प्रश्न : एक सच्चे सेवक की कहानी

उत्तर :

यह एक राजा और वहा काम करने वाले एक सच्चे सेवक की कहानी हैं। इस कहानी में अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार होने की सिख दी गई हैं। हमे किसी भी परिस्थिति में अपने कर्तव्य को नहीं भूलना चाहिए।

एक सच्चे सेवक की कहानी

एक राज्य में राजा के पास बहुत से सेवक थे। उनमें से एक काला था। लेकिन राजा के प्रति ईमानदार था। जिसके कारण राजा उससे बहुत स्नेह करता था।

एक दिन राजा ऊँट पर सवार होकर शिकार के लिए जा रहे था। कुछ सेवक राजा के सामने चल रहे थे। अन्य लोग राजा के पीछे चल रहे थे। काला सेवक राजा के बगल में एक घोड़े पर सवार था।

राजा के पास एक मोती का बक्सा था। रास्ते में डिब्बा गिर गया। मोती जमीन पर बिखर गए।

राजा ने अपने सेवकों से कहा। जाओ और अपने अपने लिए मोती ले लो। अब मुझे उसकी आवश्यकता नहीं हैं।

सभी सेवक दौड़े और मोतियों को इकट्ठा करने लगे। लेकिन काले सेवक ने अपना स्थान नहीं छोड़ा वह अपने मालिक के पास था। उसने अपने मालिक के जीवन की परवाह की। उसने मालिक के मोतियों की परवाह नहीं की। वह सच्चा सेवक था।

राजा ने नौकर के व्यवहार को देखा और उसे कई उपहार दिए।

तीन बहनों की कहानी

लीलापुर नामक गांव में रामचरण नाम का एक किसान रहता था। उसके साथ उसकी पत्नी और उसकी तीन बेटियाँ ईशा, ईशिका और ईशिता रहती थी। रामचरण अपनी बड़ी बेटी की शादी गॉंव के ही प्रकाश नाम के किसान के साथ करता है। 

ईशिका और ईशिता की शादी शहर के लड़को से करता है। तीनो बेटियों की शादी करने के के बाद रामचरण को जिम्मेदारियों से राहत मिलती है। ईशा के पति प्रकाश के पास बहुत जमीने थी। प्रकाश जब भी ईशा के लिए गहने या साड़ी खरीदने की बात करते ईशा मना कर देती और कहती हमें पैसे अपने बेटे के लिए बचा के रखना चाहिए उसके पढाई के लिए पैसो की जरुरत पड़ेगी। 

प्रकाश ईशा की बात मान जाता है और पैसो को जमा करके रखता है। उधर ईशिका और ईशिता दोनों के पति नौकरी करते थे। दोनों बहने एक ही शहर में रहने के कारण हमेशा मिलती रहती थी। वे दोनों जब भी मिलती अपने अपने साड़ी गहनों के बारे में ही बाते करती थी। 

ईशिका और ईशिता दोनों के पति रमेश और राकेश भी अच्छे दोस्त बन गए थे। रामचरण और उसकी पत्नी का 35 वा सालगिरह आने वाला था। रामचरण की पत्नी अपने तीनो बेटियों और जमाई को बुलावा भेजता है। 

ईशा पहले अपनी माँ के घर आ गयी होती है ईशिका और ईशिता भी अपने अपने पति के साथ आती है। ईशा अपनी दोनों बहनो से गले लगाती है। लेकिन इशिका और ईशिता ईशा से गैरों की तरह गले लगती है और बोलती है। ये क्या हालत बना रखी हो दीदी ये कैसी साड़ी पहन के के आई हो जीजा जी आपके लिए कोई नई साड़ी खरीद नहीं सकते क्या, ईशा दोनों की बातों को मुस्कुरा के टाल देती है।

तीनों बहने अपनी माँ और पिता जी के पास बैठती है। वे अपने माँ और पिता के लिए गिफ्ट लायी थी ईशिका अपनी माँ ले लिए सोने की चैन और पिता जी के लिए महँगी घड़ी लायी थी। और ईशिता एक जैसी दिखने वाली रिंग लायी थी। ईशा अपनी बहनों का गिफ्ट देख कर अपने गिफ्ट को बहुत छोटा समझती है। ईशा गिफ्ट को देने से हिचकिचा रही थी लेकिन फिर भी उसने अपनी माँ और पिता को गिफ्ट दे दी। 

ईशा की दोनों बहने सौल और साड़ी को देखकर हसने लगती है तभी वहां ईशा का बेटा धोती और कुर्ते पहने हुए आता है। इशिका और इशिता दोनों अपनी दीदी से कहती है आप अपने बेटे के लिए कोट और पैंट` खरीद लेते न दीदी उनकी बातों को सुनकर उदास हो जाती है। 

प्रकाश  ईशा का उदास चेहरा देखता है और पूछता है क्या हुआ ईशा तुम इतनी उदास क्यों हो ईशा बोलती है कुछ नै मेरी दोनों बहने माँ और पिता जी के लिए महगें महगें गिफ्ट लाये थे और मै छोटा सा प्रकाश बोलता है गिफ्ट छोटा हो या बड़ा कोई फर्क नहीं पड़ता है। 

घर जाते समय इशिका और इशिता बाते करते है की दीदी के बेटे को 100 रूपए दे दे उनको देख कर तो ये 100 रुपया भी ज्यादा है ये बात प्रकाश सुन लेता है और ईशा के उदास होने का कारण जान जाता है। 

सभी अपने अपने घर चले जाते है प्रकाश ईशा से कहता है हमें हमारे घर को नया बनाना चाहिए। ईशा मान जाती है। प्रकाश अपनी जमीन का एक हिस्सा बेच देता है जिससे उसे 2 कड़ोड़ मिल जाती है। जिससे वे अपने घर को नया बनाता है। और अपनी पत्नी के लिए एक अच्छी महंगी साड़ी और गहने खरीदता है। और अपने और अपने बेटे के लिए कोट ख़रीदता है। 

प्रकाश बी डब्लू कार खरीदता है और उसी में बैठ कर ईशा अपने बहनो के घर घर के उद्घटान के लिए बुलाने जाती है। दोनों बहने ईशा को गहनों के साथ देखती है तो वे ईशा को पहचान नहीं पाते है। वे सभी ईशा के घर आते है उनका घर देख इशिका और इशिता अपने लाये गिफ्ट को बहुत छोटा समझती है। 

प्रकाश ईशा की दोनों बहनो के लिए सोने की चैन और उनके पति के लिए महंगे घड़ी लाये थे ये देख कर इशिका और इशिता रोते रोते ईशा से माफ़ी मांगने लगे। प्रकाश बोलता है किसी को देख कर उसे छोटा नहीं समझना चाहिए। इशिका और इशिता को अपनी गलती का अहसास हो गया।

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