आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन परिचय - jivan parichay of ramchandra shukla

Post Date : 29 April 2020

आचार्य शुक्ल का जन्म सन् 1884 में उत्तरप्रदेश में बस्ती जिले के अन्तर्गत अगोना गाँव में हुआ था। इंटरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् मिर्जापुर के मिशन स्कूल में अध्यापन कार्य प्रारंभ किया। साहित्य साधना के प्रति लगाव होने के कारण पत्र-पत्रिकाओं में उनके आलेख प्रकाशित होने लगे। 

उनकी विद्वता से प्रभावित होकर काशी नगरी प्रचारिणी सभा ने उन्हें हिन्दी शब्द सागर के सम्पादक मण्डल में नियुक्त किया, इस कार्य में उन्होंने अपनी योग्यता का प्रशंसनीय परिचय दिया। इससे प्रभावित होकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में आपकी नियुक्ति की गई । सन् 1941 में आचार्य शुक्ल का देहावसान हो गया।

रचनाएँ  - श्री शुक्ल जी निबन्धकार एवं आलोचक हैं। उनके मुख्य साहित्य इस प्रकार हैं

(1) निबंध संग्रह - चिन्तामणि
(2) हिन्दी साहित्य का इतिहास
(3) आलोचना साहित्य - त्रिवेदी, रसमीमांसा
(4) काव्य - बुद्ध चरित्र
(5) उपन्यास - शशांक

विषय वस्तु - इन्होंने सामान्य विषय शांत, क्रोध, उत्साह आदि विषयों पर मनोवैज्ञानिक निबंध लिखे । हिन्दी साहित्य का क्रमिक विकास प्रस्तुत किया। धार्मिकता से प्रेरित होकर बुद्ध चरित्र लिखे । विषय-वस्तु में विविधता है। 

भाषा शैली - शुक्ल जी विशुद्ध खड़ी बोली में लिखते हैं। तत्सम, तद्भव शब्दों का बाहुल्य है । अंग्रेजी भाषा का भी कहीं-कहीं प्रयोग है। मुहावरों का प्रयोग है। विचारात्मक एवं गवेषणात्मक शैली है । विषय वस्तु प्रतिपादन की दृष्टि-से-निगमन व आगमन दोनों शैली हैं।

(1) विचारात्मक शैली, (2) समीक्षात्मक शैली, (3) गवेषणात्मक शैली, (4) भावनात्मक शैली, (5) हास्य विनोद एवं व्यंग्य प्रधान शैली, (6) विश्लेषणात्मक शैली, (7) समीक्षात्मक शैली, (8) उद्धरण शैली, (9) सामासिक शैली, (10) सूत्रात्मक शैली, (11) अध्यापक शैली। 

साहित्य में स्थान - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का इतिहास लेखक, समालोचक निबंधकार के रूप हैं तथा हिन्दी साहित्य में सर्वश्रेष्ठ स्थान है।