लक्ष्य भाषा और स्रोत भाषा में क्या अंतर है -lakshya bhasha aur srot bhasha mein antar

लक्ष्य भाषा और स्रोत भाषा में क्या अंतर है ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिये। 

अनुवाद का शाब्दिक अर्थ होता है - किसी के कहने के बाद कहना। किसी कथन का अनुवर्ती कथन, पुन: कथन अथवा पुनरुक्ति अनुवाद कहलाता है। एक भाषा में कही हुई बात को दूसरी भाषा में कहना या बतलाना अनुवाद कहलाता है। 

अनुवाद में एक भाषा की सामग्री को दूसरी भाषा में प्रस्तुत किया जाता है। पाठ-सामग्री को दूसरी भाषा में प्रतिस्थापित किया जाता है। इस प्रक्रिया में एक स्रोत भाषा एवं दूसरी लक्ष्य भाषा होती है। 

अंग्रेजी के प्रसिद्ध भाषाविद् जे. सी. केटफर्ड के अनुसार - अनुवाद एक भाषा (स्रोत भाषा) की मूल पाठ सामग्री का दूसरी भाषा (लक्ष्य भाषा) में समानार्थक (इक्विबेलेंट) मूल पाठ सामग्री का स्थानापन्ना है।

वह भाषा जिसमें कथित बात को दूसरी भाषा में अनुदित किया जाता है स्रोत भाषा कहलाती है भाषा जिसमें अनुवाद किया जाता है।  वह लक्ष्य भाषा कही जाती है। उदाहरणार्थ कथित बात अंग्रेजी और अनुवाद हिन्दी भाषा में किया जाता है तो यहाँ अंग्रेजी स्रोत भाषा एवं हिन्दी लक्ष्य भाषा होगी। 

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