अंतरिक्ष किसे कहते हैं - antriksh kise kahate hain

हमारे लिए बाहरी अंतरिक्ष एक ऐसा क्षेत्र है जो ग्रह से लगभग 100 किलोमीटर ऊपर होता है, जहाँ साँस लेने या प्रकाश को बिखेरने के लिए कोई हवा नहीं होती है। उस क्षेत्र में, नीला काला रंग देता है क्योंकि ऑक्सीजन के अणु आकाश को नीला बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में नहीं होते हैं।

गैस, धूल और अन्य पदार्थ ब्रह्मांड के खाली क्षेत्रों के आसपास तैरते हैं, जबकि अधिक क्षेत्रों में ग्रहों, सितारों और आकाशगंगाये हो सकती हैं। कोई नहीं जानता कि वास्तव में अंतरिक्ष कितनी बड़ी है। अंतरिक्ष में लंबी दूरी को प्रकाश-वर्ष में मापते हैं, यह उस दूरी को दर्शाता है जो प्रकाश को एक वर्ष में यात्रा करने में लगती है। लगभग 9.3 ट्रिलियन किलोमीटर।

अंतरिक्ष किसे कहते हैं

अंतरिक्ष पृथ्वी के वायुमंडल से परे ब्रह्मांड में सब कुछ है वह अंतरिक्ष है जिसमे चंद्रमा, गृह उपग्रह, सितारे, आकाशगंगा, ब्लैक होल आदि हैं। अंतरिक्ष का अर्थ ग्रहों, उपग्रहों, सितारों के बीच जो वैक्यूम होता है। उसे स्पेस या अंतरिक्ष कहा जाता हैं। जिसे इंटरप्लेनेटरी माध्यम या इंट्रा-क्लस्टर माध्यम के रूप में जाना जाता है। दूसरे शब्दों में, यह बहुत कम घनत्व वाली गैस या प्लाज्मा होते है।

अंतरिक्ष क्या है - what is space

अंतरिक्ष में कोई भी आपकी चीख नहीं सुन सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अंतरिक्ष में हवा नहीं है। और ध्वनि तरंगें बिना हवा के माध्यम से यात्रा नहीं कर सकती हैं। बाहरी अंतरिक्ष पृथ्वी से लगभग 100 किमी ऊपर शुरू होता है, जहां हमारे ग्रह के चारों ओर हवा गायब हो जाता है। 

अंतरिक्ष को आमतौर पर पूरी तरह से खाली माना जाता है। पर ये सच नहीं है। तारों और ग्रहों के बीच विशाल अंतराल भारी मात्रा में पतली फैली हुई गैस और धूल से भरे होते हैं। यहां तक कि अंतरिक्ष के सबसे खाली हिस्से में प्रति घन मीटर कम से कम कुछ सौ परमाणु या अणु होते हैं।

अंतरिक्ष भी कई प्रकार के विकिरणों से भरा हुआ है जो अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरनाक हैं। इस अवरक्त और पराबैंगनी विकिरण का अधिकांश भाग सूर्य से आता है। उच्च ऊर्जा एक्स-रे, गामा किरणें और कॉस्मिक किरणें - प्रकाश की गति के करीब यात्रा करने वाले कण दूर के तारा प्रणालियों से आते हैं।

अंतरिक्ष का रहस्य 

अंतरिक्ष विज्ञान के विकाश के बावजूद आज भी ऐसे रहस्य है जिसे सुलझाया नहीं गया है। जिसे समझने और जानने के लिए वैज्ञानिक लगातार अंतरिक्ष ग्रह तारे का अध्ययन कर रहे है। विश्व के प्रसिद्ध अंतरिक्ष संस्था उपग्रह की सहायता से ग्रहो और तारो का अध्ययन कर रहे है। 

आपने तो बाड़मुड़ा ट्रैंगल के बारे में सुना ही होगा। कहा जा रहा है की अंतरिक्ष में भी एक ऐसी जगह है जहा से गुजरने से अंतरिक्ष यात्रियों को अजीब लाइट दिखयी देती है और मशीन भी काम करना बंद कर देते है। 

इसके अलावा कितने ग्रह तारे है जिसके बारे में हमें मालूम नहीं है। वैज्ञानिक सदियों से जीवन की तलाश कर रहा है। ये भी रहस्य है की ब्रम्हांड में जीवन है या नहीं आज तक हमें जीवन का कही प्रमाण नहीं मिला है। लेकिन वैज्ञानिको का मत है की ब्रम्हांड में जीवन है लेकिन दुरी इतनी है की हम उससे सम्पर्क नहीं कर पा रहे है। 

