व्यष्टि अर्थशास्त्र के प्रकार - vyashti arthashaastr ke prakaar

 व्यष्टि अर्थशास्त्र के प्रकार

व्यष्टि अर्थशास्त्र प्रमुख रूप से तीन प्रकार के होते हैं

1. व्यष्टि स्थैतिकी - व्यष्टि स्थैतिकी विश्लेषण में किसी दी हुई समयावधि में संतुलन की विभिन्न सूक्ष्म मात्राओं के पारस्परिक संबंधों की व्याख्या की जाती है। इस विश्लेषण में यह मान लिया जाता है कि संतुलन की स्थिति एक निश्चित समय बिन्दु से संबंधित होती है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता है ।

2. तुलनात्मक सूक्ष्म स्थैतिकी - तुलनात्मक सूक्ष्म स्थैतिकी विश्लेषण विभिन्न समय बिन्दुओं पर विभिन्न संतुलनों का तुलनात्मक अध्ययन करता है। परन्तु यह नये एवं पुराने संतुलन के बीच के संक्रमण काल पर कुछ भी प्रकाश नहीं डालता है।

सूक्ष्म स्थैतिकी विश्लेषण इन दोनों की आपस में तुलना तो करता है। परन्तु यह नहीं बताता है कि नया संतुलन किस क्रिया स स्थापित हुआ है। इस प्रकार सूक्ष्म स्थैतिकी विश्लेषण में केवल ‘दो स्थिर चित्रों' की तुलना की जाती है। 

3. सूक्ष्म प्रावैगिकी – सूक्ष्म प्रावैगिकी विश्लेषण के माध्यम से हम पुराने संतुलन से नये संतुलन की ओर अग्रसर होते हैं। यह विश्लेषण पुराने और नए संतुलन के संक्रमण काल को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, किसी वस्तु की कीमत माँग और पूर्ति के संतुलन का परिणाम होती है। 

अब मान लीजिए कि बाजार में उस वस्तु की माँग घट जाती है। माँग के घट जाने से बाजार में माँग पूर्ति का संतुलन टूट जाएगा। वस्तु की कम कीमत पर नया संतुलन स्थापित होने से पूर्व असंतुलनों की एक श्रृंखला उत्पन्न हो जाती है, और यह विश्लेषण उन सभी घटनाओं का पूर्ण अध्ययन करता है जो पुराने संतुलन में बाधा डालते हैं और नये संतुलन के स्थापित होने तक के संक्रमण काल में घटित होते हैं।

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