अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम - American freedom struggle

क्रांति से तात्पर्य राजनैतिक तथा सामाजिक व्यवस्थाओं में परिवर्तन से है। यूरोपीय राजतंत्रात्मक देशों की आम जनता क्रांति शब्द से अनभिज्ञ थी। अमेरिका की राज्य क्रांति ने विश्व के राष्ट्रों, विशेषकर यूरोप के राष्ट्रों का पथ प्रदर्शन किया। इसी ने फ्राँस की राजय क्रांति को नेता प्रदान किया।

अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम

अमेरिका का स्वाधीनता संग्राम 18वीं सदी की  एक महत्वपूर्ण घटना है। यह युद्ध अमेरिकी उपनिवशों द्वारा इंग्लैण्ड के विरूद्ध लड़ा गया। यूरोप में पहली बार इस स्वाधीनता युद्ध का लोकतांत्रिक शासन पद्धति के लिए किए गए संघर्ष के इतिहास में विशिष्ट स्थान है। इस समय इंग्लैण्ड का शासक जार्ज तृतीय था।

अमेरिका की खोज- 1492 ई. में पुर्तगाली नाविक कोलम्बस ने अमेरिका जाने वाले रास्ते की खोज की। कोलम्बस द्वारा खोजे गए जलमार्ग से ही लगभग इसी समय अमेरिगो वेस्पुसी ने अमेरिका के पूर्वी तट के मार्ग का पता लगाया। इसलिए अमेरिगो के नाम पर ही इस भूखंड का नाम अमेरिका पड़ा। 18वीं सदी के अंतिम दशकों में महत्वपूर्ण क्रांतियाँ हुई। इनमें पहली अमरीकी स्वतंत्रता संग्राम और दूसरी फ्राँसीसी राज्य क्रांति थी।

अमेरिका में अंग्रेजी उपनिवेश - अमेरिका के भूखंड में उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का समावेश है जो पनामा नहर से जुड़ा हुआ है। अमेरिका समृद्धशाली और प्राकृतिक सम्पदा से भरा पड़ा है। यूरोपीय देश स्पेन, फ्राँस, पुर्तगाल और इंग्लैण्ड आदि देशों ने यहाँ उपनिवेश बसाकर इनकी धन सम्पत्ति को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 

अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम - American freedom struggle

17वीं शताब्दी में उत्तरी अमेरिका में अटलांटिक के किनारे-किनारे ब्रिटेन के 13 उपनिवेश स्थापित हो चुके थे। ट्यूडर तथा स्टुअर्ट राजाओं के काल में अँग्रेजों ने इन अमेरिकी उपनिवेशों पर जमकर अत्याचार और शोषण किया।

इंग्लैंड जो जलशक्ति में अद्वितीय था जिसके संदर्भ में कहा जाता था कि इसका सूर्य कभी भी अस्त नहीं होता। भारत में सन् 1600 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई। तब से भारत, अमेरिका और अन्य महाद्वीपों पर इंग्लैंड का आधिपत्य था । विश्व का सबसे शक्तिशाली देश इंग्लैंड कहा जाता था। 

ब्रिटेन की सरकार ने अमेरिका के 13 उपनिवेशों को अपने अधिपत्य में कर लिया था। भूमिहीन किसान, धार्मिक स्वतंत्रता चाहने वाले व्यक्ति और मुनाफाखोर व्यक्ति इस उपनिवेशों में जाकर बस गए थे। उत्तरी उपनिवेशों के निवासियों का मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना और जहाज बनाना था। दक्षिण में सामंती मेनरों की भाँति बड़े-बड़े फार्म बन गए थे। उन पर अँग्रेज जमींदार अफ्रीका से लाए हुए दासों की सहायता से तम्बाकू और कपास की खेती करते थे।

प्रत्येक उपनिवेश में एक विधानसभा थी, जिसके सदस्य विशेष योग्यता प्राप्त मतदाताओं द्वारा चुने जाते थे। ये सभाएँ स्थानीय मामलों के बारे में कानून बनाती और कर लगाती थी । किन्तु वे ब्रिटेन की सरकार के अध् पीन थी जिनके वे उपनिवेश थे। इर उपनिवेशों से अंग्रेज कर वसूल करते थे। करों में वृद्धि होती गई और वाणिज्य व्यवस्था तथा प्रशासन पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए। जिसका अमरीकी उपनिवेश ने विरोध किया।

