अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के संगठन एवं शक्तियाँ - america ke sarvoch nyayalaya ka sangathan

संघीय न्यायालयों की व्यवस्था में सर्वोच्च स्तरीय न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय इसकी व्यवस्था अमेरिकी संविधान में की गई है। अमेरिका में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 1789 ई. के न्यायिक अधिनियम द्वारा की गई थी।

 ब्राइस ने अमेरिकन सर्वोच्च न्यायालय के सम्बन्ध में लिखा है संयुक्त राज्य अमेरिका की किसी अन्य विशेषता ने यूरोपीय जगत में इतनी जिज्ञासा जाग्रत नहीं की, इतनी अधिक चर्चा उत्पन्न नहीं की, इतनी अधिक प्रशंसा प्राप्त नहीं की और इतनी अधिक गलतफहमी भी पैदा नहीं की, जितनी की सर्वोच्च न्यायालय के उन कर्त्तव्य और कार्यों ने की है, जो वह संविधान की रक्षा करते हुए करता है । 

अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के संगठन एवं शक्तियों का वर्णन कीजिए 

सर्वोच्च न्यायालय के संगठन को निर्धारित करने का अधिकार काँग्रेस को दिया है । काँग्रेस ने समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय के कार्यभार को देखकर न्यायाधीशों की संख्या निश्चित की है। वर्तमान में न्यायाधीशों की संख्या 9 है। इनमें से एक मुख्य न्यायाधीश तथा 8 अन्य न्यायाधीश हैं ।

न्यायाधीशों की नियुक्ति-संयुक्त राज्य अमेरिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सीनेट की अनुमति से की जाती है। सामान्यतः सीनेट राष्ट्रपति द्वारा की गई नियुक्तियों की पुष्टि कर देती है, परन्तु अनेक अवसर ऐसे भी आए हैं, जबकि सीनेट ने राष्ट्रपति द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति की पुष्टि नहीं की है।

न्यायाधीशों का कार्यकाल 

अमेरिका में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति उनके जीवन-पर्यन्त के लिए होती है। वे 'सदाचार पर्यन्त' अपने पद पर बने रहते हैं। वे चाहें तो 70 वर्ष की आयु के पश्चात् संवैधानिक पद-मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

न्यायाधीशों की पदच्युति

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को केवल महाभियोग की प्रक्रिया द्वारा ही अपने पद से हटाया जा सकता है। महाभियोग का प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा द्वारा प्रस्तावित किया जाता है। प्रतिनिधि सभा जब उसे अपने दो-तिहाई बहुमत से पारित कर देती है तो उसे सीनेट में विचारार्थ भेजा जाता है। 

सीनेट यदि अपने दो-तिहाई बहुमत से इस प्रस्ताव को पारित कर देती है तो न्यायाधीश को पदच्युत कर दिया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय में एक न्यायाधीश सेम्युअलचेज के विरुद्ध ही अभी तक महाभियोग लगाया गया था, परन्तु वह भी पारित नहीं हो सका। अतः सर्वोच्च न्यायालय के किसी भी न्यायाधीश को आज तक महाभियोग द्वारा हटाया नहीं गया है ।

सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार एवं कार्य

 सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार एवं उसके कार्यों को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है

1. प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार - सर्वोच्च न्यायालय के प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत निम्नलिखित मुकदमे आते हैं—

(अ) वे सभी विवाद जिसमें राजदूत, अन्य सार्वजनिक मन्त्री, वाणिज्य विदेशी प्रतिनिधि एक पक्ष में हों। दूत अथवा

(ब) ऐसे सभी विवाद जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका का संघ या अमेरिकी संघ का कोई एक या अधिक राज्य एक पक्ष हो ।

2. अपीलीय क्षेत्राधिकार- सर्वोच्च न्यायालय का दूसरा क्षेत्राधिकार अपीलीय क्षेत्राधिकार है, परन्तु सर्वोच्च न्यायालय में राज्यों के उच्च न्यायालयों द्वारा दिये गये समस्त निर्णयों के विरुद्ध अपील नहीं की जा सकती। उच्च न्यायालय में उन्हीं निर्णयों के विरुद्ध अपील की जा सकती है, जिनमें

