प्रदूषण पर निबंध - pollution essay in hindi

Post Date : 31 August 2019

निबंध एक विचार प्रस्तुत करने, तर्क का प्रस्ताव देने, भावना व्यक्त करने माध्यम है। यह एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग लेखक के विचारों को गैर-काल्पनिक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है।

एक निबंध 500 शब्दों से लेकर 5000 शब्द तक के हो सकते है। हालाँकि, अधिकांश निबंध लगभग 1000 से 3000 शब्दों में होते हैं। यह शब्द सीमा लेखक को एक तर्क विकसित करने के लिए पर्याप्त स्थान प्रदान करती है और किसी विशेष मुद्दे के बारे में लेखक के दृष्टिकोण से पाठक को समझाने के लिए काम करती है।

प्रदूषण पर निबंध

रूप-रेखा - प्रस्तावना, प्रदूषण क्या है। प्रदूषण के कारण। प्रदूषण के प्रकार। प्रदूषण सुधार के उपाय। 

प्रस्तावना - विज्ञान ने कई लाभ प्रदान किये है वही इससे हानि भी हुआ है। इसके कारण प्रदूषण की समस्या उत्त्पन्न हो रही है। जिससे की हमारे दैनिक जीवन में कई समस्याएं उत्त्पन्न हुए है। इससे लोगो को नए नए जानलेवा बीमारिया हो रही है। पर्यावरण को और यहाँ रहने वाले जीवो को कई समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिग, तापमान में वृद्धि और मानसून में अनिश्चिता प्रदूषण के कारण हो रहे हैं। 

प्रदूषण क्या है

अवांछित तत्व का वातावरण में मिल जाना ही प्रदूषण कहलाता है। यह हवा, भूमि, पानी और ध्वनि को प्रदूषित करते है। 

जिसका जीवो पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। और मानव के लिए यह कई बीमारी लेकर आता है। प्रदूषण की समस्या एक मानवीय क्रिया हैं। जो पर्यावरण को हानि पहुंचते हैं। जल और वायु प्रदूषण जीवों को अधिक प्रभावित करते हैं। 

दिल्ली की बात करे तो देश में सबसे प्रदूषित शहर है। इसका कारण वाहनों और कारखानो से निकलने वाले धुआँ हैं। ठण्ड के दिनों में यहाँ का मौसम और अधिक ख़राब हो जाता हैं। सड़को पर धुंध ही धुंध दिखाई देता हैं।   

प्रदूषण के कारण

इसका मुख्य कारण है। कारखानों से निकालने वाले दुषित पानी जिसे नदी या नालों में बहा दिया जाता हैं। जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो जाता है। जिसके कारण नदी में रहने वाले जीवों की मृत्यु तक हो जाती हैं।

इसके आलावा वहां से निकलने वाले धुएं जो हवा को प्रदूषण करते है। जो ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण हैं। प्रति वर्ष हमारी पृथ्वी का तपमानी बढ़ता जा रहा है। जिससे कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने लगी है। 

पेड़ो की अंधाधुन कटाई से पर्यावण असंतुलित होता है। जसके कारण बाढ़ जैसे प्राकृतिक विपदा आती है। और कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगती है। 

प्रदूषण के प्रकार

1. वायु प्रदूषण -  फ़ैक्टरी से निकलने वाले धुएं के अलावा मोटर गाड़ी के धुएं से भी वायु प्रदूषण होता है। वायु प्रदूषण हमारे वातावरण के लिए बहुत खतरनाक है। यह हमारे स्वास्थ्य को बहुत प्रभावित करता हैं। 

प्रदूषित हवा में सांस लेने से कई बीमारियां होती हैं। जैसे अस्थमा साइनस, साँस लेने में तकलीफ और श्वसन सम्बन्धी बीमारिया होती हैं। धुएं में कार्बन डाई आक्साइड होता है। जो वातावरण को गर्म करता है। जिससे की कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है। इसे रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है।

2 . जल प्रदूषण - कहा जाता है। जल ही जीवन है। लेकिन हम जाने अनजाने में जल को गन्दा कर रहे है। कारखाना से निकने वाला प्रदूषित पानी हमारे नदी नालो को दुसित कर रहे है। 

और हम नदी में न जाने कितने कचड़े फैक देते है। जिससे की कई बैक्टीरिया जल में पनप जाते है। और हमारे शरीर पर बीमारी को जन्म है। इसके अलावा जलीय जीवो को हानि पहुँचती है। 

3 . ध्वनि प्रदूषण - आज कल कई प्रकार की कारखाने से निकलने वाले आवाजे ध्वनि प्रदूषण की समस्या बढ़ाती है। मोटर गाड़ी से निकलने वाले हॉर्न की आवाजो से शहरों में ध्वनि प्रदुषण अधिक होता हैं। 

जिससे की मानव शरीर पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके उपाय के लिए कारखानों को शहरो से दूर होना चाहिए और वहां का काम उपयोग करना होगा।

प्रदूषण के उपाय

प्रदूषण को रोकना हमरी जिम्मेदारी है। इसे अगर गंभीरता से नहीं लिया गया तो आगे जाकर इसका परिणाम और खतरनाक होगा। अभी हमारे सामने इसके कारण कई परेशानी उत्पन्न हो रहा है। हवा बहुत दुषित होने लगा है।  कई प्रकार की नयी बीमारी जन्म ले रही है। पर्यावण में कई अनपेक्षित परिवर्तन हो रहे है। 

वायु प्रदुषण को कम करने के लिए हमें जितना हो सके पेड़ लगाना होगा है। पेड़ कार्बन डाई ऑक्साइड को सोखती है और ऑक्सीजन को वातावरण में उत्सर्जित करती हैं। जिससे पर्यावरण में संतुलन बना रहता हैं।   

कम से कम डीजल, पेट्रोल से चलने वाले वाहन का इस्तेमाल करना चाहिए। जिससे की, हानि कारक गैस की उत्सर्जन कम होगा। बैटरी से चलने वाले वाहन का उपयोग इसके लिए उत्तम होगा। साईकल का इतेमाल करना उपयोगी होगा।

कारखानों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए। सरकार को इस पर नियंत्रण के लिए उपाय ढूढ़ना होगा। कारखानों में एक पैरामीटर के ऊपर प्रदूषण होता है। तो उस फ़ैक्टरी को बंद करना चाहिए या प्रदूषण काम हो ऐसी कारखानों का परिवर्तन करने का आदेश चाहिए।

प्रदूषण के बारे में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया से जानकारी प्राप्त कर सकते है और आपको जो अच्छा लगे उसे निबंध में जोड़ सकते हैं।