रिजर्व बैंक की सफलताएँ - rijarv baink kee saphalataen

Post Date : 27 July 2022

रिजर्व बैंक की सफलताएँ

भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की प्रमुख सफलताएँ निम्नांकित हैं -

1. नोट निर्गमन में सफलता - रिजर्व बैंक को नोट निर्गमन के एकाधिकार में सफलता मिली। उसने सन् 1935 से 1956 तक आनुपातिक कोष प्रणाली द्वारा तथा सन् 1956 में न्यूनतम कोष प्रणाली अपनाकर इच्छानुसार नोट छापने का एकाधिकार ले लिया। वर्तमान में वह 115 करोड़ मूल्य का सोना एवं 85 करोड़ रु. की विदेशी प्रतिभूति नोट को रखकर मुद्रा छाप रही है। इससे मुद्रा की पूर्ति का नियमन करना संभव हो गया है।

2. सुलभ मुद्रा नीति - रिजर्व बैंक की स्थापना के समय बैंक दर 3.5 प्रतिशत थी, जिसे नबम्बर सन् 1935 में घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया। सन् 1951 तक यही बैंक दर रही। सन् 1991 तक बैंक दर धीरे-धीरे करके बढ़ी, लेकिन 10 प्रतिशत तक ही रही। वर्तमान में यह 6 प्रतिशत है। स्पष्ट है कि रिजर्व बैंक ने अपने जीवन काल में सुलभ मुद्रा नीति का अनुसरण किया है। 

3. स्फीति नियंत्रण – रिजर्व बैंक ने देश में प्रचलित मुद्रा स्फीति को नियंत्रित एवं नियमित करने के लिए समय समय पर अनेक कदम उठाये हैं। बैंक दर, खुले बाजार की क्रियाएँ, नकद कोषानुपातों में परिवर्तन के साथ-साथ इसने चयनात्मक साख नियंत्रण द्वारा देश के भीतर कीमत स्तर को नियंत्रित करने का प्रयत्न किया है।

4. ब्याज दरों में स्थिरता - रिजर्व बैंक की स्थापना से पूर्व देश में ब्याज की दरों में बहुत उच्चावचन होते रहते थे। रिजर्व बैंक ने व्यापारिक आवश्यकताओं के अनुसार साख का नियमन करके ब्याज की दरों में होने वाले परिवर्तनों में काफी स्थिरता स्थापित कर दी है।

5. सार्वजनिक ऋण की व्यवस्था - सरकार के एजेन्ट के रूप में रिजर्व बैंक ने सरकार के लिए सार्वजनिक ऋण का बहुत अच्छा एवं सराहनीय प्रबन्ध किया है। उसने केवल आंतरिक ऋण ही नहीं बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय ऋण भी भारी मात्रा में कम ब्याज दर पर उपलब्ध कराया है।

6. कृषि वित्त की व्यवस्था - रिजर्व बैंक ने स्थापना के बाद कृषि के विकास के लिए कृषि साख विभाग की स्थापना की। साथ ही देश में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना द्वारा भी कृषि क्षेत्र के विस्तार के लिए काफी प्रयत्न किये हैं। 

7. औद्योगिक वित्त - रिजर्व बैंक ने देश में औद्योगिक विकास को सुचारु रूप तथा संतुलित रखने की दृष्टि से उद्योगों के लिए अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन ऋणों को उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न वित्त निगमों को सहायता प्रदान की है। 

8. समाशोधन गृहों की व्यवस्था - रिजर्व बैंक ने विभिन्न बैंकों द्वारा आपसी लेन-देन के निपटारे के लिए समाशोधन ग्रहों की स्थापना की है। जहाँ रिजर्व बैंक के कार्यालय नहीं है, वहाँ स्टेट बैंक, रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि के रूप में यह सुविधा प्रदान करता।