मानचित्र किसे कहते है?

मानचित्र भूगोल का प्राण है उसे जीवंत तथा मूर्त स्वरूप प्रदान करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। अतः हम कह सकते हैं कि मानचित्र भूगोल वेता का उपकरण है भूगोल विषय का गहन अध्ययन मानचित्र के बिना असंभव है। 

पाठ्यक्रम में प्रस्तुत विषय सामग्री को अच्छी तरह समझने एवं किसी क्षेत्र विशेष की विभिन्न स्थलाकृतियों व आर्थिक, सामाजिक तथा राजनैतिक प्रणालियों का सही ज्ञान प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को मानचित्रों और एटलस का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर अभ्यास करना चाहिए।

मानचित्र किसे कहते है

मानचित्र एक प्रतीकात्मक चित्रण है जो किसी स्थान और वस्तुओं का विवरण प्रदान करता है। मानचित्र कागज या किसी माध्यम पर बनाया जा सकता हैं। मानचित्र का उपयोग भूगोल में किसी स्थान को चित्रित करने के लिए किया जाता है।

सबसे पहले ज्ञात मानचित्र, आकाश का बनाया गया था। लेकिन क्षेत्र के भौगोलिक मानचित्रों की एक बहुत लंबी परंपरा है। मानचित्र शब्द मध्यकालीन लैटिन से आया है। इस प्रकार मानचित्र दुनिया की सतह के द्वि-आयामी प्रतिनिधित्व करता है।

मानचित्र में भौतिक एवं सांस्कृतिक लक्षणों को जिन संकेतों की सहायता से प्रकट किया जाता है उन्हें रूढ़ चिन्ह या परम्परागत चिन्ह कहा जाता है। इन चिन्हों का निर्धारण अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है।

अतः सभी देशों में इन्हीं चिन्हों का मानचित्र में प्रयोग किया जाता है। रूढ़ चिन्हों व संकेतों के प्रयोग से मानचित्रों में अधिक विवरण प्रदर्शित किए जा सकते हैं मानचित्र अंकन के द्वारा विद्यार्थियों में कलात्मक रचनात्मक प्रकृति का विकास होता है।

मानचित्र पठन एवं अंकन

मानचित्र में अंकन करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।

1. मानचित्र स्वच्छ सुन्दर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए ।

2. मानचित्रों में नगरों को काले बिन्दु से प्रदर्शित करना चाहिए तथा संबंधित नगर या केन्द्र का नाम लिखना चाहिए।

3. सड़क मार्ग को लाल रंग से रेलमार्ग को काले रंग से, नदी को नीले रंग से, पर्वत को कत्थई रंस से प्रदर्शित करना चाहिए।

4. वनस्पति जलवायु तथा मरूस्थल आदि को प्रदर्शित करने के लिए चिन्हों का प्रयोग करना चाहिए।

5. खाड़ी, झील, नहर, द्वीप, नदी, पर्वत, नगर आदि अंकित करते समय उनका नाम अवश्य लिखना चाहिए।

6. मानवीय बस्तियों को लाल रंग से, जलीय भाग को नीले रंग, स्थान कृतियों को बादामी रंग से, कृषि क्षेत्र को पीले रंग, प्राकृतिक वनस्पति को हरे रंग तथा हिम भागों को श्वेत रंग से प्रदर्शित करना चाहिए।

7. यदि प्रश्न पत्र में संकेत के संबंध में कोई दिशा निर्देश नहीं दिए गए हो तो मानचित्र में परम्परागत यह रूढ़ चिन्हों का ही प्रयोग करना चाहिए।

8. मानचित्र में अंकित किए गए भौगोलिक तथ्यों एवं सूचनाओं की सूची मानचित्र में नीचे दाई या बाई ओर सुविधानुसार बना देनी चाहिए।

9. मानचित्र पर प्रदर्शित भौगोलिक तथ्यों की स्थिति सुस्पष्ट एवं निर्धारित स्थान पर ही होनी चाहिए लेखन स्पष्ट तथा अक्षरों की मोटाई मानचित्र के आकार और मापक के अनुसार होना चाहिए। आवश्यकतानुसार अक्षरों का आकार घटा या बढा लेना चाहिए।

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