चीन की राष्ट्रीय जनवादी काँग्रेस की रचना- chin ki rashtriya janwadi congress ki rachna

चीन गणराज्य की सर्वोच्च शक्ति स्रोत संस्था राष्ट्रीय जन काँग्रेस है। राज्य के महत्त्वपूर्ण पदाधिकारियों को नियुक्त करने तथा निष्कासित करने का उसे अधिकार प्राप्त है। 

इस प्रकार हम देखते हैं कि चीन की राष्ट्रीय जन काँग्रेस संविधान के अन्तर्गत सुधार करने के लिए अधिकृत है, परन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि वह भारत की विधायिका के समान एक प्रबल शक्ति है। 

क्योंकि वह साम्यवादी दल के निर्णयों के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य है। इस प्रकार की चीन की विधायिका या कार्यपालिका दोनों दलों में साम्यवादी दल ही सर्वोच्च सत्ता का अधिकारी है। यहाँ हम चीन गणराज्य की राष्ट्रीय जन कॉंग्रेस की रचना, शक्ति एवं उसके कार्यों का संक्षेप में वर्णन करेंगे। 

चीन की राष्ट्रीय जनवादी काँग्रेस की रचना तथा शक्तियों का वर्णन कीजिए।

चीनी गणराज्य के अन्तर्गत विधायिका एक सदनीय सत्ता है जिसे कि वहाँ पर राष्ट्रीय जन काँग्रेस कहा जाता है। चीन गणराज्य की सर्वोच्च सत्ता होने के कारण चीन के गणराज्य की महत्त्वपूर्ण प्रशासकीय जो भी शक्तियाँ हैं। 

वे सभी राष्ट्रीय जन काँग्रेस के हाथ में है। नवीन संविधान की धारा 13 के अनुसार, जन काँग्रेस चीन गणराज्य की सर्वोच्च सत्ता है।

राष्ट्रीय जन-काँग्रेस का संगठन, कार्य व शक्तियाँ

चीन के जनवादी गणराज्य में राष्ट्रीय जन काँग्रेस को देश की राष्ट्रीय व्यवस्थापिका कहा गया है। संविधान की धारा 21 के अनुसार, राष्ट्रीय जनवादी काँग्रेस चीन के जनवादी गणतन्त्र में राज्य की सत्ता का उच्चतम अभिकरण है। संविधान की धारा 22 के अनुसार, राष्ट्रीय जन काँग्रेस देश की एकमात्र विधानसभा है।

राष्ट्रीय जन-काँग्रेस का संगठन  - राष्ट्रीय जन काँग्रेस एक सदनीय व्यवस्थापिका है। इसके सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा न होकर विभिन्न राज्यों के क्षेत्रों की जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों के द्वारा किया जाता है। 

ये प्रतिनिधि डिप्यूटीज कहलाते हैं। राष्ट्रीय जन काँग्रेस के सदस्यों का चुनाव स्वशासित क्षेत्रों, राष्ट्रीय लोकसभा के प्रान्तों, नगरपालिकाओं और विदेशों में रहने वाले चीनी नागरिकों के द्वारा किया जाता है।

संविधान की धारा 86 के अनुसार, प्रत्येक नागरिक को, जिसकी आयु 18 वर्ष हो चुकी है, वोट देने का अधिकार है तथा निर्वाचन में खड़े होने का अधिकार है। चीन में चुनाव का आधार भूमिगत प्रतिनिधित्व है। 

कुछ विशेष वर्गों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। विदेशी प्रवासी चीनी भी अपने 30 प्रतिनिधियों को खड़ा कर सकते हैं। सशस्त्र सैनिकों में 60 प्रतिनिधियों को निर्वाचित रखा जाता है।

राष्ट्रीय जन-काँग्रेस का कार्यकाल - संविधान की चौथी धारा के अन्तर्गत जन काँग्रेस की अवधि चार वर्ष की है। संविधान की 25वीं धारा के अनुसार राष्ट्रीय जन काँग्रेस का अधिवेशन वार्षिक होता है। स्थायी समिति के कम-से-कम जन प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्ताव, करने पर अधिवेशन को बीच में ही बुलाया जा सकता है।

राष्ट्रीय जन-काँग्रेस के विशेष विशेषाधिकार - संविधान की 36वीं तथा 37वीं धारा में राष्ट्रीय जन काँग्रेस के कार्यों तथा अधिकारों का वर्णन किया गया है। 

1. सदस्य राज्य की कौंसिल, मन्त्रिपरिषद् तथा आयोगों से प्रश्न पूछ सकते हैं 

2. किसी सदस्य को राष्ट्रीय जन काँग्रेस की अनुमति प्राप्त किये बिना बन्दी नहीं बनाया जा सकता। उस पर कोई अभियोग नहीं चलाया जा सकता। यदि राष्ट्रीय जन काँग्रेस का अधिवेशन चल रहा हो तो इस कार्य के लिए स्थायी समिति से आज्ञा प्राप्त करनी पड़ती है ।

राष्ट्रीय जन-कॉंग्रेस के सदस्यों के कर्त्तव्य  - राष्ट्रीय जन काँग्रेस के सदस्यों के कर्त्तव्य प्रमुख निम्न प्रकार हैं -

डिप्यूटीज  - डिप्यूटीज का समस्त निर्वाचकों के प्रति पृथक्-पृथक् उत्तरदायित्व होता है। यदि अपने क्षेत्र का उचित प्रतिनिधित्व न कर सके तब उनका 'प्रत्यावर्तन' किया जा सकता है।

