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प्रश्न : 8 मजेदार कहानी हिंदी में - chote baccho ki kahaniya

उत्तर :

कहानी हमे कई सिख प्रदान करती हैं। जो हमारे जीवन को बेहतर बना सकते हैं। जीवन में हमेशा समस्याएं और दबाव होंगे। इन समस्याओं पर आप इस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं, यह सबसे अधिक मायने रखती है।

छोटे बच्चों की मजेदार कहानियां

इस पोस्ट में 8 कहानी हैं। जिसे आपको पढ़कर मजा आएगा साथ साथ पको सिख भी मिलेगी। जो लोग दूसरों की गलती से सीखते हैं। उन्हे जीवन में सफलता अवश्य मिलती हैं। कहानी का लिस्ट इस प्रकार हैं -

  1. दो मेढक की कहानी
  2. कछुआ और खरगोश की कहानी
  3. सफलता की राह
  4. सर्कस का हाथी
  5. भेड़िया की कहानी
  6. जादू की कहानी
  7. तीन छोटे सूअर की कहानी
  8. बंदर और मगरमच्छ की कहानी

1. दो मेंढक की कहानी

गर्मी के दिनों में कई मेंढक पानी की तलाश में जंगल में घूम रहे थे। अचानक उनमें से दो मेंढक गलती से एक गहरे गड्ढे में गिर गए। सभी मेंढक गड्ढे में गिरे अपने दोस्तों के लिए चिंतित हो गए।

गड्ढा की गहराई को देखते हुए सभी मेंढकों ने उन दोनों से कहा कि इस गड्ढे से बचने का कोई रास्ता नहीं है और कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है। वे लगातार उन्हें हतोत्साहित करते रहे थे। दोनों मेंढक गड्ढे से बाहर कूदने की कोशिश करने लगे।

कुछ समय बाद एक मेंढक ने सभी मेंढकों की बात पर विश्वास करना शुरू कर दिया, कि वे कभी भी इस गड्ढे से नहीं बच पाएंगे। अंततः इस प्रकार हार मान लेने के बाद उस मेढक की  मृत्यु हो जाती हैं।

दूसरा मेंढक लगातार कोशिश करता रहता है और आखिर में इतनी ऊंची छलांग लगाता है कि वह गड्ढे से बाहर निकल आता है। बाहर खड़े सभी मेंढक चौंक जाते हैं और आश्चर्य से पूछने लगते हैं तुमने यह कैसे किया।

दोनों में मेढको में अंतर यह था कि पहले मेढक ने दूसरों के कहने पर विश्वास कर लिया और प्रयास करना बंद कर दिया जबकि दूसरे मेढक ने अपने आप पर विश्वास रखा और लगातार गड्ढे से बाहर आने का प्रयास करता रहा जिसके कारण वह सफल हुआ। इस प्रकार हमे भी दूसरों की बातों पर पर विश्वास नहीं करना चाहिए, अपने आप पर सबसे अधिक विश्वास करना चाहिए और लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। 

2. कछुआ और खरगोश की कहानी 

यह एक लोकप्रिय कहानी हैं जो एक खरगोश और कछुआ के बारे में है। खरगोश को आपने देखा होगा जो इधर उधर भागता रहता हैं। और कछुआ बहुत शांत रहता हैं और उसकी चलने की गति बहुत धीमी होती है। दोनों की दौड़ कराई जाय तो कौन जीतेगा आपको क्या लगता हैं। चाहिए जानते हैं। 

कहानी तब शुरू हुई जब कई दौड़ जीतने वाले खरगोश ने कछुए के साथ दौड़ लगाने की शर्त लगाई। खरगोश सिर्फ यह साबित करना चाहता था कि उसे कोई हरा नहीं सकता है। वह अपने तेज गति पर अहंकार हो गया था। 

