ब्रिटिश प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियों की तुलना - british pradhanmantri aur ameriki rashtrapati ki tulna

 

अमेरिका के राष्ट्रपति तथा ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री संवैधानिक सीमाओं तथा व्यवहार पद्धति में बँधे हुए अत्यधिक शक्ति का उपयोग करते हैं। दोनों की भिन्न-भिन्न परिस्थिति है। उनकी भिन्न-भिन्न प्रणालियाँ हैं। कुछ क्षेत्रों में राष्ट्रपति ब्रिटिश प्रधानमन्त्री से कम है, जबकि कुछ क्षेत्रों में वह उससे अधिक है।

चुनाव- राष्ट्रपति तथा प्रधानमन्त्री दोनों ही अपने-अपने राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। उनके चुनाव में मूलभूत अन्तर यही है कि प्रधानमन्त्री जनता की प्रत्यक्ष पसन्द है, जबकि राष्ट्रपति जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित किया जाता है।

कार्यकाल-ब्रिटिश प्रधानमन्त्री का कार्यकाल संसद के विश्वास पर निर्भर है वैसे उसका कार्यकाल 5 वर्ष है, पर संसद अविश्वास का प्रस्ताव पारित कर उसे अवधि से पूर्व हटा सकती है। इसके विपरीत राष्ट्रपति का कार्यकाल संसद के विश्वास पर निर्भर न होकर चार वर्ष के लिए निश्चित है। 

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति और ब्रिटिश प्रधानमंत्री की शक्तियों की तुलना कीजिए।

प्रधानमन्त्री तथा राष्ट्रमण्डल का संसद के प्रति उत्तरदायित्व है। डॉ. वी. वी. सिंह ने प्रधानमन्त्री की नाजुक स्थिति पर विचार करते हुए कहा है कि, “उसे अपना त्यागपत्र अपनी जेब में रखना पड़ता है। पर अमेरिका में राष्ट्रपति का काँग्रेस के प्रति इस प्रकार का कोई उत्तरदायित्व नहीं है। काँग्रेस उसे केवल महाभियोग द्वारा ही हटा सकती है जो कि अत्यन्त कठिन कार्य है।

अधिकार- अमेरिकी राष्ट्रपति तथा ब्रिटिश प्रधानमन्त्री के मध्य अधिकार सम्बन्धी अन्तर निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है

( 1 ) मन्त्रिमण्डल से सम्बन्ध - राष्ट्रपति अपने मन्त्रिमण्डल का सर्वोच्च सत्तायुक्त व्यक्ति होता है। 

(i) उसको मनोनयन तथा पदच्युति के सम्बन्ध में एकाधिकार प्राप्त है। 

(ii) उसकी मन्त्रिपरिषद् वास्तव में केवल एक परामर्शदात्री संस्था है। इस संस्था के परामर्श को स्वीकार करना, अस्वीकार करना पूर्णरूपेण उसकी इच्छा पर निर्भर करता है। 

(iii) राष्ट्रपति तथा मन्त्रिपरिषद् के मध्य सम्बन्ध स्वामी तथा सेवक के मध्य स्थिति सम्बन्धों के समान हैं।

इसके विपरीत, ब्रिटेन में प्रधानमन्त्री की स्थिति 'समान में प्रथम' की होती है। 

(i) वह मन्त्रिपरिषद् का स्वामी न होकर केवल मान्य नेता है उसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर अपने मन्त्रियों से सलाह प्राप्त करनी पड़ती है। 

अनेक अवसरों पर प्रधानमन्त्री को अपना दृष्टिकोण त्याग कर मन्त्रिमण्डल का दृष्टिकोण स्वीकार करना पड़ता है, क्योंकि यदि वह प्रभावशाली मन्त्रियों से स्पर्द्धा करने का प्रयास करता है तब उसके अस्तित्व को खतरा होता है।

(2) विधि-निर्माण - विधि-निर्माण के सम्बन्ध में प्रधानमन्त्री की शक्ति राष्ट्रपति से अधिक है। ब्रिटेन में प्रधानमन्त्री तथा उसके सहयोगी मन्त्री राज्य की विधायी नीति तथा कार्यों का पथ-प्रदर्शन करते हैं, विधेयकों को संसद में प्रस्तावित करते हैं और बहुमत के बल पर वहाँ से पारित कराते हैं। 

