स्विस संघीय सरकार की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

स्विस कार्यपालिका अपनी अद्भुत विशेषताओं के कारण सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है। संगठन की दृष्टि से यह बहुल कार्यपालिका है। शक्तियों की दृष्टि से इसकी कोई समता नहीं है। ब्राइस के शब्दों में यह एक ऐसी संस्था है जिसका अध्ययन करना समस्त संस्थाओं से महत्त्वपूर्ण है। 

संविधान के अनुच्छेद 95 के अनुसार स्विस राज्य मण्डल की सर्वोच्च निदेशन तथा कार्यपालिका शक्ति 7 सदस्यों की एक संघीय परिषद् द्वारा प्रयुक्त की जाती है।

स्विस संघीय सरकार की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

संघीय परिषद् के सदस्यों का निर्वाचन संघीय सभा के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अपने सदस्यों के बीच में किया जाता है, परन्तु निर्वाचन होने के पश्चात् व्यवस्थापिका से वे अपना त्यागपत्र दे देते हैं।

सदस्यों के निर्वाचन के सम्बन्ध में कुछ महत्त्वपूर्ण परम्पराएँ स्थापित हो गई हैं। ये परम्पराएँ तथा नियम निम्नलिखित हैं

(अ) अनुच्छेद 96 के अनुसार, किसी कैण्टन से राज्य परिषद् में एक से अधिक सदस्य नहीं हो सकते।

(ब) 1914 ई. के नियम के अनुसार, परिषद् के सदस्य आपस में सम्बन्धी नहीं होने चाहिए।

(स) यह परम्परा स्थापित हो गई है कि तीन कैण्टनों बैरन, ज्यूरिच तथा बोर्ड में से एक-एक प्रतिनिधि संघीय परिषद् में अवश्य लिया जाएगा। 

कार्यकाल एवं वेतन

संघीय परिषद् के सदस्यों का कार्यकाल संघीय व्यवस्थापिका के साथ जुड़ा है। संघीय व्यवस्थापिका का कार्यकाल चार वर्ष है। अतः संघीय परिषद् के सदस्यों का कार्यकाल भी चार वर्ष है।

परन्तु यदि संघीय व्यवस्थापिका इसके पूर्व भंग हो जाए तो संघीय परिषद् को भी त्यागपत्र देना पड़ता है। संघीय परिषद् का यदि कोई स्थान रिक्त हो जाए तो शेष अवधि के लिए व्यवस्थापिका नए सदस्य को चुनती है। किसी सदस्य के पुनर्निर्वाचन पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है।

संघीय परिषद् के सदस्यों का निर्वाचन संघीय सभा द्वारा किया जाता है, सभा उन्हें अविश्वास प्रस्ताव द्वारा अपने पद से हटा नहीं सकती है। 

वेतन-परिषद् के सदस्यों को 80 हजार फ्रेन्क वार्षिक वेतन मिलता है। यदि कोई व्यक्ति दस वर्ष तक परिषद् का सदस्य रह चुका हो और 55 वर्ष की आयु प्राप्त कर ले तो उसके लिए पेन्शन की व्यवस्था भी की गई है। 

परिषद् की कार्यप्रणाली

परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता परिषद् का अध्यक्ष करता है। इसकी बैठकें प्रायः सप्ताह में दो बार होती हैं। बैठकों का कोरम चार है तथा निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं। बैठकों की कार्यवाही गुप्त रखी जाती है। परिषद् के सभी सदस्य समान होते हैं।

अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष - संघीय सभा के दोनों सदन अपनी एक संयुक्त बैठक में संघीय परिषद् के सदस्यों में से ही एक अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का निर्वाचन करते हैं। 

संघीय परिषद् का अध्यक्ष ही स्विस राज्य मण्डल का राष्ट्रपति होता है। वह लगातार दो वर्ष तक अध्यक्ष नहीं चुना जा सकता। यद्यपि वह एक से अधिक बार अध्यक्ष निर्वाचित हो सकता है।