अठारहवीं शताब्दी में उपनिवेशवासियों ने यह अनुभव किया कि ब्रिटेन की सरकार ने उनके ऊपर जो कानून लागू किए वे बहुत आपत्तिजनक है। उनके मन में स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के विचार का उदय हुआ और उसने विकसित होकर एक ऐसे क्रांतिकारी युद्ध का रूप ले लिया, जिसके फलस्वरूप उपनिवेशवासियों को स्वाधीनता मिल गई।

अमरीकी स्वाधीनता युद्ध के कारण - अमेरिका में इंग्लैंड के विरोध में 1776 ई. में क्रांति हुई तिसके निम्नलिखित कारण थे- 1. राजनीतिक कारण, 2. आर्थिक कारण, 3 सामाजिक कारण, 4 ग्रीनविले की नीति, 5. स्टाम्प एक्ट, 6. टाउनशैड के अधिनियम, 7 दार्शनिकों का प्रमाण, 8. तात्कालिक कारण- बोस्टन टी पार्टी।

1. राजनीतिक कारण 

  • अमरीकी उपनिवेश पर राजनीतिक प्रतिबंध - इंग्लैंड की सरकार अमेरिका के उपनिवेशों में अपने यहाँ के गवर्नर नियुक्त करती थी। जो उपनिवेशों की व्यवस्थापिकाओं के प्रति उत्तरदायी न होकर इंग्लैंड की सरकार के प्रति उत्तरदायी होते थे। उपनिवेशों में बड़े पदों पर ब्रिटिश नियुक्त होते थे। उपनिवेशवासियों को सरकारी पदों पर नियुक्ति नहीं की जाती थी। अतः उपनिवेशवासियों में ब्रिटेन की प्रति आक्रोश था।
  • सप्तवर्षीय युद्ध का प्रभाव (1756.1763) - सप्तवर्षीय युद्ध में एक ओर इंग्लैंड व प्रशा थे, दूसरी ओर फ्राँस, आस्ट्रिया और अन्य राष्ट्र | इस यु० में फ्राँस बुरी तरह पराजित हुआ और वह अमेरिका से हट गया। अब उपनिवेशवासी फ्राँस के भय से मुक्त हो गए। अब उनके सामने एकही रोड़ा इंग्लैंड था। उपनिवेशवासी इंग्लैंड के कर के बोझ से असतुष्ट थे।
  • मध्यम वर्ग का विकास - इस समय इंग्लैण्ड के मध्यमवर्गीय कुछ लोग धार्मिक स्वेच्छाचारिता से पेरशान होकर अमेरिका भाग आए थे। उनके स्वतंत्र विचार थे कि और वे उनमें अपनी शासन व्यवस्था तथा सरकार की रूप-रेखा तैयार करने की भावना थी।

2. आर्थिक कारण - ब्रिटिश सरकार की नीति उपनिवेशों का शोषण करने की थी। उपनिवेशों में ऊनी कपडा, टोपी बनाना तथा लोहे का सामान बनाना निषिद्ध था । इंग्लैंड उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते में प्राप्त करता था और तैयार माल को उन्हीं के बाजार में अधिक दाम में बेचता था ।

3. धार्मिक मतभेद - इंग्लैंड छोड़कर अमेरिका में बसने वाले अंग्रेज वहाँ होने वाले अत्याचारों से दुःखी होकर यहाँ आए। ये अँग्रेज लोगों के धार्मिक अत्याचारों से बचने के लिए इंग्लैंड छोड़कर अमेरिका आए थे। इन लोगों में इंग्लैंड के प्रति कोई सहानुभूति नहीं थी।

4. ग्रीनविले की नीति - 1763 में ग्रीनविले इंग्लैंड का प्रधानमंत्री बना। ग्रीनविले के निम्न कार्यों से उपनिवेश के लोग अँग्रेजों से नाराज हो गए -