कछुआ मान गया और दौड़ शुरू हुई। खरगोश ने शुरुआत तो अच्छी की वह कछुआ के आगे हो गया, ओवर कॉन्फिडेंस के कारण दौड़ खतम करने के बजाय उसने थोड़ी देर पेड़ के नीचे आराम करने लगा।

इस बीच कछुआ धीरे-धीरे लेकिन दृढ़ निश्चयी के साथ आगे बड़ता रहा, वह खरगोश से बहुत पूछे होने के बावजूद एक पल के लिए भी हार नहीं मानी और बाधाओं को दूर करते हुए आगे बढ़ता रहा।

जब खरगोश सो रहा था, कछुआ ने फिनिश लाइन पार की और रेस जीत लिया। सबसे अच्छी बात यह थी कि कछुआ घमण्ड नहीं करता था और न ही खरगोश को नीचा दिखाना चाहता था। सभी जंगली जानवर इस बात से काफी प्रभावित हुए और कछुए की तारीफ की और खरगोश का घामड़ टूट गया।

कहानी से सिख 

धैर्य से काम करने पर ही सफलता मिलती है। जब आप कड़ी मेहनत करते हैं, और एक निश्चित लक्ष्य रखते हैं, तो आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं। चाहे वह कार्य असंभव क्यों ना लगता हो। और हमे किसी भी बात पर घामड़ नहीं करना चाहिए कभी ना कभी शेर को सवा शेर मिल जाता हैं। 

3. सफलता की राह

एक गाँव में मीरा नाम की एक लड़की रहती थी। वह बहुत गरीब थी हर दिन जंगल जाकर फल फूल जमा करती और बाजार मे बेच देती थी। इस काम से उसे रोज घर चलाने के लिए कुछ पैसे मिल जाते थे। एक दिन वह जंगल में फल तोड़ने जा रही थी। तो उसे एक गाय और एक बछड़ा मिला उसका कोई मालिक ना होने के कारण मीरा गाय को अपने साथ लाती हैं।  

मीरा ने अगले दिन सुबह गाय से दूध निकाला और एक बाल्टी दूध सायकल पर लटकाकर बाजार में दूध बेचने के लिए चली गई। बाजार जाते जाते उसने सपना देखना शुरू कर दिया कि, वह दूध से जो पैसे मिलेंगे, उसका वह क्या क्या करेगी। उसने मकान, गाड़ी और गहने लेने की योजना बनाई। वह अपने ही खयाल मे डूबी हुई थी। अचानक, उसने महसूस किया कि दूध नीचे गिर रहा हैं। जब उसने बाल्टी को देखा तो वे खाली हो गई थी। फिर वह निरास होकर वापस अपने घर चली गई।

कहानी से सिख 

मुर्गियों के बच्चे पैदा करने के पहले उनकी गिनती न करें। अर्थात भविष्य की चिंता करने के बजाय हमे वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए। जो लोग खयालों की दुनिया में दुबे रहते हैं। उन्हे कभी ना कभी नुकसान का सामना करना पड़ता हैं।

4. सर्कस का हाथी

एक सर्कस में पांच हाथियों को खेल दिखाने के लिए रखा गया था। सभी हाथी को एक कमजोर रस्सी से बांधकर रखा जाता था। जिसे वे आसानी से तोड़ का भाग सकते थे। एक दिन सर्कस में जाने वाले एक व्यक्ति ने रिंग मास्टर से पूछा आप लोग हाथी को एक रस्सी से बांधते हैं। क्या हाथी रस्सी तोड़कर नहीं भागते हैं।

रिंगमास्टर ने उत्तर दिया - जब वे छोटे थे, तब हाथियों को लोहे की जंजीर से बाँधा जाता हैं और उन जंजीरों को वह लाख कोसिस करने पर भी तोड़ नहीं पाते हैं। तो यह विश्वास हो गया हैं की वह इस रस्सियों को कभी तोड़ नहीं पाएंगे इसलिए वे रस्सी को तोड़ने का प्रयास ही नहीं हैं।

