रेखा चित्र से आप क्या समझते हैं समझाइए

रेखाचित्र गद्य साहित्य की एक नवीनतम विधा है। हिन्दी साहित्य के विकास के साथ-साथ रेखाचित्र साहित्य का भी विकास आधुनिक काल में हुआ। भावात्मक प्रतिपाद्य को संक्षेप में अभिक रेखाओं द्वारा चित्रित कर देना रेखाचित्र है। रेखाचित्र गद्य विधा का विकास हिन्दी के अधिकतर पत्र-पत्रिकाओं द्वारा ही हुआ है। 

'विशाल भारत ' 'माधुरी' 'हंस' एवं 'सरस्वती' जैसे प्रसिद्ध साहित्यिक त्र-पत्रिकाओं ने इसके विकास में विशेष रूप से सहयोग दिया है। हिन्दी रखाचित्र का प्रारंभिक काटर 1900 से 1930 तक माना जाता है।

रेखाचित्र एक नवीनतम विधा है। इस विधा का विकास भारतेंदु युग से माना जाता है। भारतेंदु युग के पश्चात ही हिन्दी साहित्य में दिखाई देते हैं।

हिन्दी साहित्य के गद्य लेखिकाओं में महादेवी वर्मा का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वह रेखाचित्र लिखने के कारण ही गद्य साहित्य में पहचानी जाती है। इनमें समस्त रेखाचित्रों का संग्रह 'स्मृति के रेखाएँ' 'अतीत के चलचित्र' है। 

रेखा चित्र से आप क्या समझते हैं समझाइए

इन रेखाचित्रों के माध्यम से महादेवी वर्मा सर्वमान्य वर्ग के दुःख पीड़ा तथा उनके जीवन के अनेक पहलुओं को पकड़ना चाहती है, वर्मा जी ने इन रखाचित्रों के माध्यम से सर्वमान्य जनता के असामान्य गुणों को पकड़ना चाहती है। '

अतीत के चलचित्र' में अपनी बात स्पष्ट करते हुए वर्मा जी कहती है उनसे पाठकों का सस्ता मनोरंजन हो सके एसी कामना करक इन क्षत-विक्षत जीवनों की खिलौनों की हॉट में नहीं रखना चाहती है। यहाँ महादेवी वर्मा का खादित्र लिखने का गहन और गंभीर उद्देश्य स्पष्ट होता है।

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