ads

मानव विकास सूचक क्या है

वर्तमान में आर्थिक विकास को मापने के लिए दो विधियाँ प्रयोग में लायी जा रही हैं -

(1) मानव विकास सूचकांक (HDI) जिसका निर्माण 1990 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने किया है।

(2) क्रय शक्ति समता विधि जिसका प्रयोग 1933 में अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने किया है। 

इनका प्रयोग इस समय ह्यूमन डेवलपमेण्ट रिपोर्ट तथा वर्ल्ड डेवलपमेण्ट रिपोर्ट' में किया जा रहा है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री महबूबले हक ने विकास के एक सर्वमान्य सूचक को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन तथा प्रोफेसर सिंगर हंस के नेतृत्व में कुछ अर्थशास्त्रियों ने मानव विकास सूचक (HDI) को विकसित किया हैं। 

मानव विकास सूचक की अवधारणा इस मान्यता पर आधारित है कि किसी राष्ट्र में निवास करने वाले लोग ही उस राष्ट्र की वास्तविक सम्पत्ति हैं। मानव विकास ही मानव का साध्य है तथा आर्थिक विकास का श्रेष्ठ मापक है। मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार, मानव विकास व्यक्तियों की पसन्दगी को विस्तृत करने की एक प्रक्रिया हे । ये पसन्दगियाँ अनेक हो सकती हैं और इनमें समय के साथ परिवर्तन भी हो सकता है।

विकास के प्रत्येक स्तर पर तीन आवश्यक पसन्दगियाँ हैं - 

(i) लम्बा और स्वस्थ जीवन जीने की इच्छा।
(ii) ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा।
(iii) एक खूबसूरत जीवन जीने के लिये संसाधन। 

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यदि ये तीनों बातें नहीं होतीं तो मनुष्य को अन्य अनेक अवसरों से वंचित रहना पड़ सकता है। मानव विकास सूचक (HDI) तीन सामाजिक अभिसूचकों अथवा सामाजिक मापदण्डों का एक मिश्रित सूचक है जिसमें वास्तविक प्रति व्यक्ति GDP का भी ध्यान रखा जाता है । HDI का मूल्य निकालने के लिये निम्न तीन बातों का ध्यान रखा जाता है - 

1. दीर्घायु - इन्हें जन्म के समय जीवन प्रत्याशा द्वारा मापा जाता है जिसे न्यूनतम 25 वर्ष तथा अधिकतम 85 वर्ष तक दर्शाया जाता है।

2. शैक्षिक योग्यताओं की प्राप्ति - इसे वयस्क शिक्षा तथा प्राथमिक, माध्यमिक व क्षेत्रीय विद्यालयों में उपस्थित अनुपातों के मिश्रण के रूप में मापा जाता है।

3. जीवन स्तर - इसे डालर की क्रय शक्ति समता पर आधारित वास्तविक प्रति व्यक्ति द्वारा मापा जाता है। 

प्रत्येक देश का मानव विकास सूचक (HDI) मूल्य यह दर्शाता है कि उसे अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये कितना प्रयास करना है। ये परिभाषित लक्ष्य हैं - 85 वर्ष के औसत जीवन की अवधि, सभी के लिये शिक्षा की उपलब्धि तथा उत्कृष्ट जीवन-स्तर। किसी भी देश का मानव विकास सूचक (HDI) क्रम विश्व आवंटन के बीच ही तय होता है।

उदाहरणार्थ - यह क्रम प्रत्येक विकसित तथा विकासशील देशों से सम्बन्धित अपने HDI मूल्य पर आधारित होता है । इसके लिये उस देश द्वारा HDI न्यूनतम मूल्य शून्य (0) से HDI अधिकतम मूल्य एक (1) तक प्रयास किये गये हैं।

देश में मानव विकास में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जैसा कि शैक्षिक उपलब्धियों, स्वास्थ्य कवरेज तथा बुनियादी सामाजिक ढाँचे के प्रावधान में दर्ज किए गए सुधारों जैसे स्थूल संकेतकों से पता चलता है। 

यू.एन.डी. पी. के मानव विकास सूचकांक (HDI) के अनुसार 162 देशों में से भारत का स्थान 115वाँ है और वर्ष 2001 में भारत 0.571 के HDI सहित मध्यम मानव विकास समूह में वर्गीकृत है। 

यद्यपि लिंग से सम्बन्धित विकास समग्र सूचकांक में दर्ज 2001 में वर्ष 1992 की तुलना में सुधार हुआ फिर भी यह देश के मानव विकास स्तरों के साथ तुलना में अभी भी कम है ।

HDI मानव विकास का सापेक्ष सूचक है। इसका आगणन सभी देशों को समान महत्व देते हुए किया जाता है। HDI हमें विकास की प्रगति के बारे में भी स्पष्ट करता है।

Subscribe Our Newsletter