परम्परागत रूप से 'ज्येष्ठता के नियम' को स्वीकार करते हुए वरिष्ठ सदस्य को अध्यक्ष बना दिया जाता है तथा एक व्यक्ति को उपाध्यक्ष । 

यह भी परम्परा स्थापित हो गई कि उपाध्यक्ष ही अगले वर्ष अध्यक्ष चुन लिया जाता है। उपाध्यक्ष अन्य सदस्यों की ही भाँति एक विभाग का प्रमुख होता है तथा अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अध्यक्ष या राष्ट्रपति के पद पर कार्य करता है ।

संघीय परिषद् के अध्यक्ष या स्विस राज्य मण्डल के राष्ट्रपति की शक्तियाँ एवं स्थिति

स्विस संघीय परिषद् के अध्यक्ष की स्थिति अन्य सदस्यों के बराबर है। लावेल के शब्दों में वह साधारण रूप से राष्ट्र की कार्यपालिका समिति का अध्यक्ष होता है और इस कारण वह यह जानने का प्रयत्न करता है कि उसके साथी क्या कर रहे हैं और राज्य के नाममात्र के अध्यक्ष के औपचारिक कर्त्तव्यों को वह पूरा करता है ।

1. राज्य मण्डल के राष्ट्रपति के रूप में-स्विस राष्ट्रपति ब्रिटिश सम्राट की भाँति राष्ट्र का प्रतीक है। वह राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में अपने देश का प्रतिनिधित्व करता है। वही विदेशी राजदूतों का स्वागत करता है तथा उनसे परिचय-पत्र प्राप्त करता है। 

संघीय सभा द्वारा पारित विधेयकों पर वही हस्ताक्षर करता है। उसकी स्थिति औपचारिक ही है। उसे विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है।

2. संघीय परिषद् के सभापति के रूप में-संघीय परिषद् के अध्यक्ष के रूप में वह परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता करता है। उसे निर्णायक मत देने का अधिकार है। वह एक विभाग का अध्यक्ष होता है। 

इस दृष्टि से वह कुछ प्रशासनिक अधिकारों का प्रयोग करता है। वह अन्य विभागों के कार्यों का निरीक्षण करते हुए उन्हें सुझाव दे सकता है। निर्देशन देने का अधिकार उसे नहीं है । 

वह परिषद् के सदस्यों को न तो नियुक्त कर सकता है और न उन्हें पदच्युत ही कर सकता है। उनके विभागों में परिवर्तन करने का अधिकार भी उसे नहीं है। इस प्रकार उसकी स्थिति परिषद् के अन्य सदस्यों के समान है ।

 राष्ट्रपति पद की स्थिति

इस प्रकार राज्य मण्डल का राष्ट्रपति शक्तियों की दृष्टि से प्रायः शून्य है। स्विस राष्ट्रपति की तुलना 'अमेरिका के राष्ट्रपति से नहीं की जा सकती। अमेरिकी राष्ट्रपति तो शक्तिपुंज है, वही दूसरी ओर स्विस राष्ट्रपति शक्तिहीन है।

इसी प्रकार वह ब्रिटिश प्रधानमन्त्री के समान भी नहीं है। ब्रिटिश प्रधानमन्त्री तो सूर्य है जिसके चारों ओर अन्य नक्षत्र चक्कर लगाते हैं। परन्तु स्विस राष्ट्रपति प्रशासनिक विभाग का एक सामान्य अध्यक्ष है। 

वह एक वर्ष के लिए औपचारिक अध्यक्ष होता है। रैपार्ड के शब्दों में, “उसके पद का कोई राष्ट्रीय महत्त्व नहीं है। उसका न कोई विशेषाधिकार है और न ही कोई विशेष प्रभाव है।

