अनुवाद के महत्व - anuvad ka mahatva

अनुवाद के महत्व को लिखिए।

अनुवादक द्वारा मूल सामग्री का पठन से लेकर अनुवाद तैयार होने तक की प्रक्रिया अनुवाद प्रक्रिया कहलाती है। इसे हम कार्य आरंभ से लेकर कार्य सम्पन्न होने के बीच की प्रक्रिया भी कह सकते हैं । विभिन्न विद्वानों ने अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न चरण को उल्लेखित किया है। 

डॉ. भोलानाथ तिवारी ने अनुवाद प्रक्रिया के पाँच चरण माने हैं - (1) पाठ-पठन, (2) पाठ-विश्लेषण, (3) भाषांतरण, (4) समायोजन, (5) मूल-संतुलन। 

डॉ. जी. गोपीनाथन ने अनुवाद प्रक्रिया के दो प्रमुख चरण माने हैं -

(1) मूल पाठ्य सामग्री का विश्लेषण। 

(2) समुचित समतुल्यता का निर्णय। 

विभिन्न विद्वानों के विचारों को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि अनुवादक, अनुवाद के प्रथम चरण में स्रोत भाषा के पाठ का मनोयोग पूर्वक पढ़कर अर्थ ग्रहण करता है। 

इसमें वह विभिन्न कोशों और विषय के विशेषज्ञों की सहायता भी लेता है। तत्पश्चात् अनुवादक लक्ष्य भाषा की प्रकृति के अनुसार भाषिक इकाइयों के लिए समतुल्य समानक खोजकर अनुवाद की भाषिक योजना तैयार करता है। 

भाषिक योजना तैयार करने के पश्चात् अनुवादक स्रोत भाषा की सामग्री को लक्ष्य भाषा की निकटतम समतुल्य अभिव्यक्ति में समायोजित करते हुए अंतरण का कार्य करता है। इस कार्य में उसे एकाधिक बार भी प्रारूप तैयार करना होता है।

अनुवादक प्रक्रिया के अंतिम चरण में अनुवादक अनूदित सामग्री की पड़ताल करके उसमें यथासंभव सुधार या परिष्कार का कार्य करता है। इसमें अनुवादक अनूदित सामग्री को मूल से तुलना करके किसी भी प्रकार के दोष का परिष्कार करता है।

अनुवाद प्रक्रिया में ध्यान देने योग्य बातें

1. जिस पाठ्य सामग्री का अनुवाद किया जाना है उसे दो-तीन बार अच्छी तरह पढ़ना चाहिए । 2. उस सामग्री में प्रयुक्त शब्दों के सन्दर्भ के अनुकूल लक्ष्य भाषा में निकटस्थ समानार्थी शब्द ढूँढ़ना चाहिए।

3. स्रोत भाषा से लक्ष्य भाषा में रूपान्तरित वाक्यों की प्रकृति लक्ष्य भाषा के अनुसार होनी चाहिए । 4. शब्द कोष के अर्थों की अपेक्षा व्यावहारिक ज्ञान भी आवश्यक है। इससे स्रोत भाषा में व्यक्त भावों की सटीक अभिव्यक्ति होती है। 

5. लक्ष्य भाषा के अनुरूप लिंग, वचन, कारक व व्याकरणगत संरचना का निर्माण किया जाना चाहिए। 

6. वाक्यों का अनुक्रम लक्ष्य भाषा की व्याकरणिक व्यवस्था द्वारा अनुशासित होना चाहिए। 

7. मुहावरों के स्थान पर लक्ष्य भाषा से भी मुहावरों को ही रखा जाना चाहिए। 

8. कथ्य के भावों के अनुसार ही अनुवाद करना चाहिए। 

Subscribe Our Newsletter