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है। जब पानी जम जाता है, तो उसके अणु दूर-दूर चले जाते हैं, जिससे बर्फ पानी की तुलना में कम सघन हो जाती है। इसका मतलब यह है कि बर्फ पानी की समान मात्रा से हल्की होगी और इसलिए बर्फ पानी में तैरती रहेगी। पानी 0° सेल्सियस, 32° फ़ारेनहाइट पर जम जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2 तरल -\u003C\/b\u003E पानी गीला और तरल होता है। जल का यही वह रूप है जिससे हम सर्वाधिक परिचित हैं। हम तरल पानी का उपयोग धोने और पीने सहित कई तरीकों से करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E\u0026nbsp;3 गैस- \u003C\/b\u003Eवाष्प के रूप में हमारे चारों ओर की हवा में हमेशा मौजूद रहता है। तुम यह नहीं देख सकते। जब आप पानी उबालते हैं, तो पानी तरल से गैस या जल वाष्प में बदल जाता है। जैसे ही जलवाष्प का कुछ भाग ठंडा होता है, हम इसे एक छोटे बादल के रूप में देखते हैं जिसे भाप कहा जाता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/7330197332922518730\/comments\/default","title":"Post 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वाष्प में बदल जाते है तथा ऊपर उठने लगते है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजल वाष्प को अधिक ऊंचाई पर ठंडे तापमान का सामना करना पड़ता है। जल वाष्प हवा में कणों के चारों ओर छोटी पानी की बूंदों या बर्फ के क्रिस्टल में संघनित हो जाता है, जिससे बादल बनते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eबादल हवा में लटकी लाखों छोटी पानी की बूंदों से बने होते हैं। जब बादल में पानी की बूंदें मिलकर काफी बड़ी हो जाती हैं, तो वे वर्षा के रूप में जमीन पर गिरती हैं। तापमान और वायुमंडलीय स्थितियों के आधार पर पानी बारिश, बर्फ, और ओला के रूप गिरती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयदि सतह पर तापमान शून्य से ऊपर है, तो पानी वर्षा के रूप में गिरती है। वर्षा की बूंदें तब बनती हैं जब छोटी बूंदें टकराती हैं और बादल में विलीन हो जाती हैं। अंततः हवा के प्रतिरोध को पार करने और जमीन पर गिरने के लिए पर्याप्त भारी हो जाती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजल चक्र एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है। जो पृथ्वी पर जल स्रोतों की भरपाई करती है। यह पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने, कृषि कार्य करने और जल संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण 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पाया जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eबजरी ग्रेनाइट, चूना पत्थर और बेसाल्ट सहित विभिन्न प्रकार के चट्टान के टुकड़ों और खनिजों से बनी होती है। बजरी को अलग-अलग आकार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eबजरी का उपयोग सड़कों और पार्किंग स्थलों के लिए किया जाता है। पानी के बहाव को सुविधाजनक बनाने के लिए, नालियों में बजरी का उपयोग किया जा सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eबजरी आमतौर पर विभिन्न रंगों और आकारों के होते है। इसे अक्सर सजावट के लिए चुना जाता है। बजरी एक मूल्यवान और बहुमुखी सामग्री है जो निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/7807160061292867174\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/11\/blog-post_33.html#comment-form","title":"0 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भोजन प्रदान करती हैं। पशुधन की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए चरागाहों की खेती और रखरखाव किया जाता है। ये पशु कृषि और मांस, दूध और अन्य पशु उत्पादों के उत्पादन का एक अभिन्न अंग हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eचरागाहों में आमतौर पर विभिन्न घास की प्रजातियां शामिल होती हैं, जिनमें राईघास, फेस्क्यू और बरमूडा घास, साथ ही तिपतिया घास, अल्फाल्फा और विभिन्न फलियां जैसे चारा पौधे शामिल होते हैं। चरागाह की संरचना जलवायु, मिट्टी के प्रकार और चराए जाने वाले पशुओं की आवश्यकताओं के आधार पर भिन्न हो सकती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eचरागाहों का उपयोग पशुओं को चराने के लिए किया जाता है, और जानवरों में मवेशी, भेड़ और घोड़े शामिल हैं। ये जानवर अपनी आहार संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए चरागाह में मौजूद वनस्पतियों को खाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eबड़े चरागाह को छोटे वर्गों में विभाजित करना और पशुओं को एक हिस्से में चराया जाता है। यह विधि अतिचारण को रोकती है और वनस्पति को पुनः उगने में मदद करती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपशुधन की भलाई और उत्पादकता के लिए चरागाहों में चारे की गुणवत्ता आवश्यक है। किसान और पशुपालक उर्वरक, खरपतवार नियंत्रण और सिंचाई जैसी प्रथाओं के माध्यम से चारे की गुणवत्ता में सुधार के लिए चरागाहों का प्रबंधन कर सकते हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5800869881311056956\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/11\/blog-post_20.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5800869881311056956"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5800869881311056956"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/11\/blog-post_20.html","title":"चारागाह किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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किए जाने वाले दो प्राथमिक निर्देशांकों में से एक है, दूसरा अक्षांश है। देशांतर रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक चलती हैं और इन्हें मेरिडियन के रूप में भी जाना जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eप्राइम मेरिडियन देशांतर मापने के लिए एक रेखा है और इसे 0 डिग्री देशांतर के रूप में नामित किया गया है। सबसे व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त प्रमुख मध्याह्न रेखा ग्रीनविच, इंग्लैंड से होकर गुजरने वाली है, जिसे ग्रीनविच मध्याह्न रेखा या प्राइम मध्याह्न रेखा के रूप में जाना जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदेशांतर को प्रधान मध्याह्न रेखा के पूर्व या पश्चिम में मापा जाता है। प्रधान मध्याह्न रेखा के पूर्व के स्थानों में सकारात्मक देशांतर हैं, जबकि पश्चिम के स्थानों में नकारात्मक देशांतर हैं। अधिकतम पूर्व की ओर देशांतर 180 डिग्री है, और अधिकतम पश्चिम की ओर देशांतर भी 180 डिग्री है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदेशांतर रेखाएं समान दूरी पर होती हैं और उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव पर मिलती हैं। पृथ्वी के चारों ओर 360 डिग्री देशांतर है, जो प्रधान मध्याह्न रेखा के 180 डिग्री पूर्व और 180 डिग्री पश्चिम में विभाजित है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदेशांतर को आमतौर पर डिग्री में मापा जाता है, लेकिन अधिक सटीक स्थान विवरण के लिए इसे मिनटों और सेकंड में भी विभाजित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक देशांतर निर्देशांक को 75 डिग्री 30 मिनट 15 सेकंड पश्चिम के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदेशांतर का समय क्षेत्रों से गहरा संबंध है। चूँकि पृथ्वी 24 घंटों में 360 डिग्री घूमती है, प्रत्येक समय क्षेत्र 15 डिग्री देशांतर को कवर करता है। किसी विशिष्ट स्थान पर समय मानक समय क्षेत्र मेरिडियन के सापेक्ष उसके देशांतर द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदेशांतर, अक्षांश के साथ मिलकर, एक ग्रिड प्रणाली बनाता है जो पृथ्वी की सतह पर सटीक स्थान निर्धारण करता है। यह नेविगेशन, टाइमकीपिंग, कार्टोग्राफी और विभिन्न भौगोलिक और वैज्ञानिक अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो ग्रह पर किसी भी स्थान को सटीक रूप से इंगित करने का साधन प्रदान करता है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/7550391724621320576\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/11\/blog-post_17.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/7550391724621320576"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/7550391724621320576"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/11\/blog-post_17.html","title":"देशांतर किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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किए जाने वाले दो प्राथमिक निर्देशांकों में से एक है, दूसरा देशांतर है। अक्षांश रेखाएँ पूर्व-पश्चिम की ओर चलती हैं और इन्हें समानांतर रेखा भी कहा जाता है, क्योंकि ये भूमध्य रेखा के समानांतर होती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूमध्य रेखा एक काल्पनिक रेखा है जो क्षैतिज रूप से पृथ्वी का चक्कर लगाती है और 0 डिग्री अक्षांश पर स्थित है। यह पृथ्वी को उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी गोलार्ध में विभाजित करता है। भूमध्य रेखा पर स्थित स्थानों का अक्षांश 0 डिग्री होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउत्तरी ध्रुव 90 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर स्थित है, जबकि दक्षिणी ध्रुव 90 डिग्री दक्षिणी अक्षांश पर है। ये अधिकतम अक्षांशीय मान हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअक्षांश रेखाएं भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण में इसके स्थान के संदर्भ में पृथ्वी की सतह पर किसी स्थान की स्थिति का वर्णन करने का एक तरीका हैं। उत्तरी गोलार्ध में सकारात्मक अक्षांश वाले सभी बिंदु शामिल हैं, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में नकारात्मक अक्षांश वाले सभी बिंदु शामिल हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअक्षांश को आमतौर पर डिग्री में मापा जाता है, प्रत्येक डिग्री को 60 मिनट में और प्रत्येक मिनट को 60 सेकंड में विभाजित किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक अक्षांश निर्देशांक को 45 डिग्री 30 मिनट 15 सेकंड के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअक्षांश की रेखाएँ भूमध्य रेखा के समानांतर होती हैं और इन्हें अक्सर अक्षांश के वृत्त कहा जाता है। अक्षांश की प्रत्येक रेखा के बीच की दूरी लगभग समान होती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअक्षांश किसी क्षेत्र की जलवायु के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आम तौर पर, भूमध्य रेखा के करीब के स्थानों में गर्म तापमान का अनुभव होता है क्योंकि उन्हें अधिक सीधी धूप मिलती है, जबकि उच्च अक्षांश वाले स्थानों पर ठंडे तापमान का अनुभव होता है। जहाँ पर सूर्य का प्रकाश कम पहुंचता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअक्षांश, देशांतर के साथ मिलकर, एक ग्रिड प्रणाली बनाता है जो पृथ्वी की सतह पर सटीक स्थान निर्धारण करता है। साथ में, ये निर्देशांक ग्रह पर किसी भी स्थान को इंगित करने का साधन प्रदान करते हैं, नेविगेशन, कार्टोग्राफी और विभिन्न अन्य भौगोलिक और वैज्ञानिक अनुप्रयोगों की सुविधा प्रदान करते हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/413258188688623796\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/11\/blog-post_91.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/413258188688623796"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/413258188688623796"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/11\/blog-post_91.html","title":"अक्षांश किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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का द्रव्यमान संतुलित होता है। मानचित्रण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए समुद्र का स्तर महत्वपूर्ण होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eमीन सी लेवल - मीन सी लेवल एक विशिष्ट अवधि में समुद्र की सतह की ऊंचाई का दीर्घकालिक औसत है, जिसकी गणना आमतौर पर 19 साल के चक्र में की जाती है। यह विभिन्न मापों के लिए एक स्थिर संदर्भ बिंदु प्रदान करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसमुद्र का स्तर स्थिर नहीं है और ज्वार, मौसम की स्थिति, समुद्री धाराओं और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं सहित विभिन्न कारकों के कारण इसमें उतार-चढ़ाव होता है। इन अल्पकालिक बदलावों को ज्वारीय उतार-चढ़ाव के रूप में जाना जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपिछली शताब्दी में, जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने के साथ समुद्री जल में वैश्विक औसत वृद्धि हुई है। यह एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि समुद्र का स्तर बढ़ने से तटीय कटाव, बाढ़ में वृद्धि और अन्य पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसमुद्र के स्तर की निगरानी और समझ विभिन्न वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका तटीय प्रबंधन, नेविगेशन और आपदा तैयारियों पर प्रभाव पड़ता है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5105023269799435205\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/11\/blog-post_25.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5105023269799435205"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5105023269799435205"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/11\/blog-post_25.html","title":"समुद्र तल किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूमि की सतह - यह पृथ्वी की भूमि की स्थलाकृति को संदर्भित करता है, जिसमें पहाड़, घाटियाँ, मैदान और पठार शामिल हैं। भूगोलवेत्ता भूमि की सतह का अध्ययन उसकी ऊंचाई, आकार और प्राकृतिक प्रक्रियाओं और मानवीय गतिविधियों को कैसे प्रभावित करते हैं, यह समझने के लिए करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजल सतह - जल सतहों में महासागर, समुद्र, झीलें, नदियाँ और तालाब जैसे जल निकाय शामिल हैं। भूगोलवेत्ता पानी की सतहों का विश्लेषण उनकी सीमा, मात्रा और विशेषताओं के साथ-साथ जलवायु, पारिस्थितिक तंत्र और मानव बस्तियों पर उनके प्रभाव का अध्ययन करने के लिए करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eवायुमंडलीय सतह - मौसम विज्ञान में, \"सतह\" शब्द अक्सर पृथ्वी की सतह को संदर्भित करता है जहां तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और दबाव सहित मौसम की स्थिति को मापा जाता है। मौसम के मिजाज को समझने और पूर्वानुमान के लिए सतही अवलोकन महत्वपूर्ण हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूगोल में, पृथ्वी की सतह का अध्ययन क्षेत्र का एक मूलभूत पहलू है, क्योंकि इसमें ग्रह के बाहरी हिस्से के भौतिक, पर्यावरणीय और 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उपजाऊ भूमि है जो दो नदियों के बीच स्थित होती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदोआब उन क्षेत्रों में आम है जहां कई नदियाँ एक दूसरे के समानांतर बहती हैं और एक संगम पर मिलती हैं। इस शब्द का प्रयोग अक्सर गंगा-यमुना दोआब के संदर्भ में किया जाता है, जो भारत में सबसे प्रसिद्ध दोआब में से एक है। यह क्षेत्र गंगा और यमुना नदियों के बीच स्थित है और इसमें उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्यों के कुछ हिस्से शामिल हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eनदियों द्वारा जमा की गई उपजाऊ मिट्टी के कारण दोआब अक्सर कृषि के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। वे कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं और ऐतिहासिक रूप से मानव बस्ती और आर्थिक गतिविधि के केंद्र होते हैं। दोआब की अवधारणा भारतीय उपमहाद्वीप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसने कृषि और शहरों के विकास को प्रभावित किया है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/610825852421378255\/comments\/default","title":"Post 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की एक श्रेणी है। यह अन्य प्रकार की भूमि, जैसे शहरी, आवासीय, औद्योगिक या प्राकृतिक भूमि से अलग होती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकृषि भूमि का उपयोग अक्सर विभिन्न प्रकार की फसलें लगाने, उगाने और कटाई के लिए किया जाता है, जैसे अनाज (जैसे, गेहूं, चावल, मक्का), फल, सब्जियां, और नकदी फसलें (जैसे, कपास, सोयाबीन)। कृषि भूमि पर खेती की जाने वाली फसल का प्रकार क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और स्थानीय कृषि पद्धतियों के आधार पर भिन्न हो सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकृषि भूमि का उपयोग पशुधन खेती के लिए भी किया जा सकता है, जिसमें मवेशियों, भेड़, बकरियों को चराना और मुर्गीपालन, डेयरी और मांस उत्पादों का उत्पादन शामिल है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकुछ मामलों में, कृषि भूमि का उपयोग वृक्षारोपण या वानिकी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है, जहां लकड़ी और अन्य वन उत्पादों के उत्पादन के लिए पेड़ उगाए जाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकृषि भूमि ग्रामीण समुदायों को रोजगार, आर्थिक जीविका और खाद्य उत्पादन प्रदान करती है। यह दुनिया भर में कई लोगों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकृषि भूमि खाद्य उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है और वैश्विक आबादी की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, पर्यावरण की रक्षा करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को समर्थन देने के लिए कृषि भूमि का टिकाऊ और जिम्मेदार प्रबंधन आवश्यक है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4530708711868141537\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/11\/blog-post_3.html#comment-form","title":"0 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टेक्टोनिक प्लेट के खिसकने या ज्वालामुखी गतिविधि के माध्यम से होता हैं। पर्वत श्रृंखलाएँ हर महाद्वीप पर पाई जाती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E1. हिमालय: एशिया में स्थित, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/himalaya-in-hindi.html\"\u003Eहिमालय \u003C\/a\u003Eदुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला है और सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का घर है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E2. रॉकी पर्वत: ये पर्वत उत्तरी अमेरिका, मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/Canada.html\"\u003Eकनाडा \u003C\/a\u003Eसे होकर गुजरती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E3. एंडीज़: दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट तक फैली एंडीज़ दुनिया की सबसे लंबी पर्वत श्रृंखला है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E4. आल्प्स: यूरोप में स्थित, आल्प्स एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है जो अपनी सुंदरता के लिए जानी जाती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपर्वत श्रृंखलाएँ पृथ्वी के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह जलवायु, पारिस्थितिकी तंत्र और मानव सभ्यताओं पर प्रभाव डालती हैं। वे अक्सर नदियों के स्रोत के 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वर्षावन या शीतोष्ण वर्षावन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E1. उष्णकटिबंधीय वर्षावन वे वर्षावन हैं जो उष्णकटिबंधीय वर्षावन \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/jalvayu-kise-kahate-hain.html\"\u003Eजलवायु \u003C\/a\u003Eवाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं जिनमें कोई शुष्क मौसम नहीं होता है - सभी महीनों में औसत वर्षा कम से कम 60 मिमी होती है। इसे तराई भूमध्यरेखीय सदाबहार वर्षावन भी कहा जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E2. समशीतोष्ण वर्षावन शंकुधारी या चौड़ी पत्ती वाले वर्षावन को कहा जाता हैं जहाँ भारी वर्षा होती हैं। समशीतोष्ण वर्षावन दुनिया भर के समुद्री नम क्षेत्रों में पाए जाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउत्तरी अमेरिका के प्रशांत क्षेत्र वर्षावन, दक्षिण अमेरिका के वाल्डिवियन समशीतोष्ण वर्षावन, न्यूज़ीलैंड और दक्षिणपूर्वी ऑस्ट्रेलिया के वर्षावन, उत्तर पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी जापान, काला सागर-कैस्पियन सागर क्षेत्र, बल्गेरियाई तट के दक्षिणपूर्वी तटीय क्षेत्र से, तुर्की के माध्यम से, जॉर्जिया और उत्तरी ईरान तक यह वर्षावन पाया जाता हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/8522525715853180100\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_88.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/8522525715853180100"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/8522525715853180100"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_88.html","title":"वर्षावन किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-lithosphere.html\"\u003Eस्थलमण्डल \u003C\/a\u003Eमें कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेट हैं जो लगभग 3.4 बिलियन ईयर से धीरे-धीरे घूम रही हैं। यह मॉडल महाद्वीपीय बहाव (continental drift) की अवधारणा पर आधारित है, यह विचार 20वीं सदी के पहले दशकों के दौरान विकसित हुआ था। 1960 के दशक के मध्य से अंत तक \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/samudra-kise-kahate-hain.html\"\u003Eसमुद्र\u003C\/a\u003E तल के फैलाव को मान्य किए जाने के बाद प्लेट टेक्टोनिक्स को भूवैज्ञानिकों द्वारा स्वीकार किया जाने लगा।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपृथ्वी का स्थलमंडल को भूपर्पटी और मेंटल सहित सात प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित है। प्लेटों की सापेक्ष गति आम तौर पर सालाना शून्य से 10 सेमी तक होती है। टेक्टॉनिक प्लेटों के कारण ही \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/earthquake-in-hindi.html\"\u003Eभूकंप \u003C\/a\u003Eऔर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/jwalamukhi-kya-hai.html\"\u003Eज्वालामुखी \u003C\/a\u003Eजैसे गतिविधि होते हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/3994289317727975962\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_27.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/3994289317727975962"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/3994289317727975962"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_27.html","title":"टेक्टोनिक प्लेट क्या है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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भारत में सर्वोत्तम सागौन की लकड़ी और सर्वोत्तम बांस के जंगलों के लिए प्रसिद्ध है। महान नदियाँ चम्बल और नर्मदा विंध्य से निकलती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइनका निर्माण लाखों वर्षों की भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के संयोजन से हुआ है, जिसमें मुख्य रूप से टेक्टोनिक गतिविधि और कटाव शामिल है। विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाओं का निर्माण तब हुआ जब दक्कन का पठार प्राचीन महाद्वीप गोंडवाना से टकराया था।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1303434692580266118\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_9.html#comment-form","title":"0 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इन जलमार्गों का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच व्यापार, वाणिज्यिक गतिविधियाँ, उपयोगिता और परिवहन की सुविधा प्रदान करना होता है। इन जलमार्गों पर जलयान, जैसे कि जहाज़, नौकाएँ, और बोट आदि, का प्रयोग होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन होते हैं और विभिन्न देशों के बीच सांविदानिक रूप से समझौतों के माध्यम से स्थापित किए जाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउदाहरण के रूप में, गंगा नदी भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग के रूप में जानी जाती है, जो बांगलादेश और भारत के बीच गतिविधि प्रदान करती है और व्यापारिक के लिए महत्वपूर्ण है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/2452650693778327361\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post.html#comment-form","title":"0 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पूर्व में तीस्ता से घिरी है। यह नेपाल और भारत के मध्य स्थित\u0026nbsp; पर्वत हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E1852 तक कंचनजंगा को दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत माना जाता था। लेकिन 1849 में ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा गणना और माप से पता चला कि माउंट एवरेस्ट विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत हैं। सभी गणनाओं के और सत्यापन के बाद, 1856 में आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई कि कंचनजंगा तीसरा सबसे ऊंचा पर्वत है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकंचनजंगा को सिक्किम राज्य के लोगों द्वारा एक पवित्र पर्वत माना जाता है। 2016 में पर्वत के निकट स्थित कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकंचनजंगा का हिमखंड नेपाल और भारत दोनों देशो में स्थित है और इसमें 7,000 मीटर से अधिक 16 चोटियाँ शामिल हैं। कंचनजंगा माउंट एवरेस्ट से लगभग 125 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है। कंचनजंगा के दक्षिणी भाग में सिंगलिला पर्वत है। जो सिक्किम और नेपाल को अलग करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकंचनजंगा ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन का सबसे ऊँचा स्रोत है, जो विश्व स्तर पर सबसे बड़ी नदी बेसिनों में से एक है। कंचनजंगा पर्वत में 8,000 मीटर से ऊंची छह चोटियां है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/2766811125516375047\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/08\/blog-post_59.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/2766811125516375047"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/2766811125516375047"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/08\/blog-post_59.html","title":"कंचनजंघा कहा है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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मीटर है।\u0026nbsp;माउंट एवरेस्ट कई पर्वतारोहियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eमाउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पहले व्यक्ति एडमंड हिलेरी थे। जिन्होंने 29 मई 1953 को नेपाल के पर्वतारोही शेरपा तेनजिंग नॉर्गे के साथ मांउट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त की थी।\u0026nbsp;इस पर्वत पर चढ़ने के दो रस्ते हैं। एक नेपाल में दक्षिण-पूर्व\u0026nbsp; और दूसरा तिब्बत में उत्तर से।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/351463353883419806\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/08\/blog-post_22.html#comment-form","title":"0 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जिन्हें वलन कहा जाता है। वलन आमतौर पर उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहां \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_27.html\"\u003Eटेक्टोनिक प्लेटें\u003C\/a\u003E एक-दूसरे से मिलती हैं या एक-दूसरे से आगे खिसकती हैं। वलन दो प्रकार के होते हैं - एंटीकलाइन और सिंकलाइन।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1382643913632832820\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/08\/blog-post.html#comment-form","title":"0 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href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/chattan-kise-kahate-hain.html\"\u003Eचट्टान\u003C\/a\u003E नीचे की ओर\n  गिरने लगती है। भूस्खलन प्राकृतिक और मानव निर्मित हो सकता है। यह अधिकतर पहाड़ी\n  क्षेत्रों में बारिश के मौसम में अधिक देखा जाता हैं। भारत का लगभग 12% क्षेत्र\n  भूस्खलन से प्रभावित है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  उत्तराखंड में सबसे अधिक भूस्खलन होता है। पिछले दो दशकों में इस राज्य में\n  11,000 से अधिक भूस्खलन हुए हैं। भूस्खलन के कई कारण होते है। जिसकी जानकारी नीचे\n  दी गयी हैं।\n\u003C\/p\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEgkJ1fQLdHHOo2MDsTIkSMLqBYLMedMBWmegunCXqZ3LiNiSDd7IdAUoa795jTFvB_aRcGaUSdaaPlEULwGu1AbqcoLjO_5rY9LRJgqrFd96MSAIZmK3s6NiyWjOF6QlbqX_lfyXscgDdqkOmYPoQsFMJqtPL1PxOg17Uxec9zIHHwRu0SzkqwyxfPRdSiw\/s600\/20230727_202827.webp\"\u003E\u003Cimg alt=\"भूस्खलन किसे कहते हैं?