इन सबके बावजूद यह मानना भ्रामक होगा कि स्विस राष्ट्रपति का पद महत्त्वहीन है। ब्रुक्स ने कहा है जनसेवा के एक लम्बे जीवन के पश्चात् सर्वोच्च पारितोषिक के रूप में इस पद की कामना की जाती है और इसी के कारण वह समस्त स्विस जनता के लिए बहुत अधिक सम्मान का पात्र है । 

स्विस परिषद् की शक्तियाँ और कार्य स्विस संघीय परिषद् एक प्रशासकीय निकाय है। परन्तु फिर भी इसे कुछ विधायी, वित्तीय तथा न्यायिक शक्तियाँ प्राप्त हैं। स्विस संघीय परिषद् की प्रमुख शक्तियाँ हैं

1. विधायी शक्तियाँ–(अ) संघीय कानूनों को लागू करने की शक्ति स्विस कार्यपालिका के पास है। 

इस दृष्टि से वह स्विस संविधान के उपबन्धों, संघीय सभा द्वारा निर्मित विधियों,अध्यादेशों, सन्धियों तथा न्यायालयों द्वारा लिये गये निर्णयों को लागू करती है ।

(ब) संघीय परिषद् को सभी महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियाँ करने का अधिकार प्राप्त है।

(स) बाहरी आक्रमणों से देश की रक्षा करना तथा आन्तरिक शान्ति एवं सुरक्षा की स्थापना करना संघीय परिषद् का दायित्व है। इस हेतु वह आवश्यक कदम उठा सकती है।

(द) संघीय परिषद् सेना पर नियन्त्रण करती है। जिस समय संघीय सभा की बैठक न हो रही हो तो वह अपनी इच्छा से सेना का प्रयोग कर सकती है।

(य) वैदेशिक सम्बन्धों का संचालन संघीय परिषद् ही करती है। इनके साथ ही कैण्टनों द्वारा आपस में की जाने वाली तथा विदेशों से की जाने वाली सन्धियों की समीक्षा की जाती है।

(र) संघीय परिषद् कैण्टनों के प्रशासन के ऊपर भी नियन्त्रण रखती है। उनके वित्तीय, सैनिक तथा प्रशासनिक कार्यों का निरीक्षण करती है ।

2. व्यवस्थापन सम्बन्धी शक्तियाँ - स्विस संविधान में संसदीय व्यवस्था के अनुकूल संघीय परिषद् को व्यवस्थापन सम्बन्धी कुछ महत्त्वपूर्ण शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। 

ब्रुक्स के शब्दों में, स्विट्जरलैण्ड के संविधान निर्माता मान्टेस्क्यू के सिद्धान्त में श्रद्धा नहीं रखते थे, इसलिए उन्होंने राज्य के संगठन के विभिन्न अंगों में शक्ति का विभाजन या पृथक्करण नहीं किया और न उसके साथ पारस्परिक सन्तुलन अथवा अवरोध का आयोजन ही किया।

संघीय परिषद् के सदस्य संघीय सभा की बैठकों में भाग लेते हैं। अधिकार प्राप्त नहीं होता, परन्तु इसके अतिरिक्त वे समस्त विधायी कार्यों को सम्पन्न करते हैं। 

संघीय परिषद् स्वेच्छा से संघीय सभा में कोई विधेयक प्रस्तुत कर सकती है अथवा कोई विधेयक प्रस्तावित करने के लिए संघीय सभा को कहती है। व्यवहार में लगभग 95% विधेयक संघीय परिषद् द्वारा ही प्रस्तावित किए जाते हैं।

अन्य सदस्यों द्वारा प्रस्तावित विधेयक भी पहले संघीय परिषद् के परामर्श के लिये भेजे जाते हैं। परिषद् में योग्य एवं अनुभवी सदस्य होते हैं। अतः व्यवस्थापिका में उनकी राय को पर्याप्त सम्मान दिया जाता है ।

संघीय परिषद् के सदस्य उन समितियों के भी सदस्य होते हैं जिनके सम्मुख विधेयक को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाता है।