नासा अंतरिक्ष अनुसन्धान केंद्र 

नासा का गठन नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम के अंतर्गत 19 जुलाई 1948 में किया गया था। यह अमेरिका की अंतरिक्ष केंद्र संस्था है जहा पर स्पेस से जुड़े अध्ययन किये जाते है। नासा ने चाँद पर मानव भेजा है हाल ही में दो एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष स्टेशन तक कम समय में पहुंचने का रिकॉड बनाया है। नासा की बात करे तो अभी अंतरिक्ष की दुनिया में पहले स्थान पर है। नासा ने कई सेटेलाइट भेजे है। जिन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी वैज्ञानिको को प्रदान किया है।

नासा ने कहा कि इसके अलावा दो और एस्टेरॉयड के रविवार 24 जुलाई 2020 को पृथ्वी के नजदीक से गुजरेगा। जिनका नाम नासा ने 2016 डीवाई-30 और 2020 एमई-3 नाम दिया है।

अंतरिक्ष में मानव

मानव ने हमेशा से अंतरिक्ष को नज़दीक से देखना चाहता है। इसके लिए वैज्ञानिको ने लोगो को दूसरे ग्रहो पर बसाने के लिए कार्य आरम्भ कर दिया है। जिसमे स्पेक्स एक्स ने 2024 तक लोगो को मंगल ग्रह पर बसाने की बात की है। साथ ही नासा भी इस पर योजना बना रहा है की 2030 तक लोगो को मंगल पर बसा सके।

वही भारत के इसरो ने 2021 तक मानव मिसन भेजेगा। उसके बाद आगे दूसरे ग्रहो पर बस्ती बसने के लिए प्रोग्राम बनाये जायेंगे। मानव दे तो चाँद पर अपना कदम रख लिया है अब वह मंगल ग्रह पर रखना चाहता है। देखने होगा की ये स्पेस एजेंसिया कब तक मंगल में बस्ती बसाने में सफल होगा।

अंतरिक्ष में क्या है 

मानव की हमेश से उत्सुकता रही है की धरती के बहार क्या है। वैज्ञानिको शोध से पता चला है की ब्रम्हांड में लाखो करोडो तारे है और उसके चककर लगते है ग्रह है। इसके अलावा ब्लैक होल पुच्छलतारा और कई एस्ट्रोइड है। इसके अलावा और बहुत कुछ हो सकता है। क्योकि इंसान ने अभी ब्रम्हांड के कुछ ही भाग को जान पाए है यह हमारे कल्पना से भी बड़ा हो सकता है।

अंतरिक्ष उड़ान

मानव ने अंतरिक्ष को पहले दूरबीन से निहारकर ग्रहो तारो का अध्ययन किया। 20 सदी में टेक्नोलॉजी के विकास से रॉकेट और कई उपकरण के विकास के कारण इंसान ने अंतरिक्ष में रॉकेट की सहायता से मानव निर्मित उपग्रह भेजा जिसकी सहायता से पृथ्वी के मौसम और बनावट का अध्ययन किया जा रहा है।

अंतरिक्ष पर पहले जाने वाले मानव यूरी गागरिन थे। जिन्हे 12 अप्रैल 1961 में सोवियत संघ द्वारा वोस्तोक कार्यक्रम की सहायता से स्पेस में बेजा गया था। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने 1968 में पहली बार मानव को चाँद पर भेजा था। जिसके बाद अमेरिका ने 1972 तक  8 और कार्यक्रम बनाने जिसमे इंसान को चाँद पर भेजा गया।

2015 से पहले सभी मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाले रॉकेट को एस्ट्रोनॉट द्वारा संचालन किया जाता था लेकिन 2015 में स्वचालित अंतरिक्ष यान बनाये जाने के बाद से एस्ट्रोनॉट को और समय मिलेगा रिसर्च करने के लिए। भारत के अंतरिक्ष संस्थान इसरो ने 2024 तक मानव को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बनाई है।

भारतीय अंतरिक्ष संगठन इसरो 

भारत का पहला उपग्रह आर्यभट था जिसको 19 अप्रैल 1975 को रूस की सहायता से अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था। भारतीय गणितज्ञ आर्यभट ने नाम पर इस उपग्रह को रखा गया था। दूसरा उपग्रह भास्कर था जिसको 1979 में स्थापित किया गया था।1980 में भारत द्वारा निर्मित यान SLV-3 की सहायता से रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया।

इसके बाद भारत के दो और रॉकेट PSLVऔर GSLV का निर्माण किया। जनवरी 2014 को भारत ने क्रायोजनिक इंजन द्वारा जीएसएलवी-डी 5 रॉकेट का निर्माण किया। भारत आज अपनी अंतरिक्ष यानो को ले जाने में सक्षम है बल्कि वे अन्य देशो के उपग्रहों को स्थापित करने में सहायता कर रहा है। 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 भेजा गया जिसने चाँद की परिक्रमा कर महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र किया। उसके बाद मंगल मिशन के माध्यम से पहली ही बार में भारत ने उपग्रह को मंगल के कक्षा में स्थापित करने में सफलता पायी।

