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जनसंख्या घनत्व किसे कहते हैं

संसार की वर्तमान जनसंख्या 6 अरब से अधिक है, जो पृथ्वी के 14.5 करोड़ वर्ग किमी. थल भाग पर निवास करती है। अंटार्कटिका महाद्वीप को छोड़कर पृथ्वी के शेष स्थल पर जनसंख्या का औसत घनत्व लगभग 40 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. है, परन्तु जनसंख्या का यह घनत्व सर्वत्र समान नहीं है। 

धरातल का लगभग 66% भाग निर्जन प्राय है, विश्व की लगभग 75% जनसंख्या पृथ्वी के 10% भाग पर निवास करती है। इस प्रकार जनसंख्या वितरण की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विशेषता इसकी क्षेत्रीय विषमता है ।

जनसंख्या के भौगोलिक वितरण का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि विश्व की लगभग 85% जनसंख्या उत्तरी महाद्वीपों में तथा शेष 15% जनसंख्या दक्षिणी महाद्वीपों में निवास करती है। 

उत्तरी गोलार्द्ध में 20° से 60° के मध्य विश्व की लगभग 80% जनसंख्या पायी जाती है। जनसंख्या वितरण प्रतिरूप के अध्ययन के लिए मापक के रूप में जनसंख्या घनत्व का साधारणतः प्रयोग किया जाता है।

जनसंख्या घनत्व किसे कहते हैं

जनसंख्या घनत्व किसी निश्चित भू-भाग के क्षेत्रफल तथा उसमें बसे हुए लोगों के मूल्यों में जो अनुपात होता है, उसे जनसंख्या घनत्व कहते हैं। जैसे - 5 वर्ग किमी क्षेत्रफल में 500 लोग निवास करते हैं, तो दोनों का अनुपात 5 : 500 होगा। जनसंख्या का यह घनत्व प्रति वर्ग किमी में व्यक्त किया जाता है।

जनसंख्या वितरण में विभिन्नता में उपर्युक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या वितरण के प्रतिरूप को तीन वर्गों में रखा जाता है -

  1. उच्च घनत्व वाले प्रदेश।
  2. मध्यम घनत्व वाले प्रदेश।
  3. न्यून घनत्व वाले प्रदेश। 

उच्च घनत्व वाले प्रदेश 

इसके अन्तर्गत विश्व के वे भाग सम्मिलित हैं, जहाँ 50 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. या इससे अधिक निवास करते हैं। इस अधिक घनत्व का आधार कृषि एवं औद्योगिक प्रगति है, जिसके आधार पर इन क्षेत्रों को दो वर्गों में रखा जाता है— 

1. कृषि प्रधान प्रदेश – दक्षिण-पूर्वी एशिया, पूर्वी एशिया में चीन, जापान, फिलीपाइन द्वीप तथा ताइवान (फारमूसा) में सघन जनसंख्या पायी जाती है। दक्षिणी एशिया में भारत , श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश में जनसंख्या का घनत्व अधिक है। 

जनसंख्या घनत्व किसे कहते हैं

जावा द्वीप में भी सघन जनसंख्या है । म्याँमार में इरावदी नदी का डेल्टाई भाग घना बसा है । पाकिस्तान में सिन्धु घाटी, जापान में क्वान्टो का मैदान, चीन में ह्वांगहो, यांगटीसीक्यांग व सीक्यांग घाटियाँ और भारत में गंगा - ब्रह्मपुत्र का मैदान तथा बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र का डेल्टाई भाग विश्व के सघनतम जनसंख्या वाले क्षेत्र हैं।

इस सघन जनसंख्या के निम्नांकित कारण हैं -

  1. उष्ण एवं आर्द्र मानसूनी जलवायु के कारण कृषि उत्पादन अधिक होना।
  2. सिंचाई साधनों की उपलब्धता का होना।
  3. चावल में पोषण क्षमता का अधिक होना।
  4. जापान में विकसित मत्स्य-व्यवसाय तथा औद्योगीकरण का होना। 
  5. खनिज पदार्थों की उपलब्धता का होना।

2. औद्योगिक प्रदेश - यूरोप महाद्वीप के अधिकांश देशों पूर्व सोवियत संघ को छोड़कर जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, किन्तु इनका इंग्लिश चैनल से रूस के यूक्रेन तक का 50° उत्तरी अक्षांश के साथ वाला भाग सघन जनसंख्या वाला है। 

इसलिए यूरोप में 50° उत्तरी अक्षांश को जनसंख्या की धुरी कहते हैं। इस क्षेत्र के अन्तर्गत इंग्लैण्ड, जर्मनी की रूर घाटी, इटली में पो बेसिन, फ्रांस में एरिस बेसिन और रूस में मास्को-यूक्रेन क्षेत्र सम्मिलित हैं।

उत्तरी अमेरिका के मध्य पूर्वी भाग में अटलांटिक तट, सेन्ट लारेंस घाटी तथा महान झीलों का प्रदेश घना बसा है। इन दोनों प्रदेशों की सघनता का आधार वहाँ की औद्योगिक क्रांति है। अन्य कारण निम्नलिखित हैं -

  • समशीतोष्ण एवं स्वास्थ्यवर्धक जलवायु। 
  • वाणिज्य एवं व्यापार की प्रगति। 
  • उन्नत परिवहन साधन। 
  • उन्नत एवं मिश्रित कृषि के कारण अधिक उत्पादन। 
  • विपुल खनिज पदार्थों की उपलब्धता। 
  • सागर तटीय स्थिति। 
  • वैज्ञानिक तथा तकनीकी ज्ञान में वृद्धि।
  • नगरीकरण।
  • लोगों का उच्च जीवन स्तर।

