राष्ट्रीय आय का महत्व समझाइए - rashtriya aay ka mahatva

Post Date : 04 August 2022

 राष्ट्रीय आय का महत्व समझाइए

राष्ट्रीय आय के महत्व को निम्न बिन्दुओं के रूप में स्पष्ट किया जा सकता है -

1. आर्थिक नियोजन में सहायक - राष्ट्रीय आय के समंकों की सहायता से नियोजन किया जाता है। आर्थिक नियोजन के लिए उत्पादन, उपभोग, बचत संबंधी समंक राष्ट्रीय आय के विश्लेषण से ही प्राप्त होते हैं। यह समंक इस बात पर भी प्रकाश डालते हैं कि पिछली प्रवृत्तियाँ किस प्रकार की रही हैं।  अतः ये भविष्य में उचित आर्थिक नियोजन के लिए भी मार्गदर्शन का कार्य करते हैं। 

2. आर्थिक कल्याण का मापक - राष्ट्रीय आय को आर्थिक कल्याण का बैरोमीटर कहा जाता है। यदि अन्य बातें समान रहें तो राष्ट्रीय आय में वृद्धि होने पर आर्थिक कल्याण भी बढ़ जाता तथा राष्ट्रीय आय में कमी होने पर आर्थिक कल्याण भी कम हो जाता है। 

3. जीवन स्तर का सूचक - राष्ट्रीय आय के समंकों की सहायता - से देश के जीवन स्तर के बारे में मालूम किया जा सकता है। जिस देश की प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय अधिक होती है, वहाँ के नागरिकों का जीवन स्तर प्रायः उतना ही ऊँचा होता है।

4. तुलनात्मक अध्ययन में सहायक - राष्ट्रीय आय के समंकों की सहायता से विभिन्न देशों की आर्थिक अवस्था की तुलना की जा सकती है। प्रति व्यक्ति आय के आधार पर विभिन्न देशों की आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। 

राष्ट्रीय आय तथा प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर न केवल दो देशों की आर्थिक स्थिति की तुलना की जा सकती है, बल्कि एक ही देश में विभिन्न क्षेत्रों में हो रही आर्थिक प्रगति का भी तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है।

5. आर्थिक विकास का सूचक - प्रत्येक देश की राष्ट्रीय आय उसकी आर्थिक स्थिति का सूचक होती है। सामान्यता, जिन देशों की राष्ट्रीय आय अधिक होती है, वह आर्थिक दृष्टि से विकसित माने जाते हैं तथा इसके विपरीत जिन देशों की राष्ट्रीय आय कम होती है, वह आर्थिक रूप से पिछड़े माने जाते हैं।

6. आर्थिक नीति के निर्माण में सहायक - राष्ट्रीय आय के समंक प्रत्येक देश की आर्थिक नीति के निर्माण में भी सहायक होते हैं। इन समंकों से सरकार को रोजगार, साख, बचत तथा विनियोग संबंधी मामलों में आर्थिक नीति बनाने में सहायता मिलती है।

7. आय के समुचित वितरण की जानकारी - राष्ट्रीय आय के समंकों की सहायता से इस बात का पता लगाया जाता है कि राष्ट्रीय आय का आय के विभिन्न रूपों, जैसे- मजदूरी, लगान, ब्याज, लाभ में किस प्रकार वितरण हुआ है। अतः सरकार इस वितरण की जानकारी के आधार पर सामाजिक न्याय के लिए उचित नीतियाँ बना सकती हैं।