  • एडमिरेल्टी कोर्ट की स्थापना - जलसेना न्यायालय ने तस्कर व्यापार को रोकने के लिए कोर्ट की स्थापना की।
  • शीरा अधिनियम - 1764 में ग्रीनविले ने शीरा, कानून बनाया। उसने शीरे के आयात पर रोग लगा दी। आयात किए हुए शीरे पर चुंगी कम कर दी, परंतु उसे कठोरता से वसूला जिससे उपनिवेश के लोग नाराज हो गए।
  •  मूल निवासियों की सुरक्षा - ग्रीनविले अमेरिका के मूल निवासियों, रेड इंडियनों के लिए उपनिवेशों का एक बड़ा भाग सुरक्षित कर दिया। उपनिवेशों की जनता ने इसका विरोध किया।
  • स्थायी सेना रखना - अमेरिकी उपनिवेशों की सुरक्षा के लिए ग्रीनविले ने दस हजार की अँग्रेजी सेना, उत्तरी अमेरिका में रखने की घोषणा की। इस सेना पर होने वाले खर्च का 1/3 भाग उपनिवेशों को देने को कहा गया। उपनिवेशवासी घोषणा से असंतुष्ट थे। उपनिवेशों को सेना के लिए भोजन तथा आवास की सुविधाएँ देने के लिए कहा।

5. स्टाम्प एक्ट - सप्तवर्षीय युद्धों ( 1756- 1763) में उलझे रहने के कारण इंग्लैंड की आर्थिक दशा खराब हो गई थी। उस पर ऋण का बोझ बढ़ गया । धन की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए 1765 ई. पू. में ब्रिटेन की संसद में स्टाम्प एक्ट पारित किया । उपनिवेश वासियों को व्यापारिक सौदे पर कर देना आवश्यक हो गया। 

कानूनी कागजातों और अन्य दस्तावेजों पर 20 शिलिंग तक का स्टाम्प लगाना पड़ता था। अमेरिका में बसे यूरोप के लोगों का कहना था कि ब्रिटेन की संसद में उनका कोई प्रतिनिधि नहीं है। अतः संसद का उन पर कर लगाने का कोई अधिकार नहीं है। स्टाम्प एक्ट का अमेरिका में घोर विरोध हुआ। फलस्वरूप 1766 ई. में इस एक्ट को रद्द करना पड़ा।

6. टाउन शैड के अधिनियम - 1767 में ब्रिटिश संसद ने चाय, शीश (काँच) तथा कागज पर नए आयात कर लगा दिए थे। तीव्र विरोध के कारण 1770 में शीश और कागज के करों को रद्द कर दिया गया। चाय पर कर बना रहा। अमेरिका वासियों का क्रोध शांत नहीं हुआ।

7. दार्शनिकों का प्रभाव - अमरीकी जनता को क्रांतिकारी विचारों से प्रेरणा मिली । फ्राँसीसी दार्शनिकों ने विचार व्यक्त किए थे। कि मनुष्य को कुछ मौलिक अधिकार प्राप्त है जिसका हनन कोई नहीं कर सकता अन्याय के खिलाफ विद्रोह करना ऐसा ही एक अधिकार था । ल्यूक हेरिंगटन, टामस पेन आदि दार्शनिकों के विचारों ने अमरीकियों को प्रभावित किया। 

अमरीकी नेता थामस जेफरसन ने उपनिवेशी जनता को प्रोत्साहित किया। 1776 को 13 उपनिवेशों के प्रतिनिधियों ने मिलकर स्वतंत्रता की लड़ाई शुरु कर दी। अंततोगत्वा उपनिवेशों को स्वतंत्रता मिली। जिन्हें हम संयुक्त राज्य अमेरिका कहते हैं उन्होंने गणतंत्रात्मक शासन प्रणाली लागू की ।

8. तात्कालिक कारण - बोस्टन टी पार्टी - ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत से सीधे अमेरिका चाय भेजने का एकाधिकार चाय कानून के तहत प्रदान किया गया। उपनिवेशवासियों ने इसका विरोध किया। 16 दिसंबर, 1773 ई. को ईस्ट इंडिया कम्पनी के चाय से लदे कुछ जहाज बोस्टन के बन्दरगाह पर पहुँचे। 

बोस्टन में जब वहाँ के गवर्नर ने चाय उतारने का आदेश दिया तब वहाँ के कुछ नागरिक आदिवासियों जैसे कपड़े पहनकर जहाज पर पहुँचे और चाय की 343 पेटियाँ समुद्र में फेंक दी। यह घटना इतिहास में बोस्टन टी पार्टी के नाम से प्रसिद्ध है। ब्रिटिश सरकार ने बोस्टन के बंदरगाह को व्यापार के लिए बंद कर लिया तथा अनेक दमनकारी कानून बनाए। उपनिवेशवासी विद्रोह के लिए उठ खड़े हुए।

