व्यापारिक बैंकों के कार्य - vyaapaarik bainkon ke kaary

Post Date : 26 July 2022

 व्यापारिक बैंकों के कार्य

व्यापारिक बैंकों के प्रमुख कार्य निम्नांकित हैं -

  1. जमा अथवा निक्षेप प्राप्त करना। 
  2. ऋण प्रदान करना।  
  3. प्रतिनिधित्व सम्बन्धी कार्य करना। 
  4. विविध कार्य करना। 
  5. आन्तरिक एवं विदेशी व्यापार का अर्थ- प्रबन्धन। 
  6. साख का सृजन करना। 
  7. व्यापारिक बैंकों के आधुनिक कार्य। 

जमा अथवा निक्षेप प्राप्त करना 

व्यापारिक बैंकों का प्रथम कार्य जनता की बचतों को जमा के रूप में प्राप्त करना होता है। अधिकांश व्यक्ति अपनी आय में से कुछ न कुछ रकम बचाते हैं। ऐसी बचत बैंक द्वारा जमा के लिए विभिन्न प्रकार के खातों में प्राप्त की जाती है, जैसे

1. बचत खाता – बैंकों ने ऐसे खातों की व्यवस्था विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए की है, जिनकी बचतें थोड़ी होती हैं और उन्हें अपनी जमाओं की बार-बार आवश्यकता नहीं होती। इस प्रकार के खातों के अन्तर्गत खाताधारी रकम तो चाहे जितनी बार जमा कर सकता है।  

किन्तु रुपया निकालने के सम्बन्ध में कुछ नियम हैं, जिनके अनुसार वर्तमान में खाताधारी 6 माह में केवल 30 बार ही रुपया निकाल सकता है। इस खाते पर बैंक निश्चित अवधि खाते की तुलना में कम ब्याज प्रदान करता है।

2. चालू खाता - इस खाते के अर्न्तगत जमाकर्ता एक दिन में चाहे जितनी बार रुपया निकाल सकता है। चालू खाते पर बैंक द्वारा कोई ब्याज नहीं दिया जाता, क्योंकि बैंक को ऐसे खातों में जमा सम्पूर्ण राशि का भुगतान करने के लिए सदैव तैयार रहना पड़ता है और इसके लिए अपने पास नकद कोष रखने पड़ते हैं। कुछ बैंक ऐसे खाताधारियों से अपनी सेवाओं के बदले कुछ सेवाशुल्क भी वसूल करते हैं। यह खाता विशेष रूप से कुछ बड़े व्यापारियों को ही सुविधा प्रदान करता है।

3. निश्चित अवधि खाता - इस खाते में बैंकों द्वारा निश्चित अवधि के लिए धन स्वीकार किया जाता है, जिसकी वर्तमान में न्यूनतम अवधि 46 दिन है। इस खाते में ब्याज की दर अन्य खातों की अपेक्षा अधिक होती है। इन खातों में रुपया जितने अधिक लम्बे समय के लिए जमा करवाया जाता है, ब्याज की दर उतनी ही अधिक होती है। यदि जमाकर्ता निश्चित अवधि से पूर्व अपना रुपया वापस लेना चाहे, तो बैंक साधारण दर से ब्याज देकर रुपया वापस कर सकता है। 

4. अनिश्चितकालीन जमा खाता - इस प्रकार के खाते के अन्तर्गत रुपये को अनिश्चित काल के लिये जमा किया जाता है तथा विशेष परिस्थितियों को छोड़कर जमाकर्ता को रुपया निकालने की अनुमति नहीं दी जाती। जमाकर्ता केवल ब्याज की राशि को ही निकाल सकता है।