\" border=\"0\" data-original-height=\"393\" data-original-width=\"600\" 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निर्माण, वनों की कटाई और खनन जैसी मानवीय\n  गतिविधियाँ ढलानों को कमजोर कर देती हैं। जिससे भूस्खलन हो सकता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E4. ढाल की अस्थिरता -\u003C\/b\u003E कमजोर खड़ी ढलानों पर\n  भूस्खलन का खतरा अधिक होता है। भूगर्भीय कारक जैसे कि मिट्टी या चट्टान का\n  प्रकार, ढलान का कोण और पानी की मात्रा ढलान की अस्थिरता में योगदान कर सकते हैं।\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/7225789949593145890\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/05\/blog-post_50.html#comment-form","title":"0 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सागर कहां पर स्थित है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eलाल सागर अफ्रीका और एशिया में अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित है। यह हिंद महासागर का एक प्रमुख समुद्री क्षेत्र है। पश्चिम में लाल सागर मिस्र और सूडान से घिरा है। जबकि पूर्वी हिस्से में इसकी सीमा सऊदी अरब और यमन से लगती है। लाल सागर बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के माध्यम से दक्षिण में अदन की खाड़ी से जुड़ा हुआ है।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEjPL2riJqtNn9atNkWBBI5X0QF_JbPGSJmHsN6ndP0D9DT9kpyuxaFxMhOqzPP3RFCVKLHHaOZg5UCG6LCaDOkd931Gz_IiEFTmDmmN7FLo872BSDWvd5SOVj8ivdIg6GATBjdXJ8F3TKowkHV9Sl-exly29HvhQ3f2kZb1N1y1Jsdm2bgkqLGVxXBcK4JR\/s600\/20230727_204407.png\" style=\"text-align: center;\"\u003E\u003Cimg alt=\"लाल सागर कहां पर स्थित है?\" border=\"0\" data-original-height=\"393\" data-original-width=\"600\" height=\"210\" 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है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/6903589305774174757\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/05\/blog-post_1.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/6903589305774174757"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/6903589305774174757"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/05\/blog-post_1.html","title":"लाल सागर कहां पर स्थित है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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सागर कहां है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eभूमध्य सागर दक्षिणी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के बीच स्थित है। यह कई देशों और क्षेत्रों से घिरा हुआ है। समुद्र अपने विविध समुद्री जीवन, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व और पर्यटन स्थल के रूप में अपनी लोकप्रियता के लिए जाना जाता है। भूमध्य सागर के आसपास के क्षेत्र को अक्सर भूमध्यसागरीय बेसिन के रूप में जाना जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूमध्य सागर के उत्तर में आपको दक्षिणी यूरोप मिलेगा। इस क्षेत्र में समुद्र की सीमा वाले देशों में स्पेन, फ्रांस, मोनाको, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/07\/blog-post.html\"\u003Eइटली\u003C\/a\u003E, स्लोवेनिया, क्रोएशिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, मोंटेनेग्रो, अल्बानिया और ग्रीस हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूमध्य सागर के पूर्व में आपको एशिया मिलेगा। इस क्षेत्र के समुद्र सिमा वाले देशों में तुर्की, सीरिया, लेबनान, इज़राइल और फिलिस्तीन हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूमध्य सागर के दक्षिण में आपको उत्तरी अफ्रीका मिलेगा। यहाँ मिस्र, लीबिया, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया और मोरक्को देशों की सीमा समुद्र से लगती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूमध्य सागर स्पेन और मोरक्को के बीच पश्चिम में स्थित जिब्राल्टर की जलडमरूमध्य के माध्यम से अटलांटिक महासागर से जुड़ा हुआ है। यह मिस्र के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित स्वेज नहर के माध्यम से लाल सागर से भी जुड़ा हुआ है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/7728981374374051170\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/05\/blog-post_10.html#comment-form","title":"0 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नदियों के संगम पर स्थित एक डेल्टा है। यह \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/05\/geography-of-india-in-hindi.html\"\u003Eभारत\u003C\/a\u003E और \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/bangladesh-in-hindi.html\"\u003Eबांग्लादेश \u003C\/a\u003Eके सिमा क्षेत्र में आता हैं। सुंदरबन रिजर्व फ़ॉरेस्ट दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव फ़ॉरेस्ट है। यह बांग्लादेश के बालेश्वर नदी से लेकर भारत के \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/04\/blog-post_12.html\"\u003Eहुगली नदी\u003C\/a\u003E तक फैला है। सुंदरबन में चार संरक्षित क्षेत्रों को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।\u0026nbsp;यह जंगल 539 वर्ग मील में फैला हुआ है।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv class=\"separator\" style=\"clear: both; text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEiG5HxmjfFYjwZzdg8LmziJeripibMbfnFEL1_J5eF57jwc9_tXFjQe69pper7IAh38Z6zYWxPHhCX6ygB5-riOclnwrSjCPsdbMun5tzj3E4v4y9qP286umuW3rFMWtcXR1ntJ03Bq-utVlVn9Sfi519tndrQbcpKXECagZxuCvDTh_mtiaO1smeLu3w\/s600\/20230508_072831.webp\" style=\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003E\u003Cimg alt=\"सुंदरवन कहां स्थित है - where is sundarbans located\" border=\"0\" data-original-height=\"396\" data-original-width=\"600\" height=\"211\" src=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEiG5HxmjfFYjwZzdg8LmziJeripibMbfnFEL1_J5eF57jwc9_tXFjQe69pper7IAh38Z6zYWxPHhCX6ygB5-riOclnwrSjCPsdbMun5tzj3E4v4y9qP286umuW3rFMWtcXR1ntJ03Bq-utVlVn9Sfi519tndrQbcpKXECagZxuCvDTh_mtiaO1smeLu3w\/w320-h211\/20230508_072831.webp\" title=\"सुंदरवन कहां स्थित है - where is sundarbans located\" width=\"320\" \/\u003E\u003C\/a\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003Cp\u003E\u003Cbr 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वर्ष किसे कहते हैं?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eयदि आप एक कैलेंडर में जनवरी से दिसंबर तक सभी दिनों की गणना करते हैं, तो आपको 365 दिन मिलेंगे। लेकिन हर चार साल में फरवरी में 28 के बजाय 29 दिन होते हैं। इस तरह हर चार साल में एक वर्ष 366 दिन के होते हैं। लीप वर्ष इसी से जुड़ा हुआ हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eलीप वर्ष किसे कहते हैं\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/prithvi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eपृथ्वी \u003C\/a\u003Eको सूर्य की \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/02\/blog-post_60.html\"\u003Eपरिक्रमा\u003C\/a\u003E करने में लगभग 365.25 दिन लगते हैं। जिसे एक सौर वर्ष कहा जाता था। आमतौर पर एक वर्ष में 365 दिन होते हैं। बचे हुए घण्टे को हर चार साल में एक पूर्ण दिन माना जाता हैं। इसे ही लीप वर्ष कहते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eवर्ष \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/what-is-planet-in-hindi.html\"\u003Eग्रह \u003C\/a\u003Eऔर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/tara-kise-kahate-hain.html\"\u003Eतारे \u003C\/a\u003Eसे जुड़ा होता हैं। एक वर्ष वह समय होता हैं जो किसी ग्रह को अपने तारे की एक चक्कर लगाने में लगता है। एक दिन वह समय है जो किसी ग्रह को अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में लगता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपृथ्वी को सूर्य की \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/02\/blog-post_60.html\"\u003Eपरिक्रमा \u003C\/a\u003Eकरने में लगभग 365 दिन और 6 घंटे लगते हैं। पृथ्वी को अपनी धुरी पर घूमने में लगभग 24 घंटे लगते हैं। इसलिए सभी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2020\/08\/shabd-bhandar-kya-hai.html\"\u003Eवर्ष \u003C\/a\u003Eसमान दिनों का नहीं है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइस वजह से अधिकांश वर्षों में दिनों को घटाकर 365 कर देते हैं। हालांकि एक दिन का बचा हुआ भाग गायब नहीं होता है। उस अतिरिक्त भाग को हर चार साल में एक दिन बनाकर जोड़ दिया जाता हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEha4rQz9qapL4DLnn0UAzI77Fp7smhNSVZhx-LQzetMIBLtyN8i9QvN6qP7PJQ3z3fTIVMiDhfgMIX2rnqL8ptwhtlGntApbLf0e1XwiJk9MixrqZsVl-HxdZoxJwrAY0cNAZaxUE3A3ZuEjt-I6QBvKlPVRpvZEJML_HvZcIKT8NYaylw3PihHiEMh5g\/s340\/20221228_153759.webp\" style=\"text-align: center;\"\u003E\u003Cimg border=\"0\" data-original-height=\"220\" data-original-width=\"340\" src=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEha4rQz9qapL4DLnn0UAzI77Fp7smhNSVZhx-LQzetMIBLtyN8i9QvN6qP7PJQ3z3fTIVMiDhfgMIX2rnqL8ptwhtlGntApbLf0e1XwiJk9MixrqZsVl-HxdZoxJwrAY0cNAZaxUE3A3ZuEjt-I6QBvKlPVRpvZEJML_HvZcIKT8NYaylw3PihHiEMh5g\/s16000\/20221228_153759.webp\" \/\u003E\u003C\/a\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cp\u003Eकैलेंडर वर्ष और सौर वर्ष को बराबर करने के लिए लीप वर्ष महत्वपूर्ण होता हैं। पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में जो समय लगता है। इसके सामने एक साल में 5 घंटे, 46 मिनट का समय बहुत छोटा लगता हैं। अगर कई सालों तक हर साल लगभग 6 घंटे को छोड़ देंगे, तो कई चीजें वास्तव में गड़बड़ हो सकती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउदाहरण के लिए मार्च एक गर्मी का महीना है। यदि हमारे पास लीप वर्ष नहीं होते तो, वे सभी घंटे दिनों, सप्ताहों और महीनों में जुड़ जाते और कुछ सौ वर्षों में मार्च का महीना कड़ाके की ठंड में परिवर्तित हो जाता।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/378816587758985792\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/11\/jansankhya-vriddhi-ke-prabhav.html#comment-form","title":"0 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किसे कहते हैं?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eसूनामी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/earthquake-in-hindi.html\"\u003Eभूकंप \u003C\/a\u003Eया \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/jwalamukhi-kya-hai.html\"\u003Eज्वालामुखी \u003C\/a\u003Eके विस्फोट से उत्पन्न हुई विशाल लहर है। जिसे भूकंपीय समुद्री लहरों के रूप में भी जाना जाता है। यह \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/samudra-kise-kahate-hain.html\"\u003Eसमुद्र \u003C\/a\u003Eमें सैकड़ों मील की दूरी, एक घंटे में तय कर सकती है और 100 फीट से अधिक ऊंची हो सकती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजिस स्थान पर सुनामी उत्पन्न होती है, वहाँ से इसकी लहरें सभी दिशाओं में फ़ैल जाती हैं। यह लहरें एक से अधिक हो सकती हैं और अगली लहर पहले वाली लहर\u0026nbsp;से बड़ी होती जाती है। यही कारण है कि छोटी सूनामी कुछ मील दूर जाने पर एक विशाल सुनामी में बदल जाती है।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv class=\"separator\" style=\"clear: both; text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEhsDZ0Nsut2-39lxEKS5WAJ18axTLOvI8dafRtBQVJ2AilI3x9F2zoIhCQ71KxWksKpQGwnZcX1snITP_VQTE9j4qFD9vATXnMC8kMEb4URTefNVZf3b7l1JuaFmC9MlM8wsaHWKXn8cRMYtZlNGpE6hHt2nAhL9OkPlO9tccHw9I0xX45NGcA5q3BpuQ\/s340\/20230107_214227.webp\" style=\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003E\u003Cimg alt=\"सुनामी किसे कहते हैं - sunami kise kahate hain\" border=\"0\" data-original-height=\"220\" data-original-width=\"340\" src=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEhsDZ0Nsut2-39lxEKS5WAJ18axTLOvI8dafRtBQVJ2AilI3x9F2zoIhCQ71KxWksKpQGwnZcX1snITP_VQTE9j4qFD9vATXnMC8kMEb4URTefNVZf3b7l1JuaFmC9MlM8wsaHWKXn8cRMYtZlNGpE6hHt2nAhL9OkPlO9tccHw9I0xX45NGcA5q3BpuQ\/s16000\/20230107_214227.webp\" title=\"सुनामी किसे कहते हैं - sunami kise kahate hain\" \/\u003E\u003C\/a\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cp\u003Eअधिकतर सूनामी खतरनाक होती हैं। समुद्र तल से उत्पन्न भूकंप अक्सर सूनामी का कारण बनती हैं। यदि कोई बड़ा भूकंप तट के करीब होता है, तो यह सुनामी कुछ मिनटों में समुद्र तट पर पहुंच जाती है। यदि वे क्षेत्र समुद्र तल से 25 फीट से कम और तटरेखा के एक मील के भीतर हैं, तो वे अधिक खतरनाक होती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E26 दिसंबर 2004 को 9.1 मेगावॉट की तीव्रता वाला एक बड़ा भूकंप \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/indonesia-in-hindi.html\"\u003Eइंडोनेशिया \u003C\/a\u003Eके उत्तरी क्षेत्र में उत्पन्न हुआ था। जिसे सुमात्रा-अंडमान भूकंप के नाम में जाना जाता है। इसका निर्माण बर्मा प्लेट और भारतीय प्लेट के टकराने से हुआ था।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइस सुनामी में 30 मीटर की ऊंची लहरे आयी थी, जिसने \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/indian-ocean-in-hindi.html\"\u003Eहिंद महासागर\u003C\/a\u003E के आसपास के तटों को तबाह कर दिया था। इस सुनामी में 14 देशों के लगभग 227,898 लोग मारे गएऔर दर्जनों लोग घायल हो गए थे। यह \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/what-is-history-in-hindi.html\"\u003Eइतिहास \u003C\/a\u003Eमें सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक था। इस सुनामी ने इंडोनेशिया, श्रीलंका और भारत के तटीय प्रांतों को अधिक हानि पहुचायी थी।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eसुनामी के प्रकार\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eसामान्य रूप से सुनामी दो प्रकार की होती है - स्थानीय सुनामी\u0026nbsp; और सुदूर क्षेत्र या दूर की सुनामी।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. स्थानीय सुनामी\u003C\/b\u003E - प्रशांत महासागर, दक्षिण चीन सागर, सुलु सागर और सेलेब्स सागर में आने वाले सूनामी स्थानीय सुनामी होता हैं जो स्थानीय भूकंपों से उत्पन्न होते हैं। स्थानीय सूनामी आमतौर पर भूकंप और \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/05\/blog-post_50.html\"\u003Eभूस्खलन \u003C\/a\u003Eके कारण होता हैं जो कुछ सौ किलोमीटर के भीतर ही सीमित होती हैं। यह 2 से 5 मिनट में तटरेखा तक पहुंच सकता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2. दूर की सुनामी\u003C\/b\u003E - सुदूर क्षेत्र या दूर की सूनामी को तट पर पहुंचने के लिए 1 से 24 घंटे की यात्रा करनी पड़ती है। ये सुनामी मुख्य रूप से प्रशांत महासागर की सीमा से लगे देशों जैसे चिली, यूएसए और जापान आती हैं। PTWC और NWPTAC जैसे एजेंसियां प्रशांत क्षेत्र के सुनामी पर बारीकी से निगरानी रखती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eसुनामी के कारण\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. भूकंप \u003C\/b\u003E- समुद्र तल में आने वाले भूकंप सूनामी का सबसे आम कारण हैं। भूकंप पृथ्वी की पपड़ी के अचानक बदलाव के कारण होता है, जो भूकंपीय तरंगों का कारण बनता है। जब यह तरंगे पानी से टकराते हैं तो इसे परिणाम स्वरूप विशाल और तेज़ लहरें उत्पन्न होती हैं जो कभी-कभी 800 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक हो जाती हैं। आमतौर पर, सुनामी रिक्टर पैमाने पर 7.5 से अधिक तीव्रता वाले भूकंपों के कारण होती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2. भूस्खलन \u003C\/b\u003E- जिसे \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/05\/blog-post_14.html\"\u003Eपनडुब्बी \u003C\/a\u003Eभूस्खलन भी कहा जाता है, सूनामी का एक अन्य सामान्य कारण है। जब गुरुत्वाकर्षण या अधिक ढलान के कारण समुद्र के तल में चट्टानें खिसक जाती हैं। जिसके कारण \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/05\/blog-post_50.html\"\u003Eभूस्खलन \u003C\/a\u003Eसूनामी उत्पन्न होती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eज्वालामुखी विस्फोट के कारण अक्सर मजबूत भूकंपीय तरंगे उत्पन्न होती हैं जिसके कारण सूनामी आ सकती है। इतिहास में दर्ज सबसे शक्तिशाली सूनामी 1883 में ज्वालामुखी विस्फोट के कारण आई थी।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E3. ज्वालामुखी \u003C\/b\u003E- ज्वालामुखी न केवल भूकंपीय तरंगें उत्पन्न करके सूनामी लाती हैं, बल्कि समुद्र में बहने वाला लावा भी सूनामी को गति प्रदान करता है। जब तेज़ गति वाला मलबा ऊपर से समुद्र में गिरता है, तो यह तेज़ लहरें पैदा कर सकता है, और सुनामी ला सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E4. उल्कापिंड\u003C\/b\u003E - \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-meteorite-called.html\"\u003Eउल्कापिंड \u003C\/a\u003Eका टकराना एक दुर्लभ घटना हैं। लेकिन सुनामी का संभावित कारण बन सकता है। हालांकि किसी उल्कापिंड के कारण दर्ज इतिहास में कोई सुनामी उत्पन्न नहीं हुई है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eसुनामी के प्रभाव\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eभले ही सूनामी बहुत कम आती है, और अधिकांश छोटे होते हैं, लेकिन इसके प्रभाव कई दिनों तक होता हैं। यह तटीय स्थानों पर रहने वाले समुदायों के लिए एक बड़ा खतरा हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसूनामी मानव स्वास्थ्य, संपत्ति और संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण खतरा हैं। इसका प्रभाव लंबे समय तक रहता हैं, और इसके प्रभाव को समुद्र तट से बहुत दूर भी महसूस किया जा सकता हैं। सूनामी आमतौर पर नजदीकी तट को सबसे गंभीर क्षति पहुचाती है। लेकिन बड़ी सूनामी दूर के तटों तक भी पहुँच सकती है, जिससे व्यापक क्षति हो सकती है। हिंद महासागर मे आए 2004 की सूनामी ने दक्षिणपूर्वी एशिया और पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका के 17 देशों को प्रभावित किया था।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/3919287831801232549\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/11\/sharad-ritu-ki-visheshta.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/3919287831801232549"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/3919287831801232549"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/11\/sharad-ritu-ki-visheshta.html","title":"सुनामी किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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पर्वत कहा है?"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003Cp\u003Eभूगोल के इस टॉपिक में आज हम बात करने वाले हैं। हिमालय पर्वत कहां है और इसकी क्या प्रमुख विशेषताए हैं। तो चलिए शुरू करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eहिमालय पर्वत कहां है\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eहिमालय पर्वत भारत के उत्तरी भाग पर स्थित एक पर्वत श्रृंखला हैं। जो भारत के मैदानी इलाकों और तिब्बत के पठार को अलग करती हैं। हिमलाय पर्वत में विश्व की सबसे ऊंची चोटियां स्थित हैं, जिनमें सबसे ऊंचा पर्वत\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/06\/where-is-mount-everest-located.html\"\u003Eमाउंट एवरेस्ट\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;भी शमिल है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइस पर्वत माला में 23,600 फीट से अधिक ऊंचाई वाली 100 से अधिक पर्वत हैं।\u0026nbsp;हिमालय पर्वत की कुल लंबाई 2400 किलोमीटर है। यह भूटान, चीन, भारत, नेपाल और पाकिस्तान तक फैला हुआ हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eहिमालय के उत्तर में तिब्बत का पठार और दक्षिण में गंगा का मैदान है। यहाँ से दुनिया की कुछ प्रमुख नदियाँ, सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र निकलती हैं। हिमालय में लगभग 53 मिलियन लोग रहते हैं। हिमालय ने दक्षिण एशिया और तिब्बत की संस्कृतियों को आकार दिया है। हिमालय में स्थित कई पर्वत को हिंदू, जैन और बौद्ध धर्मो में पवित्र माना जाता हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv class=\"separator\" style=\"clear: both; text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEjQhoonzzkGfjbhUAKhd44sh37JcxilqBj1mlNmiAhSzvREFWFVe5fs9jipc_UnwKy24lHMiRVdYJeWl7ROCgErMP5r_CzeIm0fZb7anu2ILoghG043ImS5LiequQbn2Ow-57Vko8vkblAftQAXH1CyFR5IFWpywRdZlLprdcFRboXlTh7bjCEcAK9asg\/s340\/20230107_215854.webp\" style=\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003E\u003Cimg alt=\"हिमालय पर्वत कहा है\" border=\"0\" data-original-height=\"220\" data-original-width=\"340\" height=\"207\" 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हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eहिमालय दुनिया के सबसे नए पर्वत श्रृंखलाओं में से एक हैं। जिसका आकर समय के साथ बढ़ता जा रहा हैं। पर्वत के पश्चिमी भाग की तुलना में पूर्वी भाग में भिन्नता देखी जा सकती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eमहान हिमालय पर्वत श्रृंखला में ऐसे 30 पर्वत चोटियाँ हैं, जो 7315 मीटर से अधिक ऊँची और लगभग 200 मील चौड़ी हैं। हिमालय के कुल क्षेत्रफल की बात करे तो यह पृथ्वी के क्षेत्रफल का 0.4 प्रतिशत है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eहिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान शिव का निवास स्थान कैलास पर्वत को बताया गया है। नेपाली इसे सागरमाथा कहते हैं, जिसका अर्थ है, ब्रह्मांड की देवी से हैं। एक कहानी में यति के बारे में बताया गया है, जो एक बड़े वानर जैसा राक्षस है और यह हिमालय में रहता है।\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5451691933474642519\/comments\/default","title":"Post 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भाटा किसे कहते है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003E\n  ज्वार भाटा चाँद और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण पृथ्वी के महासागरों\n  पर होने वाली एक घटना है। ज्वार भाटा का पर्यावरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसके कारण जलीय\n  जीव-जंतु और समुद्र तटीय क्षेत्रों में पौधों की प्रजातियों का विकास होता रहता\n  है। ज्वार भाटा का उपयोग बिजली उत्पन्न करने और प्राकृतिक घटनाओं जैसे भूकंप और\n  ज्वालामुखी विस्फोट के समय और स्थान की भविष्यवाणी करने के लिए भी किया जाता है।\n\u003C\/p\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEjLup41fWzXSPZlyP9l9X0A4g0ln38hS_dv8e5-eQe5uaWk6r1Hg2jfKMks1mlI2PRrRERv62KxgGCF3INWqK1Sjvgm4L8oPiIA4k_bS0OVo7wQiltv5GWoFiCoH8YMazGEfIasxcEWVHzSgkGDVhlCI5V2Kk5qnSTaGva5GcAOHwpsKwcLGZpL5v_nCg\/s600\/20211029_142000.webp\"\u003E\u003Cimg alt=\"ज्वार भाटा किसे कहते है\" border=\"0\" data-original-height=\"338\" data-original-width=\"600\" height=\"180\" 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किसे कहते हैं?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eज्वालामुखी के बारे में आपने सुना ही होगा यह एक प्राकृतिक घटना हैं। जिसमे एक जोरदार धमाके के साथ पृथ्वी के अंदर मौजूद तरल पदार्थ बहार आता हैं। वर्तमान में कई ऐसे स्थान हैं जहाँ एक्टिव ज्वालामुखी पाया जाता हैं। ज्वालामुखी के मुँह से निकली हुयी तरल पदार्थ को मैग्मा कहा जाता हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमैग्मा किसे कहते हैं\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eमैग्मा पिघला हुआ पदार्थ है जिससे आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है। मैग्मा पृथ्वी की सतह के नीचे पाया जाता है। अन्य स्थलीय ग्रहों और कुछ प्राकृतिक उपग्रहों पर भी मैग्मा के प्रमाण खोजे गए हैं। पिघली हुई चट्टान के अलावा, मैग्मा में क्रिस्टल और गैस के बुलबुले भी होते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: center;\"\u003E\u003Ca 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पलायन करते हैं, जहां मैग्मा चैंबर्स में संग्रहीत होते है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eक्रस्ट में मैग्मा के भंडारण के दौरान इसकी संरचना में आंशिक क्रिस्टलीकरण होती रहती है। जिसके बाद ये क्रस्टल मेल्ट क्रस्ट के माध्यम से ज्वालामुखी मुख की और की ओर जाने लगती है और लावा के रूप में बाहर निकाल जाती है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमैग्मा के प्रकार\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eपृथ्वी पर सबसे पुराने तरल पदार्थ को मैग्मा कहा जाता है। यह सिलिकेट, ऑक्साइड और अन्य वाष्पशील घटकों का मिश्रण है। पृथ्वी की पपड़ी के नीचे एक चुंबकीय कक्ष में मैग्मा होता है। जब मैग्मा को पिघलाया जाता है, तो यह लावा के रूप में फूटता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eघनत्व के आधार पर मैग्मा तीन प्रकार के होते है - बेसाल्ट मैग्मा, एंडीसाइट मैग्मा और रयोलाइट मैग्मा आदि।सामान्य रूप से मैग्मा चार प्रकार के होते है -\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. अल्ट्रामैफिक\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- अल्ट्रामैफिक मैग्मा का तापमान 1500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इसमें बहुत कम चिपचिपापन होता है जिससे कम विस्फोटक विस्फोट होते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2. माफिक\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- माफिक मैग्मा का तापमान 1300 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इसकी चिपचिपाहट भी कम होती है। इसमें कोमल विस्फोट होते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E3. मध्यवर्ती\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- मध्यवर्ती मैग्मा का तापमान 1200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। चिपचिपाहट मध्यम होती है। इसमें विस्फोटक विस्फोट होते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E4. फ़ेलसिक\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- फेल्सिक मैग्मा का तापमान 900 डिग्री सेल्सियस से कम होता है। यह अत्यधिक चिपचिपा होता है। इसमें विस्फोट विस्फोटक हैं। यह महाद्वीपीय क्रस्ट और दरारों में गर्म स्थानों में आम है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमैग्मा और लावा में अंतर\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eमैग्मा तापमान 700 डिग्री सेंटीग्रेड से 1300 डिग्री सेंटीग्रेड तक भिन्न होता है। जबकि लावा का तापमान 700 डिग्री सेंटीग्रेड से 1200 डिग्री सेंटीग्रेड तक भिन्न होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eआग्नेय चट्टानें तब बनती हैं जब मैग्मा ग्रह के आंतरिक भाग से बाहर आता है और लावा नामक पिघली हुई चट्टान का निर्माण करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eमैग्मा आंतरिक रूप से बाहर निकल सकता है और ज्वालामुखी विस्फोट को जन्म दे सकता है या पृथ्वी की दरारों के भीतर भी डाइक, सिल्स आदि बनाने के लिए जम सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसिलिका युक्त मैग्मा माफिक मैग्मा की तुलना में अधिक चिपचिपे होते हैं। माफिक मैग्मा सिलिका युक्त मैग्मा की तुलना में अधिक गर्म होते हैं। फेल्डस्पार, फेल्डस्पैथोइड्स, ओलिविन, पाइरोक्सेन, एम्फीबोल, माइक और क्वार्ट्ज लावा के प्रमुख घटक हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4867842487416983694\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/magma-in-geography.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4867842487416983694"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4867842487416983694"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/magma-in-geography.html","title":"मैग्मा किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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किसे कहते हैं?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  पानी से भरा एक \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-area-called.html\"\u003Eक्षेत्र \u003C\/a\u003Eजो भूमि से घिरा हुआ है। उसे झील कहा जाता हैं। दुनिया\n  में लाखों झीलें हैं। वे हर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/08\/what-is-continents.html\"\u003Eमहाद्वीप \u003C\/a\u003Eपर और हर तरह के वातावरण में पाए जाते हैं।