यद्यपि सैद्धान्तिक रूप से विधि-निर्माण कार्य संसद द्वारा किया जाता है, पर व्यावहारिक रूप में इस कार्य को प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिमण्डल द्वारा किया जाता है। प्रधानमन्त्री व्यवस्थापिका में बहुमत दल का नेता होने के कारण व्यवस्थापिका का स्वामी बना रहता है। वह इच्छित विधेयकों को वहाँ से पारित करा सकता है। उसका यह क्षेत्र व्यापक है।

अमेरिका के राष्ट्रपति को इतनी शक्ति कभी प्राप्त नहीं हो सकती, वह व्यवस्थापिका का भाग ही नहीं है। वह न तो किसी कानूनी कार्यवाही में भाग ले सकता है, न ही इच्छित विधेयकों को काँग्रेस में पारित करा सकता है। उसे काँग्रेस को सलाह देने का अधिकार है, पर काँग्रेस को पूर्ण अधिकार है कि वह राष्ट्रपति की बात को स्वीकार करे अथवा ठुकरा दे। 

इस प्रकार अमेरिका में जनता किसी गलत अथवा अनुचित कानून के निर्माण के लिए राष्ट्रपति को दोषी नहीं मानती, जबकि ब्रिटेन की जनता किसी अनुचित विधि-निर्माण के लिए प्रधानमन्त्री को उत्तरदायी मानती है।

(3) वित्तीय क्षेत्र - वित्तीय क्षेत्र में भी ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री को अमेरिका के राष्ट्रपति की अपेक्षा अधिक शक्तियाँ प्राप्त हैं। प्रधानमन्त्री की देख-रेख में वित्त मन्त्री द्वारा बजट तैयार किया जाता है। बजट को कॉमन सभा में पारित करने का उत्तरदायित्व प्रधानमन्त्री का तथा सहयोगियों पर है। 

बजट में नाममात्र के संशोधन भी प्रधामन्त्री की सहमति से ही किये जाते हैं। प्रधानमन्त्री सदन में अपने दल के बहुमत के कारण बजट को पारित कराने में सफल हो जाता है। दूसरी ओर अमेरिका में बजट को राष्ट्रपति की देख-रेख में तैयार किया जाता है। 

यद्यपि राष्ट्रपति को न तो काँग्रेस के समक्ष प्रस्तुत करने का अधिकार है और न राष्ट्रपति के मन्त्री ही इस अधिकार को रखते हैं। अमेरिकन राष्ट्रपति के बजट को पारित करना अथवा उसे पूर्णरूपेण अस्वीकार कर देना काँग्रेस के हाथ में है।

(4) कार्यकारी शक्तियाँ- कार्यकारी शक्तियों के क्षेत्र में निस्संदेह अमेरिका के राष्ट्रपति की स्थिति ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ है। 

(i) अमेरिका का राष्ट्रपति प्रधान दण्डाधिकारी है। (ii) वह थल, वायु और जल सेना का प्रधान सेनापति है। (iii) वह सीनेट की अनुमति से उच्च वर्ग की सेवाओं में अधिकारियों की नियुक्ति करता है। (iv) वह सीनेट की अनुमति अथवा सहमति प्राप्त किये बिना ही उन उच्चाधिकारियों को पदच्युत कर सकता है। (v) उसे निम्न वर्गों की नियुक्तियाँ स्वविवेक से करने का अधिकार है। (vi) यदि राज्य में कानूनों का पालन नहीं हो पाता तब उसका उत्तरदायित्व भी उसी पर है। (vii) उसे अपने विवेक से अध्यादेश जारी करने तथा प्रशासकीय समझौता करने का अधिकार है। (viii) सीनेट की सहमति से वह सन्धियाँ सम्पन्न करता है। (ix) वह अपने व्यापक अधिकार के बल पर इस प्रकार की परिस्थितियाँ उत्पन्न कर सकता है कि देश युद्ध में फँस जाये।

(5) उत्तरदायित्व - ब्रिटेन का प्रधानमन्त्री संसद के प्रति उत्तरदायी है। उस पर संसद प्रश्नों द्वारा, बजट द्वारा, निन्दा प्रस्ताव तथा अविश्वास के प्रस्ताव द्वारा नियन्त्रण रखती है। दूसरी ओर राष्ट्रपति काँग्रेस के प्रति उत्तरदायी नहीं है।

निष्कर्ष-कार्यपालिका की उपर्युक्त सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक तुलना के पश्चात् इस निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि किन्हीं क्षेत्रों में अमेरिकन राष्ट्रपति ब्रिटिश प्रधानमन्त्री से निर्बल है तथा अन्य क्षेत्र में वह उसकी अपेक्षा अधिक सशक्त है। यह कहना कठिन है कि उन दोनों में से अधिक शक्तिशाली कौन है ?

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