राष्ट्रीय आय एवं राष्ट्रीय पूँजी में अन्तर - rashtriya aay tatha rashtriya punji mein antar

Post Date : 04 August 2022

राष्ट्रीय आय एवं राष्ट्रीय पूँजी में अन्तर

राष्ट्रीय आय एवं राष्ट्रीय पूँजी में प्रमुख अन्तर निम्नांकित हैं -

राष्ट्रीय आय राष्ट्रीय पूँजी
राष्ट्रीय आय एक समयावधि, जैसे - एक वर्ष की होती है। अत: यह एक प्रवाह होती है।

राष्ट्रीय पूँजी किसी समय-विशेष पर होती है।अतः यह एक स्टॉक है।

राष्ट्रीय आय में सेवाएँ शामिल होती हैं। राष्ट्रीय पूँजी में सेवाएँ शामिल नहीं होती हैं। 
राष्ट्रीय आय में पूँजीगत तथा उपभोग दोनों वस्तुएँ शामिल होती हैं। राष्ट्रीय पूँजी में केवल पूँजीगत वस्तुओं को शामिल किया जाता है।
राष्ट्रीय आय, राष्ट्रीय पूँजी को प्रभावित करती है। राष्ट्रीय पूँजी, राष्ट्रीय आय का कारण होती है।
आर्थिक क्रियाएँ राष्ट्रीय आय को प्रभावित करती हैं।

एक निश्चित समय में राष्ट्रीय पूँजी स्थिर होती है।

राष्ट्रीय आय

राष्ट्रीय आय का अर्थ है एक वित्तीय वर्ष के दौरान किसी देश द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य से होता हैं। इस प्रकार, यह एक वर्ष की अवधि के दौरान किसी भी देश की सभी आर्थिक गतिविधियों का शुद्ध परिणाम है और पैसे के संदर्भ में इसका मूल्यांकन किया जाता है। राष्ट्रीय आय एक अनिश्चित शब्द है और इसे अक्सर राष्ट्रीय लाभांश, राष्ट्रीय उत्पादन और राष्ट्रीय व्यय के साथ परस्पर उपयोग किया जाता है।

परिभाषा - राष्ट्रीय आय एक वर्ष में किसी देश को आर्थिक गतिविधियों से होने वाली आय की कुल राशि है। इसमें मजदूरी, ब्याज, किराए और मुनाफे के रूप में सभी संसाधनों के लिए किए गए भुगतान शामिल हैं। किसी देश की प्रगति देश की राष्ट्रीय आय की वृद्धि से निर्धारित की जा सकती है।

राष्ट्रीय पूंजी धन की योग को संदर्भित करती है प्राकृतिक, मानवीय, और सामाजिक धन देश की संपत्ति होती हैं। इसे ही राष्ट्रीय पूंजी कहा जाता है। 

राष्ट्रीय पूंजी

राष्ट्रीय पूंजी में प्राकृतिक, मानवीय और सामाजिक करक राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। आर्थिक रूप से समृद्ध होने के लिए एक देश के पास राष्ट्रीय पूंजी का होना आवश्यक है। अमीर देशों के राष्ट्रीय पूंजी में ज्यादातर अमूर्त पूंजी शामिल होती है, जैसे कि मानव और सामाजिक लाभ आदि, जबकि प्राकृतिक पूंजी का अनुपात कम होता है।

राष्ट्रीय पूंजी के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं - 

1. प्राकृतिक - भूमि, खनिज और ऊर्जा संसाधन, भूजल संसाधन, पारिस्थितिक तंत्र, पेड़ और अन्य गैर-खेती वाले पौधे, और जानवर आदि। 

2. मानव - शिक्षित और स्वस्थ कार्यबल।

3. सामाजिक - कार्यशील सामाजिक नेटवर्क और संस्थान।

4. उत्पादित -मशीनरी, भवन, दूरसंचार और अन्य बुनियादी ढांचे के प्रकार।

5. वित्तीय - स्टॉक, बांड और मुद्रा भंडार।