अंतरिक्ष पर जाने वाले पहला भारतीय राकेश शर्मा थे। जो वायुसेना में थे। उसे विज्ञानं में बहुत रूचि था और आकाश में उड़ना बहुत पसंद था। 1971 के युद्ध में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। 3 अप्रैल 1984 को राकेश शर्मा ने तीन एस्ट्रोनॉट के साथ उड़ान भरी। जो भारत और सोवियत संघ का एक मिशन था।

इसरो का गगन यान

यह भारत का मानव को अंतरिक्ष में भेजने का कार्यक्रम है। यह एक कैप्सूल होगा जिसमे तीन अंतरिक्ष यात्री को भेजा जायेगा। यह 3.4 टन का है। जिसने 2014 में मानव रहित उड़ान भरा था। गगन यान का निर्माण 2006 से शुरु कर दिया था। इसरो ने कहा है की 2022 के पहले इस मिशन को लांच लिया जायेगा। दिसंबर 2020 और 2021 को मानवरहित प्रक्षेपण किया जायेगा।

यह मिशन पूरी तरह से भारत द्वारा तैयार किया जा रहा है। आत्मनिर्भरत भारत की और या एक कदम है जिसमे भारत सभी उपकरण को देश में ही निर्माण कर रहा है। जिससे की दूसरे देशो पर निर्भरता कम किया जा सके।

सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र

यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो का प्रक्षेपण केंद्र है यही से अंतरिक्ष में उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा जाता है। यह आन्ध्रप्रदेश के श्रीहरि कोटा में स्थित है, 2002 में वैज्ञानिक सतीश धवन के मरणोपरांत सम्मान में इसे सतीश धवन के नाम से पुकारा जाने लगा।

सौरमंडल क्या है 

सौरमंडल हमारे चारों ओर दूर-दूर तक फैला स्वच्छ विस्तृत बाहरी आकाश, एक महासमुद्र की भांति है, इसको ही अंतरिक्ष कहते हैं। प्राचीन काल से ही वैज्ञानिकों द्वारा इसके गूढ रहस्यों का पता लगाने का प्रयास किया जाता रहा है। 

आज तो मानव निर्मित उपग्रहों, रॉकेटों, विशालकाय स्वयं-नियन्त्रित इलेक्ट्रॉनिक दूर्बीनों एवं वेधशालाओं से इसका निरन्तर अध्ययन किया जा रहा है। यह बाहरी आकाश या अन्तरिक्ष आश्चर्य भरे अनेकानेक स्वरूपों एवं तथ्यों का अनन्त भण्डार है। अभी तक जो भी खोज हो पायी है उसके आधार पर इसके विस्तार को अनन्त ही कहा जा सकता है।  

 क्योंकि वैज्ञानिकों द्वारा विशेष शक्तिशाली अति संवेदनशील एवं इलेक्ट्रॉनिक दूरबीन, उपग्रहों के टेलीविजन कैमरों तथा दूरबीनों से अब तक इसके सौ प्रकाश वर्षों से भी अधिक गहराई तक की इसको विशेषताओं एवं इसके विस्तार को ही नापकर देखा जा सका है। अब तक इसकी जो खोज की गयी है

 उसके अनुसार इस अनन्त अन्तरिक्ष में अनेक निहारिकाएं, काले छिद्र (Black Holes), स्वयं विस्फोट करती निहारिकाएँ, गेलेक्सी (आकाश गंगा), अति ज्वलनशील एवं प्रकाशशील विशेष आकार की अनेक प्रकार की निहारिकाएँ, आद्य पदार्थों या ब्रह्माण्डीय धूल (Cosmic Dust) का संघटन, आदि का हा अब तक कित किया जा सका है। ब्रह्माण्ड के इस स्वरूप में निचले स्तर पर तारे,ग्रह, अवान्तर प्रह, उल्का, पुच्छल तारे (धूमकेतु), उपमह (चन्द्रमा), आदि पाये जाते हैं।

सौरमंडल में कितने ग्रह है

सौरमण्डल या सौर परिवार के अन्तर्गत सूर्य एवं उसके प्रभाव क्षेत्र में आने वाले आकाशीय पिण्ड अर्थात सभी नौ ग्रह ( अब दस है, उनके उपग्रह पुच्छल तारे व उल्का पिण्ड सम्मिलित गर्व से दरी के अनुसार ग्रहों का क्रम-बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण, यम व कारला आदि हैं जबकि आकार के आधार पर इनका क्रम बृहस्पति, शनि, अरुण वरुण पृथ्वी,शुक्र,  मंगल,बुध और यम है। जैसाकि उपर्युक्त विवेचन में उल्लेख किया गया है कि इस विचित्र ब्रह्माण्ड में अनगिनत सौरमण्डल हैं। सौरमण्डल का केन्द्र या जनक सूर्य है । सूर्य एवं उसके ग्रहों-उपग्रहों का परिचय निम्नांकित है:

