मानव सभ्यता का विकास - development of human civilization

 मानव सभ्यता का विकास

मानव का विकास - जब पृथ्वी लगभग चार अरब पचास करोड़ वर्ष तक सूर्य से अलग होकर ठंडी हुई होगी तब उपर्युक्त जल, वायु तथा जीवों की पारिस्थितिक परिवर्तन के पश्चात् मानवीय आकृति उभरकर आई जो कि अन्य जीवों से कुछ मामलों में बेहतर प्रजाति रही। 

जो अन्य जीवों की तरह चल भाग तो नहीं सकती थी परंतु बुध्दि का उपयोग अन्य जीवों से बेहतर कर रही थी। वह प्रजाति कहलायी मानव प्रजाति। पहाड़ों व महासागरों का इसी तरह निर्माण हुआ पृथ्वी के धरातल पर हुए परिवर्तनों से जलवायु में भी परिवर्तन हुए जिससे जीवन का और विकास एवं विस्तार हुआ। इनमें से कुछ परिवर्तन इस प्रकार हुए

मानव का उदय - मानव सभी जीवों में सर्वाधिक विकसित है। मानव का उदय लगभग बीस लाख साल पहले हुआ था। मानव की प्रगति की कहानी के उस भाग को इतिहास कहते हैं। जिसके लिए लिखित विवरण मिलते हैं। किन्तु लिखना सीखने के पहले भी मानव इस धरती पर लाखों वर्ष रह चुका था। वह अतीत जब मनुष्य ने घटनाओं का कोई लिखित विवरण नहीं रखा प्राग् इतिहास कहलाता है। उसे हम प्रागैतिहासिक काल भी कहते हैं।

मानव की कहानी आज से लगभग बीस लाख वर्ष पूर्व से प्रारंभ होती है। इसी समय के आसपास पेड़ों पर रहने वाले वानरों से आदि मानव विकसित हुआ वह धरती पर अपने दोनों पैरों पर खड़े होकर चलना सीखने लगा धीरे-धीरे उसमें बुद्धि का विकास भी हुआ। फिर भी अबसे सिर्फ तीस-चालीस हजार वर्ष पहले ही होमोसेपियंस या "ज्ञानी मानव' इस धरती पर प्रकट हो सके। वर्तमान मानव इसी होमोसेपियंस जाति के हैं। 

मनुष्य का सीधा खड़ा होना - पेड़ों पर रहने वाले वानर, जो शायद गौरिल्ला, चिपैंजी और मानव तीनों के पूर्वज थे लगभग एक करोड़ वर्ष पहले अस्तित्व में आए। मानव ने धीरे-धीरे खड़ा होना, फिर पिछले पैरों से चलना सीखा।

यह मानव विकास की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी। इससे नई जीवन पद्धति का विकास हुआ। पेड़ों से उतरकर जमीन पर रहने से उसमें शारीरिक परिवर्तन हुए। उनकी कलाई की हड्डियों का विकास हुआ और उन्हें हाथों से वस्तुओं को पकड़ने का अभ्यास हुआ। खड़े होने पर उनके हाथ सामने की वस्तुओं को पकड़ने तथा मजबूत डंडों को हथियारों के रूप में इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र थे। 

कालांतर में इनके हाथों में लचीली उंगलियों तथा नमनीय अंगूठों का विकास हुआ। इस नए विकास ने आदि मानव को एक शिल्पी मानव बना दिया। अब वह चीजों को पकड़कर अपनी आँखों के पास लाने में समर्थ हो गया। साथ ही साथ शरीर के अंदर के अवयवों में खड़े होने की स्थिति के अनुकूल कई परिवर्तन हुए। उसके मस्तिष्क का विकास हुआ जिससे उसे औजार बनाने तथा अंततोगत्वा अन्य पशुओं से ऊपर उठने में बुद्धि का प्रयोग करने में सहायता मिली।

मानव की बोलने की शक्ति - ज्ञान के निरंतर संचय तथा संचार से ही मनुष्य सांस्कृतिक प्रगति करता है। बोलने की क्षमता मानव की अद्भुत विशेषता है जो संचार प्रक्रिया को संभव बनाती है बोलने की यह क्षमता उच्च बुद्धि की परिचायक होती है। जिससे अभिव्यक्ति के लिए विचार उत्पन्न होते हैं। ऐसी ऊँची बुद्धि केवल मानव प्राणियों के ही पास है।

औजार निर्माण का संबंध बुद्धि से भी है इस प्रकार यह एक विशिष्ट मानवीय क्रिया है। लगातार अच्छे तेज घातक हथियार व औजार बनाकर मानव अपने पर्यावरण व अन्य जीवों पर अपनी श्रेष्ठता स्थापित की। यह औजार उसके शिक्षा उपकरण भी थे। 

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