राष्ट्रीय जन-कॉंग्रेस की शक्तियाँ  - राष्ट्रीय जन काँग्रेस की प्रमुख शक्तियाँ इस प्रकार हैं-

1. विधायिका सम्बन्धी शक्तियाँ  - राष्ट्रीय जन काँग्रेस राज्य सत्ता की सर्वोच्च समिति है। इसके पास असीमित अधिकार हैं। इसे विधि-निर्माण की सर्वोच्च शक्ति प्राप्त है। इसे प्रेसीडियम तथा स्थायी समिति का भी करने का चुनाव अधिकार है।

2. संविधान में संशोधन की शक्तियाँ - संविधान की धारा 29 के अन्तर्गत राष्ट्रीय जन काँग्रेस के प्रतिनिधियों के दो-तिहाई बहुमत से संविधान का संशोधन किया जा सकता है। इसका कार्य यह भी देखना है कि संविधान उचित प्रकार से लागू हो रहा है अथवा नहीं।

3. न्यायिक शक्तियाँ  - संविधान की 17वीं धारा के अनुसार, राष्ट्रीय जन काँग्रेस को चीनी सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष की नियुक्ति व उसे पदच्युत करने का भी अधिकार है। राष्ट्रीय जन काँग्रेस राजनैतिक अपराधियों को जीवनदान दे सकती है।

4. निर्वाचन सम्बन्धी शक्तियाँ - चीन की राष्ट्रीय जन काँग्रेस राष्ट्र के महत्त्वपूर्ण अधिकारों, चीनी गणतन्त्र के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष, सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष तथा 'चीफ प्रोक्यूरेटर', राज्य परिषद् के प्रधानमन्त्री तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् के उपसभापति तथा अन्य सदस्यों आदि को निर्वाचित करती है।

5. प्रशासन सम्बन्धी शक्तियाँ  - राष्ट्रीय जन काँग्रेस अध्यक्ष का परामर्श लेकर प्रधानमन्त्री तथा अन्य मन्त्रियों का चुनाव कर सकती है। यह उन्हें पदच्युत कर सकती है। संविधान की 27वीं तथा 28वीं धारा के अन्तर्गत वह चीनी गणराज्य के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का चुनाव करती है। आवश्यकता अनुभव करने पर वह जाँच समितियों की नियुक्ति कर सकती है।

6. धन सम्बन्धी अधिकार - संविधान की 29वीं धारा के अन्तर्गत राष्ट्रीय जन काँग्रेस को धन सम्बन्धी अधिकार प्राप्त हैं। वह राष्ट्रीय बजट को पारित करती है तथा उसमें संशोधन कर सकती है। वित्तीय प्रतिवेदनों का निरीक्षण कर सकती है। 

बजट समिति को बुलाती है, जनता पर कर लगाती है तथा उसे एकत्रित करने के नियमों का निर्माण करती है। राष्ट्रीय आर्थिक योजनाओं के सम्बन्ध में निर्णय देती है। शासकीय वित्त प्रतिवेदन की जाँच करती है। 

7. अन्य अधिकार  - राष्ट्रीय जन काँग्रेस युद्ध और शान्ति के प्रश्नों का निर्णय देती है, संविधान की देखभाल करती है, उपाधि और पदकों का उपयोग करती है।

आलोचना - इस प्रकार हम देखते हैं कि साम्यवाद इस प्रकार की घोषणा करता है कि वह अन्य प्रजातन्त्र राष्ट्रों के समान जनता को पूर्ण स्वतन्त्रता प्रदान करता है

परन्तु वास्तविकता इसके विपरीत है। चीन राज्य की शक्ति का मुख्य स्रोत जन काँग्रेस है परन्तु उसके अधिकारों का उपयोग स्थायी समिति के द्वारा किया जाता है, जिसका कारण यह है कि जन समिति में सदस्यों की संख्या अधिक है और इसकी बैठकें भी कम होती हैं। 

काँग्रेस को साम्यवाद के निर्णयों को मानना पड़ता है और साम्यवाद की तानाशाही के विपरीत एक भी शब्द कहने का अधिकार नहीं है। इस प्रकार सैद्धान्तिक रूप से जन काँग्रेस शासन की सर्वोच्च सत्ता है, परन्तु व्यवहार में एक महत्त्वहीन संस्था बन जाती है।

निष्कर्ष - चीन की राष्ट्रीय जन काँग्रेस अन्य देशों में संसद अथवा काँग्रेस के समान शक्तियों का उपयोग करती है। स्वयं अपनी शक्तियों की सीमाओं का निर्धारण करती है। 

यह देश की केवल व्यवस्थापिका मात्र न होकर कार्यपालिका की शक्तियों का भी प्रयोग करती है। किसी अन्य देश में व्यवस्थापिका को इतने अधिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं, जितने कि चीन की राष्ट्रीय जन कॉंग्रेस को। 

पर आलोचकों का कथन है कि व्यवहार में जन काँग्रेस की सर्वोच्चता भ्रान्तिपूर्ण है। इसका अधिवेशन वर्ष में अधिक से अधिक एक बार होता है। यह अधिवेशन भी अल्पकालीन ही होता है। इसकी शक्तियों का प्रयोग स्थायी समिति द्वारा ही किया जाता है। 

राष्ट्रीय जन काँग्रेस को साम्यवादी दल के निर्णयों का पालन करना पड़ता है। इस प्रकार वास्तविकता में चीन की राष्ट्रीय जन काँग्रेस एक महत्त्वहीन संस्था है। उसे साम्यवादी दल की विचारधारा के अनुसार कार्य करना पडता है।

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