राष्ट्रीय आय लेखांकन की विधि - rashtriya aay lekhankan ki vidhi

 राष्ट्रीय आय लेखांकन की विधि  

राष्ट्रीय आय लेखांकन की दृष्टि से सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को निम्नांकित चार भागों में बाँटा जाता है - 

1. उत्पादन क्षेत्र - उत्पादन क्षेत्र किसी भी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में उन सभी व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मिलित किया जाता है, जो कि उत्पादन की क्रियाओं में संलग्न होते हैं। इस क्षेत्र में सभी निजी फर्मों, एकाकी व्यापार, साझेदारी फर्मों को सम्मिलित किया जाता है। इस प्रकार उत्पादन क्षेत्र का प्रमुख कार्य उत्पादन करना है।

2. उपभोक्ता क्षेत्र - उपभोक्ता क्षेत्र को गृहस्थ एवं परिवार क्षेत्र भी कहा जाता है। इसके अन्तर्गत उन व्यक्तियों को सम्मिलित किया जाता है जो कि उपभोक्ता होने के साथ सेवाओं के पूर्तिकर्ता भी हैं। दोनों क्षेत्रों के बीच संस्थागत अन्तर नहीं होता, बल्कि फलनात्मक अन्तर होता है। 

फलनात्मक अन्तर का आशय यह है कि आर्थिक क्रियाओं के अनुसार उत्पादन क्षेत्र तथा परिवार क्षेत्र में अन्तर होता है, जबकि उत्पादन क्षेत्र साधन-सेवाएँ प्रदान करता है और दूसरी स्थिति में उपभोक्ता होता है। यह सामान्य अनुभव की बात है कि प्रत्येक उत्पादक निश्चित रूप से उपभोक्ता भी होता है। इसी प्रकार अधिकांश उपभोक्ता उत्पादक होते हैं।

3. सरकारी क्षेत्र - सरकारी क्षेत्र में सरकार की समस्त क्रियाओं को सम्मिलित किया जाता है अर्थात् इसमें सरकार की आय व व्यय क्रियाओं का अध्ययन होता है। इस क्षेत्र में सरकार की दोहरी भूमिका होती है, एक ओर सरकार उत्पादक की भूमिका अदा करती है। जैसे अस्पताल, बाँधों, सड़क, रेलमार्ग आदि का निर्माण, तो दूसरी ओर, सरकार उपभोक्ता के रूप में उत्पादन क्षेत्र से वस्तुओं व सेवाओं का क्रय करती है। जिसका उपभोग अर्थव्यवस्था में सामूहिक रूप से किया जाता है। 

4. विदेशी क्षेत्र - प्रत्येक अर्थव्यवस्था में कुछ फर्मों अथवा उद्योग ऐसे होते हैं जो विदेशों के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं को उत्पन्न करते हैं और उन्हें विदेशों में निर्यात कर देते हैं। इसी प्रकार विदेशों से कुछ वस्तुओं का आयात भी किया जाता है। इस प्रकार के आयात-निर्यात में शामिल सौदों को विदेशी क्षेत्र के अन्तर्गत रखा जाता है। 

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