परिषद् को संविधान में संशोधन सम्बन्धी विधेयक प्रस्तावित करने का भी अधिकार है। संघीय परिषद् को अध्यादेश जारी करने का अधिकार है। इन अध्यादेशों को कानूनों के समान ही मान्यता प्राप्त है ।

इसके अतिरिक्त प्रदत्त व्यवस्थापन की व्यवस्था के कारण कानूनों को लागू करते समय नियम बनाने का अधिकार परिषद् को प्राप्त हो गया है ।

इस प्रकार विधि-निर्माण के क्षेत्र में अनेक महत्त्वपूर्ण शक्तियाँ परिषद् को प्राप्त हो गई हैं। रैपार्ड के शब्दों में वस्तुतः संवैधानिक धारणा के नितान्त विपरीत संघीय परिषद् कार्यपालिका और प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ ही महत्त्वपूर्ण विधायी कार्य भी करती है। 

3. वित्तीय शक्तियाँ - वित्तीय क्षेत्र में परिषद् के पास अत्यन्त महत्त्वपूर्ण शक्तियाँ हैं। संघीय बजट का निर्माण करना तथा उसे व्यवस्थापिका की स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करना परिषद् का ही कार्य है। 

नए कर प्रस्तावित करना तथा राजस्व की व्यवस्था करना इसी का कार्य है। देश के आय-व्यय का हिसाब रखना संघीय परिषद् का ही कार्य है।

4. न्यायिक शक्तियाँ- संघीय परिषद् को अनेक न्यायिक शक्तियाँ प्राप्त हैं। 1914 ई. के पूर्व ये शक्तियाँ बहुत अधिक थीं, परन्तु 1914 ई. में इन्हें बहुत कम कर दिया गया। संघीय परिषद् को निम्नलिखित न्यायिक शक्तियाँ प्राप्त हैं

(अ) यह संघीय सरकार के विभिन्न विभागों के निर्णयों के विरुद्ध अपीलें सुनती है। 

(ब) यह कैण्टनों के निर्णयों के विरुद्ध अपीलें सुनती है।

(स) यदि कैण्टनों में पारस्परिक विवाद हो तो उसका निर्णय संघीय परिषद् ही करती है। 

(द) संविधान की कुछ धाराओं के सम्बन्ध में उत्पन्न विवादों का निर्णय वही करती है, परन्तु इसके निर्णय अन्तिम नहीं होते। इसके निर्णय के विरुद्ध अपील संघीय प्रशासकीय न्यायालय में की जा सकती है।

5. संकटकालीन शक्तियाँ- स्विस संविधान द्वारा संघीय परिषद को कोई संकटकालीन शक्तियाँ प्रदान नहीं की गई हैं, किन्तु व्यवहार में उसने ये शक्तियाँ प्राप्त कर ली हैं। 

जब कभी भी देश में कोई आन्तरिक या बाह्य संकट उत्पन्न हुआ है, संघीय परिषद् को ये शक्तियाँ प्रदान कर दी गई हैं। विभिन्न समयों में तटस्थता की रक्षा करने के लिए इस प्रकार की शक्तियाँ स्विस कार्यपालिका को प्रदान की गईं। 

द्वितीय विश्व युद्ध के समय परिषद् को पूर्ण अधिकार प्रदान कर दिये गये थे। इसी प्रकार संकटकाल में संघीय परिषद् अत्यधिक शक्तिशाली हो जाती है तथा इसे अनेक विवेकाधिकार प्राप्त हो जाते हैं ।

संघीय परिषद् के कार्यों के उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि संघीय परिषद् अनेक उन कार्यों को सम्पन्न करती है जो कि ब्रिटिश मंत्रिमण्डल अथवा अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा किये जाते हैं। 

लावेल के अनुसार संघीय परिषद् को राष्ट्रीय सरकार रूपी घड़ी की कमानी कहा जा सकता है और यह निश्चित रूप से राष्ट्रीय शासन का सन्तुलित चक्र है । ”

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