समुद्र तटीय मैदान का महत्व बताइए - Significance of the seaside plain

भारत के दक्षिणी पठार के पश्चिम एवं पूर्व में संकरे तटीय मैदान है जिनका विस्तार पश्चिम में गुजरात से केरल तक तथा पूर्व में स्वर्ण रेखा नदी से कुमारी अन्तरीप तक है। अरब सागर के तटीय पट्टी को उत्तरी भाग में कोंकण तथा दक्षिण में मलाबार के नाम से जाना जाता है। 

समुद्र तटीय मैदान का महत्व बताइए 

  1. यह मैदान उपजाऊ मिटटी से बने हैं जिससे यहाँ धान की सघन खेती होती है। 
  2. तट के समीप मुंबई टापू के पास खनिज तेलों के विशाल भंडार हैं।
  3. मालाबार तट तथा तमिलनाडू तट मत्स्य उद्योग के महत्वपूर्ण केन्द्र हैं।
  4. तटवर्ती प्रदेश में सागर के जल से नमक बनाया जाता है।
  5. केरल के तट पर मोनोजाइट खनिज प्राप्त होता है।
  6. समुद्र तट पर्यटन एवं स्वास्थ्यवर्धक केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है।

तटीय मैदान को कितने भागों में बांटा गया है 

समुद्र तटीय मैदान को दो भागों में विभाजित किया गया है। पूर्वी तटीय मैदान और पश्चिमी तटीय मैदान। जिसकी जानकारी निम्नलिखित हैं -

1. पूर्वी तटीय मैदान

यह मैदान पूर्वीघाट बंगाल की खाड़ी के मध्य उत्तर में स्वर्ण रेखा नदी के दक्षिण में कुमारी अन्तरीप तक फैला हुआ है। इस क्षेत्र में महानदी, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी नदियों की ऊपरी घाटियाँ और उपजाऊ डेल्टाई प्रदेश शामिल है। इसके सम्पूर्ण तट को कारोमण्डल कहते हैं। 

गोलकुण्डा तथा दक्षिणी भाग को कर्नाटक या कोरोमण्डल कहते हैं पूर्वी तटीय मैदान को तीन उप विभागों में बाँटा गया है - 1. उत्कल का मैदान, 2. आन्ध्र का मैदान, 3. तमिलनाडू का मैदान।

2. पश्चिमी तटीय मैदान

यह अरब सागर के तट एवं पश्चिमी घाट के मध्य कच्छ की खाड़ी से कुमारी अन्तरीप तक विस्तृत है जिनकी चौड़ाई 64 कि.मी. है इस मैदान को निम्नलिखित भागों में विभक्त किया गया है

1. कच्छ का मैदान - यह शुष्क व अर्द्धशुष्क नमकीन रेतीला मैदान है जो वर्षा ऋतु में बाढ़ युक्त तथा दलदली हो जाता है इसके मध्य में गिरनार की पहाड़ियाँ हैं।

2. गुजरात का मैदान - यह कच्छ तथा गुजरात के आन्तरिक मैदान तथा खम्भात की खाड़ी में फैला हुआ है, जहाँ पर माही, साबरमती, नर्मदा और ताप्ती नदियाँ मुहाना बनाती है।

3. कॉकण का मैदान - यह दमन से गोआ तक 500 किमी लंबा है और 50 किमी से 80 किमी चौड़ा मैदान है।

4. मलाबार तटीय मैदान - यह मंगलौर से गोआ तक 225 किमी लंबा मैदान है।

5. केरल का तटीय मैदान - यह मगलौर से कुमारी अन्तदीप तक 500 किमी लंबा तटीय मैदान है जिसके पश्चिमी तट पर प्राकृतिक पोताश्रय है।

समुद्र तटीय द्वीप समूह

भारत द्वीपों का देश है जहाँ कुल 2,470 द्वीप हैं जिसमें 204 द्वीप बंगाल की खाड़ी में 43 द्वीप प्रवाल निर्मित है। बंगाल की खाड़ी के मुख्य द्वीप गंगासागर, न्यूमरे द्वीप, श्री हरिकोटा, अण्डमान निकोबार द्वीप समूह आदि प्रमुख हैं।

अरब सागर में केरल तट के पश्चिम में कई छोटे-छोटे द्वीप हैं जिनका निर्माण अल्पजीवी सूक्ष्म प्रवाल के सतत और शांत प्रयत्नों से हुआ है। इन द्वीपों की आकृति घोड़े की नाल अथवा अँगूठी के समान है।

इसलिए इन्हें एटाल या प्रवालद्वीप वलय कहते हैं। अरब सागर के प्रमुख द्वीप ऐलीफेन्टा द्वीप एवं भारत के दक्षिण पश्चिमी तट से 200 किमी से 320 किमी की दूरी तक फैले लक्ष्यद्वीप, मिनीकाय और अमनद्वीप है। 

उपरोक्त वर्णित भारत के भू-आकृतिक विभाग एक-दूसरे के पूरक हैं प्रायद्वीप भू-खंड हैं जिनकी सामग्री से उत्तरी मैदान तथा हिमालय का निर्माण हुआ जो इस उपमहाद्वीप को हजारों किलोमीटर की दूरी घेरे हुए है। 

उत्तर की विशाल पर्वत श्रृंखला के कारण भारतीय उपमहाद्वीप एशिया के शेष भागों में अलग-सा रहा है इसी पृथकता ने देश की एकरूपता को सुदृढ़ बनाने में सहायता प्रदान की। इसलिए भारत विश्व के राष्ट्रों में अपना अलग एक विशिष्ट महत्व रखता है। इसकी प्राकृतिक विविधता ही इसे विशिष्टता प्रदान करती है।

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