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प्रत्यय किसे कहते हैं - pratyay ki paribhasha

आज हम आपको बताने वाले हैं, प्रत्यय के बारे में इसके पहले हमने बात किया था उपसर्ग के बारे में। चलिए जानते हैं: प्रत्यय की परिभाषाप्रत्यय के भेद और उपसर्ग और प्रत्यय में क्या अंतर है। 

प्रत्यय किसे कहते हैं

भाषाविज्ञान में, प्रत्यय शब्द किसी मुख्य शब्द के बाद रखा जाता है। जो संज्ञा, विशेषण और क्रिया के व्याकरणिक मामले को इंगित करते हैं, और क्रियाओं का संयुग्मन बनाते हैं। एक विभक्ति प्रत्यय को कभी-कभी व्याकरणिक प्रत्यय भी कहा जाता है। 

विभक्ति किसी शब्द के व्याकरणिक गुणों को उसकी वाक्य-विन्यास श्रेणी में बदल देती है। व्युत्पन्न प्रत्ययों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: वर्ग-परिवर्तन व्युत्पत्ति और वर्ग-बनाए रखने की व्युत्पत्ति।

परिभषा - वे शब्दांश जो किसी शब्द के अंत में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन लाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं।

प्रत्यय के उदाहरण

  • दया + लु = दयालु
  • लोहा + आर = लुहार
  • नाटक + कार =नाटककार
  • बड़ा + आई = बडाई
  • सुन + आई = सुनाई
  • समाज + इक = सामाजिक
  • लेख + अक = लेखक
  • भूल + अक्कड = भुलक्कड
  • बिक + आऊ = बिकाऊ
  • मोर + नी = मोरनी 
  • होन + हार = होनहार
  • घट +  इया = घटिया
  • गाडी + वाला = गाड़ीवाला

उपरोक्त शब्दों के अंत में क्रमशः 'नी', 'आई' तथा 'अक' का प्रयोग किया गया है। ये प्रत्यय कहलाते हैं। ये शब्दांश मूल शब्द के अंत में जुड़कर शब्दों का निर्माण करते हैं।

प्रत्यय के भेद

प्रत्यय के दो भेद होते हैं -

  1. कृत प्रत्यय 
  2. तद्धित प्रत्यय 

1. कृत प्रत्यय किसे कहते हैं

कृत प्रत्यय - जो प्रत्यय क्रिया धातु के रूप के बाद लगते हैं तथा संज्ञा, विशेषण आदि शब्द बनाते हैं, उन्हें कृत प्रत्यय कहते हैं। कृत प्रत्यय लगाकर बंनने वाले शब्द कृदंत कहलाते हैं;  

कृत प्रत्यय के उदाहरण

तैराक, कसौटी, लिखावट, लेखक, गायक, पाठक आदि। 

कृत प्रत्यय के प्रकार

कृत प्रत्यय पाँच प्रकार के होते हैं -

  1. कर्तृवाचक कृत प्रत्यय 
  2. कर्मवाचक कृत प्रत्यय 
  3. करणवाचक कृत प्रत्यय 
  4. भाववाचक कृत प्रत्यय 
  5. क्रियावाचक कृत प्रत्यय 

1. कर्तृवाचक कृत प्रत्यय - जिन प्रत्यय धातुओं के अंत में लगाकर बनाए गए नए शब्दों के कर्ता का बोध हो उन्हें कर्तृवाचक कृत प्रत्यय कहते हैं; जैस- 

प्रत्ययमूल शब्दनए शब्द
इयाचूहा, लोटाचुहिया, लुटिया
हारहोन, पालनहोनहार, पालनहार
आकालड़, उड़लड़ाका, उड़ाका
वालाघर, रखघरवाला, रखवाला
इयलअड़, मरअड़ियल, मरियल
वानबल, धनबलवान, धनवान

2. कर्मवाचक कृत प्रत्यय - जिन प्रत्यय धातुओं के अंत में लगाकर बनाए गए नए शब्दों से कर्म का बोध हो, उन्हें कर्मवाचक कृत प्रत्यय कहते हैं। 

