भारत की प्रमुख फसलें एवं उत्पादक राज्य - major crop producing states of india

Post Date : 05 July 2022

भारत में अनेक प्रकार की फसलें पैदा की जाती हैं। इस पोस्ट मे भारत की प्रमुख फसलें एवं उत्पादक राज्यों की जानकारी दी गई हैं।

  1. चावल
  2. गेहूँ
  3. जूट या पटसन
  4. चाय
  5. कपास

भारत की प्रमुख फसलें एवं उत्पादक राज्य

1. चावल

चावल भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल है। देश की कुल कृषि भूमि के लगभग 30% भाग में इसकी कृषि की जाती है। सन् 1996-97 में 432 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की गयी। भारत में मौसम के आधार पर चावल की तीन प्रकार की फसलें ली जाती हैं।

  • शीतकालीन जुलाई से दिसम्बर
  • ग्रीष्मकालीन दिसम्बर से अप्रैल 
  • शरदकालीन जून से अक्टूबर

भौगोलिक दशाएँ

1. तापमान - चावल उष्णकटिबन्धीय पौधा है, अतः उसे ऊँचे तापमान की आवश्यकता होती है। बोते समय 20°C तथा फसल पकते समय 27°C तापमान ठीक माना गया है। 19°C से कम तापमान में यह पैदा नहीं होता हैं।

2. वर्षा - खेतों में जल की मात्रा 75 दिनों तक भरी रहनी चाहिए। धान के पौधों को पानी की आवश्यकता अधिक होती है। 100 सेमी. से 200 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों को इससे अधिक अनुकूल मानते हैं। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा अनिवार्य है

3. मिट्टी - चावल के लिए उपजाऊ चिकनी, कछारी अथवा दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है, जिससे धान की जड़ें और पौधा खड़ा रह सके । डेल्टाई क्षेत्र एवं नदियों के बाढ़ क्षेत्र में धान अधिक होता है।

4. श्रम - चावल को बोने के लिए अधिक मात्रा में श्रमिकों की आवश्यकता होती है, क्योंकि क्यारियों से निकालने, निदाई, गुड़ाई, रोपाई कटाई, मिंजाई में श्रम की आवश्यकता पड़ती है।

उत्पादक राज्य

चावल भारत का प्रमुख खाद्यान्न है। इसकी खेती सम्पूर्ण राज्यों में की जाती है। चावल उत्पादन में भारत, चीन के बाद द्वितीय बड़ा उत्पादक देश है। भारत में चावल के प्रमुख उत्पादक राज्य निम्नलिखित हैं

प. बंगाल – इस राज्य की कुल कृषि भूमि का 77% भाग में चावल की खेती की जाती है। यहाँ वर्ष में चावल की तीन फसलें अमन, ओस व बोरो उगायी जाती हैं।

सन् 2001-02 में यहाँ 152.57 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ था, जो भारत के कुल उत्पादन का 16-39% भाग है। यहाँ चावल के प्रमुख जिले कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, बांकुड़ा, मिदनापुर, वर्धमान व दार्जिलिंग हैं।

उत्तर प्रदेश – इस राज्य के चावल के प्रमुख उत्पादक जिले सहारनपुर, देवरिया, गोरखपुर, लखनऊ, बहराइच, गोंडा बस्ती, बलिया, रायबरेली, पीलीभीत आदि हैं। यहाँ 2001-02 में चावल का उत्पादन 124-59 टन हुआ था, जो भारत के कुल उत्पादन का 13-38% से अधिक है।

आन्ध्र प्रदेश – इस राज्य में चावल की दो फसलें ली जाती हैं। प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1980 किग्रा. है। यहाँ गोदावरी नदी घाटियों तथ समुद्रतटीय मैदानों में चावल उगाया जाता है। सन् 2001-02 में यहाँ चावल का उत्पादन 113-9 लाख टन का उत्पादन किया गया जो भारत के कुल उत्पादन का 12 से 24% है।

पंजाब – क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का अत्यन्त छोटा राज्य है, जहाँ 88.16 लाख टन चावल का उत्पादन किया जाता है । यहाँ चावल का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 3229 किग्रा है।