5. गृह बचत खाता – इस योजना के अन्तर्गत बैंक द्वारा खाताधारी के घर पर एक गुल्लक रख दी जाती है। जमाकर्ता अथवा उसके परिवार के सदस्य इस गुल्लक में अपनी छोटी-छोटी बचतों को डालते रहते हैं तथा निश्चित अवधि के पश्चात् उस गुल्लक की सम्पूर्ण राशि को खाताधारी के खाते में जमा कर दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि इस गुल्लक की चाबी प्रायः बैंक के पास रहती है और बैंक इस रकम पर बहुत कम ब्याज देते हैं।

ऋण प्रदान करना 

केन्द्रीय बैंक को छोड़कर शेष सभी बैंकों का दूसरा प्रमुख एवं महत्वपूर्ण कार्य ऋण प्रदान करना है। वर्तमान में बैंकों द्वारा प्राय: उत्पादक कार्यों के लिए ही ऋण प्रदान किये जाते हैं। साथ ही यह ऋण विक्रयशील प्रतिभूतियों की धरोहर के आधार पर प्रदान कर दिये जाते हैं। 

लेकिन कभी कभी बैंकों द्वारा अनुत्पादक ऋण प्रदान कर दिये जाते हैं। साथ ही कुछ परिस्थितियों में बैंक व्यक्तिगत जमानत के आधार पर भी ऋण प्रदान कर देते हैं। बैंकों द्वारा प्रदान किये जाने वाले ऋण सामान्यतः चार प्रकार के होते हैं। 

1. नकद साख - नकद साख के अन्तर्गत बैंक व्यक्तियों को एक निश्चित सीमा तक ऋण लेने का अधिकार प्रदान करता है। ऋण की सम्पूर्ण राशि ऋणी को नकद रूप में न देकर ऋणी के खाते में जमा करवा दी जाती है और ऋणी को उसकी आवश्यकतानुसार, धन निकालने का अधिकार दे दिया जाता है। बैंक साधारणतया ऋण की सम्पूर्ण राशि पर ही ब्याज वसूल करते हैं, लेकिन कुछ बैंक प्रयोग न की गई राशि पर ब्याज की छूट भी प्रदान करते हैं।  

2. अधिविकर्ष - जिन व्यक्तियों का बैंक में चालू खाता होता है, वे बैंक में जमा अपनी राशि से एक निश्चित सीमा तक अधिक रकम निकालने की बैंक से अनुमति प्राप्त कर लेते हैं। जमाकर्ता द्वारा स्वयं की जमा राशि के अतिरिक्त निकाली गई राशि अधिविकर्ष कहलाती है। बैंक द्वारा यह सुविधा केवल उन्हीं व्यक्तियों को प्रदान की जाती है। जिनकी साख अच्छी होती है। अधिविकर्ष पर बैंक ऊँची दर से ब्याज वसूल करता है।

3. ऋण तथा अग्रिम - इसके अर्न्तगत ऋणी को बैंक से ऋण की सम्पूर्ण राशि एक साथ प्राप्त हो जाती है। ऋण की राशि एक साथ प्राप्त हो जाती है। ऋण की राशि का कुछ अंश बैंक को वापस कर देने की स्थिति में ऋणी उस राशि को पुनः प्राप्त करने का अधिकारी बना रहता है ।

4. विनिमय बिलों की कटौती - आधुनिक समय में बैंकों द्वारा विनिमय बिलों की पुर्नकटौती के माध्यम से भी ऋणों की सुविधा उपलब्ध करवायी जाती है। विनिमय बिल के वाहक को बिल की परिपक्वता अवधि समाप्त होने से पूर्व ही बिल का भुगतान कर दिया जाता है। बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली यह सेवा अल्पकालीन ही होती है। 

प्रतिनिधित्व सम्बन्धी कार्य करना 

बैंक अपने ग्राहकों की ओर से अभिकर्ता अथवा प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य करता है। बैंक के अभिकर्ता या प्रतिनिधि सम्बन्धी प्रमुख कार्य निम्नांकित हैं -