प्रत्यय मूल शब्दनए शब्द
नीओढ़, सूँघ ओढ़नी, सूँघनी
हुईसुन, देखसुनी हुई, देखी हुई
नाबचा, गा बचाना, गाना
औनाबिछ, खेलबिछौना, खिलौना

3. करणवाचक कृत प्रत्यय - जिन प्रत्यय को क्रिया के अंत में लगाकर बनाए गए नए शब्दों से क्रिया अर्थात करण का बोध हो, उन्हें करणवाचक कृत प्रत्यय कहते हैं; जैसे -

प्रत्यय मूल शब्दनए शब्द
भूख, मेल भूखा, मेला
नीसूँघ, चटसूँघनी चटनी
बोल, रेत बोली, रेती
नागा, बोलगाना, बोलना

4. भाववाचक कृत प्रत्यय - जिन प्रत्यय धातुओं के अंत में लगाकर बनाए गए नए शब्दों से भाव का बोध हो उन्हें भाववाचक कृत प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

प्रत्यय मूल शब्दनए शब्द
आनचढ़, थक चढान, थकान
आईलिख, पढ़लिखाई, पढ़ाई
आवटथक, सजावटथकावट, सजावट
आवाभूल, छल भुलावा, छलावा
आहटगुर्रा, घबरागुर्राहट, घबराहट
औतीचुन, मनचुनौती, मनौती

5. क्रियावाचक कृत प्रत्यय - जिन प्रत्यय शब्दों के अंत में लगाकर बनाए गए नये शब्दों से क्रिया होने के भाव का बोध हो, उन्हें क्रियावाचक कृत प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

प्रत्यय मूल शब्दनए शब्द
एरालूट, मम लुटेरा, ममेरा
याखा, गाखाया, गाया
आलुदया, श्रद्धादयालु, श्रद्धालु
करपढ़, खा पढ़कर, खाकर
तेहँस, बोलहँसते, बोलते
ताखेल, बोलखेलता, बोलता

2. तद्धित प्रत्यय किसे कहते हैं

तद्धित प्रत्यय - जो प्रत्यय धातु को छोड़कर अन्य संज्ञा, विशेषण, सर्वनाम और अव्यय के बाद लगाए जाते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं; 

तद्धित प्रत्यय उदाहरण

जैसे - मास+इक = मासिक, धर्म + इक = धार्मिक

तद्धित प्रत्यय के भेद


तद्धित प्रत्यय छः प्रकार के होते हैं -
  1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय 
  2. क्रमवाचक तद्धित प्रत्यय 
  3. भाववाचक तद्धित प्रत्यय 
  4. संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय 
  5. लघुताववाचक तद्धित प्रत्यय 
  6. स्त्रीलिंगवाचक तद्धित प्रत्यय 

1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय - इस प्रकार के प्रत्यय से कर्ता का बोध होता है इसे इस प्रकार भी कहा जा सकता है, इन तद्धित प्रत्ययों से करता का बोध होता है, उन्हें कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं। जैसे-

प्रत्ययमूल शब्दनए शब्द
आरीपूजा, जुआपुजारी, जुआरी
बाल, चालबालक, चालक
दारदूकान, जमीनदुकानदार, जमींदार
आरलोहा, सोनालुहार, सुनार
एरासाँप, लूटसपेरा, लुटेरा
वालासब्जी, गाड़ीसब्जीवाला, गाड़ीवाला

2. क्रमवाचक तद्धित प्रत्यय - जैसे की नाम से ही स्प्ष्ट है क्रम अर्थात एक के बाद दूसरे का आना ठीक है इस प्रकार के प्रत्यय शब्दों के अंत में जुड़कर क्रम संख्या का बोध कराते हैं, उन्हें क्रमवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