उड़ीसा – यहाँ चावल का उत्पादन कटक, पुरी,सम्बलपुर, बालासोर, मयूरगंज, गंजाम कालाहांडी, बोलनगिरि आदि जिलों में किया जाता है। यह भारत का पाँचवाँ बड़ा चावल उत्पादक राज्य है।

तमिलनाडु – भारत का छठवाँ बड़ा चावल उत्पादक राज्य है। इस राज्य के 38% भूमि पर चावल की कृषि की जाती है। प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 3075 किग्रा. है। काबेरी डेल्टा का थंजापुर जिला राज्य का 25% चावल उत्पादन करता है।

बिहार – बिहार में चावल का 52-58 लाख टन (1999-2000 में) उत्पादन किया गया, यहाँ चावल उत्पादक प्रमुख जिले शाहाबाद, चम्पारण, गया, दरभंगा, पूर्णिया, मुँगेर, भागलपुर, सहरसा ।

छत्तीसगढ़ - धान का कटोरा के नाम से विख्यात राज्य छत्तीसगढ़ है। चावल यहाँ की प्रमुख फसल है। यहाँ कुल भूमि के 60% भाग में चावल का उत्पादन किया जाता है। यहाँ प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2000 किग्रा. है। यहाँ चावल की खेती सभी 16 जिलों में की जाती है।

2. गेहूँ

चावल के बाद गेहूँ हमारे देश का दूसरा महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है। भारत विश्व का चौथा बड़ा गेहूँ उत्पादक देश है, यह विश्व का 8% गेहूँ उत्पन्न करता है। देश के उत्तर व उत्तर-पश्चिम भाग के लोगों का यह मुख्य आहार है। सन् 2001-02 में भारत में 718 लाख टन गेहूँ का उत्पादन हुआ था।

भौगोलिक दशाएँ

1. तापमान - गेहूँ समशीतोष्ण कटिबन्धीय पौधा है। इसे बोते समय 10° से 12° से ग्रे. तापमान तथा पकते समय 15° से 20° तापमान की आवश्यकता पड़ती है।

2. वर्षा - गेहूँ की कृषि के लिए 20 से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। लेकिन 100 सेमी. से अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में गेहूँ की कृषि नहीं की जा सकती हैं।

3. मिट्टी - गेहूँ की कृषि अनेक प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। परन्तु हल्की मृतिका मिट्टी, मृतिकायुक्त दोमट मिट्टी, भारी मिट्टी, बलुई मिट्टी इसके लिए उत्तम होती है।

4. भूमि - गेहूँ की कृषि के लिए समतल भूमि उपयुक्त होती है।

5. श्रम - गेहूँ की कृषि में यन्त्रों का प्रयोग अधिक होता है। अतः इसकी कृषि के लिए अधिक श्रम की आवश्यकता नहीं होती है।

उत्पादक राज्य

उत्तर प्रदेश – गेहूँ के उत्पादन में इस राज्य का भारत में प्रथम स्थान है। यहाँ की कुल कृषि भूमि के 82% भाग पर गेहूँ बोया जाता है। यहाँ भारत के कुल गेहूँ उत्पादन का 34-84% गेहूँ उत्पन्न किया जाता है।

गंगा-यमुना दोआब प्रमुख गेहूँ उत्पादक क्षेत्र हैं। मेरठ, बुलन्दशहर, देहरादून, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, मुजफ्फरपुर, मुरादाबाद, इटावा, फर्रुखाबाद, बदायूँ, कानपुर, फतेहपुर आदि जिलों में एकतिहाई कृषि योग्य भूमि में गेहूँ की कृषि की जाती है।

पंजाब – पंजाब भारत का द्वितीय बड़ा गेहूँ उत्पादक राज्य है। यहाँ 12% कृषि भूमि पर गेहूँ की खेती की जाती है । सन् 2001-02 में यहाँ गेहूँ का कुल उत्पादन 154.99 लाख टन हुआ था, जो भारत के कुल उत्पादन का 21.58% है।

उर्वरा भूमि, सिंचाई सुविधा कीटनाशक दवाओं का प्रयोग यन्त्रीकरण के कारण प्रति हेक्टेयर उपज 3155 किग्रा. से अधिक है। गेहूँ उत्पादक जिलों में अमृतसर, लुधियाना, गुरुदासपुर, पटियाला, जालन्धर, भटिण्डा प्रमुख हैं ।

