गरीब बुढ़िया की कहानी

नीरपुर गांव में एक बूढी काकी रहती थी। जिसका नाम जमुना था। जमुना का एक बेटा भी था, वीसीजो कुछ काम नही करता था। जमुना उसे हमेशा काम करने के लिए बोलती थी।

जमुना काकी का बेटा शहर में काम करना चाहता था। इसलिये जमुना काकी अपने बेटे को अपने सारे गहने, जेवर दे देती है। वह शहर चला जाता है। उसके जाने के बाद जमुना बिलकुल अकेली हो गई थी। उसके बेटे का न कोई चिट्ठी आया और न पैसे जमुना का घर चलाना भी मुश्किल हो गया था।

एक दिन जमुना काकी एक थैली लेकर घर से बाहर जाती है।काकी को रास्ते में कोई पूछते तो काकी बिना कुछ बोले सीधा उंगली दिखा कर आगे बढ़ती है।

सुगंधा काकी को रोज देर रात तक आते हुए देखती है। और अपने पति को पता लगाने के लिए बोलती है की काकी हरदिन कहां जाती है।

सुगंधा का पति मना कर देता है और सोने के लिए बोलता है। सुबह काकी सुगंधा को एक कटोरी हलवा देती है। सुगंधा हलवा को अपने बेटे को खाने के लिए दे देता है। कुछ समय बाद उसका बेटा उल्टी करने लग जाता है। 

काकी को थैली पकड़े गांव से जाते हुए गौरी देखती है। गौरी सुगंधा को पूछती है काकी रोज कहा जाती है। सुगंधा मुझे नहीं पता बोलती है। गौरी काकी को जादू टोना करने जाती होगी बोलकर अपने घर चली जाती है। 

सुगंधा रात में एक काली परछाई देखती है। जिसे काकी के घर की तरफ जाते हुए देखती है। उसे पता चल जाता है की वह परछाई काकी थी।

काकी के घर अंदर जाते ही गांव के लोग मसाल लिए सुगंधा के पति को आवाज लगाते है। उसे उषा के बेटे को ढूंढने जाने के लिए कहते है। सुगंधा का पति चला जाता है। उषा का बेटा झाड़ियों में मरा हुआ मिलता है।

सुगंधा गांव के लोगो को बोलती है की उषा के बेटे को जमुना काकी ने मारा है। काकी रोज देर रात को आती है। काकी जादू टोना करने जाती होगी और वह अपने बेटे को वापिस लाने के लिए दूसरे के बच्चों की बलि देती होगी।

गांव का मुख्या बैठक बुलाता है। और बैठक में काकी को भी बुलाया जाता है। गांव के मुख्या काकी से सवाल करते है की तुम रोज कहा जाती हो और देर रात को वापिस क्यों आती हो।

गांव के लोग काकी के ऊपर जादू टोना करने और बच्चो की बलि देने का आरोप लगाती है। जब मुख्या काकी को पूछते है तो काकी कोई जवाब नही देती और जाने लगती है।

मुख्या काकी को रोकने का इशारा करता है। गांव के लोग जमुना काकी को रोक लेते है। और उसके थैले को खोलते है जिसमें बिंदी काला रंग का कपड़ा, हार और एक दीया भी था।

काकी से थैला छीनते समय काकी वही गिर जाती है जिसे देख कर कुछ बूढी औरते आती है। मुख्या उन्हे काकी और उन बूढी औरत को पूछते है।

काकी बोलती है की हमें हमारा घर चलाने के लिए काम करना पड़ता है। इस उमर में हम कोई काम नही कर सकते इसलिए बड़े बड़े घर में जब कोई मर जाता है तो वहां हमें रोने के लिए बुलाया जाता है।

जिसके कारण वह हमे पैसे देते है और हम अपना घर चला पाते है। गांव वाले बोलते है की उषा के बेटे को किसने मारा तभी वहां पुलिस आती है और बताते है की उषा के बेटे को एक बैल ने मारा है।

गांव वाले सच्चाई जानकर काकी से माफी मांगते है।और बोलते है की काकी आपको ये काम छुप कर करने की जरुरत नही है गांव वाले आपको कुछ नही बोलेंगे।

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