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एक सच्चे सेवक की कहानी

 एक राजा के पास बड़ी संख्या में दास थे। उनमें से एक बहुत काला था। वह राजा के प्रति सच्चा था। इसलिए राजा उससे बहुत प्यार करता था।

एक दिन राजा ऊँट पर सवार होकर निकला। कुछ दास राजा के सामने चले। अन्य लोग राजा के पीछे चले गए। काला दास अपने मालिक - राजा के बगल में एक घोड़े पर सवार हुआ।

राजा के पास एक बक्सा था। उसमें मोती थे। रास्ते में डिब्बा संकरी गली में गिर गया। यह टुकड़ों में टूट गया। मोती जमीन पर लुढ़क गए।

राजा ने अपने दासों से कहा। “जाओ और मोती ले लो। मैं उन्हें अब और नहीं चाहता," राजा ने कहा।

दास दौड़े और मोतियों को इकट्ठा किया। उन्होंने उन मोतियों को ले लिया। काले दास ने अपना स्थान नहीं छोड़ा।

वह अपने मालिक के पास था। उसने अपने स्वामी की रक्षा की। उसने अपने मालिक के जीवन की परवाह की। उसने मालिक के मोतियों की परवाह नहीं की। वह सच्चा सेवक था।

राजा ने नौकर के व्यवहार को देखा और उसे कई उपहार दिए।

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