बिहारी रत्नाकर के संपादक कौन है - Bihari Ratnakar

बिहारी रत्नाकर के संपादक जगन्नाथदास रत्नाकर हैं। जगन्नाथदास रत्नाकर जन्म 1923 में हुआ था। पिता का नाम पुरुषोत्तमदास। रत्नाकर जी की प्रारंभिक शिक्षा फारसी में हुई। उसके पश्चात्‌ इन्होंने अंग्रेजी पढ़ना प्रारंभ किया। इनके हिंदी काव्यगुरु सरदार कवि थे। ये मथुरा के प्रसिद्ध कवि थे।

रत्नाकर जी ने अपनी आजीविका के हेतु 30-32 वर्ष में जरदेजी का काम आरंभ किया था। उसके उपरांत ये आवागढ़ रियासत में कोषाध्यक्ष के पद पर नियुक्त हुए। भारतेंदु जी के संपर्क और काशी की कविगोष्ठियों के प्रभाव से इन्होंने 1889 ई. में ब्रजभाषा में रचना करना आरंभ किया। बिहारी रत्नाकर इनकी प्रसिद्ध रचनाओं मे से एक हैं। बिहारी रत्नाकर की कुछ पंक्तीय नीचे डी गई हैं -

1. मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरी सोइ।
जा तन की झाँई परैं स्यामु हरित-दुति होइ।। 

2. अपने अंग के जानि कै जोबन-नृपति प्रबीन।
स्तन, मन, नैन, नितम्ब की बड़ौ इजाफा कीन।। 

3. अर तैं टरत न बर-परे, दई मरक मनु मैन।
होड़ाहोडी बढि चले चितु, चतुराई, नैन।।

4. औरें-ओप कनीनिकनु गनी घनी-सिरताज।
मनीं धनी के नेह की बनीं छनीं पट लाज।।

5. सनि-कज्जल चख-झख-लगन उपज्यौ सुदिन सनेहु।
क्यौं न नृपति ह्वै भोगवै लहि सुदेसु सबु देहु।।

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