हरियाणा – देश के कुल कृषि भूमि में 6.17% भाग में गेहूँ बोया जाता है। यहाँ 2001-02 में 94.37 लाख टन गेहूँ का उत्पादन हुआ था, जो देश के कुल उत्पादन का 13-14% है। यहाँ प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2617 कि.ग्रा. है। मुख्य उत्पादक जिले रोहतक, हिसार, गुड़गाँव करनाल व जिन्द आदि हैं ।

राजस्थान – यह भारत का चौथा बड़ा गेहूँ उत्पादक राज्य है। सन् 2001-02 में यहाँ 63-89 लाख टन गेहूँ का उत्पादन हुआ था, जो देश का 8-89% है।

मध्य प्रदेश – राज्य में कुल कृषि भूमि का 17-7% भाग पर गेहूँ की फसल ली जाती है। सन् 200102 में यहाँ गेहूँ का कुल उत्पादन 57-32 लाख टन हुआ था, जो भारत में कुल गेहूँ का 7-84% है। यहाँ गेहूँ के प्रमुख उत्पादक जिले होशंगाबाद, सागर, ग्वालियर, खण्डवा, खरगोन, उज्जैन, देवास, भोपाल, रीवा, जबलपुर आदि हैं।

3. जूट या पटसन

जूट भारतीय मूल का पौधा है, इससे रेशा प्राप्त होता है। जूट से टाट, बोरे, परदे, कालीन, गलीचा, दरी आदि बनाए जाते हैं। इसके विविध उपयोग के कारण इसे भारत का "सुनहरा रेशा " भी कहा जाता है। जूट, कपास के बाद भारत की दूसरी महत्वपूर्ण रेशेदार फसल है।

भौगोलिक दशाएँ

1. तापमान - जूट उष्ण-आर्द्र जलवायु का पौधा है। इसके लिए 24° से 37° से. तापमान उपयुक्त होता है। वर्षा इसके लिए 100 से 200 सेमी. वर्षा उपयुक्त है। उत्तम रेशे के लिए वर्ष पर्यन्त वर्षा आवश्यक है।

3. मिट्टी - गहरी उपजाऊ कॉप मिट्टी में फसल की पैदावार अधिक होती है। नदी के बाढ़ क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी जूट के लिए उपयुक्त है।

4. जल - जूट एक रेशेदार फसल है। इसके रेशे को अलग करने, सड़ाने, छिलने व धोने के लिए पर्याप्त स्वच्छ जल की आवश्यकता पड़ती है।

5. श्रम - जूट काटने, बण्डल बनाने, सड़ाने, छिलने, धोने के लिए सस्ते व कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

उत्पादक राज्य

प. बंगाल – भारत में प. बंगाल को जूट उत्पादन में प्रथम स्थान प्राप्त है। भारत का 83% से अधिक जूट प. बंगाल में पैदा किया जाता है। प्रमुख जूट उत्पादक जिले वर्धमान, मुर्शिदाबाद, नादिया, मिदनापुर, मालदा, प. ढिनाजपुर व हुगली हैं।

बिहार – देश का द्वितीय बड़ा जूट उत्पादक राज्य बिहार है। इस राज्य के जूट उत्पादक प्रमुख पूर्णिया, कटिहार, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, चम्पारन व सहरसा आदि हैं।

असम – जूट उत्पादन में भारत का तीसरा बड़ा राज्य असम है। यहाँ प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1380 किग्रा. है। जूट उत्पादक प्रमुख जिले नवागाँव, गोभालपाड़ा एवं कामरूप हैं।

उड़ीसा – इस राज्य में कटक, बालेश्वर, किन्दूझरगढ़ तथा पुरी जिले में जूट की खेती की जाती है।

उत्तर प्रदेश – यहाँ प्रमुख उत्पादक जिले खीरी, बहराइच, गोंडा, पीलीभीत, बस्ती व देवरिया हैं।

4. चाय

चाय एक मुद्रा दायिनी रोपणी फसल है। यह दक्षिण पूर्व एशिया के पर्वतीय भागों का मूल पौधा है। चाय एक सदापर्णी झाड़ी है जिसकी सुखाई हुई पत्ती पेय पदार्थ के काम आती है। चाय में थीन नामक तत्व होता है, जिसके प्रयोग से हल्का नशा व स्फूर्ति पैदा होती है।