समाज में ऐसे कई रीति रिवाज हैं। जो हमे आगे नहीं बड़ने देते हैं। हमे आवश्यकता है। उससे परे होकर कार्य करना चाहिए तभी हम सफल हो सकते हैं। किसी भी कार्य को लगतर करते रहने से वह अवश्य पूरा होता हैं। एक बार असफल होने से यह नहीं सोचना चाहिए की वह कार्य नहीं होगा।

5. भेड़िया की कहानी 

एक गाँव में कैलास नाम का लड़का रहता था। उसके पिता ने उसे भेड़ों को चराने का कार्य दिया था। वह रोज भेड़ों को जंगल मे चराने जाता था। रोज रोज भेड़ चराने के कार्य से वह बोर हो जाता था। एक दिन कुछ किसान अपने खेतों में कार्य कर रहे थे। तो कैलास को एक मजाक सूझी उसने चिल्लाया बचावों भेड़िया-भेड़िया वह मेरे भेड़ को ले जा रहा हैं। 

उसकी चीख-पुकार सुनकर सभी किसान उसकी मदद के लिए दौड़ पड़े। जब कैलास को मुस्कुराते हुए देखा और महसूस किया कि वह अपने मनोरंजन के लिए भेड़िया भेड़िया चिल्ला रहा है, तो सभी लोगों उसे डांटा।

अगले दिन दूसरी जगह जाकर कैलास ने फिर से चिल्लाया भेड़िया आया भेड़िया आया ! गांव वाले फिर से भागे आए, भेड़िया नहीं देखने पर लोगों ने फिर डांट लगाई और अपने काम पर वापस चले गए। उसी दिन एक भेड़िया आया और भेड़ को पकड़ कर ले गया।

कैलास फिर चिल्लाया, भेड़िया! भेड़िया! कृपया मेरी मदद कीजिए बाचाओ बाचाओ। लेकिन कोई भी व्यक्ति मदद के लिए नहीं आया सभी ने फिर से मजाक कर रहा हैं बोलकर अपने काम करने लगे। और भेड़िया सभी भेड़ों को एक एक कर खा गया। कैलास रोते हुए घर चला गया।

कहानी से सिख

झूठ मत बोलो या मूर्खतापूर्ण मज़ाक मत करो, क्योंकि कोई भी झूठ बोलने वाले पर विश्वास नहीं करेगा। भले ही वह बाद मे सच कह रहा हो। हमेसा सच बोलना चाहिए यदि एक बाद किसी का विश्वास टूट जाता हैं, तो वह व्यक्ति दोबारा उस पर विश्वास नहीं करता हैं।

6. जादू की कहानी 

बहुत समय पहले यूनान देश में मिडास नाम का एक राजा रहता था। वह बहुत धनी था। वह सब कुछ पा सकता था। जिसकी उसे कभी आवश्यकता हो सकती थी। उनकी एक बेटी भी थी जिससे वह बहुत प्यार करते थे।

एक दिन मिडास ने एक फरिश्ता को देखा जो मुसीबत में था। मिडास ने फरिश्ता की मदद की और बदले में उस फरिश्ता ने उसकी इच्छा पूरी करने की बात कही। मिडास ने अपनी इच्छा बताई की वह कुछ भी छूए वह सोने में बदल जाए। फरिश्ता उसकी इच्छा पूरी करके वहाँ से चला गया।

मिदास बहुत खुश हुआ वह अपनी घर के रास्ते में पड़े कंकड़, पत्थर और पौधों को छूते हुए गया, जो सोने में बदल जाता था। वह घर पहुचा जैसे ही उसकी बेटी ने उसे गले लगाया, वह की सोने की मूर्ति में बदल गई। 

राजा बहुत दुखी हो गया उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, मिडास ने फरिश्ता से उस मंत्र को उलटने की भीख माँगी। फरिश्ता ने राजा द्वारा बनाए गए सभी सोने को फिर से सामान्य रूप दे दिया।