\n  यह आकार में बहुत भिन्न होती हैं। कुछ बहुत छोटे होते हैं तो कुछ बहुत बड़े होते\n  हैं। झीलों को अक्सर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-pond.html\"\u003Eतालाब \u003C\/a\u003Eभी कहा जाता है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  कई झीलें इतनी बड़ी हैं कि उन्हें \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/samudra-kise-kahate-hain.html\"\u003Eसमुद्र \u003C\/a\u003Eका नाम दिया गया है। \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-caspian-sea.html\"\u003Eकैस्पियन सागर\u003C\/a\u003E\n  दुनिया की सबसे बड़ी झील है, जिसका क्षेत्रफल 370,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक है।\n  और यह यूरोप और\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/asia-in-hindi.html\"\u003Eएशिया\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;के बिच स्थित हैं।\u0026nbsp;अधिकांश झीलें मीठे पानी की हैं,\n  लेकिन कुछ खारे पानी की झीलें भी पायी जाती हैं जिनमें समुद्री जल से भी अधिक\n  लवणता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  झीलें सामान्यतः तालाबों की तुलना में बहुत बड़ी और गहरी होती हैं। अधिकांश झीलों\n  में नदियों द्वारा पानी जमा होता है, लेकिन कुछ झीलें बिना किसी बाहरी नदी प्रवाह\n  के होती हैं। जैसे ज्वालामुखीय झीलें इनमे पानी सीधे वर्षा से प्राप्त होती हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  प्राकृतिक झीलें अधिकतर पहाड़ी क्षेत्रों, ज्वालामुख क्षेत्र और हिमाच्छादन वाले\n  क्षेत्रों में पाई जाती हैं। अन्य झीलें नदियों के मार्ग में पाई जाती हैं, जहाँ\n  बाढ़ के मैदान होते है। दुनिया के कुछ हिस्सों में कई झीलें हैं जो हिमयुग के समय\n  में बने हैं। अधिकतर झीलें लंबे समय तक स्थायी होती हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  कृत्रिम रूप से बनाये गए झीलों को जलाशय के रूप में जाना जाता है। जो\u0026nbsp;\n  औद्योगिक या कृषि उपयोग के लिए होते हैं। इसके आलावा इनका उपयोग पनबिजली उत्पादन,\n  घरेलू पेयजल की आपूर्ति और मनोरंजन के उद्देश्यों से किया जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पृथ्वी पर अधिकांश झीलें मीठे पानी की हैं जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित हैं।\n  कनाडा एक ऐसा देश हैं जहा पर सबसे अधिक झील पाया जाता हैं। यहाँ झील की अनुमानित\n  संख्याअज्ञात है लेकिन कम से कम 2 मिलियन होने का अनुमान है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eझील के प्रकार\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  झील कई प्रकार की होती हैं। कई भूगोलविद अपनी अलग-अलग राय रखते हैं। इस लेख में\n  झील के 9 प्रकार बताये गए हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cb\u003E1. टेक्टोनिक झीलें (tectonic lakes) -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eटेक्टोनिक झीलें - इस प्रकार\n  की झीलें \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_27.html\"\u003Eटेक्टोनिक प्लेट\u003C\/a\u003E में परिवर्तन होने से होता हैं। पृथ्वी पर सबसे बड़ी\n  झील कैस्पियन सागर, बैकाल झील और अरल सागर टेक्टोनिक झीलें हैं। जो समुद्र तल से\n  ऊपर उठकर समुद्र से अलग कर दी गई हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cb\u003E2. ज्वालामुखीय झीलें (volcanic lakes)\u003C\/b\u003E -\u0026nbsp;ज्वालामुखीय झीलें ऐसी\n  झीलें होती हैं जो ज्वालामुखी के मुख पर बनती हैं समय के साथ इस गर्त में बारिश\n  का पानी जमा होता जाता हैं। यह झीलें ज्वालामुखीय क्रेटर में बनती हैं, जो\n  वाष्पीकरण और भूजल निर्वहन के माध्यम से यह झीले खाली होती हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cb\u003E3. हिमनद झीलें (glacial lakes) \u003C\/b\u003E-\u0026nbsp;हिमनदी झीलें ग्लेशियरों द्वारा\n  बनाई गई झीलें हैं। हिमनद झील का निर्माण बर्फ के पिघलने से होता हैं। समय के साथ\n  हिम पिघलने लगता हैं तो बड़े बड़े गड्डे पानी से भर जाते हैं और झीलों का निर्माण\n  करते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cb\u003E4. नदी झील (fluvial lakes) -\u003C\/b\u003E\u0026nbsp;नदी झील का निरमा विशिष्ट घुमावदार\n  आकार के कारण होता हैं। इस प्रकार के झील को गोखुर झील भी कहा जाता है। धीमी गति\n  से चलने वाली नदी टेढ़ी-मेढ़ी आकृति बनाती हुयी बहती है। अधिक मोड़ होने से नदी का\n  प्रवाह आपस में मिल जाते हैं और नए मार्ग बनाते है। इस प्रकार धनुष के आकार की\n  झील बन जाती है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ctable align=\"center\" cellpadding=\"0\" cellspacing=\"0\" class=\"tr-caption-container\" style=\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003E\n  \u003Ctbody\u003E\n    \u003Ctr\u003E\n      \u003Ctd style=\"text-align: center;\"\u003E\n        \u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEh6iZ2EeQxSJDawvaSHKyBaYqwu04vH6LGLAjt6bJVnou3bWn1BsEc0lRWa-K76CvR3fB2x0nJayTS9RH335BmTeyzoWW39AOk99Whx3TlqH9DU3NZZFcc_TShgQa8CPp1UyTdOhx3czaG-NG7-IZaBIwXJBIGU23Bo-adS0CKAaYJSnxivr2MSNRiVQA\/s600\/ezgif.com-gif-maker.webp\" style=\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003E\u003Cimg alt=\"नदी झील\" border=\"0\" data-original-height=\"400\" data-original-width=\"600\" height=\"213\" src=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEh6iZ2EeQxSJDawvaSHKyBaYqwu04vH6LGLAjt6bJVnou3bWn1BsEc0lRWa-K76CvR3fB2x0nJayTS9RH335BmTeyzoWW39AOk99Whx3TlqH9DU3NZZFcc_TShgQa8CPp1UyTdOhx3czaG-NG7-IZaBIwXJBIGU23Bo-adS0CKAaYJSnxivr2MSNRiVQA\/w320-h213\/ezgif.com-gif-maker.webp\" title=\"नदी झील\" width=\"320\" \/\u003E\u003C\/a\u003E\n      \u003C\/td\u003E\n    \u003C\/tr\u003E\n    \u003Ctr\u003E\n      \u003Ctd class=\"tr-caption\" style=\"text-align: center;\"\u003E\n        \u003Cb style=\"text-align: left;\"\u003Eनदी झील\u003C\/b\u003E\n      \u003C\/td\u003E\n    \u003C\/tr\u003E\n  \u003C\/tbody\u003E\n\u003C\/table\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003E5. भूस्खलन झीलें (landslide lakes) -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/05\/blog-post_50.html\"\u003Eभूस्खलन\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eझील का निर्माण\n  चट्टानों के खिसकने, या दरारों द्वारा होता है। ऐसी झीलें पर्वतीय क्षेत्रों में\n  सबसे अधिक पाई जाती हैं। हालांकि भूस्खलन झीलें बड़ी और काफी गहरी हो सकती हैं,\n  वे आम तौर पर अल्पकालिक होती हैं। भूस्खलन झील का एक उदाहरण क्वेक झील है, जो\n  1959 हेब्जेन झील भूकंप के परिणामस्वरूप बनी थी।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003E6. तटरेखा झीलें (shoreline lakes)\u003C\/b\u003E -\u0026nbsp;तटरेखा झीलें आम तौर पर समुद्र के मुहाने पर बने होते हैं। इसका निर्माण अवरोध या नदी धाराओं द्वारा समुद्र तट बनाई गई झीलें हैं। इनमें समुद्री तटीय झीलें शामिल हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003E7. जैविक\n  झीलें (organic lakes) -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eजैविक झीलें पौधों और जानवरों द्वारा बनाई गई झीलें हैं। यह झील अपेक्षाकृत बहुत दुर्लभ हैं और आकार में काफी छोटे होते हैं। इसके अलावा, वे अन्य प्रकार की झीलों की तुलना में कम विशेषताएं होती हैं। जिन घाटियों में जैविक झीलें होती हैं, वे बीवर बांधों, प्रवाल झीलों, या वनस्पति द्वारा बनाए गए बांधों से जुड़ी होती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003E8. मानवनिर्मित झीलें (anthropogenic lakes) -\u003C\/b\u003E\u0026nbsp;मानव निर्मित झीलों को कृत्रिम रूप से बनाया जाता है। नदियों और नालों को बाँधने से इस प्रकार के झील का निर्माण होता हैं। दक्षिणी पोलैंड में एक मानव निर्मित झील है, जिसमें 4,000 से अधिक जल निकाय शामिल हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003E9. उल्कापिंड\n  झीलें (meteorite lakes) -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eउल्कापिंड झीलें, जिन्हें क्रेटर झीलों के रूप में भी जाना जाता है। यह उल्कापिंड द्वारा पृथ्वी के टकराने से बानी झीले होती हैं। उल्कापिंड झीलों के उदाहरण हैं भारत में लोनार झील हैं। उल्कापिंड झीलों में अद्वितीय और वैज्ञानिक रूप से मूल्यवान धातु हो सकते हैं।\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4360638955140520305\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4360638955140520305"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4360638955140520305"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html","title":"झील किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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कितने प्रकार के होते है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cdiv\u003E\u003Cdiv\u003Eभूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे अचानक आने वाली झटकों को कहते हैं। भूकंप\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_27.html\"\u003Eटेक्टोनिक प्लेट\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;में उत्पन्न होते हैं। जहां भूकंप उत्पन्न होता हैं उसे हाइपोसेंटर कहा जाता है।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eभूकंप की तीव्रता को हम दो तरीकों से माप सकते हैं, भूकंप की गणना सिस्मोग्राफ उपकरण द्वारा किए जाते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eभूकंप मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं -\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eज्वालामुखी\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eविवर्तनिक\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eपतन\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eविस्फोट\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cdiv class=\"separator\" style=\"clear: both; text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEilddFY9SvSIJ1SEzbPuYf0CnA2gUtLNHtnOLRsR11KmiGNWOhUeMW2NYx7zmpogvxDSGMZ40GuHCBCqsRuRU5RUqph4Q-R5twc5HPFMWxp2bPZkq80DQNlx4e0fTio8GeysNrZ9tBrj1DFgC7sn6YXd0jb-ndIxBl4d3R5vOYghO415RLBnWrwFMD0tQ\/s600\/20230508_073215.webp\" style=\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003E\u003Cimg alt=\"भूकंप कितने प्रकार के होते है\" border=\"0\" data-original-height=\"396\" data-original-width=\"600\" height=\"211\" src=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEilddFY9SvSIJ1SEzbPuYf0CnA2gUtLNHtnOLRsR11KmiGNWOhUeMW2NYx7zmpogvxDSGMZ40GuHCBCqsRuRU5RUqph4Q-R5twc5HPFMWxp2bPZkq80DQNlx4e0fTio8GeysNrZ9tBrj1DFgC7sn6YXd0jb-ndIxBl4d3R5vOYghO415RLBnWrwFMD0tQ\/w320-h211\/20230508_073215.webp\" title=\"भूकंप कितने प्रकार के होते है\" width=\"320\" \/\u003E\u003C\/a\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003C\/div\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5815589518945267892\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/bhukamp-ke-prakar.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5815589518945267892"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5815589518945267892"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/bhukamp-ke-prakar.html","title":"भूकंप कितने प्रकार के होते है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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का पठार कहां पर है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eपठार एक सपाट, ऊंचा भू-आकृति है जो कम से कम एक तरफ आसपास के क्षेत्र से ऊपर उठा होता है। पठार हर महाद्वीप पर पाए जाते हैं और पृथ्वी की एक तिहाई भूमि पर कब्जा करते हैं। वे पहाड़ों, मैदानों और पहाड़ियों के साथ चार प्रमुख भू-आकृतियों में से एक हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपठार दो प्रकार के होते हैं: खंडित पठार और ज्वालामुखीय पठार। पृथ्वी की पपड़ी में ऊपर की ओर गति के परिणामस्वरूप एक विच्छेदित पठार बनता है। इसका निर्माण टेक्टोनिक प्लेटों की धीमी टक्कर के कारण होता है। भारत के दक्षिण का पठार और तिब्बत का पठारइसका एक अच्छा उदाहरण हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eतिब्बत का पठार कहां पर है\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eतिब्बत का पठार मध्य एशिया और पूर्वी एशिया में एक विशाल ऊंचा पठार है, जो चीन के अधिकांश तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और भूटान व भारत के लद्दाख और लाहौल क्षेत्र मे फैला हुआ हैं। साथ ही भारतीय\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/rajya-kise-kahte-hai.html\"\u003Eराज्य\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eहिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्र भी शामिल हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cdiv class=\"separator\" style=\"clear: both; text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEgBkHGxJqVn16yOZgm4Wbt5DY2Fk0jJotdN8Q-AaxQ9kDL6A9DcdHaTEq0dj3jQBEPeaE7gk3is4YkOATWSXD1E0RHY0gkpGjL50jUNK_GwPriGcJ8L0CTVm90QaUaEACXpc9SqSsa93Ub4Ai0yCaQwiVXlGGO1fAzbbdW2arIjCGJkKW04gqF6sGtILw\/s600\/20230508_073809.webp\" imageanchor=\"1\" style=\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003E\u003Cimg alt=\"तिब्बत का पठार कहां पर है - tibet ka pathar kahan hai\" border=\"0\" data-original-height=\"395\" data-original-width=\"600\" height=\"211\" src=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEgBkHGxJqVn16yOZgm4Wbt5DY2Fk0jJotdN8Q-AaxQ9kDL6A9DcdHaTEq0dj3jQBEPeaE7gk3is4YkOATWSXD1E0RHY0gkpGjL50jUNK_GwPriGcJ8L0CTVm90QaUaEACXpc9SqSsa93Ub4Ai0yCaQwiVXlGGO1fAzbbdW2arIjCGJkKW04gqF6sGtILw\/w320-h211\/20230508_073809.webp\" title=\"तिब्बत का पठार कहां पर है - tibet ka pathar kahan hai\" width=\"320\" \/\u003E\u003C\/a\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cp\u003Eयह लगभग 1,000 किलोमीटर उत्तर से दक्षिण और 2,500 किलोमीटर पूर्व से पश्चिम तक फैला है। यह 2,500,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल के साथ समुद्र तल से दुनिया का सबसे ऊंचा और सबसे बड़ा पठार है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E4,500 मीटर से अधिक की औसत ऊंचाई के साथ यहा दुनिया के दो सबसे ऊंचे शिखर, माउंट एवरेस्ट और के 2 पर्वत श्रृंखला स्थित हैं। तिब्बत के पठार को अक्सर दुनिया की छत कहा जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eतिब्बत के पठार में अधिकांश जल निकासी घाटिया शामिल हैं। इसके हजारों ग्लेशियर और अन्य भौगोलिक और पारिस्थितिक विशेषताएं साथ ही पानी के भंडारण हैं। जो पानी क्व प्रवाह को बने रखने के लिए वाटर टॉवर के रूप में काम करती हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइसे कभी-कभी तीसरा ध्रुव भी कहा जाता है क्योंकि ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद यहा \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ice.html\"\u003Eबर्फ\u003C\/a\u003E के रूप मे ताजे पानी का सबसे बड़ा भंडार है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eतिब्बती पठार का भगोल\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eतिब्बत का पठार उच्च पर्वतीय एशिया की विशाल पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा हुआ है। पठार दक्षिण की ओर हिमालय श्रृंखला से, उत्तर में कुनलुन पर्वत द्वारा और उत्तर-पूर्व में किलियन पर्वत द्वारा घिरा है, जो पठार को हेक्सी कॉरिडोर और गोबी रेगिस्तान से अलग करता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-origin-of-river-indus-river.html\"\u003Eसिंधु नदी \u003C\/a\u003Eपश्चिमी तिब्बती पठार में मानसरोवर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझील\u003C\/a\u003E के आसपास के क्षेत्र में निकलती है।\u0026nbsp;तिब्बती पठार उत्तर में एक विस्तृत ढलान से घिरा है जहाँ ऊँचाई लगभग 5,000 मीटर से 1500 किलोमीटर से कम की है। ढलान के साथ पहाड़ों की एक श्रृंखला है। पश्चिम में कुनलुन पर्वत इस पठार को तारिम बेसिन से अलग करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपठार एक उच्च ऊंचाई वाला शुष्क \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/mandan-kise-kahate-hain.html\"\u003Eमैदान \u003C\/a\u003Eहै जो पर्वत श्रृंखलाओं और बड़ी खारी झीलों से घिरा हुआ है। यहा वार्षिक वर्षा 100 से 300 मिलीमीटर तक होती है। दक्षिणी और पूर्वी किनारों में घास के मैदान हैं जो खानाबदोश चरवाहों की आबादी का समर्थन करते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयहां औसत ऊंचाई 5,000 मीटर से अधिक है और सर्दियों का तापमान -40 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। दुर्गम वातावरण के कारण यह एशिया में सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र है और अंटार्कटिका और उत्तरी ग्रीनलैंड के बाद दुनिया में तीसरा सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभूविज्ञान और इतिहास\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eतिब्बती पठार का भूवैज्ञानिक इतिहास हिमालय के भूगर्भीय इतिहास से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। हिमालय अल्पाइन ऑरोजेनी से संबंधित है। जिसमें ज्यादातर तलछटी और मेटामॉर्फिक चट्टान शामिल हैं। उनका गठन इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच टकराव के साथ हुआ है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eटक्कर लगभग 70 मिलियन वर्ष पहले ऊपरी क्रेटेशियस काल में शुरू हुई, जब उत्तर-चलती इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट, प्रति वर्ष लगभग 15 सेमी की गति से चलती हुई, यूरेशियन प्लेट से टकरा गई। लगभग 50 मिलियन वर्ष पहले, इस तेज गति से चलने वाली इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट ने टेथिस महासागर को पूरी तरह से बंद कर दिया था।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभारत-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट तिब्बती पठार के नीचे चलती रहती है, जो पठार को ऊपर की ओर बढ़ने मे मदद करती है। पठार अभी भी लगभग 5 मिमी प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eतिब्बती पठार का पर्यावरण\u0026nbsp;\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eतिब्बती पठार विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों का समर्थन करता है, उनमें से अधिकांश को पर्वतीय घास के मैदानों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। जबकि पठार के कुछ हिस्सों में अल्पाइन टुंड्रा जैसा वातावरण है, अन्य क्षेत्रों में \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-monsoon-called-in-hindi.html\"\u003Eमानसून\u003C\/a\u003E से प्रभावित झाड़ियाँ और जंगल हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eऊंचाई और कम वर्षा के कारण पठार पर प्रजातियों की विविधता आमतौर पर कम है। तिब्बती पठार मे तिब्बती भेड़िये, तेंदुए, जंगली याक, जंगली गधे, सारस, गिद्ध, बाज, गीज़, सांप और भैंस की प्रजातियां पाई जाती है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/846475424680569328\/comments\/default","title":"Post 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का पठार कहां है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eदक्कन का पठार महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश,\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/tamil-nadu-ki-rajdhani-kya-hai.html\"\u003Eतमिलनाडु\u003C\/a\u003E, कर्नाटक और केरल में फैला हुआ हैं। पठार की औसत ऊंचाई लगभग 600 मीटर हैं। जबकि न्यूनतम ऊंचाई 100 मीटर के करीब है। अन्नामलाई पहाड़ी दक्कन पठार का सबसे ऊँचा क्षेत्र है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1242166968883130173\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/dakshin-ka-pathar-kise-kahate-hain.html#comment-form","title":"0 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गया\n  हैं -\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cli\u003Eवसंत ऋतु\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eग्रीष्म ऋतु\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eवर्षा ऋतु\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eशरद ऋतु\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eहेमंत ऋतु\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eशीत ऋतु\u003C\/li\u003E\n\u003C\/ol\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eभारत में एक कृषि प्रधान देश हैं जो पूर्ण रूप से मानसून पर निर्भर करता है। भारत में उष्णकटिबंधीय जलवायु होने के कारण गर्मी भी काफी पड़ती हैं। जबकि दुनिया के अन्य समशीतोष्ण देशों की तुलना में भारत मे सर्दी आमतौर पर हल्की और सुखद होती है।\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\n\u003C\/ol\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/353819312444912931\/comments\/default","title":"Post 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11 हजार बीपी से पहले हरा भरा \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/mandan-kise-kahate-hain.html\"\u003Eमैदान \u003C\/a\u003Eथा।\u0026nbsp;कालाहारी में अन्य मरुस्थलों की तुलना में अधिक वर्षा होती है। यहाँ औसतन 100 से 200 मिलीमीटर में 4 से 8 इंच सालाना बारिश होती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eकालाहारी मरुस्थल कहाँ स्थित है\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eकालाहारी मरुस्थल दक्षिणी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/08\/africa-continent-in-hindi.html\"\u003Eअफ्रीका \u003C\/a\u003Eमें स्थित है। जो 900,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।\u0026nbsp;कालाहारी शब्द कगाला से लिया गया है, जिसका अर्थ है एक जलविहीन स्थान हैं। यह बोत्सवाना, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के क्षेत्रों को कवर करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv class=\"separator\" style=\"clear: both; text-align: center;\"\u003E\u003Ca 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और सूखी नदी हैं। यह कई वन्यजीवों का घर है, जिसमें मृग, शेर, चीता और तेंदुए जैसे शिकारियों के साथ-साथ छोटे स्तनधारी, सरीसृप और पक्षी शामिल हैं। रेगिस्तान में कई स्वदेशी समुदाय भी रहते हैं, जिन्होंने सदियों से कठोर रेगिस्तानी वातावरण को अपना लिया है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयहाँ कई अल्पकालिक नदियाँ और भूमिगत जल के स्रोत पाए जाते हैं जो वन्यजीव और मानव आबादी दोनों को बनाए रखने में मदद करती हैं। कालाहारी मरुस्थल अपने विशिष्ट वनस्पतियों, जीवों और सांस्कृतिक विरासत के साथ शुष्क वातावरण और प्रकृति की सुंदरता के लिए जाना जाता है।\u003C\/p\u003E\n\n\n\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/3744742982101246478\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/marusthal-ke-prakar.html#comment-form","title":"0 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का जंगल किस देश में है?"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003Cp\u003Eअमेज़न का वर्षावन 55 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले है। यदि अमेज़न\u0026nbsp;का जंगल एक\n  देश होता तो विश्व का 9 वा बड़ा देश होता।\u0026nbsp;यह जंगल नौ देशो मे फैला हुआ है।\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_88.html\"\u003Eवर्षावन \u003C\/a\u003Eका अधिकांश भाग ब्राजील में पड़ता है। अन्य देश - पेरू , कोलंबिया ,\n  वेनेजुएला , इकवाडोर, बोलिविया, युगाना , सूरीनाम और फ्रेंच युगाना है। इससे पता\n  चलता है की यह जंगल कितना विशाल होगा।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv class=\"separator\" style=\"clear: both; text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEirwZUl3KgoObkRsANS1hhjAa5uZf-VmJ4Jmot-d8X4yvgCfjSZwXWdQwxcJ1vuK20qAbkvakkbreofbLPzMgyY3ayyycXIgHgtPp_lIpeb9EHtdojJaDvSn5utiJ4W2J-qApwCE9_z2zwdTawyM1LMk0urk89t4nsAzA5Ali0kq_p3_E1OncNLrUEHuA\/s600\/20230508_225329.webp\" style=\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003E\u003Cimg alt=\"अमेज़न का जंगल किस देश में है - amazon ka jungle kis desh mein hai\" border=\"0\" data-original-height=\"395\" data-original-width=\"600\" height=\"211\" src=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEirwZUl3KgoObkRsANS1hhjAa5uZf-VmJ4Jmot-d8X4yvgCfjSZwXWdQwxcJ1vuK20qAbkvakkbreofbLPzMgyY3ayyycXIgHgtPp_lIpeb9EHtdojJaDvSn5utiJ4W2J-qApwCE9_z2zwdTawyM1LMk0urk89t4nsAzA5Ali0kq_p3_E1OncNLrUEHuA\/w320-h211\/20230508_225329.webp\" title=\"अमेज़न का जंगल किस देश में है - amazon ka jungle kis desh mein hai\" width=\"320\" \/\u003E\u003C\/a\u003E\u003C\/div\u003E\n\u003Cp\u003E\n  अमेज़ॅन वर्षावन एक नम चौड़ी पत्ती वाला उष्णकटिबंधीय वर्षावन है जो दक्षिण\n  अमेरिका के अधिकांश अमेज़ॅन बेसिन को कवर करता है। इस बेसिन में 7,000,000 किमी 2\n  शामिल है, जिसमें से 5,500,000 किमी 2 वर्षावन द्वारा कवर किया गया है। इस\n  क्षेत्र में नौ राष्ट्रों से संबंधित क्षेत्र और 3,344 औपचारिक रूप से स्वीकृत\n  स्वदेशी क्षेत्र शामिल 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झील कहां स्थित है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eकोलेरू झील एक मीठे पानी की झील है। जो आंध्र प्रदेश में स्थित है और यह एशिया की सबसे उथले पानी की झील है। झील का क्षेत्र 245 किमी वर्ग हैं। यह कृष्णा और गोदावरी डेल्टा के बीच स्थित है। झील एक प्रमुख पर्यटक केंद्र है। यहाँ पर सर्दियों के मौसम में कई पक्षियों को देखा जा सकता हैं। झील में कई टापू भी स्थित हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयह कई लोगो और प्रवासी पक्षियों के लिए आवास प्रदान करता है। यह झील मत्स्य पालन, कृषि और संबंधित व्यवसायों को बनाए रखने में सहायता करता है। मानसून के मौसम में यह बाढ़ के नुकसान को कम करता हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/6459798429535327434\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/10\/where-is-kolleru-lake.html#comment-form","title":"0 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बढ़ती है। यहां नौका विहार और अन्य खेलों का आयोजन समय समय पर किया जाता है। लोकटक मणिपुरी शब्द हैं। जिसका अर्थ \"जहां जलधारा का अंत होता हैं\" उसे ही लोकटक कहाँ जाता हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4001497906201780485\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/10\/where-is-loktak-lake.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4001497906201780485"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4001497906201780485"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/10\/where-is-loktak-lake.html","title":"लोकटक झील कहाँ है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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बनी है, दक्षिणी गोलार्ध और उत्तरी गोलार्ध। पृथ्वी को तीन आयामी रेखाओं में विभाजित किया गया है, जिसे कर्क रेखा, मकर रेखा और भूमध्य रेखा कहा जाता हैं। भूमध्य रेख पृथ्वी को दो बराबर भागों मे बाटती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eगोलार्ध क्या होता है\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eकिसी गोलाकार वस्तु के आधे भाग को गोलार्ध कहाँ जाता है। उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध भूमध्य रेखा से विभाजित होते हैं। जो पृथ्वी के दो ध्रुवों के बीच का वृत्त है। जब एक रेखा समतल गोले को बराबर भागों में काटता है, तो यह गोलार्द्ध बनाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: center;\"\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEgK2FoKE-YHtum2JNhogB_9z8CqdXV0Cxu25ENejJZhTeNXoORRfpl6bnYWvO-ltRp5SJ-iFls7fh5u-fb2SsuE6OFVXoueowalomuaAUB5_o7Erxoyd1pA23njSzPhY7TLtc0OCzN_bvI4NoMYQPGanum0pW9GtjhYXOuLYak3eyTl1iWVqU7BorHzUg\/s600\/20230508_225612.webp\" style=\"text-align: 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केंद्र में है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eउत्तरी गोलार्ध\u003C\/b\u003E\u0026nbsp;- भूमध्य रेखा का उत्तरी भाग है। पृथ्वी की तिरक्षी झुकाव के कारण उत्तरी गोलार्ध में शीत ऋतु 22 दिसंबर के आसपास और ग्रीष्म ऋतु 21 जून के आस पास होता है। इस क्षेत्र में यूरोप महाद्वीप उत्तरी अमेरिका और एशिया महाद्वीप के क्षेत्र आते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eआर्कटिक प्रदेश में जलवायु ठंडी होती हैं। यहाँ गर्मियों में कुछ दिनों के लिए सूरज नहीं डूबता हैं और सर्दियों के दौरान कुछ दिनों तक सूरज नहीं उगता है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/3827934764937174088\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/10\/what-is-hemisphere.html#comment-form","title":"0 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बंदरगाह कहां है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eधामरा बंदरगाह ओडिशा में स्थित एक बंदरगाह है, जो धामरा के पुराने बंदरगाह से लगभग सात किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है। बंदरगाह को विकसित करने के अप्रैल 1998 में हस्ताक्षर किए गए थे।