निर्देशांक का महत्व - importance of coordinates

Post Date : 05 August 2022

 निर्देशांक का महत्व 

निर्देशांकों का आर्थिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र में बहुत अधिक महत्व है। क्योंकि इन क्षेत्रों में होने वाले परिवर्तन के बारे में जानकारी सूचकांकों के माध्यम से ज्ञात होता है इसलिए इसे आर्थिक वायुमापन यंत्र भी कहते हैं। जिस प्रकार वायुमापक यंत्रों द्वारा वायु के दबाव व मौसम की स्थिति के विषय में अध्ययन किया जाता है और मौसम के बारे में पूर्वानुमान लगाया जाता है 

उसी प्रकार निर्देशांक की मुद्रा की क्रय शक्ति, मुद्रा का मूल्य एवं व्यापारिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ब्लेयर के अनुसार निर्देशांक व्यवसाय के पथ पर चिन्ह और पद-प्रदर्शक स्तम्भ है जो व्यवसायी को अपनी क्रियाओं के संचालन या प्रबंध का ढंग बताते हैं। 

1. कठिन तथ्यों को सरल बनाते हैं - निर्देशांकों की सहायता से कभी-कभी ऐसे तथ्यों का मापन किया जाता है। जो अन्य किसी साधन से संभव नहीं। उदाहरण - व्यापारिक क्रिया का मापन किसी एक तथ्य के अध्ययन द्वारा संभव नहीं, किन्तु औद्योगिक उत्पादन, बैंकिंग व्यवस्था एवं यातायात आदि की प्रगति के विश्लेषण के आधार पर व्यापारिक क्रिया निर्देशांक की रचना की जा सकती है।

2. जीवन स्तर का तुलनात्मक अध्ययन - निर्देशांकों की सहायता से व्यक्तियों के जीवन स्तर में हुए परिवर्तनों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। इन उद्देश्य की पूर्ति के लिए जीवन निर्वाह लागत सूचकांक की रचना की जा सकती है।

3. मुद्रा की क्रय-शक्ति में परिवर्तन का ज्ञान - मूल्य निर्देशांक की रचना करके मुद्रा की क्रय-शक्ति में हुए परिवर्तनों को ज्ञात किया जा सकता है। चुँकि आर्थिक जगत में मुद्रा का महत्वपूर्ण स्थान है इसलिए इसके मूल्य में होने वाले परिवर्तनों की जानकारी आर्थिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण होती है।

4. व्यापारियों के लिए उपयोगी - निर्देशांक व्यापारी तथा उत्पादकों के लिए भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण सिद्ध होते हैं। यह केवल वर्तमान दशाओं को ही नहीं प्रकट करते, बल्कि इनके आधार पर भविष्य के बारे में भी महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। जिसके आधार पर ये वर्ग उत्पादन एवं व्यापार की योजना तैयार करते हैं।

5. सरकार की मौद्रिक नीति के निर्धारण में सहायक - जब मूल्य-स्तर में ह्रास से उत्पादन में गिरावट होने लगती है तो इसका प्रभाव समाज के सभी वर्गों पर प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से पड़ता है। सरकार इन्हें दूर करने के लिए उचित मौद्रिक नीति अपनाती है। इस प्रकार निर्देशांक कीमत में परिवर्तनों की ओर संकेत कर सरकार को अपनी आर्थिक नीति निर्धारण में सहायता पहुँचाते हैं।

6. उत्पादन में परिवर्तन की सूचना - निर्देशांकों के माध्यम से उत्पादन में वृद्धि या कमी के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाती है। इसके लिए औद्योगिक उत्पादन एवं कृषि उत्पादन निर्देशांक की रचना की जा सकती है।

7. वेतन, महँगाई भत्ते आदि निश्चित करने में सहायक - निर्वाह व्यय निर्देशांक की सहायता से वास्तविक मजदूरी में परिवर्तन का अध्ययन होता है। इससे किसी वर्ग विशेष के न्यूनतम वेतन, महँगाई भत्ता आदि निश्चित करने में सरलता होती है।

8. विदेशी व्यापार सम्बन्धी ज्ञान - विदेशी व्यापार सम्बन्धी निर्देशांकों की सहायता से विदेशी व्यापार में होने वाले परिवर्तन की जानकारी होती है। जिसके आधार पर भुगतान संतुलन को संतुलित करने का प्रयास किया जा सकता है।