1. भुगतान एकत्रित करना - ग्राहकों द्वारा भेजे गये चैक, विनिमय बिलों आदि साख-पत्रों का भुगतान एकत्रित करने का कार्य बैंक करता है।

2. विनिमय बिल स्वीकार करना - बैंक अपने ग्राहकों द्वारा लिखे गये चैकों का भुगतान करते हैं। वे कभी-कभी ग्राहकों के विनिमय बिलों को स्वीकार करते हैं, जिनका भुगतान एक निश्चित तिथि पर कर दिया जाता है।

3. ग्राहकों की ओर से भुगतान - ग्राहकों के आदेश के अनुसार बैंक उनके बीमे के प्रीमियम ब्याज, कर, चन्दे, ऋण की किस्त आदि का भुगतान करते हैं।

4. धन की वसूली - अपने ग्राहकों की ओर से बैंक लाभांशों, ब्याज, किराया, ऋण की किस्त आदि भी वसूल करते हैं।

5. प्रतिभूतियों एवं शेयर का क्रय-विक्रय – बैंक अपने ग्राहकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों, कम्पनियों के शेयर्स तथा ऋणपत्र आदि के क्रय-विक्रय का कार्य भी करते हैं। 

6. धन का हस्तांतरण - बैंक अपने ग्राहकों की सुविधा के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान को रकम भेजने की व्यवस्था भी करते हैं।

7. व्यवस्थापन का कार्य - बैंक अपने ग्राहकों की सम्पत्ति के प्रबन्धक, ट्रस्टी अथवा व्यवस्थापन का कार्य भी करते हैं।

8. विदेशी विनिमय की सुविधा - ग्राहकों के लिए बैंक पासपोर्ट तथा यात्रा सम्बन्धी विदेशी विनिमय एवं अन्य सुविधाओं के लिए भी पत्र व्यवहार करते हैं ।

विविध कार्य करना 

उपर्युक्त कार्यों के अतिरिक्त बैंक और भी कुछ कार्य करती है, जिन्हें विविध कार्य कहा जाता है। जैसे - दस्तावेज 

1. मूल्यवान वस्तुओं की सुरक्षा - बैंक अपनी ग्राहकों की बहुमूल्य वस्तुएँ, जैसे- जेवर, कानूनी पत्र, आदि को सुरक्षित रखने के लिए लॉकर्स अपने पास रखते हैं।

2. यात्री चैक की सुविधा - बैंक अपने ग्राहकों के लिए यात्री चैक तथा साख प्रमाण पत्र देते हैं, जिससे उन्हें यात्रा करते समय नकद मुद्रा साथ नहीं रखनी पड़ती है।

3. साख सम्बन्धी सूचना - बैंक अपने ग्राहकों की आर्थिक स्थिति की सूचना अन्य व्यापारियों को देते हैं और पूछे जाने पर अन्य व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जाँच पड़ताल करके अपने ग्राहकों को सूचित करते हैं।

4. आँकड़े एकत्रित कर प्रकाशित करना - कुछ बड़े-बड़े देशों के व्यापार तथा उद्योग से सम्बन्धित आँकड़े एकत्र करते हैं तथा उन्हें प्रकाशित करते हैं ।

5. अभिगोपन सम्बन्धी कार्य  - बैंक कम्पनियों के शेयर्स तथा ऋणपत्रों के अभिगोपन का कार्य करते हैं। इससे कम्पनियों को पूँजी प्राप्त करने में सुविधा होती है। इस कार्य के लिए बैंक इन कम्पनियों से अपना हकदार कमीशन वसूल करते हैं।

6. सरकारी ऋण-पत्रों की बिक्री - सरकार द्वारा जारी किये गये ऋण-पत्रों की ब्रिकी की व्यवस्था बैंकों द्वारा की जाती है।

7. सुरक्षा कोष व चंदे एकत्रित करना - बाढ़ पीढ़ितों का कोष, सुरक्षा कोष आदि राष्ट्रीय चंदे संग्रह करने का कार्य भी बैंकों द्वारा किया जाता है। 

