भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना कब हुई - when was british rule established in india

भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना कब हुई

भारत पर अंग्रेजों की विजय सन् 1707 में मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य का पतन हुआ। अतिम मुगल बादशाह मुहम्मद शाह को परास्त करके नादिर शाह ने मुगलों की रही सही रीढ़ भी तोड़ दी। 15वीं शताब्दी में टामस रो नामक अँग्रेज अधिकारी ने मुगल शासक जहाँगीर से व्यापार की अनुमति प्राप्त की थी। सन् 1600 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई। छोटे-छोटे देशी राजाओं के आपसी कलह के कारण भारत का राजनैतिक ढाँचा डगमगाने लगा था। 

जिसका लाभ पाश्चात्य देशों ने उठाया। सर्वप्रथम पुर्तगाली एक हाथ में तलवार और एक हाथ में क्रॉस लेकर भारत आए । भोल-भाले राजाओं की स्थिति भाँप कर क्रॉस जमीन पर रख दिया, और व्यापार बढाने तथा सैन्यीकरण करने में लग गए। फिर क्रमशः हॉलैण्ड के डच, फ्रॉसीसी और अंग्रेज ने भारत में व्यापारिक उपनिवेश बनाए। व्यापारिक एकाधिकार स्थापित करने के उद्देश्य से आंग्ल-फ्रॉसीसी युद्ध (कर्नाटक वार) हुए। अंग्रेजों की जीत रॉबर्ट क्लाइव जैसे दूरदर्शी कूटनीतिज्ञ कुशल सेनापति के कारण हुई। 1757 ई. में प्लासी का युद्ध बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और अँग्रेजों के बीच हुआ। बंगाल पर अंग्रेजों की प्रभुता स्थापित हुई।

1887 का प्रथम सिपाही विद्रोह तक पूरा भारत कंपनी के शासन के नीचे आ गया। 1857 के सैनिक विद्रोह के बाद ब्रिटेन की सरकार ने कंपनी के हाथों से भारत का शासन लेकर स्वयं को भारत का शासक घोषित किया 1857 की क्रांति के परिणाम स्वरूप अंग्रेजी शासन ईस्ट इंडिया कंपनी के स्थान पर सीधे 1857 ई. में ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के अधीन चला गया। महारानी विक्टोरिया ने भारत की साम्राज्ञी की पदवी धारण की जो पहले मुगल सम्राट धारण करते थे।

भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थिति- भारत में व्याप्त कुरीतियाँ, बाल विवाह, विधवा विवाह, सती प्रथा, अस्पृश्यता, बलि प्रथा और अशिक्षा को दूर करने के लिए समाज सुधारक राजाराम मोहन राय, दयानंद सरस्वती, रामकृष्णपरमहंस और स्वामी विवेकानंद आदि ने प्रयास किए। विभिन्न सामाजिक सुधारों के लिए विलियम बैंटिक का योगदान भी महत्वपूर्ण था। अँग्रेजों ने भारतीय बाजारों पर अपना कब्जा किया। यातायात की व्यवस्था, रेल, तार और डाक की व्यवस्था प्रारंभ की। अंग्रेज व्यापारियों को आयात-निर्यात करों से मुक्त कर दिया गया। चाय, काफी और नील की खेती का काम करने वाले मालिकों को अतिरिक्त सुविधाएँ देने की घोषण की। भारतीयों पर अत्याचार अँग्रेजों ने प्रारंभ किया। जनमत पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से प्रेस कानून बना

दिया गया। भारतीयों को महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर नियुक्त नहीं किया गया। सार्वजनिक जीवन में अंग्रेज भारतीयों से अभद्र व्यवहार करते थे, उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाते थे। इन्हीं कारणों से राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।

भारतीय जनता के आर्थिक शोषण एवं उन पर अत्याचार करने में अंग्रेजों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत के सामाजिक और आर्थिक जीवन में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन आए । भारत को अंग्रेजी साम्राज्य का सबसे चमकदार हीरा कहा जाता था।

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