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एक सांप की कहानी

रमेश नाम का एक बढाई था जिसका एक वर्कशॉप था। एक दिन रमेश अपनी वर्कशॉप बंद करके घर चला गया। रमेश के जाते ही एक जहरीला सांप उसके वर्कशॉप में घुस गया। सांप भूखा था और उम्मीद कर रहा था कि उसका खाना कहीं भीतर छिपा होगा। 

यह एक सिरे से दूसरे सिरे तक लुढ़कता रहा। अंत में वह एक कुल्हाड़ी से टकरा गया और बहुत मामूली रूप से घायल हो गया। गुस्से और बदले में सांप ने पूरी ताकत से सांप ने कुल्हाड़ी को डस लिया। सांप के काटने से धातु की कुल्हाड़ी को क्या हो सकती है? बल्कि सांप के मुंह से खून बहने लगा।


एक सांप की कहानी

क्रोध और हंकार के कारण, सांप ने धातु की कुल्हाड़ी का गला घोंटने और मारने की पूरी कोशिश की - वह वस्तु जो उसे कुल्हाड़ी के चारों ओर लपेटकर दर्द दे रही थी। अगले दिन रमेश ने वर्कशॉप को खोला। उसने कुल्हाड़ी के ब्लेड के चारों ओर लिपटे मरे हुए सांप को पाया। यहां सांप किसी की गलती से नहीं मरा।

लेकिन उसे इन परिणामों का सामना केवल अपने ही क्रोध और अहंकार के कारण करना पड़ा। कभी-कभी गुस्सा आने पर हम दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, हम महसूस करते हैं कि हमने खुद को और अधिक नुकसान पहुंचाया है। जरूरी नहीं कि हम हर बात पर रिएक्ट करें। पीछे हटें और खुद से पूछें कि क्या मामला वास्तव में जवाब देने लायक है।

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