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eधामरा पोर्ट कंपनी लिमिटेड (DPCL) का गठन बंदरगाह को चलाने के लिए लार्सन एंड टुब्रो और टाटा स्टील के बीच किया गया था। बंदरगाह को अपना पहला पोत 8 फरवरी 2010 को और पहला वाणिज्यिक पोत 10 अप्रैल 2011 को प्राप्त हुआ। बंदरगाह की प्रारंभिक क्षमता सालाना 25 मिलियन टन थी, जो अंततः बढ़कर 80 मिलियन टन सालाना हो गई है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eबंदरगाह को जून 2014 में अदानी पोर्ट ने अपने कब्जे में ले लिया था। बंदरगाह का उपयोग नजदीकी खनिज बेल्ट से लौह अयस्क के निर्यात के लिए किया जाता हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eओडिशा सरकार की नए बंदरगाह के पास संबंधित उद्योगों को विकसित करने की योजना है, जिसमें एक जहाज निर्माण यार्ड और एक पेट्रोकेमिकल और गैस आधारित विनिर्माण केंद्र शामिल है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eधमारा के लिए एक विशेष निवेश क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है, और आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य शहरी बुनियादी ढांचे को कवर करने के लिए एक क्षेत्रीय योजना तैयार की जा रहा है। लगभग 500 एकड़ के धामरा बंदरगाह के पास ओडिशा सरकार द्वारा एक नए हवाई अड्डे\/हवाई पट्टी को मंजूरी दी गई है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/9144074499226084763\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/10\/dhamra-bandargah-kahan-hai.html#comment-form","title":"0 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संस्कृति विश्व की प्रसिद्ध प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eप्राचीन काल में एक प्रसिद्ध महाप्रतापी राजा भारत के नाम पर हमारे देश का नाम भारतवर्ष पड़ा इसे सिन्धु नदी के पास स्थित होने के कारण हिन्दुस्तान भी कहा गया था। ब्रिटिश काल में अंग्रेजों द्वारा सिन्धु नदी को इण्डस कहने के कारण इसका नाम इंडिया भी हो गया।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत की भौगोलिक स्थिति का वर्णन कीजिए\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभारत पूर्णतया उत्तरी गोलार्द्ध में आता है। इसका क्षेत्रफल भौगोलिक रूप से 32,87,263 वर्ग कि.मी. है। जो उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक और पूर्व में अरुणाचलप्रदेश से लेकर पश्चिम में गुजरात तक फैला हुआ है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का सातवाँ तथा एशिया का चौथा बड़ा राष्ट्र है। देश का क्षेत्रफल विश्व के कुल क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv class=\"separator\" style=\"clear: both; text-align: 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विस्तार 3,214 किमी है और पूर्व से पश्चिम तक 2,933 किमी है। भारत की स्थलीय सीमा 15,200 किमी तथा सागरीय तट की लंबाई 7,517 किमी है। भारत के मध्य से कर्क रेखा गुजरती है। भारत के दक्षिण में अण्डमान व निकोबार द्वीप समूह है। जिसे भारत का इंदिरा पाइन्ट कहते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E2023 के अनुशार जनसंख्या की दृष्टि से भारत विश्व पहला देश है। देश की कुल आबादी 142 करोड़ हैं। सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या घनत्व 324 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी था।\u0026nbsp; जो बढ़कर\u0026nbsp;382 हो गया हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभौगोलिक महत्व\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eभारत उत्तरी पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित है। भारत के दक्षिण में हिन्द महासागर है। जहाँ से अनेक समुद्री मार्ग तट से होकर गुजरते हैं। जिससे भारत का अंतर्राष्ट्रीय महत्व बढ़ गया है। स्वेज नहर बनने से भारत तथा यूरोप के मध्य लगभग 4,800 कि.मी. की दूरी कम हो गई है। समुद्री मार्गों के अतिरिक्त भारत अंतर्राष्ट्रीय वायु मार्गों का भी केन्द्र है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभारत के समीपवर्ती देशों में पश्चिम एशिया, अफ्रीका तथा दक्षिणी पूर्वी एशिया के कई देश है। जिन्हें तैयार माल के निर्यात की सुविधा है। उत्तर में स्थित हिमालय पर्वतमाला शीतकाल में निकटवर्ती स्थानों की बर्फीली व ठंडी हवाओं से रक्षा करती है एवं वर्षा ऋतु में\u0026nbsp;मानसून पवनों को रोककर वर्षा कराती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभारत में पृथ्वी का प्राचीनतम भूखंड गोंडवाना लैंड से लेकर नवीनतम भू-भाग हिमालय पर्वत तथा गंगा और ब्रम्हपुत्र का मैदान शामिल हैं। इसके पूर्वी एवं पश्चिमी तट पर लक्षद्वीप और अण्डमान निकोबार द्वीप समूह है। देश के कुल क्षेत्रफल का 10.7 प्रतिशत पर्वत 12.6 प्रतिशत पर पहाड़ 27. 7 प्रतिशत पर पठार और 43 प्रतिशत मैदान स्थित है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभारत के धरातलीय स्वरुप को अध्ययन के दृष्टिकोण से चार भागों में विभक्त किया जा सकता हैं -\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eपर्वत श्रृंखलाएँ\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eउत्तरी भारत का मैदान\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eप्रायद्वीप पठार\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eसमुद्र तटीय मैदान\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eपर्वत श्रृंखलाएँ -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eभारत के उत्तर पश्चिम से पूर्व तक धनुषाकृति में हिमालय पर्वतमाला 2400 किमी. लंबाई में फैली है। यह पर्वतमाला पश्चिम में ब्लूचिस्तान से लेकर नेपाल व तिब्बत होते हुए पूर्व में बर्मा की अराकानयोमा सिंधु नदी मोड़ से ब्रम्हापुत्र नदी मोड़ तक फैला हुआ है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइसके उत्तर में तिब्बत का पठार एवं दक्षिण में उत्तरी भारत का विशाल मैदान है जिसकी चौड़ाई 150 किं.मी. से 400 कि.मी. एवं औसत ऊँचाई 600 मीटर है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eहिमालय संसार का सर्वोच्च पर्वत है इन पर्वतों की विभिन्न श्रेणियाँ समानान्तर रूप से चली गई हैं। इनके मध्य अनेक पठार तथा घाटियाँ हैं इन पर्वत श्रेणियों का ढाल भारत की ओर तीव्र तथा तिब्बत की ओर मंद है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूगर्भिक संरचना की दृष्टि से हिमालय एक नवीन युवा एवं वलित पर्वत है इसकी उत्पत्ति टेथिस सागर में करोड़ों वर्षों तक निक्षेपित तलछट अर्थात कोमल चट्टानों के धीरे-धीरे ऊँचे उठने से हुई है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eहिमालय पर्वत श्रेणियाँ उत्तर-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर एक दूसरे के समानान्तर फैली हुई है। भौगोलिक दृष्टि से इन्हें चार भागों में विभाजित कर सकते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत के पड़ोसी देश\u003C\/span\u003E\u003C\/b\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eएशिया महाद्वीप में स्थित भारत की विशिष्ट संस्कृति और परंपरा रही है। भारत की सिमा सात देशो से लगती हैं - उत्तर में अफगानिस्तान, उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर एवं उत्तर-पूर्व में तिब्बत, नेपाल तथा भूटान, पूर्व में बांग्लादेश एवं\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/myanmar-in-hindi.html\"\u003Eम्यांमार\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eहैं। भारत एवं चीन के मध्य सीमा रेखा को मैकमोहन रेखा कहते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसमुद्र पार हमारा निकटतम पड़ोसी देश श्रीलंका है।\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/tamil-nadu-ki-rajdhani-kya-hai.html\"\u003Eतमिलनाडु\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eतट से इसकी दूरी मात्र 32 कि.मी. है। अण्डमान निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण में दूसरा निकटतम पड़ोसी देश इण्डोनेशिया है। अन्य पड़ोसी देशों में मलेशिया, थाइलैण्ड, कम्बोडिया वियतनाम तथा लाओस हैं। पश्चिम की ओर ईरान, ईराक, सउदी अरब, ओमान और यमन स्थित है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4134001109714892886\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/blog-post.html#comment-form","title":"0 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तटीय मैदान का महत्व बताइए?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003E\n  भारत के दक्षिणी पठार के पश्चिम एवं पूर्व में संकरे तटीय मैदान है जिनका विस्तार\n  पश्चिम में गुजरात से केरल तक तथा पूर्व में स्वर्ण रेखा नदी से कुमारी अन्तरीप\n  तक है। अरब सागर के तटीय पट्टी को उत्तरी भाग में कोंकण तथा दक्षिण में मलाबार के\n  नाम से जाना जाता है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eसमुद्र तटीय मैदान का महत्व बताइए\u0026nbsp;\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Col\u003E\n  \u003Cli\u003E\n    यह मैदान उपजाऊ मिटटी से बने हैं जिससे यहाँ धान की सघन खेती होती है।\u0026nbsp;\n  \u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eतट के समीप मुंबई टापू के पास खनिज तेलों के विशाल भंडार हैं।\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eमालाबार तट तथा तमिलनाडू तट मत्स्य उद्योग के महत्वपूर्ण केन्द्र हैं।\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eतटवर्ती प्रदेश में सागर के जल से नमक बनाया जाता है।\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eकेरल के तट पर मोनोजाइट खनिज प्राप्त होता है।\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003E\n    समुद्र तट पर्यटन एवं स्वास्थ्यवर्धक केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है।\n  \u003C\/li\u003E\n\u003C\/ol\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eतटीय मैदान को कितने भागों में बांटा गया है\u0026nbsp;\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  समुद्र\u0026nbsp;तटीय मैदान को दो भागों में विभाजित किया गया है।\u0026nbsp;पूर्वी तटीय\n  मैदान\u0026nbsp;और पश्चिमी तटीय मैदान। जिसकी जानकारी निम्नलिखित हैं -\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. पूर्वी तटीय मैदान\u003C\/b\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  यह मैदान पूर्वीघाट बंगाल की खाड़ी के मध्य उत्तर में स्वर्ण रेखा नदी के दक्षिण\n  में कुमारी अन्तरीप तक फैला हुआ है। इस क्षेत्र में महानदी, कृष्णा, गोदावरी,\n  कावेरी नदियों की ऊपरी घाटियाँ और उपजाऊ डेल्टाई प्रदेश शामिल है। इसके सम्पूर्ण\n  तट को कारोमण्डल कहते हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  गोलकुण्डा तथा दक्षिणी भाग को कर्नाटक या कोरोमण्डल कहते हैं पूर्वी तटीय मैदान\n  को तीन उप विभागों में बाँटा गया है - 1. उत्कल का मैदान, 2. आन्ध्र का मैदान, 3.\n  तमिलनाडू का मैदान।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cdiv class=\"separator\" style=\"clear: both; text-align: center;\"\u003E\n  \u003Ca href=\"https:\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEgZ9ZvpZHJWkAFV9d1BBCBcMvzk-Xy5H6UKMgaqYEfMhPJScREYC8Ixyn2HUs4R5-Q9hum6ezTKbGcBdhmkqe8SwL1Mxx52-ZbcmKbPGnHukmRdMZg0ftVHyBzjERpt8dSG7Z9pT-hoMdpRQIc-C1c1UoUATcK5JnBhIX_GZeK_pONX1E_7jmd2Gqwu1A\/s600\/20230509_055448.webp\" style=\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003E\u003Cimg alt=\"समुद्र तटीय मैदान का महत्व बताइए - significance of the seaside plain\" border=\"0\" data-original-height=\"400\" data-original-width=\"600\" height=\"213\" 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का मैदान, गुजरात का मैदान, कॉकण का मैदान, मलाबार मैदान और केरल\n  का मैदान आता हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  कच्छ का मैदान\u0026nbsp;शुष्क व अर्द्धशुष्क नमकीन रेतीला मैदान है। जो वर्षा ऋतु में\n  बाढ़ युक्त हो जाता है। इसके मध्य में गिरनार की पहाड़ियाँ स्थित हैं।\u0026nbsp;कच्छ\n  का रण भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा में फैला हुआ है। यह ज्यादातर भारतीय\n  राज्य गुजरात में स्थित है, जिसका एक छोटा हिस्सा पाकिस्तान के सिंध प्रांत में\n  है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  गुजरात का मैदान गुजरात तथा खम्भात की खाड़ी में फैला हुआ है, जहाँ पर माही,\n  साबरमती, नर्मदा और ताप्ती नदियाँ मुहाना बनाती है। कोंकण का मैदान दमन से गोआ तक\n  500 किमी लंबा है तथा जिसकी चौड़ाई 50 किमी से 80 किमी है। मलाबार मैदान मैंगलोर\n  से गोआ तक 225 किमी लंबा मैदान है। केरल का मैदान मैंगलोर से कुमारी तक 500 किमी\n  लंबा तटीय मैदान है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eसमुद्र तटीय द्वीप समूह\u003C\/b\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारत द्वीपों का देश है जहाँ कुल 2,470 द्वीप हैं जिसमें 204 द्वीप बंगाल की\n  खाड़ी में 43 द्वीप प्रवाल निर्मित है। बंगाल की खाड़ी के मुख्य द्वीप गंगासागर,\n  न्यूमरे द्वीप, श्री हरिकोटा, अण्डमान निकोबार द्वीप समूह आदि प्रमुख हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  अरब सागर में केरल तट के पश्चिम में कई छोटे-छोटे द्वीप हैं जिनका निर्माण\n  अल्पजीवी सूक्ष्म प्रवाल के सतत और शांत प्रयत्नों से हुआ है। इन द्वीपों की\n  आकृति घोड़े की नाल अथवा अँगूठी के समान है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  इसलिए इन्हें एटाल या प्रवालद्वीप वलय कहते हैं। अरब सागर के प्रमुख द्वीप\n  ऐलीफेन्टा द्वीप एवं भारत के दक्षिण पश्चिमी तट से 200 किमी से 320 किमी की दूरी\n  तक फैले लक्ष्यद्वीप, मिनीकाय और अमनद्वीप है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  उपरोक्त वर्णित भारत के भू-आकृतिक विभाग एक-दूसरे के पूरक हैं प्रायद्वीप भू-खंड\n  हैं जिनकी सामग्री से उत्तरी मैदान तथा हिमालय का निर्माण हुआ जो इस उपमहाद्वीप\n  को हजारों किलोमीटर की दूरी घेरे हुए है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  उत्तर की विशाल पर्वत श्रृंखला के कारण भारतीय उपमहाद्वीप एशिया के शेष भागों में\n  अलग-सा रहा है इसी पृथकता ने देश की एकरूपता को सुदृढ़ बनाने में सहायता प्रदान\n  की। इसलिए भारत विश्व के राष्ट्रों में अपना अलग एक विशिष्ट महत्व रखता है। इसकी\n  प्राकृतिक विविधता ही इसे विशिष्टता प्रदान करती है।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/3949614362307321355\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/significance-of-seaside-plain.html#comment-form","title":"0 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का पठार कहां है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eमालवा का पठार उत्तर में अरावली पर्वत दक्षिण में विंध्याचल व सतपुड़ा पर्वत और पश्चिम में गंगा के डेल्टा तक फैला हुआ है। इन्हें कई स्थानों पर नदियों ने खंडित कर दिया है जैसे- दक्षिण उत्तर प्रदेश में बुन्देलखंड तथा बघेलखंड, दक्षिण बिहार में छोटा नागपुर आदि। इसके अंतर्गत निम्नांकित उप-प्रदेश है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. विंध्याचल पर्वत श्रेणी\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- यह मालवा पठार में 120 किमी के विस्तार में फैली है। पश्चिम में खम्भात की खाड़ी से सासाराम तक विस्तृत है । इन पर्वतों की रचना बलुआ पत्थर तथा कर्वाटजाइट शैलों से हुई है। मैकाल श्रेणी विध्याचल तथा सतपुड़ा पर्वत को मिलाती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2. सतपुड़ा पर्वत श्रेणी\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- विंध्याचल पर्वत के समान्तर दक्षिण में नर्मदा तथा ताप्ती नदियों के मध्य सतपुड़ा श्रेणियों का विस्तार है। यह पश्चिम में गुजरात की राजपीपला पहाड़ियों से लेकर पूर्व में पचमढ़ी, मैकाल तथा सरगुजा पहाड़ियों के रूप में राँची, हजारीबाग (झारखंड) तक फैली हुई है। इसकी सबसे ऊँची चोटी धूपगढ़ (1480 मी.) पचमढ़ी में है। यह श्रेणी अधिकतर बेसाल्ट तथा ग्रेनाइट शैलों से बनी है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E3. छोटा नागपुर का पठार\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- यह पठार झारखंड के राँची, हजारीबाग, गया जिलों में है। इसकी औसत ऊँचाई 760 मीटर तक है किन्तु पार्श्वनाथ की ऊँचाई 1365 मीटर है। यह पठार खनिज संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत संपन्न है। यहाँ कोयला, ताँबा, बॉक्साइट, अभ्रक, क्रोमाइट, चिकनी मिट्टी, चूनापत्थर, टंग्सटन, फेल्सपार आदि खनिज मिलते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E4. अरावली पर्वत श्रेणी\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- यह श्रेणी भारत की प्राचीनतम वलित श्रेणी है। अपक्षय तथा अपरदन के कारकों ने इसे अपरदित कर अवशिष्ट पर्वत में बदल दिया है। इस श्रेणी का विस्तार अहमदाबाद के राजस्थान होते हुए दिल्ली तक 800 कि.मी. लंबाई में है, इसकी प्रमुख चोटियाँ माउण्ट आबू, जरगा पहाड़ियाँ, हर्षनाथ आदि है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E5. थार मरुस्थल\u003C\/b\u003E\u0026nbsp;- यह मरुस्थल राजस्थान के उत्तर-पश्चिम में लगभग 640 कि.मी. लंबा और 160 कि. मी. चौड़ा रेतीला मरुस्थल है। यह पवनों की दिशा में 150 मीटर तक ऊँचाई के बालुका स्तूप मिलते हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4067350430832420610\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/malwa-plateau.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4067350430832420610"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4067350430832420610"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/malwa-plateau.html","title":"मालवा का पठार कहां है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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अरावली पर्वत इस मैदान को दो नदी तंत्रों में विभाजित करता है।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eभारत के उत्तरी मैदान को दो भागों में विभाजित किया गया हैं। पश्चिमी मैदान और पूर्वी मैदान। यह मैदान 7 लाख वर्ग किलोमीटर लंबा और 320 किमी चौड़ा हैं। उत्तर भारत की प्रमुख नदी प्रणाली सिंधु गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली हैं। उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु के कारण उत्तरी मैदान मे साधन जनसंख्या पाया जाता हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eपश्चिमी\u0026nbsp;मैदान\u003C\/b\u003E -\u0026nbsp;इस मैदान में सिंधु एवं उसकी सहायक नदियाँ सतलज, रावी, व्यास, चिनाब और झेलम प्रवाहित होती है। इस मैदान का अधिकांश भाग पाकिस्तान में है। शेष भाग हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तरी व पश्चिमी राजस्थान में फैला है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eमैदान की ऊँचाई 210 मीटर से 250 मीटर तक है। यहाँ मिट्टी के टीले पाए जाते हैं। इन टीलों मे वर्षा ऋतु के समय जल भर जाने पर यह\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझील\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eका रूप ले लेती हैं जिसे ढांढ कहते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदो नदियों के मध्य भूमि को दोआब कहते है। पंजाब के उत्तर-पश्चिम भाग को पारी दोआब, पूर्वी भाग को विस्त दोआब, दक्षिण भाग को मालवा का मैदान तथा शेष भाग को हरियाणा का मैदान कहते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eपूर्वी मैदान\u003C\/b\u003E\u0026nbsp;- पूर्वी मैदान में गंगा यमुना और इनकी सहायक नदियाँ प्रवाहित होती है। इस मैदान का विस्तार उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के राज्यों में लगभग 375 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। नदियों द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी के निक्षेप के आधार पर इस मैदान को चार भागों में बांटा गया है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभाभर\u0026nbsp;- शिवालिक श्रेणियों के बाद दक्षिणी ढलानों पर नदियों द्वारा लाई गई कंकरीली बलुई मिट्टी के निक्षेप को भाभर कहते हैं। यह लगभग 8 कि.मी. चौड़ी पट्टी में फैला हुआ है। यह मैदान कम नमी होने के कारण अधिक उपजाऊ नहीं है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eतराई\u0026nbsp;- यह दक्षिण क्षेत्र का मैदान है। मैदान में ढाल की कमी के कारण जगह-जगह पर दलदल का निर्माण हो जाता है। यह यमुना और ब्रमहपुत्र नदी के मध्य स्थित हैं। इस क्षेत्र में घास औरसघन वन पाए जाते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eबांगर\u0026nbsp;- यह उत्तरी मैदान का वह भाग है। जहाँ नदियों द्वारा संग्रहित पुरानी मिट्टी से बने ऊँचे मैदान है। वर्षा ऋतु में नदियों की बाढ़ का जल यहाँ पहुँच पहुचता है। इस मैदान में चूना युक्त मिट्टी होती है जिसमें आर्द्रता कम होती है। पंजाब और उत्तर प्रदेश में बांगर भूमि का विस्तार अधिक है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eखादर\u0026nbsp;- खादर नवीन मिट्टी के निक्षेप से निर्मित मैदानी भाग हैं जो वर्षाकाल में बाढ़ग्रस्त हो जाते हैं। यहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ का पानी मिट्टी की पतली परत जमा कर देता है। इस प्रकार की भूमि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में पाया जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eउत्तरी मैदान का महत्व\u003C\/b\u003E\u0026nbsp;-\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eइसका विस्तार देश के कुल क्षेत्रफल का 1\/3 भाग है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eभारत की 45 प्रतिशत जनसंख्या इस मैदान पर निवास करती है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eयह विश्व का सबसे बड़ा उपजाऊ तथा समृद्ध प्रदेश है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eइस मैदान में सदा प्रवाहिनी नदियाँ बहती है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eउत्तम जलवायु के कारण व्यापार एवं उद्योग धंधों का केन्द्र है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eयहाँ यातायात के साधनों का जाल बिछा हुआ है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eयह मैदान भारतीय इतिहास संस्कृति, धर्म, राजनीति का केन्द्र बिन्दु रहा है।\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/8706894238294552768\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/northern-plains-of-india.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/8706894238294552768"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/8706894238294552768"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/northern-plains-of-india.html","title":"भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-6889239288350904667"},"published":{"$t":"2022-09-20T18:36:00.002+05:30"},"updated":{"$t":"2023-02-15T11:16:52.362+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"उत्तर भारत एवं दक्षिण भारत की नदियों की तुलना कीजिए"},"content":{"type":"html","$t":"\n\n\u003Ctable\u003E\n  \u003Ctbody\u003E\u003Ctr\u003E\n    \u003Cth\u003E\u003Cspan style=\"font-weight: 400; text-align: left;\"\u003Eउत्तरी भारत नदियाँ\u003C\/span\u003E\u003C\/th\u003E\n \n    \u003Cth\u003E\u003Cspan style=\"font-weight: 400; text-align: left;\"\u003Eदक्षिणी भारत की नदियाँ\u003C\/span\u003E\u003C\/th\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eये नदियाँ हिमालय से निकलने के कारण इनमें वर्ष भर जल भरा रहता है।\u003C\/td\u003E\n    \n    \u003Ctd\u003Eये नदियाँ पूर्णतः वर्षा के जल पर निर्भर रहती है, अतः ग्रीष्म ऋतु में इनमें जल कम हो जाता है।\u0026nbsp;\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eइन नदियों का बेसिन और जल ग्रहण क्षेत्र बहुत बड़ा है।\u0026nbsp;\u003C\/td\u003E\n    \n    \u003Ctd\u003Eइन नदियों का बेसिन और क्षेत्र बहुत छोटा होता है।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eये नदियाँ नवीन वलित पर्वतों से निकलती है इसलिए पर्वतीय भाग में इनका ढाल बहुत तेज होता है।\u003C\/td\u003E\n    \n    \u003Ctd\u003Eपर्वतों को छोड़कर इनका ढाल अत्यंत मंद है।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eये नदियाँ अभी भी युवावस्था में है।\u003C\/td\u003E\n    \n    \u003Ctd\u003E\u003Cp\u003Eदक्षिण भारत की नदियाँ प्राचीन एवं जीर्ण अवस्था में है।\u003C\/p\u003E\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eहिमालय की नदियाँ कम जल प्रपात बनाती है।\u0026nbsp;\u003C\/td\u003E\n    \n    \u003Ctd\u003Eइनमें अधिक प्राकृतिक जल प्रपात पाए जाते हैं।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eहिमालय से निकलने वाली नदियाँ अपने मध्यावर्ती भाग में विशाल समतल मैदानों का निर्माण करती है।\u003C\/td\u003E\n    \n    \u003Ctd\u003E\u0026nbsp;ये नदियाँ छोटे मैदानों का ही निर्माण करती है।\u0026nbsp;\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eइन नदियों में नौका चालन एवं नहरों द्वारा सिंचाई सुविधाएँ अधिक हैं।\u0026nbsp;\u003C\/td\u003E\n    \n    \u003Ctd\u003Eइन नदियों में नौका चालन एवं सिंचाई सुविधाएँ कम है।\u0026nbsp;\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eये नदियाँ अपनी घाटियों को लम्बवत काटती है।\u003C\/td\u003E\n    \n    \u003Ctd\u003Eये नदियाँ अपनी घाटियों को सिर्फ चौड़ा करने में आज भी संलग्न है।\u0026nbsp;\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n    \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eहिमालय की नदियाँ बाढ़ के समय उत्तम उपजाऊ काँप मिट्टी बिछाती हैं अतः इनके मैदान अधिक उपजाऊ है।\u0026nbsp;\u003C\/td\u003E\n    \n    \u003Ctd\u003Eदक्षिण भारत की नदियाँ प्राचीन कठोर शैली से होकर बहती है अतः बहुत कम मिट्टी का निक्षेप होता है।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n    \n    \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eये नदियाँ अपने पर्वतीय मार्ग में टेढ़ी-मेढ़ी बहकर मैदानी क्षेत्र में विसर्पों का निर्माण करती है ।\u0026nbsp;\u003C\/td\u003E\n    \n    \u003Ctd\u003Eये नदियाँ विसर्पों का निर्माण नहीं करती है यह सीधे मार्ग में बहती है।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n\n   \n \n  \n\u003C\/tbody\u003E\u003C\/table\u003E\n\n\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/6889239288350904667\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/compare-rivers-of-north-india-and-south.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/6889239288350904667"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/6889239288350904667"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/compare-rivers-of-north-india-and-south.html","title":"उत्तर भारत एवं दक्षिण भारत की नदियों की तुलना कीजिए"}],"author":[{"name":{"$t":"Dimple "},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/15517691135806317871"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEjeVgKQytCUGzVtHR8Wy4zFDDEV9IeK7YK1RjUaNewWzYR-VSYmozeVzsKlM6CiXbKnC2vg_-gBK1BsfaiXZofGleBDezmhcXE5V_fzKgIxC2wQhCpIb_5Kt_CS3DnMdA\/s220\/26cb1c537c21f79a953214103b93c686.