सर्य - सूर्य आग का धधकता हुआ एक चमकीला गोला है। यह स्वयं अपनी क्रियाओं से प्रकाश एवं ऊर्जा बिखेरने वाला बना रहता है। इसके धरातल पर निरन्तर अणु-परमाणु के व अन्य विस्फोट होते रहते हैं। इसी कारण सूर्य की सतह पर बहुत ऊँचा तापमान बना रहता है। इसकी सतह का तापमान 6 से 7 हजार डिग्री सेण्टीग्रेड रहता है। इसके आन्तरिक एवं केन्द्रीय भाग के तापमान कुछ करोड़ डिमी सेण्टीमेड तक पहुंच जाते हैं । वाल्कोव के अनुसार, यह तापमान 2,00,00,000 सेण्टीमेड तक हो सकता है। सूर्य के काले धब्बों का तापमान 1.500 सेण्टीग्रेड होता है।

सूर्य के इन धब्बों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे तापमान की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। सूर्य का आकार (आयतन) पृथ्वी से 13 लाख गुना अधिक है एवं इसका व्यास पृथ्वी के व्यास से 109 गुना है। इतना विशाल होते हुए भी यह अरुण: पिण्ड पृथ्वी की आकर्षण शक्ति से मात्र 28 गुना ही अधिक भारी है, अर्थात् पृथ्वी का एक किलोग्राम सूर्य पर 28 किया होगा। इसका दूसरा शुक्र पृथ्वी मंगल कुबेर बुद्ध अर्थ है कि अति उत्तप्त एवं गैसीय दशा में होने से यह विशेष हल्के तत्त्वों से बना है। सूर्य का व्यास 13,93,000 किलोमीटर है। इसे अपनी कीली पर एक चक्कर पूरा करने में 25 दिन 5 घण्टे लगते हैं।

इसका निर्णय सौर कलंकों की स्थिति से किया गया है। सूर्य का पृथ्वी से औसत दूरी 14. 96 करोड किलोमीटर है। प्रकाश द्वारा एक सेकण्ड में लगभग 3 लाख किलोमीटर दूरी तय की जाती है। इसे मानक मानकर पृथ्वी सूर्य से 8 मिनट 22 सेकण्ड दूर है। हमारी पृथ्वी से सूर्य आकृति में अन्य नक्षत्रों की तुलना में सबसे बडा दिखायी देता है, क्योंकि यह पृथ्वी से सबसे निकट का तारा है अन्यथा अनेक नक्षत्र सूर्य से भी बहत बड़े हैं। आर्दा ज्येष्ठा घनिष्टा आदि ऐसे ही नक्षत्र सूर्य से सैकड़ों गुना बड़े हैं।

 ये नक्षत्र पृथ्वी से कुछ प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं। इसी भांति सबसे छोटा दिखायी देने वाला धुव तारा भी सूर्य से हजारों गुना बड़ा है,किन्तु यह सूर्य के सौरमण्डल से 400 प्रकाश वर्ष दूर है। सूर्य के चारों ओर दिखायी देने वाली एक पट्टी सर्य का मकट (Corona) कहलाता है। यह सूर्य को लाखों किलोमीटर के घेरे में घेरे हुए है। जब सूर्य घूमता है तो यह मुकट नहीं घूमता है। क्योंकि इसकी सतह सूर्य की सतह से बाहर है। ऐसा अनुमान है कि यह सूर्य की ज्वाला द्वारा निकाले गये परमाणु एवं विद्युत कणों के सूर्य की सतह के चारों ओर जमने से इसकी रचना हुई है।

सौरमण्डल के सबसे महत्वपूर्ण सदस्यों की संख्या सूर्य के पश्चात एवं अब तक भली प्रकार से ज्ञात नौ ग्रह हैं। दसवें ग्रह के बारे में प्रारंभिक सूचनाएं एकत्रित की जा रही हैं। यह नौ ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी मंगल बृहस्पति शनि अरुण वरुण एवं कुवेर हैं। मंगल एवं बृहस्पति के मध्य बहुत अधिक दूरी है। इसका कारण यहां पाये जाने वाले आवान्तर ग्रह या क्षुद्र ग्रहो का समूह है। ग्रहों का परिचय निम्न प्रकार से है।
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