फिलाडेलफिया का प्रथम सम्मेलन - 5 सितम्बर, 1774 में इंग्लैंड के दमनकारी कानून के विरोध में 13 उपनिवेशों का एक सम्मेलन फिलाडेलफिया में बुलाया गया। तय हुआ कि उपनिवेशों के सहमति के बिना उन पर किसी प्रकार का कर न लगाया जाए। अँग्रेज सरकार ने माँग अस्वीकृत कर दी और विद्रोह घोषित कर दिया।

19 अप्रेल, 1775 ई. में क्रांति का प्रथम संघर्ष मैसाचुसेटस में लैक्सिगटन नामक स्थान पर हुआ। युद्ध में हार-जीत का निर्णय न हो सका।

द्वितीय महाद्वीपीय सममेलन - 4 जुलाई, 1776 ई. को फिलाडेल्फिया में उपनिवेशवासियों की दूसरी बैठक हुई। इस सम्मेलन में पूर्ण स्वाधीनता की घोषणा की गई। यह घोषणा तैयार करने में मिस जेफर्सन का मुख्य हाथ था जिसमें संयुक्त उपनिवेशों को स्वाधीन और स्वतंत्रता घोषित किया गया।

स्वतंत्रता संग्राम का प्रारम्भ होना - अमेरिकी सेनाओं का नेतृत्व जार्ज वाशिंगटन ने किया। 1776 ई. में ब्रिटिश जनरल हो की करारी हार हार हुई। युद्ध में फ्राँस, स्पेन तथा हालैण्ड भी शामिल हो गए। वे इंग्लैंड से अपना पुराना बदला चुकाना चाहते थे। उन्होंने यूरोप में इंग्लैंड को उलझाए रखा, जिससे वह अमेरिका में अपनी सेनापतियों को सहायता न कर सका। 

अतः 1781 में यार्कटाउन नामक स्थान पर अंग्रेजी सेनापति कार्नवालिस की पराजय हुई। यह एक निर्णायक युद्ध साबित हुआ। इसके दो वर्ष तक अंग्रेजी शासन जारी रहा। 1783 में पेरिस संधि हुई और अमरीकी तेरह उपनिवेशों को स्वतंत्र कर दिया। 4 जुलाई अमेरिका में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

स्वतंत्र संयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान जब 1789 ई. में लागू हुआ तब जार्ज वाशिंगटन उसके प्रथम राष्ट्रपति चुने गए।

अमेरिका संविधान - एक योजना के अंतर्गत संयुक्त राज्य अमेरिका के नाम से राष्ट्रीय सरकार बनाने का निश्चय किया। नया संविधान सन् 1789 में लागू हुआ। अमेरिका में गणतंत्र राज्य की स्थापना की गई। अमेरिका के नागरिकों को अनेक अधिकार दे दिए गए। भाषण प्रकाशन (प्रेस) और धर्म की स्वतंत्रता तथा कानून के अनुसार न्याय प्राप्त करने का अधिकार । संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के इतिहास में यह पहला लिखित गणतांत्रिक संविधान है।

अमरीकी स्वतंत्रता संग्राम का परिणाम, प्रभाव

1. नये राष्ट्रों का उदय हुआ।

2. विश्व में लोकतंत्र शासन की स्थापना हुई।

3. अमेरिका में औद्योगिक क्रांति का श्रीगणेश हुआ।

4. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का विकास हुआ।

5. इंग्लैंड की शक्ति एवं प्रतिष्ठा को आघात्।

6. इंग्लैंड के उद्योग धंधें, वाणिज्य व्यवसाय को आघात्।

7. 1782 आयरलैंड ने स्वतंत्रता की माँग की।

8. फ्राँस में राज्यक्रांति 1789 में हुई।

9. कनाडा को औपनिवेशिक स्वराज्य मिला।

10. ब्रिटेन ने आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में नए उपनिवेश बनाए।

11. जार्ज तृतीय के निजी शासन का अंत हुआ।

12. भारत के प्रति अँग्रेजों के दृष्टिकोण में परिवर्तन आया।

अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम का महत्व

1. विश्व का पहला देश है जहाँ आधुनिक लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था की स्थापना की गई।

2. विश्व में पहला लिखित संविधान निर्मित हुआ।

3. अमरीकी क्रांति ने भविष्य में होने वाले क्रांतियों को प्रेरणा दी तथा मानवीय अधिकारों का पोषण किया साथ ही समानता के महत्व को प्रतिपादित किया।

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