मध्यम घनत्व वाले प्रदेश 

10 से 50 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी जनसंख्या वाले क्षेत्र मध्यम घनत्व वाले प्रदेश कहलाते हैं। ये प्रदेश सभी महाद्वीपों में पाये जाते हैं। 

  • एशिया में म्याँमार, थाईलैण्ड, कम्पूचिया, वियतनाम, इण्डोनेशिया, ईरान, इराक, अफ्रीका का उत्तर व दक्षिणी भाग, यूरोप में डेनमार्क, नार्वे, स्वीडन, पूर्व सोवियत संघ तथा बल्कान प्रायद्वीप। 
  • उत्तरी अमेरिका में संयुक्त राज्य अमेरिका का मध्य व पश्चिमी भाग, मैक्सिको तथा मध्य अमरीकन देश।
  • दक्षिणी अमेरिका का एण्डीज पर्वतीय एवं अमेजन घाटी को छोड़कर शेष सभी भाग।
  • आस्ट्रेलिया का पूर्वी तटीय भाग माध्यम जनसंख्या घनत्व के प्रदेश हैं।

मध्यम घनत्व के निम्नांकित कारण -

  1. इन क्षेत्रों की जलवायु न तो बहुत अनुकूल है और न बहुत प्रतिकूल है।
  2. ये क्षेत्र सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों के किनारे स्थित हैं।
  3. जिन क्षेत्रों में विस्तृत कृषि की जाती है, वहाँ मशीनों का अधिक प्रयोग होता है।
  4. पशुपालन व्यवसाय प्रधान रहा है, जिसमें कम जनसंख्या का ही पोषण हो सकता है।
  5. अनेक क्षेत्र पठारीय तथा पर्वतीय होने के कारण मध्यम जनसंख्या वाले हैं। 

कम घनत्व वाले प्रदेश

ये वे भू-भाग हैं, जहाँ जनसंख्या का घनत्व 10 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. से भी कम पाया जाता है। लगभग 50% क्षेत्र में जनसंख्या का घनत्व 2 से 3 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. ही है। कुछ प्रदेश तो लगभग निर्जन हैं। इस क्षेत्र के अन्तर्गत निम्न प्रदेश सम्मिलित हैं। 

1. उच्च पर्वतीय व पठारीय प्रदेश – हिमालय, रॉकी, एण्डीज, मध्य एशिया के पर्वतीय प्रदेश तथा तिब्बत का पठार आदि प्रमुख प्रदेश हैं । यहाँ निवास योग्य तथा कृषि हेतु समतल भू-भाग का अभाव, मिट्टी की पतली तथा अनुपजाऊ परत एवं अन्य जीवन सुविधाओं का अभाव होता है, जिसके कारण जनसंख्या बहुत कम पायी जाती है।

2. शुष्क मरुस्थल – इसके अंतर्गत सहारा, कालाहारी, अटाकामा, पश्चिमी आस्ट्रेलिया तथा गोबी मरुस्थल सम्मिलित हैं। यहाँ जल का अभाव, खाद्य पदार्थों का अभाव तथा विषम जलवायु आदि के कारण जनसंख्या विरल होती है। जहाँ कहीं जल सुलभ हो जाता है, वहाँ नखलिस्तानों या मरुद्यानों (Oasis) का विकास हो जाता है। फलत: वहाँ अच्छी जनसंख्या पायी जाती है, जैसे- सहारा - मरुस्थल में नील नदी घाटी। 

3. उष्ण एवं आर्द्र वनाच्छादित प्रदेश – इसके अन्तर्गत भूमध्यरेखीय प्रदेश हैं। इनमें अमेजन बेसिन तथा काँगो नदी बेसिन प्रमुख हैं। यहाँ पर अस्वास्थ्यवर्धक एवं गर्म जलवायु, विभिन्न रोग एवं बीमारियाँ, दलदली भूमि, सघन वनों से ढँकी भूमि, कम उपजाऊ मिट्टी, कृषि भूमि का अभाव आदि के कारण जनसंख्या का घनत्व कम पाया जाता है। -

4. टुण्ड्रा प्रदेश – इसके अन्तर्गत उत्तरी रूस, उत्तरी फिनलैण्ड, उत्तरी स्वीडन व नार्वे, उत्तरी कनाडा, ग्रीनलैण्ड व अलास्का तथा अण्टार्कटिका महाद्वीप सम्मिलित हैं। यहाँ वर्ष के अधिकांश समय और कुछ प्रदेश में तो वर्ष भर हिम आच्छादित रहती है। 

कठोर ठण्ड पड़ती है। बर्फीली एवं भयानक ठण्डी हवाएँ चलती हैं। समस्त प्रदेश प्राय: वनस्पति शून्य हैं, अतः जनसंख्या केवल 5 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. ही पायी जाती है। 

5. साइबेरिया तुल्य प्रदेश – इसके अन्तर्गत रूसी साइबेरिया तथा कनाडा का टैगा वन प्रदेश सम्मिलित हैं। यहाँ भी जनसंख्या का घनत्व एक व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. से कम पाया जाता है। इसका कारण भी इस क्षेत्र का लगभग 7 या 8 माह तक हिमाच्छादित रहना, कृषि भूमि का अभाव एवं कठोर शीत ऋतु है। 

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