कहानी से सिख

आपके पास जो कुछ है उससे संतुष्ट रहें। लालच आपको किसी मुसीबत मे डाल सकता हैं। लालच बुरी बला हैं। इससे हमेसा दूर रहना चाहिए। मनुष्य को अपने कर्म पर भरोसा करना चाहिए।

7. तीन छोटे सूअर की कहानी

एक जंगल में तीन छोटे सूअर रहते थे। सभी सूअरों ने अपना घर बनाने का फैसला किया। पहले सुअर ने बिना कोई में मेहनत किए भूसे से अपना घर बनाया।

दूसरे सुअर ने थोड़ा सा मेहनत किया और लकड़ी और घास से घर बनाया। तीसरे सुअर ने ईंट और पत्थर से बना घर बनाने मे बहुत मेहनत किया जिससे उसका घर सबसे मजबूत बन गया।

एक दिन, तीन छोटे सूअरों पर हमला करने के लिए एक बड़ा भेड़िया आया। उसने पहले दो छोटे सूअरों के घरों को उजाड़ दिया और दोनों सूअरों को खा गया।

फिर वह तीसरे छोटे सुअर के घर को उजाड़ने के लिए आया लेकिन उजाड़ नहीं पाया। तीसरा सूअर अपने घर में बैठा आराम कर रहा था।

कहानी से सिख

मेहनत हमेशा रंग लाती है। हमेशा बड़ी सोचो और आलसी मत बनो।

8. बंदर और मगरमच्छ की कहानी 

यह प्रसिद्ध नैतिक कथा पंचतंत्र की है। एक बंदर था जो नदी के किनारे एक बेरी के पेड़ पर रहता था। वह प्रतिदिन स्वादिष्ट जामुन खाता था।

एक बार, उसने पेड़ के नीचे एक मगरमच्छ को आराम करते देखा, जो थका हुआ और भूखा लग रहा था। उसने मगरमच्छ को कुछ जामुन दिए। मगरमच्छ ने बंदर को धन्यवाद दिया। जल्द ही, वे सबसे अच्छे दोस्त बन गए। बंदर रोज मगरमच्छ को जामुन देता था।

एक दिन बंदर ने मगरमच्छ को अपनी पत्नी के लिए अतिरिक्त जामुन दिए। उसकी पत्नी, एक दुष्ट मगरमच्छ थी, उसने मीठे जामुन का आनंद लिया, लेकिन फिर अपने पति से कहा कि वह बंदर का दिल खाना चाहती है क्योंकि वह मीठा होगा!

मगरमच्छ पहले तो परेशान हुआ लेकिन उसने अपनी पत्नी की इच्छा के आगे घुटने टेकने का फैसला किया।

अगले दिन उसने बंदर से कहा कि उसकी पत्नी ने बंदर को रात के खाने के लिए घर बुलाया हैं। जैसे ही मगरमच्छ ने बंदर को नदी के उस पार अपनी पीठ पर बिठाया, उसने उसे अपनी पत्नी की योजना के बारे में बताया।

बंदर होशियार था उसने मगरमच्छ से कहा कि मैंने अपना दिल बेर के पेड़ पर छोड़ दिया है। मगरमच्छ मूर्खतापूर्वक उसे वापस बेर के पेड़ के पास ले गया। पहुंचते ही बंदर पेड़ पर चढ़ गया।

दिल को पेड़ पर कौन रखेगा? तुमने मेरे भरोसे को तोड़ा है। हम फिर कभी दोस्त नहीं बन सकते! बंदर ने मगरमच्छ को बोला। अपने दोस्त को खोने के बाद दुखी मगरमच्छ अपनी दुष्ट पत्नी के पास वापस चला गया।

कहानी से सिख

अपने दोस्त उन लोगों को चुनें जिन पर आप भरोसा करते हैं। इसके अलावा, कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति के भरोसे के साथ विश्वासघात न करें जो आप पर भरोसा करता हो।

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