(i) राज्य के किसी उच्च न्यायालय ने किसी राज्य के ऐसे कानून को वैध घोषित कर दिया हो, जिसके विषय में यह शिकायत हो कि वह संघीय संविधान के अथवा काँग्रेस के द्वारा बने हुए किसी कानून के या संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा की हुई किसी संधि के विरुद्ध हो ।

(ii) उसने संघ के किसी कानून या संधि को अवैध घोषित कर दिया हो, किसी भी पक्ष को राज्य के संघीय न्याय क्षेत्र के विरुद्ध अपील करने का अधिकार नहीं है ।

इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय का अपीलीय क्षेत्राधिकार केवल संवैधानिक मामलों में है। साधारण मामलों में सर्वोच्च न्यायालय में अपील तभी होती है, जबकि राज्य के उच्च न्यायालय ने अपील की अनुमति दे दी हो।

3. न्यायिक पुनरावलोकन का अधिकार - संयुक्त राज्य अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अधिकार न्यायिक पुनरावलोकन का अधिकार है। अपने इस अधिकार के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय केन्द्र तथा राज्य की व्यवस्थापिका द्वारा निर्मित ऐसे सभी कानूनों को जो संविधान विरोधी हों तथा कार्यपालिका के उन आदेशों को जो संविधान विरोधी हैं, अवैध घोषित कर सकता है।

न्यायिक पुनरावलोकन की इस शक्ति के कारण अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने महत्त्वपूर्ण स्थिति प्राप्त कर ली है। जस्टिस हहूज का तो विचार है कि अमेरिकन जनता संविधान के अन्तर्गत अवश्य रहती है, लेकिन संविधान वही है जो न्यायाधीश घोषित करते हैं।

 जस्टिस फ्रेंक फर्ट के शब्दों में, "सर्वोच्च न्यायालय ही संविधान है।” - 4. संविधान तथा नागरिक अधिकारों का संरक्षक – संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में दस संशोधनों के माध्यम से नागरिकों के मौलिक अधिकारों की व्यवस्था की गई है ।

साथ ही नागरिकों के मौलिक अधिकारों को न्यायिक संरक्षण प्रदान किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय विभिन्न आदेश तथा परमादेश जारी करके इन मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है । यदि संघ अथवा राज्य के कर्मचारियों द्वारा नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन के प्रयास किये जाते हैं तो न्यायपालिका मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है ।

5. संघात्मक रक्षा - संयुक्त राज्य अमेरिका के संघीय व्यवस्था की रक्षा का दायित्व भी सर्वोच्च न्यायालय का है। संघात्मक व्यवस्था में केन्द्र तथा राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन होता है। इन शक्तियों के सम्बन्ध में केन्द्र तथा राज्यों के बीच संघर्ष की सम्भावना हो सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ऐसे विवादों का निर्णय कर संघ तथा राज्यों के अधिकारों को सुरक्षित रखता है।

6. उत्प्रेषण सम्बन्धी न्याय क्षेत्र - सर्वोच्च न्यायालय ने अपने न्यायिक क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण शक्ति का विकास कर लिया है। इसे उत्प्रेषण सम्बन्धी न्याय क्षेत्र कहा जाता है। इस अधिकार के अन्तर्गत सर्वोच्च न्यायालय निम्न न्यायालयों में चल रहे मुकदमों को अपने पास बुला सकता है, उन पर स्वयं निर्णय दे सकता है या नीचे के न्यायालयों को आवश्यक कार्यवाही करने के आदेश दे सकता है।

7. अन्य अधिकार - सर्वोच्च न्यायालय अन्य छोटे-छोटे कार्य भी करता है। उसे अनेक प्रशासकीय कार्यों को करना पड़ता है। अपने कर्मचारियों से सम्बन्धित अनेक कार्यों को सर्वोच्च न्यायालय ही करता है ।

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