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-265430219201414358"},"published":{"$t":"2022-09-19T12:55:00.013+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-20T23:06:43.687+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"मानसून की उत्पत्ति कैसे होती है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/monsoon-kise-kahate-hain.html\"\u003Eमानसून \u003C\/a\u003Eशब्द का अर्थ\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/02\/mausam-kise-kahate-hain.html\"\u003Eमौसम \u003C\/a\u003Eके अनुसार चलने वाली हवाओं से होती है। यह \nशब्द अरबी भाषा के मौसिम शब्द से बना है। पहली बार अरब सागर \nमें चलने वाली हवाओं के लिए इस शब्द का प्रयोग किया गया था। ये हवाएँ छः महीने भारत के उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम तथा छः महीने के दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्वी की ओर चलती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमानसून की उत्पत्ति कैसे होती है\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eउच्च वायुदाब \nक्षेत्रों से निम्न वायुदाब क्षेत्रों की ओर अर्थात् जल से थल भाग की तरफ हवाएँ चलती हैं और वर्षा करती हैं। शीत ऋतु में तापमान की \nदशाएँ विपरीत हो जाती है मध्य एशिया एवं भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी \nपश्चिमी भाग में तापमान बहुत गिर जाता है जिससे यहाँ उच्च वायुदाब विकसित होता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eथल की अपेक्षा जल धीरे-धीरे गर्म व ठंडा होता \nहै उस समय तक महासागर शीतल नहीं हो पाते हैं और उनका तापमान थल की अपेक्षा \nअधिक होता है जिससे वे निम्न वायुदाब क्षेत्र बन जाते हैं। शीत ऋतु में \nस्थल से जल की ओर हवाएँ चलने लगती है। ग्रीष्मकालीन हवाएँ दक्षिण पश्चिमी \nमानसून और शीतकालीन हवाएँ उत्तरपूर्वी मानसून कहलाती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eफलान विद्वान ने मानसून की उत्पत्ति की \nनवीन आधुनिक विचारधारा का प्रतिपादन किया है। जिसके अनुसार मानसूनी पवनों की उत्पत्ति मात्र वायुदाब तथा हवाओं के \nस्थानांतरण के कारण होती है। भूमध्य रेखा के पास कटिबंधीय अभिसरण\n उत्पन्न होता है। जिसे उष्ण \nकटिबंधीय अभिसरण कहते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउष्ण कटिबंधीय अभिसरण निम्न वायु \nदाब का क्षेत्र है जो उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी पवनों को \nएक-दूसरे से अलग करता है। इन भागों में विषुवत रेखीय हवाएँ स्थापित होती जाती हैं। जो ग्रीष्म ऋतु की \nदक्षिण पश्चिम मानसूनी हवाएँ होती हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइसके साथ अनेक वायुमण्डलीय तूफानी \nचक्रवातों की भी उत्पत्ति होती है जो कि दक्षिणी पूर्वी मानसून की \nविशेषता है। दक्षिणी पश्चिमी मानसून की भाँति उत्तर पूर्वी मानसून की उत्पत्ति, दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित निम्न दाब के कारण \nनहीं होती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eवास्तव में सूर्य की दक्षिणायन होने से वायुदाब दक्षिण की ओर खिसक जाती है, जिससे ये दक्षिणी पूर्वी एशिया से हट \nजाती हैं। परिणाम स्वरुप इन क्षेत्रों में उत्तरपूर्वी हवाओं का विस्तार हो जाता है। इन्हें ही शीतकालीन मानसून कहते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमानसूनी पवनों की उत्पत्ति के कारक\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eथल और जल भाग के तापीय अन्तर की प्रकृति।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eतिब्बत के पठार और हिमालय की उपस्थिति।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eतिब्बत और हिमालय पर निर्मित उच्च व निम्न वायुदाब।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eपछुआ हवा और जेट स्ट्रीम के मार्गो में परिवर्तन।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eभूमध्य रेखीय निम्नदाब पेटी का खिसकना।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eपश्चिमी विक्षोभ चक्रवात का उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में प्रवेश करना।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउपरोक्त सभी कारकों के सम्मिलित सहयोग तथा क्रियाओं से मानसूनी हवाओं की उत्पत्ति होती है। जेट स्ट्रीम क्षोभ मंडल के ऊपरी भाग में बहने वाली वायु धारा है। पश्चिमी \nजेट प्रवाह पश्चिम से पूर्व को प्रवाहित होता है इसके मार्ग में हिमालय पर्वत पड़ते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजिससे यह दो शाखाओं में विभाजित \nहो जाता है। उत्तरी जेट प्रवाह यह हिमालय के उत्तर और दक्षिण में बहता हैं। यह देश की जलवायु को प्रभावित करता है। वर्षा कराने वाली शीतकालीन चक्रवात इन्हीं के द्वारा लाए जाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E1. शीतकालीन मानसून\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eभारतीय\n शीत ऋतु की प्रमुख विशेषता तापमान और आर्द्रता का कम पाया जाना है। \nस्वच्छ आकाश, निम्न तापमान, कम आर्द्रता तथा वर्षा रहित दिन\n इस ऋतु की विशेषता है। यह ऋतु सुहावनी और आनंदप्रद होती है यह ऋतु मध्य \nनवम्बर से प्रारंभ हो जाती है और फरवरी तक रहती है। जनवरी इसका सबसे ठंडा \nमहीना होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. तापमान - \u003C\/b\u003Eशीत\n ऋतु में सूर्य की किरणें दक्षिणी गोलार्द्ध में सीधी पड़ती हैं तथा उत्तरी\n गोलार्द्ध में तिरछी जिससे उत्तरी गोलार्द्ध का तापमान कम होता है दिन \nछोटे होते हैं। उत्तर भारत के अधिकांश क्षेत्र में दैनिक तापमान 21° \nसे.ग्रे. से कम रहता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eरात में यह कहीं-कहीं हिमांक तक चला जाता है वहीं \nदक्षिण भारत के समुद्र तटीय क्षेत्र में समुद्र के प्रभाव के कारण सामान्य तापमान बना रहता है। देश के भीतरी भागों में तापमान अधिक पाया \nजाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2. वायुदाब एवं हवाएँ -\u003C\/b\u003E सूर्य की दक्षिणायन स्थिति के\n कारण भारतीय उपमहाद्वीप में उच्च वायुदाब का केन्द्र पाकिस्तान के पेशावर शहर के आसपास बन \nजाता है। दक्षिण के पठार पर अपेक्षाकृत वायुदाब कम होता है। उत्तर भारत के \nमैदानी भाग में उच्च वायुदाब का क्षेत्र होने के कारण यहाँ से हिन्द \nमहासागर की ओर उत्तर-पूर्व तथा दक्षिण-पश्चिम की ओर हवाएँ चलती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E3. वर्षा - \u003C\/b\u003Eहवाएँ\n स्थल से जल की ओर चलती है। हवाएं शुष्क होने के कारण वर्षा नहीं करती है \nकिन्तु\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/blog-post_3.html\"\u003Eअसम\u003C\/a\u003E, बंगाल क्षेत्र से चलने वाली हवाओं के रास्ते में बंगाल की \nखाड़ी पड़ती है। ये भाप ग्रहण कर लेती है और जैसे ही तमिलनाडू खाड़ी पार\n करके आती है। तो पूर्वी घाट की पहाड़ियों से टकराकर वर्षा करती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eये बारिश भारत \nमें चावल की फसल के लिए बहुत लाभप्रद होती है। इस तरह शीत ऋतु \nमें उत्तर-पूर्वी मानसून केवल तमिलनाडू में वर्षा करती है। उधर भारत के \nउत्तर-पश्चिम क्षेत्र में भूमध्य सागर से उठने वाले चक्रवात बनते हैं जो \nपछुआ हवाओं के सहारे यहाँ तक पहुँचते हैं और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, \nहिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तरी राजस्थान, झारखंड और बिहार \nमें वर्षा कराते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E2. ग्रीष्म कालीन मानसून\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eग्रीष्म कालीन मानसून भारत में 15 जून से 15 सितम्बर तक रहती है। इसे वर्षा ऋतु के नाम से जाना जाता हैं। यह\u0026nbsp; दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में \nजून से मध्य सितंबर तक वर्षा करती है। इस समय अधिकतर राज्यों में वर्षा होती हैं।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. तापमान - \u003C\/b\u003E15\n जून के बाद भारत के तापमान में 3° से 6° से.ग्रे. तक कमी आती है। लंबे समय\n तक वर्षा नहीं होती है तो बीच-बीच में तापमान बढ़ता जाता है। अगस्त माह \nमें तापमान में और अधिक कमी आती है। थार के मरूस्थल का तापमान लगभग 38° \nसे.ग्रे. तक रहता है। शेष भारत में औसत तापमान 30° से 32° से.ग्रे. के मध्य\n रहता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2. वायुदाब एवं हवाएँ -\u003C\/b\u003E मई और जून के महीने में \nभारत अत्यधिक गर्म हो जाता है। जिससे उत्तर-पश्चिमी मैदानी भाग में न्यून \nवायुदाब का क्षेत्र बन जाता है तथा हिन्द महासागर पर अपेक्षाकृत \nउच्च वायुदाब रहता है। अतः हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर चलने लगती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूमध्य\n रेखा पार करने पर हवाएँ दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व \nदिशा में चलने लगती है। समुद्र से आने के कारण ये भाप भरी होती है। ये वर्षा\n वाहिनी हवाएँ तीव्र गति से चलती है। इनकी औसत गति 30 कि.मी. प्रति घंटा तक होती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E3. वर्षा - \u003C\/b\u003Eजून के प्रारम्भ में मानसूनी हवाओं के साथ \nबादलों का प्रचंड गर्जन और बिजली चमकना शुरु हो जाता है और तीव्र वर्षा \nशुरु हो जाती है। इसे मानसून का फटना कहा जाता है। यह वर्षा भारत के आंतरिक भागों\n में जुलाई तक पहुँच जाता है जिससे तापमान में काफी गिरावट आ जाती है, \nचूँकि यह हवाएँ दक्षिण–पश्चिम से आती है इसलिए इन्हें दक्षिणी-पश्चिमी \nमानसून कहते हैं।\u003Cbr \/\u003E\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E3. अन्य मानसून\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eअरब सागरीय मानसून - \u003C\/b\u003Eअरब सागर से होते हुए\n हवाओं का एक हिस्सा भारत के पश्चिम तट में प्रवेश करता है, जहाँ पश्चिमी \nघाट पर्वत से टकराकर पश्चिमी मैदान में पर्याप्त वर्षा कराती है और पूर्वी \nढलानों तक आते-आते वर्षा कराने की क्षमता में काफी कम आ जाती है। इसी \nकारण पुणे और मुम्बई के वर्षा में काफी अंतर होता है। आगे यह पूर्वी महाराष्ट्र \nएवं मध्यप्रदेश मे वर्षा करते हुए गंगा के मैदान में प्रवेश करती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअरब सागरीय मानसून \nकी शाखा का दूसरा भाग खम्भात की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी से होता हुआ \nगुजरात, सौराष्ट्र पहुँचता है। यहाँ से पश्चिमी राजस्थान और अरावली पर्वत \nश्रेणियों के समानांतर होकर आगे यह पंजाब और हरियाणा पहुँचकर अंत में बंगाल\n की खाड़ी से मिलती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eबंगाल की खाड़ी मानसून -\u003C\/b\u003E इनसे \nभारत के अधिकांश भागों में वर्षा होती है। यह शाखा बंगाल की खाड़ी से चलकर\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/myanmar-in-hindi.html\"\u003Eम्यांमार\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eकी पहाड़ियों से टकराकर पर्वत तटीय मैदानों में भारी \nवर्षा कराती है। इसकी एक शाखा गंगा के डेल्टा से होकर मेघालय के पहाड़ियों से टकराती है और एकदम 15,000 मीटर की ऊँचाई तक उठ जाती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eवहीं पहाड़ियों के दक्षिण में मासिनराम स्थित है। जो भारत का सर्वाधिक वर्षा\n वाला स्थान है। इस पहाड़ी के बाद मानसून दो हिस्सों में विभक्त हो जाती \nहै। पहली शाखा उत्तर पश्चिम की ओर हिमालय की तलहटी के सहारे चलती है। जबकि\u0026nbsp;दूसरी शाखा उत्तर पूर्व से असम की ओर बढ़ती है किन्तु असम में पर्वतीय भाग अधिक ऊँचे नहीं होने के कारण यहाँ वर्षा बहुत कम होती है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत में वर्षा का वितरण\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eभारत\n में वर्षा का वितरण असमान है। थार मरुस्थल में 15 सेमी से कम वर्षा होती\n है तो मॉसिन राम (चेरापूँजी) में विश्व की सर्वाधिक वर्षा 1080 सेमी होती \nहै। वर्षा के इस प्रादेशिक अंतर के कारण वार्षिक वर्षा की प्राप्ति के आधार\n पर इसे चार भागों में विभाजित किया जाता है। \u003Cbr \/\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्र \u003C\/b\u003E-\n इसके अंतर्गत वे क्षेत्र आते हैं जहाँ 200 सेमी या इससे भी अधिक वार्षिक\n वर्षा होती है। इसमें पश्चिमी तट के कोंकण मलाबार दक्षिण किनारा क्षेत्र \nहिमालय की तलहटी, उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल के भाग, मेघालय, असम, \nनागालैण्ड, मिजोरम, अरूणाचल, मणिपुर और त्रिपुरा आते हैं। रवासी तथा जयंति \nके कुछ पहाड़ी भागों में 1,000 सेमी से भी अधिक वर्षा होती है। मासिनराम \nतथा निकटवर्ती क्षेत्रों में औसत वार्षिक वर्षा 1080 सेमी है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2. अधिक वर्षा वाले क्षेत्र - \u003C\/b\u003Eइन\n क्षेत्रों में 100 से 200 सेमी औसत वार्षिक वर्षा होती है। 100 सेमी वार्षिक वर्षा की रेखा गुजरात के तट के दक्षिण की ओर पश्चिमी घाट \nके समानांतर कन्याकुमारी तक जाती है। इस रेखा के पश्चिम में 100 सेमी से 200\n सेमी तक तथा पूर्व के प्रायद्वीपीय प्रदेशों में 60 सेमी से कम वर्षा \nहोती है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्र पश्चिमी घाट के पूर्वोत्तर ढाल, पश्चिम \nबंगाल के दक्षिण-पश्चिमी भाग, उड़ीसा, बिहार, दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश \nतथा हिमालय की तराई की संकरी पेटी शामिल है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E3. साधारण वर्षा वाले क्षेत्र - \u003C\/b\u003Eइन\n क्षेत्रों में औसत वर्षा 50 सेमी से 100 सेमी तक होती है। इनमें दक्कन का \nपठारी भाग, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरी व दक्षिणी आन्ध्रप्रदेश,\n कर्नाटक, पूर्वी राजस्थान, दक्षिणी पंजाब, हरियाणा एवं दक्षिणी उत्तर \nप्रदेश शामिल है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E4. न्यून वर्षा वाले क्षेत्र - \u003C\/b\u003Eइन क्षेत्रों\n में 50 सेमी से भी कम वर्षा होती है। इनके अंतर्गत राजस्थान का अधिकांश \nभाग, हरियाणा व उड़ीसा के कुछ भाग,\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/tamil-nadu-ki-rajdhani-kya-hai.html\"\u003Eतमिलनाडु\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eके रायल सीमा क्षेत्र आते हैं।\n राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भाग थार मरुस्थल में तो कहीं-कहीं 15 सेमी से \nभी कम वर्षा होती है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमानसून की विशेषताएं\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eग्रीष्मकालीन\n मानसून से देश की कुल वर्षा का 75 प्रतिशत तथा लौटती मानसून द्वारा 13 प्रतिशत शीतकालीन मानसून द्वारा 2 \nप्रतिशत एवं पूर्व मानसून काल में 10 प्रतिशत वर्षा होती है। वर्षा\n ऋतु में वर्षा लगातार नहीं होती है वरन बीच-बीच में वर्षा विहीन काल भी \nहोता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eवर्षा अनियमित और अनिश्चित होती है। लंबे समय तक वर्षा न होने पर \nकई बार फसलों की क्षति भी होती है। भारत \nमें वर्षा अनिश्चित भी होती है। कभी समय से पहले कभी समय पर और कभी बहुत \nदेर से आरंभ होती है। इसकी अवधि कभी बहुत छोटी तो कभी लंबी और उपयुक्त भी \nहोती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभारत की वर्षा पर्वतीय वर्षा है।\n पर्वतों के अनुकूल ढलानों पर पर्याप्त वर्षा तथा विपरीत ढलानों में बहुत कम वर्षा होती है। भारत में अधिकांशतः वर्षा मूसलाधार होती है जिससे वर्षा का अधिकांश जल व्यर्थ ही बह जाता है। भारत में मानसूनी वर्षा से कहीं सूखे के कारण अकाल तो कहीं पर बाढ़ों से तबाही आ जाती है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमौसम और जलवायु का प्रभाव\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eभौगोलिक\n पर्यावरण के सभी कारकों में जलवायु सबसे महत्वपूर्ण कारक है। जो मानव \nजीवन के संपूर्ण पक्षों को प्रभावित करता है। भारत की जलवायु यहाँ के \nनिवासियों पर निम्नांकित प्रभाव डालती है -\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E1. भारत एक \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/05\/blog-post_33.html\"\u003Eकृषि\u003C\/a\u003E प्रधान \nदेश है। लोगों का प्रमुख कार्य कृषि है जो पूर्णतः तापमान और\u0026nbsp;वर्षा पर निर्भर करती है। तापमान और वर्षा के अनुरूप ही देश के \nभिन्न-भिन्न भागों में भिन्न-भिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती है। जैसे - अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल, मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों में गेहूँ\n तथा न्यून वर्षा वाले क्षेत्रों में मोटे अनाज उत्पन्न किए जाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E2.\n जलवायु का देश में जनसंख्या के वितरण एवं घनत्व पर भी प्रभाव दिखाई\n देता है। जिन क्षेत्रों में अनुकूल जलवायु पाई जाती है। वहाँ सघन जनसंख्या\n निवास करती है तथा प्रतिकूल जलवायु के क्षेत्रों में विरल जनसंख्या निवास \nकरती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउदाहरणा के लिए, गंगा घाटी तथा समुद्री तटीय मैदानों में अच्छी\n जलवायु के कारण अधिक जनसंख्या होती है जबकि थार मरुस्थल\n के उष्ण व शुष्क जलवायु के कारण यहाँ जनसंख्या बहुत कम है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E3. \nमनुष्य के आर्थिक क्रियाकलाप जैसे शिकार करना, मछली पकड़ना, लकड़ी काटना, \nपशुपालन, कृषि, उद्योग व्यापार सभी जलवायु द्वारा नियंत्रित होते हैं, मानव\n कहाँ पर कृषि करेगा, कहाँ पर शिकार करेगा, कहाँ वनोद्योग सभी जलवायु पर ही\n निर्भर होते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E4. उद्योग और व्यापार पर भी जलवायु का प्रभाव पड़ता है। हिमालय पर्वत के तराई प्रदेश में वनोद्योग, राजस्थान में पशुचारण, \nमध्यप्रदेश में बीड़ी उद्योग एवं असम व पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग का \nविकास इन प्रदेश की जलवायु का ही परिणाम हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E5. परिवहन तथा व्यापार \nपर भी जलवायु का गहरा प्रभाव पड़ता है, आँधी, तूफान, वर्षा, कोहरा आदि का \nसड़क, रेल, वायु तथा जल परिवहन पर प्रभाव पड़ता है। परिवहन में व्यवधान \nपड़ने से व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/265430219201414358\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-monsoon-called-in-hindi.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/265430219201414358"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/265430219201414358"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-monsoon-called-in-hindi.html","title":"मानसून की उत्पत्ति कैसे होती है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-5608789907112680230"},"published":{"$t":"2022-09-12T07:44:00.002+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-10T08:50:14.599+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"मलक्का जलडमरूमध्य क्या है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eमलक्का जलडमरूमध्य 800 किमी लंबा और 65-250 किमी चौड़ा जलसन्धि हैं। यह मलय प्रायद्वीप से उत्तर-पूर्व और इंडोनेशियाई द्वीप सुमात्रा के बीच पानी का खंड है। यह अंडमान सागर और चीन सागर को जोड़ता है। हिन्द महासागर और प्रशांत महासागरों के बीच मुख्य शिपिंग चैनल के रूप मेंकार्य करता हैं। यह दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग लेन में से एक है। इसका नाम मलक्का सल्तनत के नाम पर रखा गया है जिसने 1400 और 1511 के बीच जलडमरूमध्य पर शासन किया था। जिसके प्रशासन का केंद्र मलेशिया के आधुनिक राज्य मलक्का में स्थित था।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5608789907112680230\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-strait-of-malacca.html#comment-form","title":"0 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की\n    रेखाएँ होती हैं। जैसे क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर रेखाएँ, समानांतर और लंबवत\n    रेखाएँ।\u003C\/span\n  \u003E\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eकाल्पनिक रेखा क्या है\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eकाल्पनिक रेखा\u003C\/b\u003E आमतौर पर किसी भी प्रकार की ज्यामितीय रेखा होती है जो\n  भौतिक रूप से मौजूद नहीं होती है। वास्तव में, इनका उपयोग मानचित्र पर स्थानों की\n  ठीक से पहचान करने के लिए किया जाता है। कोई भी धुरी जिसके चारों ओर कोई वस्तु\n  घूमती है, एक काल्पनिक रेखा है। एक काल्पनिक रेखा एक भौगोलिक अवधारणा के रूप में\n  काम कर सकती है। नीचे कुछ उदहारण दिए गए हैं -\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cb\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eअण्टार्कटिक\u0026nbsp;रेखा\u003C\/span\u003E\u003C\/b\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  अंटार्कटिक रेखा भूमध्य रेखा के लगभग 66.5 डिग्री दक्षिण में पृथ्वी पर अक्षांश\n  के समानांतर है। दक्षिणी ग्रीष्म संक्रांति के दिन (प्रत्येक वर्ष 22 दिसंबर के\n  आसपास), अंटार्कटिक रेखा पर पूरे 24 घंटों के लिए क्षितिज के ऊपर सूर्य होता हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  अंटार्कटिक रेखा से आगे दक्षिण में सूर्य कई दिनों तक क्षितिज से ऊपर रहता है, और\n  दक्षिणी ध्रुव पर, छह महीने का 'दिन' होता है जो शरद ऋतु के विषुव से शुरू होकर\n  छह महीने की 'रात' में बदल जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  66.5 डिग्री कोण पृथ्वी के घूर्णन अक्ष (23.5 डिग्री) के झुकाव से आता है, जैसे\n  कि 90 डिग्री - 23.5 डिग्री = 66.5 डिग्री।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cb\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eआर्कटिक वृत्त\u003C\/span\u003E\u003C\/b\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  आर्कटिक वृत्त दो ध्रुवीय वृत्तों में से एक है, और अक्षांश के पाँच प्रमुख\n  वृत्तों में से सबसे उत्तरी वृत्त है जैसा कि पृथ्वी के मानचित्रों में दिखाया\n  गया है। इसका दक्षिणी समकक्ष अंटार्कटिक सर्कल है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  आर्कटिक सर्कल दक्षिणी अक्षांश को चिह्नित करता है, जिस पर, दिसंबर संक्रांति पर,\n  उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे छोटा दिन होता हैं, सूरज पूरे दिन नहीं उगता है,\n  और जून संक्रांति पर, उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है। जिस दिन\n  सूरज अस्त नहीं होता हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  इन घटनाओं को क्रमशः ध्रुवीय रात और मध्यरात्रि सूर्य के रूप में जाना जाता है,\n  और आगे उत्तर की ओर बढ़ता है। रूसी बंदरगाह से सिर्फ 3 डिग्री ऊपर मध्य सर्दियों\n  में सूरज लगातार 40 दिनों तक नहीं उगता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  आर्कटिक वृत्त की स्थिति निश्चित नहीं है और वर्तमान में भूमध्य रेखा के उत्तर\n  में 66°33′49.2 में स्थित है। इसका अक्षांश पृथ्वी के अक्षीय झुकाव पर निर्भर\n  करता है, जो चंद्रमा की कक्षा से उत्पन्न होने वाली ज्वारीय ताकतों के कारण\n  उतार-चढ़ाव करता है। नतीजतन, आर्कटिक सर्कल वर्तमान में प्रति वर्ष लगभग 14.5\n  मीटर या 48 फीट की गति से उत्तर की ओर बढ़ रहा है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभूमध्य रेखा\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भूमध्य रेखा अक्षांश का एक चक्र है, जो परिधि में लगभग 40,075 किमी लंबा हैं, यह\n  रेखा पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में विभाजित करता है। यह एक काल्पनिक\n  रेखा है जो 0 डिग्री अक्षांश पर, उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच में स्थित है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  स्थानिक ज्यामिति में, जैसा कि खगोल विज्ञान में लागू होता है, एक घूर्णन गोलाकार\n  का भूमध्य रेखा समानांतर होता है, जिस पर अक्षांश को 0° के रूप में परिभाषित किया\n  जाता है। यह गोलाकार पर एक काल्पनिक रेखा है, जो इसके ध्रुवों से समान दूरी पर\n  है,\u0026nbsp; जो इसे उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में विभाजित करती है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भूमध्य रेखा पर हर दिन दोपहर के समय सूरज की रोशनी सीधे पड़ती हैं।नतीजतन, भूमध्य\n  रेखा में पूरे वर्ष एक स्थिर दिन का तापमान होता है। विषुवों पर लगभग 20 मार्च और\n  23 सितंबर तक उप-सौर बिंदु पृथ्वी के भूमध्य रेखा को उथले कोण पर पार करता है,\n  सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के घूर्णन अक्ष के लंबवत चमकता है, और सभी अक्षांशों में\n  लगभग 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात होती है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमकर रेखा\u0026nbsp;\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  मकर रेखा अक्षांश के पांच प्रमुख मंडलों में से एक है जिसे आप मानचित्र या ग्लोब\n  पर पाएंगे। ये अक्षांश काल्पनिक पूर्व-पश्चिम वृत्त हैं जो पृथ्वी पर स्थिति को\n  इंगित करते हैं, जब देशांतर की रेखाओं के साथ युग्मित होते हैं, जो उत्तरी और\n  दक्षिणी ध्रुवों और भूमध्य रेखा को प्रतिच्छेद करने वाले काल्पनिक वृत्त\n  हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  मकर और कर्क रेखाएं चित्रित की गईं क्योंकि वे दोनों गोलार्द्धों के भीतर हैं\n  जहां सूर्य के सीधे ऊपर होना संभव है। प्राचीन यात्रियों के लिए जो अपने मार्ग का\n  मार्गदर्शन करने के लिए स्वर्ग का उपयोग करते थे, ये महत्वपूर्ण सीमांकन रेखाएँ\n  थीं। अक्षांश की पाँच प्रमुख रेखाएँ पृथ्वी पर विशिष्ट बिंदुओं को चिह्नित करती\n  हैं.\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  मकर रेखा भूमध्य रेखा के दक्षिण में 23.4394 डिग्री पर स्थित है और सबसे दक्षिणी\n  अक्षांश को चिह्नित करती है जिस पर दोपहर के समय सूर्य सीधे ऊपर की ओर दिखाई दे\n  सकता है। यह घटना दिसंबर संक्रांति पर होती है, जब दक्षिणी गोलार्ध झुका हुआ होता\n  है। पृथ्वी के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच सब कुछ\n  शामिल है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eकर्क रेखा\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  कर्क रेखा, जिसे उत्तरी उष्णकटिबंधीय भी कहा जाता है, पृथ्वी पर अक्षांश का सबसे\n  उत्तरी वृत्त है जिस पर सूर्य सीधे ऊपर की ओर हो सकता है। यह जून संक्रांति पर\n  होता है, जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अपनी अधिकतम सीमा तक झुका होता है। यह\n  दिसंबर संक्रांति पर सौर मध्यरात्रि में क्षितिज से 90 डिग्री नीचे तक पहुंच जाता\n  है। निरंतर अद्यतन सूत्र का उपयोग करते हुए, वृत्त वर्तमान में भूमध्य रेखा के\n  उत्तर में 23°26′10.8 है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  इसका दक्षिणी गोलार्ध समकक्ष, सबसे दक्षिणी स्थिति को चिह्नित करता है जिस पर\n  सूर्य सीधे ऊपर की ओर हो सकता है, मकर रेखा है। ये उष्णकटिबंधीय अक्षांश के पाँच\n  प्रमुख वृत्तों में से दो हैं जो पृथ्वी के मानचित्रों को चिह्नित करते हैं, अन्य\n  आर्कटिक और अंटार्कटिक वृत्त और भूमध्य रेखा हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  अक्षांश के इन दो वृत्तों की स्थिति पृथ्वी की कक्षा के तल के सापेक्ष घूर्णन की\n  धुरी के झुकाव से निर्धारित होती है, और जब से झुकाव बदलता है, इन दो मंडलियों का\n  स्थान भी बदल जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4601580709146881930\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-imaginary-line.html#comment-form","title":"0 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उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच में स्थित है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eघूर्णन गोलाकार का भूमध्य रेखा समानांतर होता है जिस पर अक्षांश को 0 डिग्री के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह गोलाकार पर एक काल्पनिक रेखा है, जो इसके ध्रुवों से समान दूरी पर है, इसे उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में विभाजित करती है। दूसरे शब्दों में, यह गोलाकार का प्रतिच्छेदन है जिसमें विमान अपने घूर्णन अक्ष के लंबवत है और इसके भौगोलिक ध्रुवों के बीच में है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूमध्य रेखा पर दोपहर के समय सूरज की रोशनी\u0026nbsp;\u0026nbsp;साल भर\u0026nbsp;सीधे ऊपर पड़ती हैं। नतीजतन, भूमध्य रेखा में पूरे वर्ष एक स्थिर दिन का तापमान होता है। विषुवों पर उप-सौर बिंदु पृथ्वी के भूमध्य रेखा को पार करता है, सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के घूर्णन की धुरी के लंबवत चमकता है, और सभी अक्षांशों में लगभग 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात होती है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/590535081879510868\/comments\/default","title":"Post 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ओशिनिया का उच्च अक्षांश भी शामिल है। न्यूजीलैंड जैसे\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागरीय\u003C\/a\u003E द्वीप देश। 