चाय भारत की अति महत्वपूर्ण बागाती फसल है, जिसके निर्यात से देश को काफी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है । यहाँ चाय की खेती उद्योग के रूप में की जाती है। वर्तमान समय में इससे परोक्ष एवं अपरोक्ष रूप से लगभग 20 लाख व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त है।

भारत में यद्यपि चाय जंगली दशा में असम के पहाड़ी भागों में काफी समय पहले से ही उगती आई है, परन्तु व्यावसायिक पैमाने पर इसके उत्पादन की शुरुआत सन् 1840 में तत्कालीन गर्वनर विलियम बैंटिक द्वारा कराई गई। बाद में यहाँ चाय की खेती का उत्तरोत्तर विकास होता गया और भारत चाय का एक महत्वपूर्ण उत्पादक देश बन गया हैं।

वर्तमान में भारत विश्व में सर्वाधिक चाय पैदा करने वाला देश है तथा विश्व का लगभग एक-तिहाई से कुछ कम चाय का उत्पादन भारत में ही होता है। उत्पादन के साथ-साथ चाय के निर्यात में भी भारत का विश्व में प्रथम स्थान है।

भौगोलिक दशाएँ

1. तापमान - चाय उष्ण तथा उपोष्ण जलवायु का पौधा है। इसके लिए 25° से 30° तक तापमान उपयुक्त है। पाला इसके लिए हानिकारक होता है।

2. वर्षा - चाय के लिए 150 से 200 सेमी. वार्षिक वर्षा अनुकूल होती है। पत्तियों के निरन्तर विकास के लिए वर्षा पूरे साल समान रूप से वितरित होनी चाहिए। बार-बार बौछार का पड़ना और सुबह का कोहरा नई पत्तियों की तीव्र वृद्धि में सहायक होता है।

3. भूमि - चाय के लिए ढालू भूमि का विशेष महत्व है। चाय के पौधों के विकास के समय जड़ों में पानी एकत्रित नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि चाय के बगीचे के लिए समुद्र तल से 600 से 1800 मीटर ऊँचे पहाड़ी ढाल उपयुक्त भूमि है।

4. मिट्टी - चाय के लिए सामान्यतः हल्की बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है जिसमें पर्याप्त मात्रा में चूना, फास्फोरस, लोहा, पोटाश व जीवाश्म होता है।

5. श्रम - चाय की खेती के लिए सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। चाय का पौधा लगाने उसकी निराई, काट-छाँट तथा पत्ता चुनने और सुखाने आदि कार्यों में कुशल श्रमिकों की आवयकता पड़ती है।

उत्पादक राज्य

भारत विश्व का 35% चाय पैदा करता है तथा विश्व में चाय उत्पन्न करने में प्रथम स्थान पर है। यहाँ 8·05 लाख मीट्रिक टन चाय का उत्पादन होता है। भारत में चाय उत्पादक प्रमुख राज्य निम्न हैं -

असम – असम भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। सन् 2001-02 में असम में कुल 2-32 लाख हेक्टेयर भूमि पर चाय के बागान लगे हुए थे। जो कि भारत के कुल चाय बागान भूमि का 53% था । इस वर्ष चाय का कुल उत्पादन 414 हजार टन हुआ, जो भारत के कुल चाय उत्पादन का लगभग 50% है।

असम में मुख्य चाय उत्पादक जिले शिवसागर, लखीमपुर, दरांग, नवांगाँव, कागरूप तथा गोलपाड़ा हैं। असम की अधिकांश चाय ब्रह्मपुत्र तथा सुरमा घाटियों में उगायी जाती है।

प. बंगाल – यह भारत का द्वितीय बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। यहाँ भारत की एक चौथाई चाय पैदा होती है। मुख्य उत्पादक जिले दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी तथा कूच बिहार हैं। यहाँ द्वार के पहाड़ी ढालों पर चाय पैदा होती है। दार्जिलिंग के उत्तम किस्म की सुगन्धित चाय विश्व प्रसिद्ध है।

तमिलनाडु– तमिलनाडु भारत का तीसरा बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। यहाँ भारत का उत्पादन होता है। यहाँ मुख्यतः कोयम्बटूर, नीलगिरि तथा अन्नामलाई जिलों के पहाड़ी ढालों में चाय पैदा की जाती है।

