भारत में लौह इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए

 भारत में लौह-इस्पात उद्योग के विकास की बहुत सम्भावनाएँ विद्यमान हैं। यहाँ लौह-अयस्क, कोयला, चूना-पत्थर तथा डोलोमाइट एवं अन्य आवश्यक खनिज तथा मैंगनीज आदि प्रायः पास-पास उपलब्ध होते हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा तथा पूर्वी मध्य प्रदेश के क्षेत्र में ये सब खनिज उपलब्ध हैं।

भारत में इस समय 10 लौह-इस्पात केन्द्र हैं, एक निजी क्षेत्र में तथा 9 सार्वजनिक क्षेत्र में। भारत में लौहइस्पात उद्योग में आधुनिक ढंग का पहला कारखाना निजी क्षेत्र में सन् 1907 में जमशेदपुर (बिहार) में जमशेद जी नशरवान टाटा द्वारा स्थापित किया गया था ।

भारत में लौह इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए

दामोदर घाटी में कोयले के विशाल क्षेत्र झरिया, रानीगंज व बोकारो एवं सिंहभूमि, मयूरभंज, क्योंझर और दोनाई में लौह-अयस्क के विशाल भण्डार हैं। इस सुविधा के कारण आसनसोल, दुर्गापुर, भिलाई, बोकारो और

राऊरकेला में लौह-इस्पात के कारखानें स्थापित हुये हैं। इनके अतिरिक्त कर्नाटक में भद्रावती और विजय नगर, आन्ध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम तथा तमिलनाडु में सेलम स्थानों पर लौह-इस्पात कारखाने लगाये गये हैं।

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