छत्तीसगढ़ में अंग्रेजी शासन का प्रारंभ कब हुआ - When did the British rule start in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में अंग्रेजी शासन का आरंभ 1818 ई. में हुआ था। तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध 1818 ई. में मराठों की पराजय हुई और उनकी शक्ति लगभग समाप्त हो गई। इस युद्ध का प्रभाव नागपुर के भोंसले राज्य पर भी पड़ा।

छत्तीसगढ़ में अंग्रेजी शासन का प्रारंभ कब हुआ

26 जून 1818 को अंग्रेजों ने रघुजी द्वितीय के पोते रघुजी तृतीय को उत्तराधिकारी बना कर अप्रत्यक्ष रूप से नागपुर पर अधिकार कर लिया। इस घोषणा से छत्तीसगढ़ राज्य भी अंग्रेजों के अधीन हो गया। क्योंकि यह नागपुर के भोंसले राज्य के तहत आता था।

छत्तीसगढ़ ब्रिटिश शासन के सीधे नियंत्रण में जून 1818 ई. को आया। कैप्टन एडमण्ड छत्तीसगढ़ का प्रथम अधीक्षक नियुक्त किया गया, किन्तु उसका कार्यकाल अल्प अवधि का ही रहा। 1818 में ही एगन्यु को छत्तीसगढ़ का अधीक्षक बनाकर भेजा गया। छत्तीसगढ़ प्रशासन में एगन्यु के द्वारा किए गए प्रमुख कार्य थे।

राजधानी परिवर्तन करना - एगन्यु ने कार्यभार संभालते ही छत्तीसगढ़ की राजधानी रतनपुर से बदलकर रायपुर कर दी। उसका कहना था कि केन्द्र में होने के कारण यह राजधानी बनने के लिए ज्यादा उपयुक्त है। इस तरह रायपुर 1818 ई. में छत्तीसगढ़ की राजधानी एवं ब्रिटिश अधीक्षक का मुख्यालय बना।

प्रशासनिक ढाँचे का पुनर्गठन करना - एगन्यु ने छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढाँचे में भी परिवर्तन किया। उसने 27 परगनों को पुनर्गठित करके आठ परगनों में सीमित कर दिया। इन परगनों में परगना अधिकारी के रूप में आठ कमाविसदार नियुक्त किए गए जो अधीक्षक की देख-रेख में कार्य करते थे। 

किन्तु अपने परगनों में उन्हें शासन की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इन परगनों का पुनर्गठन 1819-20 ई. में किया गया था। आठ परगनों के नाम थे- रायपुर, रतनपुर, धमतरी, राजहरा, बालोद, दुर्ग, धमधा, नवागढ़ थे। जिनमें सबसे बड़ा एवं राजहरा सबसे छोटा परगना था।

एगन्यु ने छत्तीसगढ़ में सैनिक कार्यों हेतु तीन हजार घोडे निश्चित किए, अंतरिम अनियमित सेना का भी गठन किया गया जिसका उत्तरदायित्व रेसीडेस के सैनिक सहायक पर था।

एगन्यु ने सरकारी अभिलेखों को सुरक्षित रखने की नए सिरे से व्यवस्था की। उसने मुद्रा विनिमय के क्षेत्र में विद्यमान विषमताओं को दूर कर उनमें एकरूपता स्थापित करने का प्रयास किया। वस्तुओं के उत्पादन में वृद्धि एवं इनके व्यापार, परिवहन आदि के निश्चित नियमबने। 

1853 ई. में राजा की मृत्यु के पश्चात् तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी ने 1854 ई. में नागपुर राज्य के रेजीडेंड मेन्सन को ब्रिटिश अधिकृत नागपुर राज्य का प्रथम कमिश्नर बना दिया। इस कार्य से छत्तीसगढ़ भी ब्रिटिश साम्राज्य में आ गया। 

छत्तीसगढ़ के अंतिम मराठा जिलेदार गोपालराव ने फरवरी 1884 ई. को ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधि को अपना कार्यभार सौंप दिया। ब्रिटिश सरकार ने छत्तीसगढ़ में 1974 ई. तक चलता रहा।

ब्रिटिश कालीन छत्तीसगढ़ की विशेषताएँ

1. राजस्व व्यवस्था एगन्यु ने राजस्व व्यवस्था को मितव्ययी बनाने का प्रयत्न किया। भूराजस्व निर्धारण के मापदंडों में परिवर्तन कर भूमि उपज के आधार पर करों का निर्धारण किया गया। संपूर्ण क्षेत्र के परगनों में विभक्त कर दिया, कर वसूली के लिए अधिकारी नियुक्त किए गए।

2. न्याय व्यवस्था - छत्तीसगढ़ की न्याय व्यवस्था में भी कई परिवर्तन किए गए। न्याय व्यवस्था में एक रूपता लाकर इसे नियमित करने का प्रयास किया गया। न्याय व्यवस्था को तीन भागों में विभाजित किया गया - दीवानी, फौजदारी तथा पंचायत । न्याय व्यवस्था के दोषों को समाप्त कर अपराधों में कमी करने का प्रयत्न किया गया।

3. सैन्य व्यवस्था - छत्तीसगढ़ के नागपुर प्रांत से दूर होने के कारण यहाँ सदैव विद्रोह की आशंका बनी रहती थी इसलिए छत्तीसगढ़ में सैन्य व्यवस्था कायम की गई। जिसके तहत सेना में 200 घुड़सवार 800 बन्दूकध पारी और 168 पैदल थे। सेना का संपूर्ण भाग रायपुर तथा बिलासपुर में रखा गया। मॉक्सन को प्रादेशिक सेना का कमाण्डर नियुक्त किया गया।

4. पुलिस व्यवस्था - छत्तीसगढ़ की पुलिस व्यवस्था में अधिक परिवर्तन किए बिना ही इसमें आवश्यक सुध् किए गए। अपराधों की गुप्त जाँच की प्रथा आरंभ की। संदेह के आधार पर गिरफ्तारी भी इनकी देन थी। पुलिस विभाग का प्रमुख अधिकारी कमाविशदार को बनाया गया तथा गाँव में गोटिया मुख्य अधिकारी होता था। 

5. सार्वजनिक कल्याण कार्य - 1854-55 ई. में जल सुविधा तथा उसके कल्याण हेतु ब्रिटिश शासन ने छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक कल्याण विभाग की स्थापना की। इस विभाग ने सड़क, पुल, नहर, भवन आदि का निर्माण करवाया एवं कुछ प्रजा हितकारी कार्य भी किए।

6. शिक्षा व्यवस्था - ब्रिटिश शासनकाल में ही छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था पर विशेष कार्य किए गए। अँग्रेजी भाषा को भी शिक्षा का माध्यम बनाया गया। शिक्षा हेतु विद्यालयों की स्थापना की गई, बालिकाओं के लिए अलक से शालाएँ स्थापित की गई।

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