प्रत्ययमूल शब्दनए शब्द
गुनातीन, चारतिगुना, चौगुना
लाएकपहला
हराएक, दोएकहरा, दोहरा
सरादो, तीनदूसरा,  तीसरा
वाँपाँच, दसपांचवां, दसवाँ

3. भाववाचक तद्धित प्रत्यय - जो प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़कर भाववाचक संज्ञाओं का निर्माण करते हैं, उन्हें भाववाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

प्रत्ययमूल शब्दनए शब्द
त्वलघु, ममलघुत्व, ममत्व
आवटलिख, बनालिखावट, बनावट
आपामोटा, बूढ़ामोटापा, बुढ़ापा
भला, बुराभलाई, बुराई
आहटचिकना, गरमचिकनाहट, गरमाहट
इमालाल, महालालिमा, महिमा

4. संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय - जो तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम अथवा विशेषण शब्दों के अंत में जुड़कर बनाए गए नए शब्दों से संबंध का बोध कराते हैं, उन्हें संबंध वाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

प्रत्ययमूल शब्दनए शब्द
एरामम, फूफाममेरा, फुफेरा
इकनीति, दिननैतिक, दैनिक
पंजाब, गढ़वालपंजाबी, गढ़वाली
हालनानी, दादीननिहाल, ददिहाल

5. लघुतावाचक तद्धित प्रत्यय - जो प्रत्यय शब्दों के अंत में जुड़कर लघुता का बोध कराते हैं, उन्हें लघुतावाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

प्रत्ययमूल शब्दनए शब्द
टोकरा, छोकराटोकरी, छोकरी
इयाडिब्बा, खाटडिबिया, खटिया
ड़ीगट्ठा,टुकड़ागट्ठरी, टुकड़ी
रीकोठा, छाताकोठरी, छतरी

6. स्त्रीलिंगवाचक तद्धित प्रत्यय - जो प्रत्यय शब्दों के अंत में जुड़कर स्त्रीलिंग शब्द का बोध कराते हैं, उन्हें  स्त्रीलिंगवाचक प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

प्रत्ययमूल शब्दनए शब्द
आइनपंडित, गुरुपंडिताइन, गुरुआइन
नीशेर, मोरशेरनी, मोरनी
इनधोबी, नागधोबिन, नागिन
आनीदेवर, सेठदेवरानी, सेठानी
इयाबूढा, चिड़ाबुढ़िया, चिडिया
लड़का, चाचालड़की, चाची

ये तो थे हमारे हिंदी ग्रामर के अंतर्गत आने वाले प्रत्यय और उनके भेद तथा भेद के अंतरर्गत आने वाले प्रकार उनके उदाहरण के साथ। अब देखते हैं की उपसर्ग और प्रत्यय में क्या अंतर् है।

उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर 


उपसर्गप्रत्यय
उपसर्ग शब्द के आरम्भ में जुड़ते हैं।प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ते हैं।
उपसर्ग के लगने से शब्द के अर्थ में पूरी तरह परिवर्तन  आ जाता है।प्रत्यय के लगने से शब्द के अर्थ में विशेष परिवर्तन नहीं होता।
उपसर्ग के पाँच भेद होते हैं।प्रत्यय के दो भेद होते हैं।

स्मरणीय बिंदु 

  • वे शब्द जो किसी शब्द के अंत में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन लाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। 
  • प्रत्यय के दो भेद होते हैं - 1. कृत प्रत्यय 2. तद्धित प्रत्यय 
  • कृत प्रत्यय पाँच प्रकार के होते हैं- 1. कर्तृवाचक, 2. कर्मवाचक, 3. करणवाचक, 4. भाववाचक 5. क्रियावाचक 
  • तद्धित प्रत्यय छः प्रकार के होते  हैं - 1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय, 2. क्रमवाचक तद्धित प्रत्यय, 3. भाववाचक तद्धित प्रत्यय, 4. संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय, 5. लघुतावाचक तद्धित प्रत्यय 6. स्त्रीलिंगवाचक तद्धित प्रत्यय 
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