नागरिक अधिकार किसे कहते हैं -what are civil rights

नागरिक अधिकार का अर्थ राज्य द्वारा मान्य नागरिक स्वतंत्राओं का नाम है। ये अधिकार वह शक्ति जिनको राज्य मानता है व जिनकी प्राप्ति के बिना व्यक्ति अपना सम्पूर्ण विकास नहीं कर सकता। 

परिभाषा 

प्रो. बार्कर के अनुसार- अधिकार कुछ कार्यों को रोकने की स्वतंत्रता का दूसरा नाम है। यह स्वतंत्रता कानून से प्राप्त होती है।

हालैंड के अनुसार - एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे व्यक्ति के कार्यों को समाज के मत द्वारा प्रभावित करने की क्षमता को अधिकार कहते हैं।

वाइल्ड के अनुसार - कुछ विशेष कार्यों को करने के लिए स्वतंत्रता की विवेकपूर्ण माँग का नाम अधिकार है।

अधिकारों का प्रकार

अधिकारों का निश्चित वर्गीकरण करना कठिन है क्योंकि उनकी प्रकृति परिवर्तनशील होती है। अध्ययन दृष्टि से अधिकारों को निम्न वर्गों में विभाजित किया जा सकता है।

1. प्राकृतिक अधिकार, 2. नैतिक अधिकार, 3 कानूनी अधिकार।

1. प्राकृतिक अधिकार - ये वे अधिकार हैं जो प्रकृति द्वारा व्यक्ति को प्रदान किए गए हैं। अर्थात् जन्म के साथ ही व्यक्ति को प्राप्त हो जाते हैं। जैसे जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार व सम्पत्ति का अधिकार।

2. नैतिक अधिकार - ये वे अधिकार हैं जो समाज के नैतिकता पर आधारित होते हैं। इनका संबंध नैतिक आचरण से होता है। जैसे- बच्चों से सेवा करवाना माँ - बाप का अधिकार है व बच्चों का कर्त्तव्य है। 

3. कानूनी अधिकार - राज्य द्वारा प्रदान किए जाने वाले कानूनी अधिकार हैं। इन्हें तीन भागों में विभाजित किया गया है- 1. सामाजिक अधिकार, 2. राजनैतिक अधिकार, 3. मौलिक अधिकार। 

(1) सामाजिक अधिकार 

नागरिकों को सुखपूर्वक जीवन बिताने के लिए आवश्यक होते हैं तथा सामाजिक विकास की माँग करते हैं। इन्हें समाज व शासन की मान्यता प्राप्त होती है। इन्हें चार भागों में बाँटा जा सकता है।

1. नागरिक अधिकर, 2. आर्थिक अधिकार, 3. धार्मिक अधिकार, 4. सांस्कृतिक अधिकार।

1. नागरिक अधिकार 

  • जीवन का अधिकार - यह व्यक्ति का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अधिकार है। इसका अभिप्राय है कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने का अधिकार है और राज्य इस बात की व्यवस्था करेगा कि कोई अन्य व्यक्ति या राज्य व्यक्ति के जीवन का अंत न कर सके। अतः व्यक्ति को आत्महत्या का अधिकार नहीं है।
  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार - इस अधिकार के अंतर्गत व्यक्ति को देश में कहीं भी आने-जाने, घूमने-फिरने व निवास की स्वतंत्रता है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सबसे बड़ा प्रतिपादक जे. एस. मिल के शब्दों में - स्वयं अपने ऊपर अपने शरीर, मस्तिष्क और आत्मा पर व्यक्ति संप्रभु होता है।
  • न्याय पाने का अधिकार - यदि किसी पर अन्याय होता है तो राज्य उसे न्याय प्रदान करने की गारंटी देता है।
  • आत्म सम्मान की रक्षा का अधिकार - राज्य प्रत्येक  नागरिक को यह अधिकार देता है कि यदि कोई उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाता हो तो राज्य उन व्यक्तियों को दंड दे सकता है।
  • समुदाय बनाने का अधिकार - प्रत्येक नागरिक को संघ व समुदाय बनाने का अधिकार है। 
  • सभा करने का अधिकार - प्रत्येक नागरिक को अपनी कठिनाइयों और समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए सभा करने का अधिकार है। इस अधिकार के अंतर्गत वह अपने विचार, भाषण या प्रेसा के माध्यम से अभिव्यक्त कर सकता है।
  • विचार अभिव्यक्त करने का अधिकार - प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार विचार रखने और भाषण लेख आदि के माध्यम से विचार अभिव्यक्त की स्वतंत्रता होती है।
  • धर्म स्वतंत्रता का अधिकार - इस अधिकार के अंतर्गत व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने, प्रचार करने व धार्मिक विचार अपनाने की स्वतंत्रता है।