35°N और 35°S अक्षांशों के बीच, हिमनद केवल हिमालय, एंडीज\n  और पूर्वी अफ्रीका, मैक्सिको, न्यू गिनी और ईरान में ज़र्द कुह पर कुछ ऊँचे\n  पहाड़ों में पाए जाते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eहिमनद किसे कहते हैं\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003E\n  हिमनद घनी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ice.html\"\u003Eबर्फ\u003C\/a\u003E का एक सतत पिंड है जो लगातार अपने वजन के नीचे घूम रहा है। एक\n  ग्लेशियर बनता है जहां बर्फ का संचय कई वर्षों में, अक्सर सदियों से अधिक हो जाता\n  है. ग्लेशियर धीरे-धीरे विकृत होते हैं और अपने वजन से प्रेरित तनावों के तहत\n  बहते हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  जिससे दरारें , सेराक और अन्य विशिष्ट विशेषताएं बनती हैं। वे अपने सब्सट्रेट से\n  चट्टान और मलबे को भी हटाते हैं ताकि लैंडफॉर्म जैसे कि सर्क , मोराइन , या\n  फोजर्ड बना सकें। ग्लेशियर केवल जमीन पर बनते हैं और बहुत पतले समुद्री बर्फ और\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझील\u003C\/a\u003E की बर्फ से अलग होते हैं जो पानी के निकायों की सतह पर बनते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  7,000 से अधिक ज्ञात ग्लेशियरों के साथ, पाकिस्तानध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर किसी\n  भी अन्य देश की तुलना में अधिक हिमनदीय बर्फ है। ग्लेशियर पृथ्वी की सतह का लगभग\n  10% हिस्सा कवर करते हैं। महाद्वीपीय ग्लेशियर लगभग 13 मिलियन किमी 2 या\n  अंटार्कटिका के 13.2 मिलियन किमी 2\u0026nbsp; के लगभग 98% को कवर करते हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  जिसकी औसत मोटाई 2,100 मीटरहै। ग्रीनलैंड और पेटागोनिया में भी महाद्वीपीय\n  हिमनदों का विशाल विस्तार है। अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की बर्फ की चादरों सहित\n  ग्लेशियरों की मात्रा का अनुमान 170,000 किमी 3 है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  हिमनद बर्फ पृथ्वी पर ताजे पानी का सबसे बड़ा भंडार है , जिसमें बर्फ की चादरें\n  हैं जो दुनिया के ताजे पानी का लगभग 69 प्रतिशत है। शीतोष्ण, अल्पाइन और मौसमी\n  ध्रुवीय जलवायु के कई ग्लेशियर ठंडे मौसम में पानी को बर्फ के रूप में जमा करते\n  हैं और बाद में इसे पिघले पानी के रूप में छोड़ते हैं क्योंकि गर्म गर्मी के\n  तापमान के कारण ग्लेशियर पिघलते हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  जिससे एक जल स्रोत बनता है जो विशेष रूप से है पौधों, जानवरों और मानव उपयोगों के\n  लिए महत्वपूर्ण है जब अन्य स्रोत कम हो सकते हैं। हालांकि, उच्च ऊंचाई और\n  अंटार्कटिक वातावरण के भीतर, मौसमी तापमान अंतर अक्सर पिघला हुआ पानी छोड़ने के\n  लिए पर्याप्त नहीं होता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  चूंकि हिमनद\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/blog-post_92.html\"\u003Eद्रव्यमान\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eदीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होता है, उदाहरण\n  के लिए, वर्षा , औसत तापमान और बादल कवर , हिमनद द्रव्यमान परिवर्तन को जलवायु\n  परिवर्तन के सबसे संवेदनशील संकेतकों में से एक माना जाता है और समुद्र के स्तर\n  में बदलाव का एक प्रमुख स्रोत है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  संपीड़ित बर्फ का एक बड़ा टुकड़ा, या एक ग्लेशियर, नीला दिखाई देता है , क्योंकि\n  बड़ी मात्रा में पानी नीला दिखाई देता है । ऐसा इसलिए है क्योंकि पानी के अणु\n  नीले रंग की तुलना में अन्य रंगों को अधिक कुशलता से अवशोषित करते हैं।\n  ग्लेशियरों के नीले रंग का दूसरा कारण हवा के बुलबुले की कमी है। हवा के बुलबुले,\n  जो बर्फ को सफेद रंग देते हैं, निर्मित बर्फ के घनत्व को बढ़ाकर दबाव से निचोड़ा\n  जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4818894243649090379\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-glacier.html#comment-form","title":"0 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patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-9158806768733855272"},"published":{"$t":"2022-09-04T19:04:00.005+05:30"},"updated":{"$t":"2023-12-14T07:05:32.140+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"ग्रीनहाउस प्रभाव क्या होता है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eग्रीनहाउस गैस एक ऐसी गैस है जो थर्मल इंफ्रारेड ऊर्जा को अवशोषित और उत्सर्जित करती है, जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव होता है। पृथ्वी के वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसें जल वाष्प H 2O, कार्बन डाइऑक्साइड CO 2, मीथेन CH 4, नाइट्रस ऑक्साइड N 2O, और ओजोन O3 हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eग्रीनहाउस प्रभाव क्या होता है\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eग्रीनहाउस प्रभाव एक ऐसी प्रक्रिया है जो तब होती है जब किसी ग्रह के तारे की ऊर्जा उसके वायुमंडल से होकर जाती है और ग्रह की सतह को गर्म करती है। लेकिन वातावरण की गर्मी को अंतरिक्ष में लौटने से रोकता है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रह का वातावरण गर्म होता रहता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसूर्य से आने वाली गर्मी को कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों द्वारा अवशोषित करती रहती है। प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव के बिना, पृथ्वी का औसत तापमान ठंड से काफी नीचे होगा। ग्रीनहाउस गैसों में वर्तमान मानव-जनित वृद्धि अधिक मात्रा में गर्मी को फंसाती है, जिससे पृथ्वी समय के साथ गर्म होती जाती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकोई भी गर्म वस्तु अपने तापमान से संबंधित ऊर्जा को विकीर्ण करती है - लगभग 5,500 डिग्री सेल्सियस पर सूर्य सबसे अधिक दृश्यमान और निकट अवरक्त प्रकाश भेजता है, जबकि पृथ्वी की औसत सतह का तापमान लगभग 15 डिग्री सेल्सियस लंबी तरंग दैर्ध्य अवरक्त विकिरण गर्मी का उत्सर्जन करता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eवायुमंडल अधिकांश आने वाली धूप के लिए पारदर्शी है, और इसकी ऊर्जा को सतह तक ले जाने की अनुमति देता है। ग्रीनहाउस प्रभाव शब्द एक त्रुटिपूर्ण सादृश्य से आता है, जिसकी तुलना पारदर्शी कांच से की जाती है , जो ग्रीनहाउस में सूर्य के प्रकाश की अनुमति देता है, लेकिन ग्रीनहाउस मुख्य रूप से इस प्रभाव के विपरीत, हवा की गति को प्रतिबंधित करके गर्मी बनाए रखते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअधिकांश वातावरण अवरक्त के लिए पारदर्शी है, लेकिन ग्रीनहाउस गैसों का एक छोटा अनुपात सतह द्वारा उत्सर्जित तरंग दैर्ध्य के लिए इसे लगभग पूरी तरह से अपारदर्शी बना देता है। ग्रीनहाउस गैस के अणु इस इन्फ्रारेड को अवशोषित और उत्सर्जित करते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइसलिए गर्म करें और सभी दिशाओं में उज्ज्वल गर्मी का उत्सर्जन करें, अन्य ग्रीनहाउस गैस अणुओं को गर्म करें, और गर्मी को आसपास की हवा में पास करें। नीचे की ओर जाने वाली दीप्तिमान गर्मी सतह के तापमान को और बढ़ा देती है, जिससे वातावरण में ऊर्जा बढ़ जाती है। पृथ्वी के प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव के बिना पृथ्वी 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक ठंडी होगी।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसूर्य का प्रकाश दिन और रात, मौसम के अनुसार और भूमध्य रेखा से दूरी के अनुसार बदलता रहता है। उपलब्ध सूर्य के प्रकाश का लगभग आधा भाग बादलों से और पृथ्वी की सतह से परावर्तित होता है, जो उनकी परावर्तनशीलता पर निर्भर करता है। ग्रीनहाउस गैसों का प्रभाव, वातावरण में समय और ऊंचाई में भिन्नता होती है, जिससे सकारात्मक प्रतिक्रिया होती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपृथ्वी के ताप इंजन द्वारा ऊर्जा प्रवाह के कारण भिन्नताएं समान हो जाती हैं । आखिरकार, वायुमंडल की ऊंची\u0026nbsp;परत\u0026nbsp;अंतरिक्ष में उतनी ही ऊर्जा का उत्सर्जन करती हैं जितनी सूर्य से आ रही है, जिससे पृथ्वी का ऊर्जा संतुलन बनता है। एक भगोड़ा ग्रीनहाउस प्रभाव तब होता है जब सकारात्मक प्रतिक्रिया से वातावरण में सभी ग्रीनहाउस गैसों का वाष्पीकरण होता है, जैसा कि शुक्र पर कार्बन डाइऑक्साइड और जल वाष्प के साथ हुआ था।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eग्रीनहाउस गैस क्या है\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eग्रीनहाउस गैस एक ऐसी गैस है जो थर्मल इंफ्रारेड रेंज के भीतर उज्ज्वल ऊर्जा को अवशोषित और उत्सर्जित करती है, जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव होता है। पृथ्वी के वायुमंडल में प्राथमिक ग्रीनहाउस गैसें जल वाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और ओजोन हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eग्रीनहाउस गैसों के बिना, पृथ्वी की सतह का औसत तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के वर्तमान औसत के बजाय लगभग -18 डिग्री सेल्सियस होगा। शुक्र, मंगल और टाइटन के वायुमंडल में भी ग्रीनहाउस गैसें हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eऔद्योगिक क्रांति की शुरुआत के बाद से मानवीय गतिविधियों ने कार्बन डाइऑक्साइड की वायुमंडलीय सांद्रता को लगभग 50% बढ़ा दिया है, जो 1750 में 280 पीपीएम से 2021 में 419 पीपीएम हो गया है।\u0026nbsp; पिछली बार कार्बन डाइऑक्साइड की वायुमंडलीय सांद्रता थी यह उच्च 3 मिलियन वर्ष पहले था। कार्बन चक्र में विभिन्न प्राकृतिक कार्बन सिंक द्वारा आधे से अधिक उत्सर्जन के अवशोषण के बावजूद यह वृद्धि हुई है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eवर्तमान ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन दर पर, तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। जो कि संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल का कहना है कि 2050 तक खतरनाक स्तरों से बचने के लिए ऊपरी सीमा है। मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का विशाल बहुमत जीवाश्म ईंधन, मुख्य रूप से कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के दहन से आता है। सीमेंट निर्माण, उर्वरक से अतिरिक्त योगदान के साथउत्पादन, वनों की कटाई और भूमि उपयोग में अन्य परिवर्तन।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/9158806768733855272\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/green-house-effect-in-hindi.html#comment-form","title":"0 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यहाँ कम वर्षा होती है, और यह दुनिया का सबसे बड़ा कोहरा वाला रेगिस्तान है। अटाकामा रेगिस्तान 105,000 किमी2 में फैला हुआ है। अधिकांश रेगिस्तान पथरीले इलाकों, नमक की झीलों और फेल्सिक लावा से बना है जो एंडीज की ओर बहता है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1823542784668030237\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/atacama-desert-in-hindi.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/1823542784668030237"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/1823542784668030237"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/atacama-desert-in-hindi.html","title":"अटाकामा मरुस्थल कहां स्थित 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में दक्षिणी महासागर से जुड़ता है। वैज्ञानिक अक्सर अटलांटिक को दो घाटियों में विभाजित करते हैं: उत्तरी अटलांटिक और दक्षिण अटलांटिक।"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/2678323379998673233\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/atlantic-ocean-in-hindi.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/2678323379998673233"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/2678323379998673233"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/atlantic-ocean-in-hindi.html","title":"अटलांटिक महासागर कहाँ है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के बीच स्थित है।"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5259135670500312260\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/pacific-ocean-in-hindi.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5259135670500312260"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5259135670500312260"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/pacific-ocean-in-hindi.html","title":"प्रशांत महासागर कहां पर है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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सागर और शिवलिंग के बीच सीधी खड़ी है। 6,600 मीटर की सबसे ऊंची दक्षिणी ऊंचाई के अलावा, इस विशाल पर्वत की दो और चोटियाँ हैं, मध्य (6,310 मीटर) और उत्तरी (6,450 मीटर) जो इसे पूरी तरह से शार्क के पंख का आकार देती हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकेंद्रीय पर्वत शिखर पर शार्क का अंतिम मार्ग दुनिया के सबसे कठिन मार्गों में से एक होने के कारण पर्वतारोहियों के बीच प्रतिष्ठित है। साथ ही, यही कारण है कि कठिन मध्य शिखर से पहले दो ऊंची चोटियों पर चढ़ाई की गई थी, जिस पर अंततः वर्ष 2011 में कोनराड एंकर, जिमी चिन और रेनन ओज़टुरकिन की एक टीम ने सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी। जून 2006 में 6,604 मीटर की ऊँचाई से ग्लेन सिंगलमैन और हीथर स्वान द्वारा 'अर्थ' से उच्चतम बेस जंप, जिसे तब से पार कर लिया गया है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/9217163670032214917\/comments\/default","title":"Post 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जिसे 2000 में अंतर्राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक संगठन (आईएचओ) के एक निर्णय द्वारा स्वीकार किया गया था।\u0026nbsp;"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/237907718442881553\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/southern-ocean-in-hindi.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/237907718442881553"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/237907718442881553"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/southern-ocean-in-hindi.html","title":"दक्षिणी महासागर कहां स्थित है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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परिक्रमा करने के कारण। 'एक दिन' शब्द का निर्धारण पृथ्वी द्वारा अपनी धुरी पर एक बार चक्कर लगाने में लगने वाले समय से होता है और इसमें दिन और रात दोनों समय शामिल होते हैं।"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/6359136515324201979\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/din-aur-raat-kyon-hota-hai.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/6359136515324201979"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/6359136515324201979"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/din-aur-raat-kyon-hota-hai.html","title":"दिन और रात क्यों होता है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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अप्रत्याशित और अत्यधिक परिवर्तनशील होते हैं । दैनिक तापमान सीमा सबसे गर्म और सबसे ठंडे महीनों के बीच मौसमी बदलाव से कहीं अधिक है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/2006620713133267833\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-tropical-climate.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/2006620713133267833"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/2006620713133267833"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-tropical-climate.html","title":"उष्णकटिबंधीय जलवायु क्या होता है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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विभिन्न जल निकाय हो सकता है। प्रायद्वीपों को एक विशिष्ट भौतिक विशेषता के साथ अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे कि हेडलैंड या केप जो भूमि का पतला टुकड़ा है जो एक जल निकाय में फैला हुआ है, एक प्रोमोंट्री जो भूमि का एक उठा हुआ द्रव्यमान है जो एक जल निकाय में प्रोजेक्ट करता है और थूकता है जो संकीर्ण मार्ग हैं।\u003C\/span\u003E\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/6007105734736336506\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/peninsula-in-hindi.html#comment-form","title":"0 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नदियां, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझीलें\u003C\/a\u003E, जलाशय और अंतर्निहित भूजल शामिल हो सकते हैं जो सैकड़ों मील अंतर्देशीय हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eएक वाटरशेड के आकार को कई पैमानों पर परिभाषित किया जाता है - जिसे इसके हाइड्रोलॉजिकल यूनिट कोड (एचयूसी) के रूप में संदर्भित किया जाता है - जो उस भूगोल पर आधारित होता है जो उसके विशिष्ट क्षेत्र के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक होता है। एक वाटरशेड छोटा हो सकता है, जैसे कि एक मामूली अंतर्देशीय झील।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइसके विपरीत, कुछ वाटरशेड हजारों वर्ग मील में फैले हुए हैं और इसमें धाराएं, नदियां, झीलें, जलाशय और अंतर्निहित भूजल शामिल हो सकते हैं जो सैकड़ों मील अंतर्देशीय हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे बड़ा वाटरशेड मिसिसिपी रिवर वाटरशेड है, जो सभी 31 अमेरिकी राज्यों और दो कनाडाई प्रांतों से 1.15 मिलियन वर्ग मील की दूरी पर है, जो रॉकीज से एपलाचियन तक फैला है!\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसैकड़ों, और अक्सर हजारों, खाड़ियों और धाराओं का पानी उच्च भूमि से नदियों में प्रवाहित होता है जो अंततः एक बड़े जलाशय में बह जाती है। जैसे ही पानी बहता है, यह अक्सर प्रदूषकों को उठाता है, जिसका वाटरशेड की पारिस्थितिकी पर और अंततः जलाशय, खाड़ी या \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर\u003C\/a\u003E पर जहां यह समाप्त होता है, पर भयावह प्रभाव हो सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eहालाँकि, सारा पानी सीधे समुद्र में नहीं जाता है। जब बारिश सूखी जमीन पर गिरती है, तो यह जमीन में भीग सकती है या घुसपैठ कर सकती है। यह भूजल मिट्टी में रहता है, जहां यह अंततः निकटतम धारा में रिस जाएगा।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकुछ पानी भूमिगत जलाशयों में बहुत गहराई तक घुसपैठ करता है, जिन्हें एक्वीफर कहा जाता है। अन्य क्षेत्रों में, जहां मिट्टी में बहुत अधिक कठोर मिट्टी होती है, बहुत कम पानी घुसपैठ कर सकता है। इसके बजाय, यह जल्दी से निचली जमीन पर चला जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eवाटरशेड से बारिश और हिमपात कई मार्गों से समुद्र तक जाते हैं। भारी बारिश और \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ice.html\"\u003Eबर्फ\u003C\/a\u003E बारी की अवधि के दौरान, पानी अभेद्य सतहों जैसे कि पार्किंग स्थल, सड़कों, इमारतों और अन्य संरचनाओं पर बह सकता है और बंद हो सकता है क्योंकि यह कहीं और नहीं जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eये सतहें \"फास्ट लेन\" के रूप में कार्य करती हैं जो पानी को सीधे तूफानी नालियों में ले जाती हैं। अतिरिक्त पानी की मात्रा नदियों और नदियों को जल्दी से बहा सकती है, जिससे वे अतिप्रवाह हो सकती हैं और संभवतः बाढ़ का कारण बन सकती हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/720136126743261834\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-watershed.html#comment-form","title":"0 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वार्षिक तापमान हिमांक बिंदु के करीब होता हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5578239852159821410\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/glacier-in-hindi.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5578239852159821410"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5578239852159821410"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/glacier-in-hindi.html","title":"ग्लेशियर किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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के समानांतर चलती है। यह लगभग 900 किमी की दूरी तक फैली हुई है।\nयह सीमा पूर्वी गुजरात राज्य में बढ़ती है जो पूर्व में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा से होते हुए पूर्व में छत्तीसगढ़ तक जाती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eयह सीमा उत्तर में विंध्य श्रेणी के समानांतर है, और ये दो पूर्व-पश्चिम पर्वतमाला भारतीय उपमहाद्वीप को उत्तरी भारत के भारत-गंगा के मैदान और दक्षिण के दक्कन के पठार में विभाजित करती हैं।\nसतपुड़ा के हिस्सों को मोड़कर उकेरा गया है। उन्हें संरचनात्मक उत्थान या 'हॉर्स' के रूप में माना जाता है।\nमहादेव हिल्स पर पचमढ़ी के पास धूपगढ़ (1,350 मीटर) सबसे ऊंची चोटी है।\nअमरकंटक (1,127 मीटर) एक और महत्वपूर्ण चोटी है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4752047311716427479\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/satpura-parvat-kis-rajya-mein-hai.html#comment-form","title":"0 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ग्रीनलैंड विश्व का सबसे बड़ा द्वीप हैं। जो कनाडा के उत्तर में बसा हुआ हैं। ग्रीनलैंड लगभग 2,166,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eदुनिया भर में समुद्र, झीलों और नदियों में अनगिनत द्वीप हैं। वे आकार, जलवायु और उनमें रहने वाले जीवों के प्रकार में बहुत भिन्न होते हैं।\u0026nbsp;कई द्वीप काफी छोटे होते हैं, जिनका क्षेत्रफल कुछ एकड़ से भी कम होता है। इन छोटे द्वीपों को अक्सर टापू कहा जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eभारत में दो महत्वपूर्ण द्वीप समूह है - अरब सागर में लक्षद्वीप द्वीप समूह और बंगाल की खाड़ी में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह। भारत और श्रीलंका के बीच भी द्वीप हैं जो राम सेतु के अवशेष हैं जिनका निर्माण रामायण काल में हुआ माना जाता हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/2926433552065977701\/comments\/default","title":"Post 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गया है। पृथ्वी के 23.43 डिग्री अक्षीय झुकाव के कारण, उत्तरी गोलार्ध में सर्दी दिसंबर से मार्च तक रहती है, जबकि ग्रीष्मकाल जून से सितंबर तक रहता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकैलेंडर वर्ष और खगोलीय वर्ष के बीच अंतर\u0026nbsp;के कारण हर साल तिथियां बदलती रहती हैं। उत्तरी गोलार्ध के भीतर, समुद्री धाराएँ मौसम के पैटर्न को बदल सकती हैं जो उत्तरी तट के भीतर कई कारकों को प्रभावित करती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eव्यापारिक हवाएँ भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं। हवाएँ अपने साथ सतही जल को खींचती हैं, जिससे धाराएँ बनती हैं, जो कोरिओलिस प्रभाव के कारण पश्चिम की ओर बहती हैं। धाराएँ फिर उत्तर की ओर बढ़ते हुए दाईं ओर झुकती हैं। लगभग 30 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर पछुआ हवाएं, धाराओं को वापस पूर्व की ओर धकेलती हैं। दक्षिणावर्त लूप का निर्माण करती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदक्षिणी गोलार्ध में 80.9% पानी की तुलना में इसकी सतह 60.7% पानी विधमान है, और यहाँ पृथ्वी की 67.3% भूमि मौजूद है। यूरोप और उत्तरी अमेरिका पूरी तरह से पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध पर स्थित हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभूगोल और जलवायु\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eआर्कटिक उत्तरी ध्रुव (90° अक्षांश) के आसपास का एक क्षेत्र है। इसकी जलवायु ठंडी सर्दियाँ और ठंडी ग्रीष्मकाल की विशेषता है। वर्षा ज्यादातर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ice.html\"\u003Eबर्फ\u003C\/a\u003E के रूप में आती है। आर्कटिक सर्कल (66°34′ अक्षांश) के अंदर के क्षेत्र गर्मियों में कुछ दिनों का अनुभव करते हैं जब सूर्य कभी अस्त नहीं होता है, और कुछ दिन सर्दियों के दौरान जब यह कभी नहीं उगता है। इन चरणों की अवधि आर्कटिक सर्कल पर स्थित स्थानों के लिए एक दिन से लेकर ध्रुव के पास कई महीनों तक भिन्न होती है, जो उत्तरी गोलार्ध के मध्य में है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eआर्कटिक सर्कल और कर्क रेखा (23°26′ अक्षांश) के बीच उत्तरी समशीतोष्ण क्षेत्र स्थित है। गर्मी और सर्दी के बीच इन क्षेत्रों में परिवर्तन आमतौर पर अत्यधिक गर्म या ठंडे होने के बजाय हल्के होते हैं। हालांकि, एक समशीतोष्ण जलवायु में बहुत अप्रत्याशित मौसम हो सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउष्णकटिबंधीय क्षेत्र (कर्क रेखा और भूमध्य रेखा के बीच, 0° अक्षांश) आम तौर पर पूरे वर्ष गर्म होते हैं और गर्मियों के महीनों के दौरान बरसात के मौसम और सर्दियों के महीनों के दौरान शुष्क मौसम का अनुभव करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउत्तरी गोलार्ध में, पृथ्वी की सतह के ऊपर या ऊपर घूमने वाली वस्तुएं कोरिओलिस प्रभाव के कारण दायीं ओर मुड़ जाती हैं। नतीजतन, हवा या पानी के बड़े पैमाने पर क्षैतिज प्रवाह घड़ी की दिशा में मुड़ने वाले गियर बनाते हैं। ये उत्तरी अटलांटिक और उत्तरी प्रशांत महासागरों में \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर\u003C\/a\u003E परिसंचरण पैटर्न में सबसे अच्छी तरह से देखे जाते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउत्तरी गोलार्ध के भीतर, समुद्री धाराएं मौसम के पैटर्न को बदल सकती हैं जो उत्तरी तट के भीतर कई कारकों को प्रभावित करती हैं; जैसे अल नीनो।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइसी कारण से, पृथ्वी की उत्तरी सतह की ओर नीचे की ओर हवा का प्रवाह एक दक्षिणावर्त पैटर्न में सतह पर फैल जाता है। इस प्रकार, दक्षिणावर्त वायु परिसंचरण उत्तरी गोलार्ध में उच्च दबाव वाले मौसम कोशिकाओं की विशेषता है। इसके विपरीत, पृथ्वी की उत्तरी सतह से उठने वाली हवा (निम्न दबाव का क्षेत्र बनाकर) वामावर्त पैटर्न में हवा को अपनी ओर खींचती है। तूफान और उष्णकटिबंधीय तूफान (विशाल कम दबाव प्रणाली) उत्तरी गोलार्ध में वामावर्त घूमते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eउत्तरी गोलार्ध के देश\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eगोलार्ध की शाब्दिक परिभाषा \"आधा गोला\" है जो लोगों को यह विश्वास दिला सकती है कि उत्तरी गोलार्ध में दुनिया के आधे देश और आधी आबादी शामिल होगी। यह एक गलत धारणा है। वास्तव में, ग्रह पर अधिकांश भूमि उत्तरी गोलार्ध में स्थित है और दुनिया की लगभग 90% आबादी वहाँ रहती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउत्तरी गोलार्ध में स्थित सैकड़ों देशों को निर्धारित करने का सबसे अच्छा तरीका वर्तमान विश्व मानचित्र से परामर्श करना है। मानचित्र पर भूमध्य रेखा का पता लगाएँ। उस रेखा से ऊपर के प्रत्येक देश को उत्तरी गोलार्ध का हिस्सा माना जाता है। इसमें उत्तरी अमेरिका का पूरा महाद्वीप (जिसमें मध्य अमेरिका शामिल है) और पूरे यूरोप, अधिकांश एशिया, लगभग दो तिहाई अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका का लगभग दस प्रतिशत शामिल है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउत्तरी अमेरिका में लगभग 42 देश शामिल हैं, जिनमें कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको और ग्रीनलैंड के साथ-साथ मध्य अमेरिका के छोटे देश और कैरिबियन के विभिन्न द्वीप राष्ट्र शामिल हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयूरोप पचास देशों और अन्य दर्जन क्षेत्रों से बना है। इसमें पूर्वी यूरोप, कुछ पूर्व सोवियत राज्य, उत्तरी यूरोप, मध्य यूरोप और भूमध्यसागरीय देश और द्वीप शामिल हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइंडोनेशिया को छोड़कर, लगभग पूरा एशिया उत्तरी गोलार्ध में है, जो भूमध्य रेखा को पार करता है और इसकी अधिकांश भूमि दक्षिणी गोलार्ध में है। एशिया में चीन, रूस और शेष पूर्व सोवियत राज्य, जापान, भारत और मध्य पूर्वी देशों के साथ-साथ फिलीपींस जैसे द्वीप शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 54 देश।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअफ्रीका में 32 देश हैं जो मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध में हैं, जिनमें केन्या, इथियोपिया, मिस्र, लीबिया, मोरक्को और पश्चिमी सहारा शामिल हैं। कुछ और उत्तरी गोलार्ध में आंशिक रूप से स्थित हैं लेकिन ज्यादातर दक्षिणी में स्थित हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदक्षिण अमेरिका में पांच देश हैं जो ज्यादातर उत्तरी गोलार्ध में स्थित हैं और दो अन्य जो आंशिक रूप से भूमध्य रेखा से ऊपर हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/255240036648350173\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/northern-hemisphere-in-hindi.html#comment-form","title":"0 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गोलार्द्ध\u0026nbsp;में पांच महाद्वीपों के कुछ हिस्से शामिल हैं। अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका का लगभग 90%, अफ्रीका का एक तिहाई और एशिया की महाद्वीपीय मुख्य भूमि से कई द्वीप दक्षिण गोलार्ध का भाग है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजबकि चार महासागर हिन्द \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर\u003C\/a\u003E, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/atlantic-ocean-in-hindi.html\"\u003Eअटलांटिक महासागर\u003C\/a\u003E, दक्षिणी महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर भी इसी का हिस्सा है। न्यूजीलैंड और ओशिनिया में अधिकांश प्रशांत द्वीप समूह। इसकी सतह पर 80.9% पानी है, जबकि उत्तरी गोलार्ध के मामले में 60.7% पानी है, और इसमें पृथ्वी की 32.7% भूमि है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसूर्य और ग्रहण तल के सापेक्ष पृथ्वी के घूर्णन के झुकाव के कारण, गर्मी दिसंबर से फरवरी (समावेशी) और सर्दी जून से अगस्त (समावेशी) तक होती है। 