संयुक्त राज्य अमेरिका की न्यायिक प्रणाली - sanyukt rajya ki nyay pranali kya hai

संयुक्त राज्य अमेरिका की न्यायिक प्रणाली क्या हैं। विस्तार से इसकी जानकरी दी गयी हैं। 

(1) संविधान में सर्वोच्च न्यायालय की ही व्यवस्था - यद्यपि अमेरिका में वर्तमान समय में संघीय न्यायपालिका में तीन श्रेणियों के न्यायालय हैं, परन्तु इनमें से केवल सर्वोच्च न्यायालय की ही स्थापना संविधान द्वारा की गई है, शेष दो न्यायालयों की स्थापना कांग्रेस ने अपने कानूनों द्वारा की है।

आगे सर्वोच्च न्यायालय के संगठन व शक्तियों का विस्तृत उल्लेख किया जायेगा । यहाँ पर इतना कहना काफी है कि जिला न्यायालय संघीय न्यायपालिका के संगठन में सबसे निम्न श्रेणी का न्यायालय है। समस्त अमेरिका को अनेक जिलों या क्षेत्रों में बाँटकर प्रत्येक राज्य में कम-से-कम एक ऐसा न्यायालय अवश्य स्थापित किया गया है। इस न्यायालय में केवल प्रारम्भिक मुकदमे सुने जाते हैं, अपीलें नहीं। अमेरिका में वर्तमान में ऐसे जिला न्यायालयों की संख्या 88 है।

भ्रमण न्यायालयों में अपीलें सुनी जाती हैं, परन्तु इनके निर्णयों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपीलें सुनी जाती हैं। ऐसे भ्रमण न्यायालयों की संख्या 10 है। कोलम्बिया के लिए पृथक न्यायालय हैं।

(2) न्यायिक समीक्षा - संविधान में अनुच्छेद 6 की दूसरी उपधारा में व्यवस्था है कि संविधान देश का सर्वोच्च कानून है और इसका पालन कराना न्यायाधीशों का दायित्व है। दूसरे शब्दों में, न्यायपालिका को व्यवस्थापिका तथा कार्यपालिका के कार्यों की संवैधानिकता की जाँच करने का अधिकार प्राप्त है। सर्वोच्च न्यायालय का संरक्षक है और वही उसका अन्तिम व्याख्याकार है।

(3) न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की संरक्षक है - अमेरिकन नागरिकों के अधिकारों की संविधान में गारण्टी की गई है, न्यायपालिका मूल अधिकारों की संरक्षक है। इस सम्बन्ध में न्यायपालिका को लेख व आदेश जारी करने का अधिकार प्राप्त है, जैसे - बन्दी प्रत्यक्षीकरण का आदेश, परमादेश का लेख आदि ।

(4) न्यायपालिका की स्वतन्त्रता - अमेरिका के न्यायाधीश जितने कार्यपालिका व विधायिका के नियन्त्रणों से मुक्त हैं, उतने किसी अन्य देश के न्यायाधीश नहीं। न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति सीनेट के अनुमोदन से करा सकता है। संघीय न्यायाधीशों को केवल महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है। उनके कार्यकाल में वेतन तथा अन्य सुविधाओं में कमी नहीं की जा सकती है।

(5) दोहरी न्याय प्रणाली – भारत की भाँति अमेरिकन न्याय व्यवस्था इकहरी न होकर, दोहरी है। एक ओर संघीय न्यायालय हैं, जिनके शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय है । दूसरी ओर राज्यों को अपनी पृथक् न्याय व्यवस्था है।

(6) सार्वजनिक सुनवाई का अधिकार - अमेरिका में हत्या तथा अन्य गम्भीर मामलों की सुनवाई ग्राण्ड जूरी (Grand Jury) द्वारा होती है। दीवानी के कुछ मामले भी जूरी के द्वारा सुने जाते हैं। संविधान में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी व्यक्ति से बहुत अधिक जमानत नहीं माँगी जायेगी, न ही बहुत अधिक जुर्माने किये जायेंगे और न क्रूर व भयंकर दण्ड दिये जायेंगे।

(7) सर्वोच्च न्यायालय की व्यापक शक्तियाँ - विश्व में किसी भी न्यायालय को इतनी शक्तियाँ प्राप्त नहीं, जितनी कि अमेरिकन सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त हैं। इसकी विस्तृत शक्तियों के कारण ही इसे 'संविधान का सन्तुलन चक्र' और 'कांग्रेस का तीसरा सदन' कहा गया है।

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