कागजी मुद्रा के दोष - kaagajee mudra ke dosh

Post Date : 25 July 2022

 कागजी मुद्रा के दोष

कागजी मुद्रा (पत्र - मुद्रा) के प्रमुख दोष निम्नांकित हैं -

1. मुद्रास्फीति का भय - कागजी मुद्रा का सबसे बड़ा दोष यह है कि इसमें मुद्रास्फीति का भय सदैव बना रहता है, क्योंकि इसमें मुद्रा का निर्गमन करने के लिए किसी प्रकार का धात्विक कोष नहीं रखना पड़ता है। अत: संकट के समय सरकार अत्यधिक नोट छापकर अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेती है। परिणामस्वरूप मुद्रास्फीति की दशा उत्पन्न हो जाती है। जिसका अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

2. आंतरिक कीमतों में उच्चावचन - कागजी मुद्रा वाले देशों के आंतरिक कीमत-स्तरों में अनावश्यक उच्चावचन होते रहते हैं। इस प्रकार आंतरिक कीमतों में अस्थिरता का देश के उत्पादन, व्यापार तथा रोजगार की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

3. विदेशी विनिमय दरों में अस्थिरता - विदेशी विनिमय दरों में स्थिरता की दृष्टि से कागजी मुद्रा को अच्छी प्रणाली नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि मुद्रा के मूल्यों में उच्चावचन के कारण कागजी मुद्रामान में विदेशी विनिमय दरों में अस्थिरता बनी रहती है। जिसका विदेशी व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

4. सीमित क्षेत्र में चलन - कागजी मुद्रा का चलन एक देश में ही सम्भव होता है। एक देश की मुद्रा को दूसरे देश में स्वीकार नहीं किया जाता है। इस प्रकार, कागजी मुद्रामान में कागजी मुद्रा का चलन क्षेत्र बहुत सीमित होता है।

5. नाशवान प्रकृति - कागजी मुद्रा शीघ्र नाशवान प्रकृति की होती है। इसके खराब होने, फटने व नष्ट होने का सदैव भय बना रहता है। वैसे तो नोट निर्गमन अधिकारी इस प्रकार के नोटों को वापस लेने का आश्वासन देते हैं। किन्तु खराब नोटों की वापसी करते समय जनता को बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है। 

6. स्वयं चालकता का अभाव - कागजी मुद्रा एक प्रबंधित मुद्रामान है अर्थात् उसमें मुद्रा का निर्गमन करते समय सरकार द्वारा बनाये गये नियमों का पालन करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त मुद्रा की मात्रा तथा समय को भी ध्यान में रखना पड़ता है। इस प्रकार इसमें स्वयं चालकता का अभाव होता है। 

7. सट्टे को प्रोत्साहन - कागजी मुद्रा के अधिक प्रचलन में आ जाने पर सट्टा, जुआ आदि प्रवृत्तियों को प्रोत्साहन मिलता है। यही कारण है कि कुछ अर्थशास्त्रियों ने इसे एक प्रकार का सामाजिक धोखा बताया है। 

8. जालसाजी का भय - कागजी मुद्रामान के अन्तर्गत जाली नोटों को छापना एक सामान्य बात हो गयी है तथा जाली नोटों की पहचान करना एक सामान्य व्यक्ति के लिए सम्भव नहीं हो पाता। इस कारण से देश में भारी मात्रा में जाली नोट चलन में होने की संभावना बनी रहती है। जिससे देश में समानांत अर्थव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने का भय बना रहता है। 

उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि कागजी मुद्रा में गुण अधिक हैं। दोष कम। जो दोष हैं भी, वह भी सरकार की इच्छा पर निर्भर करते हैं। यदि सरकार उचित मौद्रिक नीति बनाकर मुद्रा के मूल्य में होने वाले परिवर्तनों पर नियंत्रण रखती है, तो यह एक श्रेष्ठमान है।