केरल – दक्षिण भारतीय राज्य केरल भारत का 8-4% चाय पैदा कर चौथा बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। यहाँ चाय की खेती वायनाद, ट्रावनकोर मालाबार, त्रिचूर व कोझीकोड जिलों में की जाती है।

कर्नाटक – यहाँ कहवा की तुलना में चाय का कम महत्व है, यहाँ चाय शिमोगा, चिकमंगलूर, हसन, काटूर कुर्ग जिलों में चाय उत्पन्न की जाती है।

उत्तरांचल – भारत के उत्तरी क्षेत्र में उत्तरांचल प्रमुख है। यहाँ देहरादून, गढ़वाल चमोली, कुमायूँ, नैनीताल, अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ जिलों में चाय पैदा की जाती है।

5. कपास

कपास भारतीय मूल का रेशेदार व्यापारिक फसल है। इसके रेशे से सूती वस्त्र तैयार किया जाता है। इसी उपयोगिता के कारण भारत में इसकी खेती अति प्राचीन समय से होती आ रही है। भारत की कुल कृषि योग्य भूमि के 5% भाग में कपास पैदा की जाती है।

भौगोलिक दशाएँ

1. तापमान - कपास उष्ण तथा उपोष्ण कटिबन्धीय पौधा है, इसके लिए 21° से 27° सेग्रे. तापमान अनुकूल होता है। इसकी खेती के लिए 6-7 माह पालारहित मौसम आवश्यक है।

2. वर्षा - कपास के लिए 50 से 100 सेमी. वर्षा आवश्यक है, किन्तु 40 से 150 सेमी. वर्षा वाले भागों में भी इसे पैदा किया जा सकता है।

3. मिट्टी - लावा निर्मित काली उपजाऊ मिट्टी कपास के लिए उपयुक्त है। गहरी उपजाऊ दोमट मिट्टी भी उपयुक्त होती है।

4. भूमि - इसके लिए समतल किन्तु सुप्रवाहित भूमि उपयुक्त होती है।

5. श्रम - कपास बोने, चुनने व सिंचाई में कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है। कपास की किस्में

उत्पादक राज्य

महाराष्ट्र - कपास उत्पादन में इस राज्य का स्थान देश में प्रथम है, यहाँ सन् 2001-02 में 26-65%लाख गाँठों का उत्पादन हुआ था, देश के कुल उत्पादन का 26.65% है। कपास उत्पादक प्रमुख जिले यवतमाल, औरंगाबाद, अमरावती, नासिक, नागपुर, अकोला, शोलापुर, जलगाँव, धुलिया व वर्धा हैं ।

आन्ध्र प्रदेश - यहाँ मुख्यतः मंगारी किस्म की कपास पैदा होती है। यहाँ कर्नूल, कड्डप्पा, गुण्टूर, प. गोदावरी, कृष्णा, महमूद नगर, आलिदाबाद और अनन्तपुर आदि प्रमुख कपास उत्पादक जिले हैं । सन् 2001-02 में यहाँ 18·72 लाख गाँठों का उत्पादन हुआ जो देश के कुल उत्पादन का 18.55% है।

गुजरात - देश के कुल कपास क्षेत्र की 18.5% भूमि इसी राज्य में है। कपास उत्पादन में इस राज्य का तृतीय स्थान है। मुख्य उत्पादक जिले बड़ोदरा, सुरेन्द्रनगर, भड़ौच, अहमदाबाद हैं। सन् 2001-02 में यहाँ 17.03 लाख गाँठें उत्पादित की जो भारत के कुल उत्पादन का 16-87% है।

पंजाब - यहाँ कपास का प्रति हेक्टेयर उत्पादन अन्य राज्यों से सर्वाधिक 386 किग्रा है । यह राज्य भारत का 12-95% कपास उत्पादित करता है। यहाँ कपास उत्पन्न करने वाले प्रमुख जिले लुधियाना, भटिण्डा, अमृतसर, फिरोजपुर, जालन्धर व संगरूर हैं।

हरियाणा - कपास उत्पादन में इस का स्थान पंचम है। यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले हिसार, करनाल, गुड़गाँव व रोहतक हैं। हिसार राज्य का लगभग 25% कपास उत्पन्न करता है। हरियाणा देश का 7-15% कपास उत्पन्न करता है।