निर्देशांक की सीमाएँ - ranges of coordinates

 निर्देशांक की सीमाएँ

निर्देशांक की प्रमुख सीमाएँ निम्नांकित हैं -

1. सापेक्ष परिवर्तनों का माप - निर्देशांकों द्वारा केवल सापेक्ष परिवर्तनों का ही मापन किया जा सकता है निरपेक्ष परिवर्तन का नहीं। इसके माध्यम से वास्तविक परिवर्तन की मात्रा का बोध नहीं होता है। क्योंकि निर्देशांक किसी आधार पर आधारित होकर प्रतिशतों में व्यक्त किये जाते हैं।

2. पूर्ण शुद्धता की कमी - निर्देशांकों की रचना समग्र में से निर्देशन द्वारा कुछ इकाइयाँ चुनकर करते हैं। इस कारण इन इकाइयों के आधार पर तैयार निर्देशांक अधिक शुद्ध व विश्वसनीय नहीं होते हैं।

3. निर्देशांक लगभग संकेतक होते हैं - ये परिवर्तन की दिशा व औसत की ओर संकेत मात्र करते हैं वास्तविक स्थिति का ज्ञान इनसे संभव नहीं होता, क्योंकि ये अनेक तत्वों पर निर्भर होते हैं। 

4. आधार वर्ष का चुनाव - निर्देशांकों के निर्माण में आधार वर्ष का चुनाव अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी के आधार पर समस्त परिणाम निर्भर करते हैं। यदि आधार वर्ष का चुनाव कोई सामान्य वर्ष न होकर असामान्य वर्ष हो तो ऐसे निर्देशांक के द्वारा निकाले गये निष्कर्ष भ्रामक होंगे ।

5. दीर्घकालीन तुलना के अयोग्य - निर्देशांक दीर्घकालीन तुलना के अयोग्य होते है, क्योंकि समय की अवधि अधिक होने पर व्यक्तियों की रुचि, आदतें, रीति-रिवाज, वस्तुओं के किस्म में अन्तर के कारण निर्मित निर्देशांक तुलना के योग्य नहीं होता है।

6. जीवन निर्वाह व्यय निर्देशांकों से वास्तविक तुलना संभव नहीं - विभिन्न स्थानों एवं क्षेत्रों पर व्यक्तियों के खान-पान व रहन-सहन का ढंग विभिन्न होता है और तो और एक स्थान पर एक ही वर्ग में रहन-सहन के स्तर में अंतर होता है। जैसे कोई शिक्षा पर अधिक व्यय करता है, तो कोई सिनेमा पर कोई धूम्रपान या शराब पर। ऐसी दशा में निर्देशांक सबके लिए तुलना योग्य नहीं होता है।

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