8. उपभोक्ता ऋण प्रदान करना - बैंक अपने ग्राहकों को उपभोग सम्बन्धी महँगी वस्तुओं जैसे- मोटरकार, स्कूटर, रेफ्रीजरेटर आदि खरीदने के लिए ऋण उपलब्ध कराता है।

9. ग्राहकों को सलाह देना - बैंक एक विशेषज्ञ के रूप में अपने ग्राहकों को उनके धन तथा विनियोग सम्बन्धी मामलों में सलाह भी देते हैं।

10. बैंकिंग शिक्षा एवं प्रशिक्षण - बैंकों के विस्तार के कारण बैंकिंग कार्यों में कुशल और प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यापारिक बैंक अपने लोगों को प्रशिक्षण भी देती है।

आन्तरिक एवं विदेशी व्यापार का अर्थ- प्रबन्धन 

आन्तरिक एवं विदेशी व्यापार के लिए धन की व्यवस्था बैंकों द्वारा व्यापारियों के विनिमय विपत्रों, आंतरिक विपत्रों, हुण्डियों आदि को भुनाकर की जाती है। यदि किसी व्यापारी के पास कोई बिल है, जिसका भुगतान उसे कुछ समय के बाद प्राप्त होता है और यदि उसे धन की तत्काल आवश्यकता होती है तो इस बिल को उस अवधि का ब्याज काटकर शेष रुपया व्यापारी को दे दिया जाता है। स्वयं उस बिल का भुगतान अवधि समाप्त होने पर 'ड्राञी' से वसूल कर लेता है।

साख का सृजन करना

व्यापारिक बैंकों का एक महत्वपूर्ण कार्य साख का सृजन करना है। अधिकाधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से बैंक अपनी अंश पूँजी को और जमाधन की कुल राशि से अधिक ऋण देते हैं, जो इसलिए संभव होता है, क्योंकि बैंक साख सृजन का कार्य भी करते हैं। बैंक दो तरीकों से साख का सृजन करते हैं

  1. पत्र मुद्रा के निर्गमन द्वारा, 
  2. प्रारंम्भिक जमाओं और व्युत्पन्न जमाओं द्वारा ।

व्यापारिक बैंकों के आधुनिक कार्य

वर्तमान समय में व्यापारिक बैंकों ने अपने परम्परागत कार्यों के अतिरिक्त निम्नांकित कार्य करने भी प्रारम्भ कर दिये हैं -

  1. इंटरनेट बैंकिंग - इस सुविधा के अन्तर्गत ग्राहक अपने कम्प्यूटर के द्वारा इंटरनेट के माध्यम से अपने खाते चला सकता है।
  2. सर्वत्र बैंकिंग - अब व्यापारिक बैंक अपने ग्राहकों को देशव्यापी अपनी किसी भी शाखा से रुपया जमा कराने अथवा निकालने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं ।
  3. ए.टी.एम. सुविधा - अब व्यापारिक बैंक अपने ग्राहकों के लिए विभिन्न स्थानों पर ए. टी. एम. मशीन उपलब्ध करा रहे हैं। खाताधारी इन मशीनों का उपयोग किसी भी समय अथवा स्थान पर कर सकते हैं।
  4. साख पत्र – व्यापारिक बैंक अपने ग्राहकों के लिए साख पत्र जारी करने लग गए हैं। साख पत्रों के धारक इनका प्रयोग बाजार में खरीददारी हेतु कर सकते हैं। अब उन्हें बाजार में वस्तुएँ खरीदते समय नकद भुगतान करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। बैंक अपने ग्राहकों की ओर से दुकानदारों का शीघ्र भुगतान कर देते हैं, लेकिन उन्हें यह राशि अपने ग्राहकों से 45 दिन की अवधि में प्राप्त होती है।