22 या 23 सितंबर वर्णाल विषुव है और 20 या 21 मार्च शरद विषुव है। दक्षिणी ध्रुव दक्षिणी गोलार्ध क्षेत्र के केंद्र में है।\u003C\/p\u003E\u003Ch2\u003E\u003Cb\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eदक्षिणी गोलार्द्ध की विशेषताएँ\u003C\/span\u003E\u003C\/b\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eदक्षिणी गोलार्ध की जलवायु उत्तरी गोलार्ध में समान अक्षांशों की तुलना में थोड़ी हल्की होती है, अंटार्कटिक को छोड़कर जो आर्कटिक की तुलना में ठंडा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दक्षिणी गोलार्ध में काफी अधिक महासागर और बहुत कम भूमि है; पानी गर्म होता है और जमीन की तुलना में धीमी गति से ठंडा होता है। अंतरों को समुद्री गर्मी हस्तांतरण और ग्रीनहाउस ट्रैपिंग के विभिन्न विस्तारों के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदक्षिणी गोलार्ध में, सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर उत्तर से होकर गुजरता है, हालांकि मकर रेखा के उत्तर में मध्य सूर्य सीधे ऊपर की ओर या दोपहर के समय उत्तर की ओर हो सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसूर्य उत्तरी आकाश के माध्यम से दाएं से बाएं प्रक्षेपवक्र का अनुसरण करता है, जब सूर्य के बाएं से दाएं गति के विपरीत उत्तरी गोलार्ध से देखा जाता है क्योंकि यह दक्षिणी आकाश से गुजरता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसूर्य-कास्ट छाया पूरे दिन में वामावर्त घूमती है और धूपघड़ी के घंटे वामावर्त दिशा में बढ़ते हैं। मकर रेखा के दक्षिण में एक बिंदु से देखे जाने वाले सूर्य ग्रहण के दौरान, चंद्रमा सूर्य की डिस्क पर बाएं से दाएं चलता है। उदाहरण के लिए, 13 नवंबर, 2012 के सूर्य ग्रहण के समय, जबकि कर्क रेखा के एक बिंदु से उत्तर की ओर देखे जाने पर, सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा दाएं से बाएं चलता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकोरिओलिस प्रभाव चक्रवातों और उष्णकटिबंधीय तूफानों को दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिणावर्त घूमने का कारण बनता है। दक्षिणी समशीतोष्ण क्षेत्र, दक्षिणी गोलार्ध का एक उपखंड, लगभग सभी महासागरीय है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eधनु नक्षत्र जिसमें गेलेक्टिक केंद्र शामिल है, एक दक्षिणी नक्षत्र है और साथ ही मैगेलैनिक बादल दोनों हैं। यह, साफ आसमान के साथ, दक्षिणी गोलार्ध से रात के आकाश को उज्जवल और अधिक सितारों के साथ उत्कृष्ट रूप से देखने के लिए बनाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदक्षिणी गोलार्ध के जंगलों में विशेष विशेषताएं हैं जो उन्हें उत्तरी गोलार्ध के जंगलों से अलग करती हैं। चिली और ऑस्ट्रेलिया दोनों साझा करते हैं, उदाहरण के लिए, अद्वितीय बीच प्रजातियां या नोथोफैगस, और न्यूजीलैंड में निकट से संबंधित जेनेरा लोफोज़ोनिया और फुस्कोस्पोरा के सदस्य हैं। नीलगिरी ऑस्ट्रेलिया का मूल निवासी है, लेकिन अब इसे लुगदी उत्पादन के लिए दक्षिणी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में भी लगाया जाता है, और जैव ईंधन का तेजी से उपयोग होता है।\u003C\/p\u003E\u003Ch2\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eदक्षिणी गोलार्ध के देश\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eदक्षिणी गोलार्ध में 800 मिलियन से अधिक लोग रहते हैं, जो कुल वैश्विक मानव आबादी का लगभग 10–12% है।\u0026nbsp; उन 800 मिलियन लोगों में से, 200मिलियन से अधिक ब्राजील में रहते हैं, जो दक्षिणी गोलार्ध में भूमि क्षेत्र के हिसाब से सबसे बड़ा देश है, जबकि 145 मिलियन लोग जावा द्वीप पर रहते हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला द्वीप है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदक्षिणी गोलार्ध में सबसे अधिक आबादी वाला देश इंडोनेशिया है, जिसमें 267 मिलियन लोग रहते हैं। जिनमें से लगभग 30 मिलियन सुमात्रा, बोर्नियो और सुलावेसी के द्वीपों के उत्तरी भागों में भूमध्य रेखा के उत्तर में रहते हैं, साथ ही साथ अधिकांश उत्तरी मालुकु, जबकि शेष आबादी दक्षिणी गोलार्ध में रहती है। पुर्तगाली दक्षिणी गोलार्ध में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जिसके आठ देशों में 230 मिलियन से अधिक वक्ता हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदक्षिणी गोलार्ध में सबसे बड़े महानगरीय क्षेत्र जकार्ता (33 मिलियन लोग), साओ पाउलो (22 मिलियन), किंशासा-ब्रेज़ाविल (17 मिलियन), ब्यूनस आयर्स (16 मिलियन), रियो डी जनेरियो, सुरबाया (12 मिलियन प्रत्येक), जोहान्सबर्ग हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदक्षिणी गोलार्ध में महत्वपूर्ण वित्तीय और वाणिज्यिक केंद्रों में साओ पाउलो शामिल है, जहां बी 3 (स्टॉक एक्सचेंज) का मुख्यालय सिडनी के साथ, ऑस्ट्रेलियाई सिक्योरिटीज एक्सचेंज, जकार्ता, इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज की सीट, जोहान्सबर्ग, जोहान्सबर्ग स्टॉक का घर है। एक्सचेंज, और ब्यूनस आयर्स, ब्यूनस आयर्स स्टॉक एक्सचेंज का मुख्यालय, दक्षिणी गोलार्ध में सबसे पुराना शेयर बाजार।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eअफ्रीका\u003C\/b\u003E\u0026nbsp;- लगभग एक तिहाई, पूर्व में सोमालिया में मोगादिशु के दक्षिण से पश्चिम में गैबॉन में लिब्रेविल के दक्षिण तक। भूमध्य रेखा (अक्षांश: 0°) से केप अगुलहास (अक्षांश: 34°50′S) तक।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eअंटार्कटिका\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- संपूर्ण महाद्वीप और उससे जुड़े द्वीप पूरी तरह से दक्षिणी गोलार्ध के भीतर हैं। प्राइम हेड से, ट्रिनिटी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/peninsula-in-hindi.html\"\u003Eप्रायद्वीप\u003C\/a\u003E के उत्तरी सिरे पर (अक्षांश: 63°12′48″S) से दक्षिणी ध्रुव (अक्षांश: 90° S) तक।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eएशिया\u003C\/b\u003E\u0026nbsp;- पूर्वी तिमोर और अधिकांश इंडोनेशिया सहित समुद्री दक्षिण पूर्व एशिया का केवल दक्षिणी भाग, साथ ही ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र और हिंद महासागर में मालदीव के 26 में से दो। संपूर्ण महाद्वीपीय मुख्य भूमि पूरी तरह से उत्तरी गोलार्ध के भीतर है। भूमध्य रेखा (अक्षांश: 0°) से पनामा द्वीप, इंडोनेशिया (अक्षांश: 11°00'S) तक या जब कोकोस द्वीप समूह को दक्षिण पूर्व एशिया के हिस्से के रूप में शामिल किया गया, तब दक्षिण द्वीप (अक्षांश: 12°04'S)।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eऑस्ट्रेलिया\u003C\/b\u003E\u0026nbsp;- संपूर्ण महाद्वीप और उससे जुड़े द्वीप जैसे तस्मानिया और न्यू गिनी पूरी तरह से दक्षिणी गोलार्ध के भीतर हैं। भूमध्य रेखा से (अक्षांश: 0°) बिशप और क्लर्क आइलेट्स, तस्मानिया, ऑस्ट्रेलिया तक (अक्षांश: 55°03′ दक्षिण)\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eदक्षिण अमेरिका\u003C\/b\u003E\u0026nbsp;- ज्यादातर, पूर्व में ब्राजील में अमेज़ॅन \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/nadi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eनदी \u003C\/a\u003Eके मुहाने से लेकर पश्चिम में इक्वाडोर में क्विटो के उत्तर तक। भूमध्य रेखा से एगुइला आइलेट, डिएगो रामिरेज़ द्वीप समूह, चिली या, यदि दक्षिण सैंडविच द्वीप समूह को दक्षिण अमेरिका, कुक द्वीप, दक्षिण जॉर्जिया के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है और दक्षिण सैंडविच द्वीप समूह\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eज़ीलैंडिया\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- न्यू कैलेडोनिया, न्यूजीलैंड, नॉरफ़ॉक द्वीप, और समुद्र तल से ऊपर अन्य संबद्ध निचले द्वीपों सहित संपूर्ण जलमग्न महाद्वीप, पूरी तरह से दक्षिणी गोलार्ध के भीतर है। बेलेप, न्यू कैलेडोनिया, फ्रांस से से जैक्वेमार्ट द्वीप\u0026nbsp; तक।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4023187566550179026\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/southern-hemisphere-in-hindi.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4023187566550179026"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4023187566550179026"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/southern-hemisphere-in-hindi.html","title":"दक्षिणी गोलार्द्ध किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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कई देशों में फैला है, जिनमें\n  अल्जीरिया, चाड, मिस्र, लीबिया, माली, मॉरिटानिया, मोरक्को, नाइजर, पश्चिमी\n  सहारा, सूडान और ट्यूनीशिया शामिल हैं। सहारा मरुस्थल का क्षेत्रफल चीन के बराबर है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभूमध्य सागर के तट, माघरेब के एटलस पर्वत, और मिस्र और सूडान में नील घाटी को छोड़कर, सहारा मरुस्थल पुरे उत्तरी अफ्रीका के अधिकांश भाग को कवर करता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयह पूर्व में लाल सागर, उत्तर में भूमध्यसागर और पश्चिम में अटलांटिक महासागर तक फैला हुआ है। कई हज़ार वर्षों के बाद सहारा का क्षेत्र रेगिस्तान और घास के मैदान में परिवर्तित होता रहता हैं। जो पृथ्वी की धुरी के कारण होता है जो उत्तरी अफ्रीकी मानसून के स्थान को बदल देता है।\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/2355499564959233347\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/sahara-desert-in-hindi.html#comment-form","title":"0 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उन्हें पृथ्वी की परिधि निर्धारित करने में मदद की।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eएराटोस्थनीज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वह एक ग्रीक गणितज्ञ, भूगोलवेत्ता, कवि, खगोलशास्त्री और संगीत सिद्धांतकार थे। अपने तीन-खंडों के काम भूगोल में उन्होंने पृथ्वी को पाँच जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किए बिना पूरी दुनिया का वर्णन और मानचित्रण किया.\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/452053891768901791\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/father-of-geography-in-hindi.html#comment-form","title":"0 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क्षेत्र है। दुनिया की समुद्री नौवहन\n  का एक-तिहाई हिस्सा इसी से होकर गुजरता है। जो हर साल 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से\n  अधिक का व्यापार करता है। माना जाता है कि इसके समुद्र तल के नीचे तेल और\n  प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eदक्षिण चीन सागर कहा है \u003C\/span\u003E\n\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  दक्षिण चीन सागर, पश्चिमी प्रशांत \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर\u003C\/a\u003E का एक सीमांत समुद्र है। यह उत्तर में\n  दक्षिण चीन के तटों से घिरा है। जबकि पश्चिम में इंडोचाइनीज \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/peninsula-in-hindi.html\"\u003Eप्रायद्वीप\u003C\/a\u003E, पूर्व\n  में ताइवान और उत्तर-पश्चिम में फिलीपींस के द्वीपों द्वारा घिरा है। दक्षिण में\n  बोर्नियो, पूर्व में सुमात्रा और बांगका बेलितुंग द्वीप समूह स्थित हैं। यह सागर\n  लगभग 3,500,000 वर्ग किमी के क्षेत्र को कवर करता है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  दक्षिण चीन में मत्स्य पालन भी किया जाता है, जो दक्षिण पूर्व एशिया में लाखों\n  लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण चीन सागर द्वीप समूह\n  ज्यादातर छोटे निर्जन द्वीपों का घर हैं। कई देशों द्वारा इस क्षेत्र पर दावा\n  किया जाता हैं। ये दावे द्वीपों और समुद्र के लिए होते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  समुद्र की प्रमुख विशेषता पूर्वी भाग में एक गहरे समचतुर्भुज के आकार का बेसिन\n  है, जिसमें नानशान द्वीप क्षेत्र और उत्तर-पश्चिम पैरासेल द्वीप आते हैं। सबसे\n  गहरा हिस्सा चाइना सी बेसिन हैं जिसकी अधिकतम गहराई 16,457 फीट यानि 5,016 मीटर\n  हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  दक्षिण चीन सागर पश्चिमी प्रशांत का सबसे बड़ा सीमांत क्षेत्र है। यह लगभग 10 लाख\n  से 60 लाख वर्ष पहले, समुद्र तल के फैलने के परिणामस्वरूप यह टूट गया था। माना\n  जाता है कि चीन सागर बेसिन 2.5 मील अर्थात 4 किमी क्षेत्र का विस्तार हुआ है।\n  जिससे अवशिष्ट पठार और कई प्रवाल भित्तियां इसके किनारों से भरे हुए हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eदक्षिण चीन सागर का क्षेत्रफल कितना हैं\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  दक्षिण चीन सागर का क्षेत्रफल लगभग 3,500,000 किमी है। यह ताइवान जलडमरूमध्य के\n  माध्यम से पूर्वी चीन सागर के साथ जुड़ा हुआ हैं। लुजोन जलडमरूमध्य के माध्यम से\n  फिलीपीन सागर और पालावान जलडमरूमध्य के माध्यम से सुलु सागर से जुड़ा हुआ हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भू-राजनीतिक अर्थों में दक्षिण चीन सागर पानी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण निकाय है।\n  ऐतिहासिक रूप से यह सागर दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत और पश्चिम जाने के बीच एक\n  महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग बनाता है। समुद्र के तल पर पड़े व्यापारिक जहाजों के कई\n  मलवे इस क्षेत्र में सदियों से संपन्न व्यापार की पुष्टि करते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  कई देशों ने दक्षिण चीन सागर पर क्षेत्रीय दावे किए हैं। इस तरह के विवाद एशिया\n  में संघर्ष का कारण बन सकते है। दोनों पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना और चीन गणराज्य\n  लगभग पूरे चीनी सागर पर अपना दावा करते हैं। जिसे \"नौ-डैश लाइन\" के रूप में जाना\n  जाता है। जो सीमांत क्षेत्र से ज्यादा का दावा करता है। इस क्षेत्र के लगभग हर\n  दूसरे देश इस विवाद में शामिल हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eदक्षिण चीन सागर का महत्व क्या है\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  दक्षिण चीन सागर दुनिया के व्यापारिक जहाजों के लिए एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक\n  प्रवेश द्वार है। इसलिए हिंद-प्रशांत का एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक\n  उप-क्षेत्र है। यह कई जटिल क्षेत्रीय विवादों का स्थल भी है जो इस क्षेत्र के\n  भीतर और पूरे भारत-प्रशांत में संघर्ष और तनाव का कारण हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भौगोलिक रूप से, दक्षिण चीन सागर भारत-प्रशांत की भू-राजनीति में महत्वपूर्ण\n  भूमिका निभाता है। दक्षिण चीन सागर की सीमा ब्रुनेई, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया,\n  मलेशिया, फिलीपींस \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/capital-of-singapore.html\"\u003Eसिंगापुर\u003C\/a\u003E, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम से लगती है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  हालिया आर्थिक विकास ने दुनिया के वाणिज्यिक \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/10\/who-are-merchants.html\"\u003Eव्यापारी \u003C\/a\u003Eशिपिंग का एक बड़ा हिस्सा इस\n  क्षेत्र से गुजरता है। जापान और दक्षिण कोरिया अपने ईंधन और कच्चे माल की आपूर्ति\n  और निर्यात मार्ग के रूप में दक्षिण चीन सागर पर अधिक निर्भर करते हैं। दक्षिण\n  चीन सागर समृद्ध और अनियमित अति-शोषित मछली पकड़ने के क्षेत्र में शामिल हैं।\n  अनदेखे तेल और गैस के महत्वपूर्ण भंडार होने की सूचना मिली है, जो समुद्री और\n  क्षेत्रीय विवादों में एक उग्र कारक है। दक्षिण चीन सागर में प्रमुख द्वीप\n  स्प्रैटली द्वीप समूह, पैरासेल द्वीप समूह, प्रतास, नाटुना द्वीप समूह शामिल हैं।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5522886651022279741\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/south-china-sea.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5522886651022279741"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5522886651022279741"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/south-china-sea.html","title":"दक्षिण चीन सागर कहा है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-1268811309706538609"},"published":{"$t":"2022-09-02T08:09:00.013+05:30"},"updated":{"$t":"2023-02-15T11:11:16.874+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"भारत का जलवायु कैसा है"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eभारत आकार के हिसाब से दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है और यह विविध संग्रह समेटे हुए है। जो क्रमशः बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर द्वारा पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी तट के किनारे स्थित हैं। भारत की सीमा बांग्लादेश, चीन, नेपाल, भूटान,\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/myanmar-in-hindi.html\"\u003Eम्यांमार\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eऔर पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा साझा करता है। दक्षिणी तट से कुछ ही दूर कई द्वीपों के साथ \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/sri-lanka-in-hindi.html\"\u003Eश्रीलंका \u003C\/a\u003Eस्थित है। \u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत का जलवायु कैसा है\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eभारत की जलवायु काफी हद तक मानसूनी हवाओं पर निर्भर करती है। \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-monsoon-called-in-hindi.html\"\u003Eमानसून\u003C\/a\u003E आमतौर पर भूमि और पानी के अलग-अलग ताप के कारण होता है। जमीन, पानी की तुलना में तेजी से गर्म होती है। इस बदलाव से दबाव में अंतर होता है। \u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eदबाव की स्थिति भी मानसून को प्रभावित करता है। सामान्यत: उष्णकटिबंधीय पूर्वी-दक्षिण प्रशांत \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर\u003C\/a\u003E में उच्च दबाव और पूर्वी हिंद महासागर में निम्न दबाव होता है। लेकिन जैसे-जैसे साल बीतते जाते हैं। दबाव की स्थिति में उलटफेर होता जाता हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eजलवायु की दृष्टि से भारत को अनेक क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है। देश के अधिकांश भाग में उष्णकटिबंधीय जलवायु है। जो भारत के अधिकांश भाग को गीला और शुष्क बनाता है। जबकि भारत के उत्तरी भाग में आर्द्र उष्णकटिबंधीय जलवायु है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eभारत का पश्चिमी तट आर्द्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के अंतर्गत आता हैं। देश के केंद्र में अर्ध-शुष्क जलवायु है, जो उत्तर-पश्चिम तक फैली हुई है। देश के उत्तर क्षेत्र मे अत्यधिक ठंड पड़ती है। यह बड़े पैमाने पर उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में होता है जिसमें ठंडे, शुष्क वाले हिमालय शामिल हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eजलवायु - \u003C\/b\u003Eभौगोलिक दशाओं में जलवायु एक महत्वपूर्ण कारक \nहै। जलवायु शब्द से अभिप्राय किसी स्थान की दीर्घकालीक वायुमंडलीय दशाओं से\n है। वायुमंडलीय दशाएँ तापमान, वायुदाब, हवायें, आर्द्रता व मेघ संबंधी \nतत्व आते हैं। वायुमंडल की दशाएँ समय-समय पर बदलती रहती है। अल्पकालीन \nपरिवर्तन की दशाएँ मौसम कहलाती है जो अस्थाई होती है और मौसम की दीर्घकालिक\n औसत दशाओं से जलवायु का निर्धारण होता है। \u003Cbr \/\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकिसी भी स्थान की \nजलवायु वायुमण्डलीय तत्वों द्वारा निर्मित होती है यद्यपि यह तत्व प्रत्येक\n स्थानों पर पाए जाते हैं फिर भी स्थान - स्थान की जलवायु तथा मौसम में \nकाफी अंतर होता है। किसी भी देश की जलवायु वहाँ के धरातल के भौतिक तथा \nजैविक तत्वों, वन, मिट्टी मानव के व्यवसाय व उसके सम्पूर्ण सामाजिक और \nसांस्कृतिक क्रियाकलापों को प्रभावित करती है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत में जलवायु परिवर्तन\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eभारत में जलवायु परिवर्तन का भारत पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है, जो 2015 में जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित देशों की सूची में चौथे स्थान पर है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभारत हर साल लगभग 3 गीगाटन CO2 और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करता है। प्रति व्यक्ति लगभग ढाई टन, जो विश्व औसत से कम है। विश्व की आबादी का 17 प्रतिशत होने के बावजूद, देश वैश्विक उत्सर्जन का 7 प्रतिशत उत्सर्जन करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eतिब्बती पठार पर तापमान बढ़ने से हिमालय के ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं, जिससे गंगा, ब्रह्मपुत्र, यमुना और अन्य प्रमुख नदियों की प्रवाह दर को खतरा है। 2007 WWF की रिपोर्ट में कहा गया है कि \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-origin-of-river-indus-river.html\"\u003Eसिंधु नदी \u003C\/a\u003Eइसी कारण से सूख सकती है। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में तापमान बढ़ रही है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E1901 और 2018 के बीच भारत में तापमान में 0.7 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। कुछ वर्तमान अनुमानों के अनुसार, वर्तमान शताब्दी के अंत तक भारत में सूखे की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eजलवायु नियंत्रण\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eजलवायु नियंत्रण वे कारक होते हैं जो भारत की जलवायु में तापमान में भिन्नता को नियंत्रित करते हैं। छह प्रमुख जलवायु नियंत्रण निम्नलिखित हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. अक्षांश\u003C\/b\u003E - पृथ्वी का आकार गोल होने के कारण सूर्य का प्रकाश हर जगह समान रूप से नहीं पहुंचता है। भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर तापमान कम हो जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2. ऊँचाई \u003C\/b\u003E- जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊँचाई की ओर बढ़ते हैं, तापमान कम होता जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E3. दबाव\u003C\/b\u003E -  किसी भी क्षेत्र का दबाव और पवन प्रणाली उस स्थान के अक्षांश और ऊंचाई पर निर्भर करती है। इस प्रकार, यह तदनुसार तापमान को प्रभावित करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E4. समुद्र से दूरी\u003C\/b\u003E - तटीय क्षेत्र, आंतरिक क्षेत्रों की तुलना में ठंडे होते हैं। जैसे-जैसे समुद्र से दूरी बढ़ती है, इसका प्रभाव कम होता जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E5. महासागरीय धाराएँ \u003C\/b\u003E-  किसी क्षेत्र में बहने वाली ठंडी महासागरीय धाराएँ उस क्षेत्र के तापमान को कम कर देती हैं, जबकि गर्म धाराएँ तापमान को बढ़ा देती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक\u003C\/span\u003E\u003Cb\u003E\u003C\/b\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eदेश के विभिन्न \nक्षेत्रों की जलवायु दशाओं में बहुत अधिक विविधता है। यहाँ एक स्थान से \nदूसरे स्थान में एक ऋतु से दूसरे ऋतु में तापमान व वर्षा संबंधी दशाओं में \nबहुत अंतर मिलता है। जैसे कि ग्रीष्म ऋतु में पश्चिमी जस्थान के थार \nमरुस्थल में तापमान 55° सेल्सियस तक पहुँच जाता है वहीं इसके विपरीत लेह \nमें तापमान इसी मौसम में 0° सेंटीग्रेड से भी नीचे रहता है। इतना ही नहीं \nदिन व रात के तापमान में भी पर्याप्त अंतर पाया जाता है।  \u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकेरल, \nअण्डमान तथा निकोबार द्वीप में दिन और रात के तापमान में 7° से 8° से.ग्रे.\n का अंतर रहता है वहीं थार के मरुस्थल में यदि दिन का तापमान 50° से.ग्रे. \nहै तो रात में तापमान हिमांक बिन्दु तक गिर जाता है। वर्षा की मात्रा में \nभी भिन्नता रहती है। मासिनराम (मेघालय) में वार्षिक वर्षा 1,000 से.मी. से \nअधि ाक है तो पश्चिमी राजस्थान में मात्र 10 से 20 से.मी. तक वार्षिक वर्षा\n होती है। समुद्र तटीय क्षेत्रों की जलवायु सम होती है तो दूरस्थ क्षेत्रों\n की जलवायु विष्म होती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. अक्षांश\u003C\/b\u003E - हम जानते हैं कि कर्क रेखा, जो पृथ्वी के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों को अलग करती है। पश्चिम में कच्छ के रण के मध्य से पूर्व में मिजोरम तक जाती है। इसलिए, भारत की जलवायु में उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु दोनों की विशेषताएं पायी जाती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2. ऊंचाई \u003C\/b\u003E- भारत में लगभग 6000 मीटर के बहुत ऊंचे पहाड़ पाए जाते हैं। हिमालय मध्य एशिया से आने वाली ठंडी हवाओं को भारत में प्रवेश करने से रोकती है। यही कारण है कि भारत में मध्य एशिया की तुलना में हल्की सर्दी पड़ती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E3. दबाव \u003C\/b\u003E- भारत में अद्वितीय दबाव की स्थिति पायी जाती है। सर्दियों के दौरान, हिमालय के पास के उत्तरी क्षेत्र में उच्च दबाव होता है। इसलिए इस क्षेत्र से हवाएँ दक्षिण की ओर चलती हैं। जहाँ दबाव कम पाया जाता है। गर्मियों में, उत्तरी भाग में कम दबाव होता है। इसलिए हवा का रुख उलट होता है। अब दक्षिण से हवाएँ उत्तर की ओर चलती हैं। ये हवाएँ भारत की जलवायु को बहुत प्रभावित करती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E4.भौगोलिक स्थिति -\u003C\/b\u003E भारत 8.4° उत्तरी अक्षांश से 37.6° उत्तरी \nअक्षांश तक विस्तृत है इसका दक्षिणी भाग विषुवत वृत के पास है कर्क वृत \nइसके लगभग मध्य भाग से गुजरता है। उत्तरी भाग विषुवत रेखा से पर्याप्त दूर \nहै फलतः कर्क रेखा से दक्षिण भारत में उष्ण मानसूनी और उत्तरी भारत में \nमहाद्वीप जलवायु पाई जाती है इसलिए विभिन्न स्थान के तापमानों में बहुत \nअंतर पाया जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E5. पर्वतों की स्थिति व उनकी दिशा-\u003C\/b\u003E भारत \nमें पर्वतों की स्थिति तथा उनके विस्तार की दिशा यहाँ वर्षा के वितरण को \nबहुत अधिक प्रभावित करती है। उत्तर भारत में स्थित हिमालय पर्वत मानसूनी \nहवाओं है को रोककर उत्तर-पूर्वी भारत में व्यापक वर्षा कराता है साथ ही \nउत्तरी ध्रुव व तिब्बत से आने वाली बर्फीली हवाओं से देश की रक्षा करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउत्तर-पश्चिमी\n भारत में अरावली पहाड़ियाँ मानसून हवाओं के समानान्तर है जिनके कारण अरब \nसागर में मानसून पवन दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की ओर जाती है जो \nशिवालिक की ऊँची श्रेणियों से टकराकर वहाँ वर्षा कराती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E6. जल स्थल का वितरण एवं हिन्द महासागर की स्थिति -\u003C\/b\u003E\n भारत तीन ओर से सागरों से घिरा हुआ है। पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में \nबंगाल की खाड़ी, दक्षिण में उत्तरी हिन्द महासागर प्रायद्वीपीय भारत के \nआकार के कारण मानसूनी पवने दो शाखाओं में विभक्त हो जाती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cul style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003E\u003Cb\u003Eमानसून की अरब सागरीय शाखा- \u003C\/b\u003Eयह भारत में उत्तर-पूर्वी, उत्तरी तथा मध्यवर्ती भारत में वर्षा कराते हैं।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003E\u003Cb\u003Eबंगाल की खाड़ी वाली मानसूनी शाखा\u003C\/b\u003E- इनसे पूर्वी उत्तर पूर्वी उत्तरी एवं कुछ मध्यवर्ती भारत में वर्षा होती है।\u003C\/li\u003E\u003C\/ul\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E7. तापमान और वायुदाब का वितरण- \u003C\/b\u003Eउत्तरी\n मैदानों तथा भारत व प्रायद्वीपीय भारत का उत्तरी भाग शेष भारत की अपेक्षा \nग्रीष्म काल में बहुत गर्म हो जाता है। ऊँचे तापमान के कारण उत्तर-पश्चिमी \nभारत में शक्तिशाली न्यून वायुदाब क्षेत्र हो जाता है इसी तरह न्यून \nवायुदाब के क्षेत्र नागपुर के आसपास तथा पूर्व में अराम और मेघालय में \nविकसित हो जाते हैं जिनमें मानसूनी पवने आकर्षित होकर वर्षा करती है। शीत \nऋतु में यही भाग अपेक्षाकृत ठंडे हो जाने के कारण यहाँ उच्च वायुदाब \nक्षेत्र विकसित हो जाता है और थल से जल की ओर शुष्क पवने चलने लगती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E8. जेट पवनों का प्रवाह - \u003C\/b\u003Eधरातलीय\n पवनों के अतिरिक्त ऊपरी क्षोभ मण्डल में वायु धाराएँ प्रवाहित होती है। \nभारत की जलवायु पर पछुआ तथा पूर्वी वायु का व्यापक प्रभाव पड़ता है जिनके \nप्रभाव से मानसूनी हवाएँ चलती और चक्रवातीय वर्षा होती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E9. समुद्र तल से ऊँचाई तथा समुद्र तट से दूरी- \u003C\/b\u003Eजलवायु\n की विभिन्नता का एक कारक कुछ स्थानों का समुद्र तल से काफी ऊँचाई में \nस्थित होना है। ज्यों-ज्यों हम समुद्र तल से ऊँचाई की ओर जाते हैं, तापनमान\n कम होने लगता है। ऊटी दार्जिलिंग, नैनीताल, माउंटआबू, शिमला आदि स्थान \n5,000 मीटर से अधिक ऊँचाई पर हैं जहाँ ग्रीष्म ऋतु में भी तापमान 8° से \nग्रे होता है, वहीं जो स्थान समुद्र तट से दूर होते हैं वहाँ भीषण लू चलती \nहै।