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जीवन की भौतिक गुणवत्ता सूचक क्या है

मौरिस डी. मौरिस ने अपने सामाजिक मापदण्ड के निर्माण में जीवन प्रत्याशा, साक्षरता दर तथा शिशु मृत्यु दर नामक तीनों मदों को शामिल किया है और इसकी सहायता से 'जीवन की भौतिक गुणवत्ता सूचक' (PQLI) का निर्माण किया है।

इसी आधार पर उन्होंने 23 विकसित और विकासशील राष्ट्रों के आर्थिक विकास का तुलनात्मक विवेचन प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार तीनों सूचक परिणाम को मापते हैं। उनके अध्ययन के अनुसार जीवन प्रत्याशा और शिशु मृत्यु दर में उच्च डिग्री का ऋणात्मक सहसम्बन्ध गुणांक होता है। 

शिक्षा और शिशु मृत्यु दर में भी उच्च डिग्री का ऋणात्मक सहसम्बन्ध होता है परन्तु शिक्षा और जीवन प्रत्याशा में उच्च डिग्री का धनात्मक सहसम्बन्ध होता है। अन्य शब्दों में, शिक्षा में वृद्धि के साथ-साथ जीवन प्रत्याशा में भी वृद्धि होती है।

डी. मौरिस ने सन् 1950 में शिशु मृत्यु दर 229 प्रति हजार को शून्य पर स्थिर किया तथा इसकी उच्चतम सीमा को सन् 2000 तक सात प्रति हजार का लक्ष्य बनाया। इसी तरह सन् 1950 में जीवन प्रत्याशा को 38 साल के शून्य पर स्थिर किया तथा इसकी उच्चतम सीमा को पुरुषों तथा महिलाओं में सन् 2000 तक 77 साल का लक्ष्य बनाया । अन्त में 15 साल की आयु में शिक्षा की दर को शिक्षा सूचक बनाया ।

डी. मौरिस के मतानुसार, एक वर्ष की आयु में जीवन प्रत्याशा तथा शिशु मृत्यु दर ‘जीवन की भौतिक गुणवत्ता (POL)' के बहुत अच्छे सूचक हैं। इसी प्रकार की बात शिक्षा और जीवन प्रत्याशा के लिये कही गयी । डी. मौरिस के अनुसार, ‘शिक्षा सूचक' विकास की सम्भावना को स्पष्ट करता है। अन्य शब्दों में, यह शिक्षा विकास का श्रेष्ठ मापक है ।

जीवन भौतिक गुणवत्ता सूचक की सीमाएँ - डी. मौरिस ने इस सत्य को स्वीकार किया है कि जीवन का भौतिक गुणवत्ता सूचक (PQLI) मूल आवश्यकताओं को केवल एक सीमा तक ही मापा जा सकता है। यह वास्तविक राष्ट्रीय आय (GNP) का पूरक होता है। यह जीवन की गुणवत्ताओं को मापने का कार्य करता है जो निर्धनों के लिए बहुत आवश्यक है परन्तु जीवन का भौतिक गुणवत्ता सूचक (PQLI) आर्थिक विकास व कुल कल्याण को मापने में असमर्थ है।

निष्कर्ष – अतः स्पष्ट है कि डी. मौरिस द्वारा प्रस्तुत जीवन का भौतिक गुणवत्ता सूचक (PQLI) अल्पविकसित क्षेत्रों का पता लगाने तथा सामाजिक व्यक्तियों की उपेक्षा के शिकार समाज के विभिन्न वर्गों की जानकारी हासिल करने के काम आ सकता है। 

यह उस सूचक की ओर इशारा करता है जहाँ पर तुरन्त कार्यवाही की जरूरत है। सरकार द्वारा ऐसी नीतियाँ अपनायी जा सकती हैं जिससे POLI में शीघ्रता से वृद्धि हो तथा आर्थिक विकास भी बढ़े। इस प्रकार अल्पविकसित देशों के सन्दर्भ में PQLI एवं आर्थिक विकास एक-दूसरे के पूरक एवं सहायक हैं।

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