2. आर्थिक अधिकार

ये अधिकार नागरिकों के आर्थिक विकास के लिए दिए जाते हैं। इसके अंतर्गत निम्न अधिकार होते हैं।

  • आजीविका का अधिकार - प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छानुसार व्यवसाय चुनने या आजीविका के लिए स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करने का अधिकार है।
  • काम करने का अधिकार - इसके अंतर्गत व्यक्ति राज्य से काम की माँग कर सकता है यदि राज्य उसे काम नहीं दे सकता तो गुजारा भत्ता देगा।
  • न्यूनतम मजदूरी का अधिकार - प्रत्येक राज्य अपने नागरिकों को काम के बदले उचित मजदूरी देगी तथा उससे बेगार नहीं लेगा।
  • अवकाश का अधिकार - एक निश्चित अवधि तक काम करने के पश्चात् व्यक्ति को अवकाश प्राप्त करने का अधिकार है। अतः सरकार काम के घंटे व काम की दशाओं में सुधार एवं अवकाश की व्यवस्था करेगी। 
  • आर्थिक सुरक्षा का अधिकार - इसके अंतर्गत नागरिकों को वृद्धावस्था में बीमारी या अंगहीन होने के स्थिति में राज्य से आर्थिक सहायता प्राप्ति का अधिकार होगा।

3. धार्मिक अधिकार 

भारत एक धर्म निरपेक्ष राज्य है और प्रत्येक व्यक्ति को ईच्छानुसार धर्म पालन का अधिकार है। धार्मिक अधिकारों के अंतर्गत निम्नलिखित अधिकार आते हैं

  • धार्मिक विश्वास का अधिकार - प्रत्येक व्यक्ति अपनी इच्छानुसार किसी भी धर्म का पालन कर सकता है। राज्य इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।
  • धर्म के प्रचार-प्रसार का अधिकार - प्रत्येक धर्मावलम्बी को अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने तथा धार्मिक सम्मेलन करने का अधिकार है।

4. सांस्कृतिक अधिकार

प्रत्येक नागरिक को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। इस हेतु वह सांस्कृतिक संस्थाएँ स्थापित कर उसका प्रचार कर सकता है। पुस्तकालय, वाचनालय, अजायब घर, प्रयोगशालाएँ, अन्वेषण केन्द्रों तथा कला केन्द्रों की व्यवस्था कर सकता है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ मनोरंजन प्राप्त करने का भी अधिकार है।

(2) राजनैतिक अधिकार 

राजनैतिक अधिकार से आशय है कि जिनमें व्यक्ति अपने देश के शासन में भागीदारी कर सकता है। इसके अंतर्गत निम्न अधिकार होते हैं-

1. मतदान का अधिकार - प्रत्येक वयस्क नागरिक को स्वतंत्र मतदान करने का अधिकार है।

2. चुनाव लड़ने का अधिकार - प्रत्येक भारतीय नागरिक को जो 25 वर्ष का हो संसद, विधानसभा तथा स्थानीय निकाय का बिना भेदभाव के चुनाव लड़ने का अधिकार है।

3. सरकारी पद पाने का अधिकार - प्रत्येक योग्य व्यक्ति को सरकारी या सार्वजनिक पद बिना किसी भेदभाव के प्राप्त करने का अधिकार है।

4. प्रार्थना पत्र भेजने का अधिकार - नागरिक को किसी भी मामले में सरकार को प्रार्थना पत्र भेजने व अपनी माँग रखने हेतु आवेदन करने का अधिकार है।

5. राजनैतिक संगठन बनाने का अधिकार - प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार राजनैतिक संगठन बनाने का अधिकार है क्योंकि बिना दल के लोकतंत्र नहीं चल सकता।

6. सरकार की आलोचना करने का अधिकार - सभी नागरिकों को संसदीय भाषा का प्रयोग करते हुए शासन व सरकार की आलोचना करने का अधिकार है।

(3) मौलिक अधिकार 

नागरिकों के मूलभूत अधिकार मौलिक अधिकार कहलाते हैं। इन्हें संवैधानिक संरक्षण प्राप्त होता है। ये छः प्रकार के है

1. समानता का अधिकार, 
2. स्वतंत्रता का अधिकार, 
3. शोषण के खिलाफ अधिकार, 
4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, 
5. सांस्कृतिक व शिक्षा का अधिकार, 
6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
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