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E10. मानसूनी पवनें - \u003C\/b\u003Eयद्यपि भारत व्यापारिक पवनों के प्रवाह क्षेत्र में आता है जिनके कारण भारत की जलवायु मानूसनी पवनों द्वारा नियंत्रित होती है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1268811309706538609\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/how-is-climate-of-india.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/1268811309706538609"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/1268811309706538609"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/how-is-climate-of-india.html","title":"भारत का जलवायु कैसा है"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-8181465961937546328"},"published":{"$t":"2022-09-02T08:06:00.010+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-01T07:31:20.178+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"स्थलमंडल किसे कहते हैं?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003E\n  उत्पत्ति के बाद से आज तक पृथ्वी में अनेक परिवर्तन हुए हैं, और होते रहेंगे।\n  पृथ्वी का लगभग 29 प्रतिशत भाग स्थलमंडल और 71 प्रतिशत भाग \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-lithosphere.html\"\u003Eजलमंडल \u003C\/a\u003Eसे घिरा हुआ\n  है। हमारी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/prithvi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eपृथ्वी \u003C\/a\u003Eपर तीन प्रमुख मंडल पायी जाती हैं। जिन्हें स्थलमंडल, जलमंडल\n  एवं वायुमंडल कहा जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eस्थलमंडल किसे कहते हैं\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/what-is-lithosphere.html\"\u003Eस्थलमंडल\u003C\/a\u003E पृथ्वी का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। पृथ्वी पर जितने भी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/land.html\"\u003Eभूमि \u003C\/a\u003Eक्षेत्र\n  हैं। वह स्थल मंडल कहलाता है। इनमे ऊँचे \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/parvat-kise-kahate-hain.html\"\u003Eपर्वत\u003C\/a\u003E, बड़ी-बड़ी नदियाँ और घाटियाँ पाई\n  जाती हैं। कहीं विशाल \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/pathar-kise-kahate-hain.html\"\u003Eपठार \u003C\/a\u003Eहैं तो कही विशाल \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/mandan-kise-kahate-hain.html\"\u003Eमैदान \u003C\/a\u003Eपाए जाते हैं। पृथ्वी की सबसे\n  बाहरी परत को ही स्थलमंडल कहा जाता हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  स्थलमंडल \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/05\/blog-post_16.html\"\u003Eग्रह \u003C\/a\u003Eकी कठोर आवरण होता है। पृथ्वी पर यह क्रस्ट और अपर मेंटल से बना है\n  जो हजारों साल या उससे अधिक के समयके परिवर्तन का परिणाम है।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eस्थलमंडल की संरचना\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  सबसे पहले आपको यह जानना होगा कि पृथ्वी का ठोस भाग एक सामान पदार्थ से नहीं बना\n  है। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो इसमें चट्टानों की अलग-अलग परतें हैं। जिनमें\n  शीर्ष पर तलछटी चट्टानें शामिल हैं, फिर बीच में ग्रेनाइट और मेटामॉर्फिक\n  चट्टानें हैं। अंत में सबसे नीचे बेसाल्टिक चट्टानें मौजूद हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पृथ्वी की क्रस्ट में विभिन्न बड़ी गतिशील \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_27.html\"\u003Eटेक्टोनिक प्लेट\u003C\/a\u003E शामिल होती हैं। ये\n  टेक्टोनिक प्लेट्स धीरे-धीरे लेकिन लगातार चलती रहती हैं। वे लगभग 10 सेमी की औसत\n  दर से खिसकते रहते हैं। पृथ्वी पर दो प्रकार के क्रस्ट पाए जाते हैं - महाद्वीपीय\n  और समुद्री क्रस्ट।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पृथ्वी की इस परत में दो अलग-अलग प्रकार की क्रस्ट होती है। महाद्वीपीय क्रस्ट\n  में विभिन्न प्रकार की चट्टानें होती हैं। वे आग्नेय चट्टानें, अवसादी चट्टानें\n  और कायांतरित चट्टानें हैं जो चट्टान चक्र बनाती हैं। महाद्वीपीय क्रस्ट समुद्री\n  क्रस्ट की तुलना में हल्का होता है जो बेसाल्ट और गैब्रो से बना होता है। ये\n  चट्टानें ऊपरी मेंटल से निकली हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eस्थलमंडल की ऊपरी परत को क्या कहते हैं\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  स्थलमंडल की ऊपरी परत को कॉन्टिनेंटल क्रस्ट कहा जाता हैं। यह विभिन्न प्रकार के\n  ग्रेनाइट से बना होता है। भूवैज्ञानिक अक्सर महाद्वीपीय क्रस्ट की चट्टान को\n  सियाल कहते हैं। सियाल सिलिकेट और एल्यूमीनियम के मिश्रण से बने होते है,\n  महाद्वीपीय क्रस्ट में सबसे प्रचुर मात्रा में खनिज पदार्थ पाए जाते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  सियाल सिमा 70 किलोमीटर से अधिक मोटा हो सकता है, और 2.7 ग्राम प्रति घन\n  सेंटीमीटर भी हो सकता है। समुद्री क्रस्ट की तरह, महाद्वीपीय क्रस्ट प्लेट\n  टेक्टोनिक्स द्वारा निर्मित होता है। जहां टेक्टोनिक प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती\n  हैं, तो पर्वत जैसी स्थलाकृति का निर्माण होता है। इस कारण से महाद्वीपीय क्रस्ट\n  के सबसे मोटे हिस्से दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं में हैं। हिमखंडों की\n  तरह, हिमालय और एंडीज की ऊंची चोटियां इस क्षेत्र के महाद्वीपीय क्रस्ट का ही\n  हिस्सा हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  क्रस्ट पृथ्वी के नीचे असमान रूप से फैली हुई है और साथ ही वायुमंडल में भी बढ़\n  रही है। क्रेटन महाद्वीपीय स्थलमंडल का सबसे पुराना और सबसे स्थिर हिस्सा हैं।\n  महाद्वीपीय क्रस्ट के ये हिस्से आमतौर पर अधिकांश महाद्वीपों के आंतरिक भाग में\n  पाए जाते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eस्थलमंडल का विकास कैसे हुआ\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  लगभग 4.6 अरब साल पहले, पृथ्वी का निर्माण तब हुआ था। सूर्य के गठन से बचे धूल और\n  मलबे से पृथ्वी का निर्माण हुआ था। पहले पृथ्वी ऐसी नहीं दिखती थी जैसे हम आज\n  देखते हैं। लेकिन जल्दी ही यह लाल-गर्म ग्रह परिवर्तन के कारण नीला ग्रह में\n  परिवर्तित हो गया। एक महत्वपूर्ण विकास जिसने \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागरों\u003C\/a\u003E, वातावरण और जीवन रूपों\n  को जन्म दिया, वह प्लेट टेक्टोनिक्स की शुरुआत थी।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पृथ्वी अपनी प्रारंभिक अवस्था के दौरान क्रस्ट अस्थिर अवस्था में थी। घनत्व में\n  वृद्धि के कारण अंदर के तापमान में वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप पदार्थ अपने\n  घनत्व के आधार पर विभाजित होने लगे। इसने भारी सामग्री जैसे लोहा को पृथ्वी के\n  केंद्र की ओर और हल्के पदार्थों को सतह की ओर ले जाने लगे। समय बीतने के साथ यह\n  और ठंडा हो गया और जम कर छोटे आकार में संघनित हो गया।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  यह बाद में एक क्रस्ट के रूप में बाहरी सतह का निर्माण करने लगा। चंद्रमा की\n  संरचना के दौरान प्रभाव के कारण, पृथ्वी और भी गर्म हो गई थी। यह पृथक्करण की\n  प्रक्रिया के माध्यम से है कि पृथ्वी बनाने वाली सामग्री विविध परतों में विभाजित\n  हो गई। पृथ्वी के पास क्रस्ट, मेंटल, बाहरी कोर और आंतरिक कोर जैसी परतें होती\n  हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eपृथ्वी की तीन परतें कौन सी है\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003Eपृथ्वी की तीन परतें निम्नलिखित हैं -\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cli\u003Eभूपर्पटी\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eप्रवार\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eक्रोड\u003C\/li\u003E\n\u003C\/ol\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eभूपर्पटी - \u003C\/b\u003Eयह पृथ्वी की बाहरी परत है और ठोस चट्टान से बनी है, ज्यादातर\n  क्रस्ट बेसाल्ट और ग्रेनाइट से बने होते हैं। क्रस्ट दो प्रकार के होते हैं;\n  समुद्री और महाद्वीपीय। समुद्री क्रस्ट सघन और पतला होता है और मुख्य रूप से\n  बेसाल्ट से बना है। महाद्वीपीय क्रस्ट कम घना, मोटा और मुख्य रूप से ग्रेनाइट से\n  बना है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eप्रवार - \u003C\/b\u003Eप्रवार मेंटल क्रस्ट के नीचे स्थित 2900 किमी तक मोटा होता है।\n  इसमें गर्म, घने, लौह और मैग्नीशियम युक्त ठोस चट्टान शामिल हैं। क्रस्ट और मेंटल\n  का ऊपरी हिस्सा स्थलमंडल बनाते हैं, जो बड़े और छोटे दोनों प्लेटों में टूट जाता\n  है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eकोर - \u003C\/b\u003Eकोर पृथ्वी का केंद्र है और दो भागों से बना है। तरल बाहरी कोर और\n  ठोस आंतरिक कोर। बाहरी कोर निकल, लोहे और पिघली हुई चट्टान से बना है। यहां का\n  तापमान 50,000 C तक पहुंच सकता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eस्थलमंडल कितने प्रकार के होते हैं\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पृथ्वी की पपड़ी में चट्टानों की विभिन्न परतें पायी जाती हैं जिनमें शीर्ष पर\n  तलछटी चट्टानें , बीच में ग्रेनाइट और कायापलट चट्टानें और तल पर बेसाल्टिक\n  चट्टानें शामिल हैं। पृथ्वी की पपड़ी में कई बड़ी गतिशील टेक्टोनिक प्लेटें भी\n  होती हैं। ये टेक्टोनिक प्लेट्स धीरे-धीरे लेकिन लगातार चलती रहती हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  स्थलमंडल दो प्रकार के होते हैं। \u003Cb\u003Eमहासागरीय \u003C\/b\u003E- जो महासागरीय क्रस्ट से\n  जुड़ा है और महासागरीय घाटियों में मौजूद है। \u003Cb\u003Eमहाद्वीपीय\u003C\/b\u003E - यह महाद्वीपीय\n  क्रस्ट से जुड़ा है।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/8181465961937546328\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-lithosphere.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/8181465961937546328"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/8181465961937546328"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-lithosphere.html","title":"स्थलमंडल किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-1424599843060794023"},"published":{"$t":"2022-09-02T08:02:00.011+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-18T22:22:46.433+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"छोटा नागपुर पठार कहां पर है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  नागपुर नाम संभवत: नागवंशियों से लिया गया है। जिन्होंने \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/what-is-country-called.html\"\u003Eदेश \u003C\/a\u003Eके इस हिस्से में\n  शासन किया था। छोटा रांची के बाहरी इलाके में चुइता गांव है, जिसमें नागवंशियों\n  से संबंधित एक पुराने किले के अवशेष मिले हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  छोटा नागपुर पठार एक \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/blog-post_17.html\"\u003Eमहाद्वीपीय\u003C\/a\u003E पठार है। इस \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/pathar-kise-kahate-hain.html\"\u003Eपठार \u003C\/a\u003Eका निर्माण \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/prithvi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eपृथ्वी \u003C\/a\u003Eकी गहराई में\n  कार्य करने वाली शक्तियों के द्वारा हुआ है। गोंडवाना सबस्ट्रेट्स पठार के\n  प्राचीन मूल को प्रमाणित करते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eछोटा नागपुर पठार कहां पर है\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  छोटा नागपुर पठार पूर्वी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/bharat-ke-padosi-desh.html\"\u003Eभारत \u003C\/a\u003Eको कवर करता है। जिसमे \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/jharkhand-in-hindi.html\"\u003Eझारखंड \u003C\/a\u003Eराज्य के साथ-साथ \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/bihar-in-hindi.html\"\u003Eबिहार\u003C\/a\u003E, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/Odisha.html\"\u003Eओडिशा\u003C\/a\u003E, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/west-bengal-in-hindi.html\"\u003Eपश्चिम बंगाल\u003C\/a\u003E और \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/06\/what-is-capital-of-chhattisgarh.html\"\u003Eछत्तीसगढ़ \u003C\/a\u003Eके शामिल है।\n  भारत \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/ganga-ka-maidan.html\"\u003Eगंगा का मैदान\u003C\/a\u003E छोटा नागपुर पठार के उत्तर और पूर्व में स्थित है, और\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/blog-post_46.html\"\u003Eमहानदी\u003C\/a\u003E का बेसिन दक्षिण में स्थित है। छोटा नागपुर पठार का कुल \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/definition-of-area.html\"\u003Eक्षेत्रफल \u003C\/a\u003Eलगभग\n  65,000 वर्ग किलोमीटर है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  यह दक्कन प्लेट का हिस्सा है, जिसने 50 मिलियन वर्ष पहले दक्षिणी महाद्वीप\n  से अलग होकर यूरेशियन महाद्वीप मे टकरा गया था। दक्कन के पठार का उत्तरपूर्वी भाग\n  यूरेशिया के साथ संपर्क का पहला क्षेत्र था।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  छोटा नागपुर का पठार तीन चरणों से मिलकर बना है। सबसे ऊंचा कदम पठार पश्चिमी भाग\n  में है। जो की \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/samudra-kise-kahate-hain.html\"\u003Eसमुद्र \u003C\/a\u003Eतल से 910 से 1,070 मीटर की उचाई पर स्थित हैं। उच्चतम\n  बिंदु 1,164 मीटर है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  अगले भाग में पुराने रांची और हजारीबाग जिलों के बड़े हिस्से और पुराने पलामू\n  जिले के कुछ हिस्से शामिल हैं। सामान्य ऊंचाई 610 मीटर है। प्रमुख नीसिक\n  पहाड़ियों के साथ लहरदार स्थलाकृति, रूपरेखा में अक्सर गुंबद की तरह दिखाई देता\n  हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  पठार का सबसे निचला भाग लगभग 300 मीटर है। इसमें पुराने मानभूम और सिंहभूम जिले\n  शामिल हैं। ऊँची पहाड़ियाँ इस खंड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पारसनाथ\n  पहाड़ियाँ 1,370 मीटर और दलमा हिल्स की ऊंचाई 1,038 मीटर तक हैं। यह पठार को कई\n  छोटे पठारों या उप पठारों में विभाजित है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  सदियों की भारी खेती ने इसकी अधिकांश प्राकृतिक वनस्पतियों को समाप्त कर दिया है,\n  हालांकि कुछ मूल्यवान वन अभी भी बचा हुआ हैं। इस क्षेत्र के लिए तुसाह रेशम और\n  लाख जैसे वन उत्पाद आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। छोटा नागपुर क्षेत्र भारत में\n  खनिज संसाधनों का सबसे मूल्यवान केंद्र रहा है। इस लिए छोटा नागपुर के पठार को\n  भारत का रूर भी कहा जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  दामोदर घाटी में कोयले के विशाल भंडार हैं, और हजारीबाग क्षेत्र दुनिया में अभ्रक\n  के मुख्य स्रोतों में से एक है। अन्य खनिज तांबा, चूना पत्थर, बॉक्साइट, लौह\n  अयस्क, अभ्रक और एपेटाइट हैं। पूर्वी झारखंड के बोकारो में बिजली पैदा करने के\n  लिए एक विशाल थर्मल प्लांट और एक बड़ी स्टील मिल स्थित है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  दामोदर नदी को दुख की \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/nadi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eनदी\u003C\/a\u003E के रूप में जाना जाता है। यह बिहार के छोटा नागपुर पठार\n  में कमरपेट पहाड़ी से निकलता है। यह भारतीय राज्यों झारखंड और पश्चिम बंगाल में\n  बहती है। पहले इसे बंगाल का शोक के रूप में जाना जाता था, क्योंकि यह पश्चिम\n  बंगाल के कई क्षेत्रों में बाढ़ आती थी। बराकर, कोनार, बोकारो, हाहरो, जमुनिया,\n  घारी, गुइया, खड़िया, भेरा इसकी सहायक नदियाँ हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  दामोदर और बराकर छोटा नागपुर पठार को तीन भागों में विभाजित करते हैं। नदियाँ\n  पहाड़ी क्षेत्रों से बड़ी ताकत से गुजरती हैं, उनके रास्ते में जो कुछ भी आता है\n  उसे बहा देती है। हजारीबाग जिले में ग्रांड ट्रंक रोड पर बने पत्थर का पुल और\n  लोहे के पुल को बराकर नदी ने तोड़ दिया था।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  छोटा नागपुर का पठार लगभग 1,400 मिमी की औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करता है, यह\n  लगभग सभी जून और अगस्त के बीच \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-monsoon-called-in-hindi.html\"\u003Eमानसून\u003C\/a\u003E के महीनों में होता है। मानसून के दौरान\n  दामोदर और उसकी सहायक नदियों में बहने वाले पानी की भारी मात्रा घाटी के ऊपरी\n  इलाकों में रोष का कारण बनती थी। निचली घाटी में यह अपने किनारों को बहा देता था\n  और बड़े क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती थी।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eजशपुर पाट कहा हैं\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  जशपुर पाट, पूर्वी छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर तहसील तक फैला हुआ है और छोटा नागपुर\n  पठार क्षेत्र का हिस्सा है। यह सपाट-शीर्ष वाले पठारों और पहाड़ियों का एक परिसर\n  है। उत्तर में ऊपरी पाट स्थानीय रूप से उपरघाट के रूप में जाना जाता है। जिसकी\n  ऊंचाई लगभग 2,500 से 3,300 फीट है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  दक्षिण में निचला पठार स्थानीय रूप से नीचघाट के रूप में जाना जाता है। यह लगभग\n  900 से 1,650 फीट की ऊंचाई तक पहुंचता है। जशपुर पठार गंगा और महानदी जल निकासी\n  प्रणालियों के बीच एक विभाजन का कार्य करती हैं। पठार का शीर्ष बंजर क्षेत्र हैं\n  यह घास के मैदानों से ढका हुआ हैं। गश पहाड़ और औरलकी हिल जशपुर पठार की दो ऊंची\n  चोटियां हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan\u003E\u003Cb\u003Eछोटा नागपुर पठार की सबसे ऊंची पर्वत चोटी का नाम क्या है\u003C\/b\u003E\u003C\/span\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पारसनाथ पहाड़ियाँ झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित छोटा नागपुर पठार की सबसे\n  ऊंची पर्वत चोटी है। इसकी अधिकतम उचाई 1350 मीटर है। यह जैन धर्मों के लिए सबसे\n  महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। वे इसे सम्मेद सिख कहते हैं। पहाड़ी का नाम\n  23वें तीर्थंकर पारसनाथ के नाम पर रखा गया है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  इस पहाड़ी पर बीस जैन तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया हैं। उनमें से प्रत्येक\n  के लिए पहाड़ी पर एक मंदिर बनाई गई है। माना जाता है कि पहाड़ी पर कुछ मंदिर\n  2,000 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। हालाँकि, यह स्थान प्राचीन काल से बसा हुआ\n  है। लोग इसे देवता की पहाड़ी मारंग बुरु कहते हैं। बैसाख में पूर्णिमा के दिन यहा\n  पर शिकार उत्सव मनाया जाता हैं।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1424599843060794023\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/where-is-chota-nagpur-plateau.html#comment-form","title":"0 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यहाँ तक कि आपके शरीर के अंदर भी। 1875 में, भूविज्ञानी एडुआर्ड सूस पृथ्वी के उस हिस्से का वर्णन करने के लिए जीवमंडल शब्द का उपयोग करने वाले पहले वैज्ञानिक थे जहाँ जीवन मौजूद है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजीवमंडल जहाँ जीवन पाया जा सकता है। जीवन हवा में, पृथ्वी पर और पानी में मौजूद है, जीवमंडल अन्य सभी क्षेत्रों को प्रभावित करता है और वे सभी जीवमंडल को प्रभावित करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपृथ्वी पर जीवों की संख्या को ध्यान में रखते हुए, जीवमंडल काफी छोटा है। जीवमंडल का अधिकांश भाग समुद्र की सतह से 500 मीटर नीचे और पृथ्वी की सतह से छह किलोमीटर ऊपर के बीच पाया जाता है। जीवमंडल काफी पुराना है; इसका निर्माण लगभग 3.5 अरब साल पहले पहले बैक्टीरिया की उपस्थिति के साथ हुआ था। जैसे-जैसे जीवन बदल गया वैसे-वैसे जीवमंडल भी बदल गया है।\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1566619511969275776\/comments\/default","title":"Post 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patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-5644900154301088128"},"published":{"$t":"2022-08-30T22:06:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-12-14T07:12:29.606+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"जलमंडल किसे कहते हैं?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eपृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है। जल महासागरों, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझीलों\u003C\/a\u003E, नदियों और नालों में पाया जाता है और भूमिगत जल के रूप में जमा होता है। कुछ राशि \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ice.html\"\u003Eबर्फ\u003C\/a\u003E के रूप में है। जल भी वायुमण्डल में जलवाष्प के रूप में विद्यमान रहते है। पृथ्वी पर मौजूद सभी जल को जलमंडल के रूप में जाना जाता है। जलमंडल पृथ्वी का जल घटक है। इसलिए हम जलमंडल को इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eजलमंडल किसे कहते हैं\u0026nbsp;\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eकिसी ग्रह पर पानी की कुल मात्रा इसमें सतह, भूमि और हवा में शामिल पानी गिना जाता है। किसी ग्रह पर तरल, वाष्प या बर्फ के रूप में विधमान पानी को जलमंडल कहा जाता हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजलमंडल हमेशा गति में रहता है। नदियों और झरनों की गति देखी जा सकती है, लेकिन तालाबों और झीलों में पानी की गति कम होती है। समुद्र और महासागर की कुछ गति को बड़े पैमाने की गतियों के साथ आसानी से देखा जा सकता है जो ध्रुवों और उष्णकटिबंधीय या महाद्वीपों के बीच बड़ी दूरी के साथ पानी की यात्रा करती हैं। इस प्रकार की गतियाँ धाराओं के रूप में होती हैं जो उष्ण कटिबंध में गर्म जल को ध्रुवों की ओर तथा ठंडे जल को ध्रुवों से उष्ण कटिबंध की ओर ले जाती हैं। ये धाराएँ समुद्र की सतह पर और समुद्र की गहराई में मौजूद हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजलमंडल का प्रमुख महत्व यह है कि पानी विभिन्न जीवन रूपों को बनाए रखता है और पारिस्थितिक तंत्र और वातावरण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जलमंडल पृथ्वी की सतह पर मौजूद सभी जल को कवर करता है। इसमें खारे पानी, मीठे पानी और जमे हुए पानी के साथ-साथ भूजल और वायुमंडल के निचले स्तरों में पानी शामिल है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5644900154301088128\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-hydrosphere.html#comment-form","title":"0 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patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-4446382353626722761"},"published":{"$t":"2022-08-30T21:29:00.010+05:30"},"updated":{"$t":"2023-12-14T07:12:36.830+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"मानचित्र किसे कहते है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eमानचित्र भूगोल का प्राण है उसे जीवंत तथा मूर्त स्वरूप प्रदान करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। अतः हम कह सकते हैं कि मानचित्र भूगोल वेता का उपकरण है भूगोल विषय का गहन अध्ययन मानचित्र के बिना असंभव है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपाठ्यक्रम में प्रस्तुत विषय सामग्री को अच्छी तरह समझने एवं किसी क्षेत्र विशेष की विभिन्न स्थलाकृतियों व आर्थिक, सामाजिक तथा राजनैतिक प्रणालियों का सही ज्ञान प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को मानचित्रों और एटलस का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर अभ्यास करना चाहिए।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमानचित्र किसे कहते है\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eमानचित्र एक प्रतीकात्मक चित्रण है जो किसी स्थान और वस्तुओं का विवरण प्रदान करता है। मानचित्र कागज या किसी माध्यम पर बनाया जा सकता हैं। मानचित्र का उपयोग भूगोल में किसी स्थान को चित्रित करने के लिए किया जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसबसे पहले ज्ञात मानचित्र, आकाश का बनाया गया था। लेकिन क्षेत्र के भौगोलिक मानचित्रों की एक बहुत लंबी परंपरा है। मानचित्र शब्द मध्यकालीन लैटिन से आया है। इस प्रकार मानचित्र दुनिया की सतह के द्वि-आयामी प्रतिनिधित्व करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eमानचित्र में भौतिक एवं सांस्कृतिक लक्षणों को जिन संकेतों की सहायता से प्रकट किया जाता है उन्हें रूढ़ चिन्ह या परम्परागत चिन्ह कहा जाता है। इन चिन्हों का निर्धारण अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअतः सभी देशों में इन्हीं चिन्हों का मानचित्र में प्रयोग किया जाता है। रूढ़ चिन्हों व संकेतों के प्रयोग से मानचित्रों में अधिक विवरण प्रदर्शित किए जा सकते हैं मानचित्र अंकन के द्वारा विद्यार्थियों में कलात्मक रचनात्मक प्रकृति का विकास होता है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमानचित्र पठन एवं अंकन\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eमानचित्र में अंकन करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E1. मानचित्र स्वच्छ सुन्दर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए ।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E2. मानचित्रों में नगरों को काले बिन्दु से प्रदर्शित करना चाहिए तथा संबंधित नगर या केन्द्र का नाम लिखना चाहिए।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E3. सड़क मार्ग को लाल रंग से रेलमार्ग को काले रंग से, नदी को नीले रंग से, पर्वत को कत्थई रंस से प्रदर्शित करना चाहिए।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E4. वनस्पति जलवायु तथा मरूस्थल आदि को प्रदर्शित करने के लिए चिन्हों का प्रयोग करना चाहिए।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E5. खाड़ी,\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझील\u003C\/a\u003E, नहर, द्वीप, नदी, पर्वत, नगर आदि अंकित करते समय उनका नाम अवश्य लिखना चाहिए।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E6. मानवीय बस्तियों को लाल रंग से, जलीय भाग को नीले रंग, स्थान कृतियों को बादामी रंग से, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/05\/blog-post_33.html\"\u003Eकृषि\u003C\/a\u003E क्षेत्र को पीले रंग, प्राकृतिक वनस्पति को हरे रंग तथा हिम भागों को श्वेत रंग से प्रदर्शित करना चाहिए।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E7. यदि प्रश्न पत्र में संकेत के संबंध में कोई दिशा निर्देश नहीं दिए गए हो तो मानचित्र में परम्परागत यह रूढ़ चिन्हों का ही प्रयोग करना चाहिए।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E8. मानचित्र में अंकित किए गए भौगोलिक तथ्यों एवं सूचनाओं की सूची मानचित्र में नीचे दाई या बाई ओर सुविधानुसार बना देनी चाहिए।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E9. मानचित्र पर प्रदर्शित भौगोलिक तथ्यों की स्थिति सुस्पष्ट एवं निर्धारित स्थान पर ही होनी चाहिए लेखन स्पष्ट तथा अक्षरों की मोटाई मानचित्र के आकार और मापक के अनुसार होना चाहिए। आवश्यकतानुसार अक्षरों का आकार घटा या बढा लेना चाहिए।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4446382353626722761\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-map.html#comment-form","title":"0 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patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-5395605240755686272"},"published":{"$t":"2022-08-30T16:59:00.004+05:30"},"updated":{"$t":"2023-12-14T07:12:44.110+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"धरातल किसे कहते हैं?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eपृथ्वी की ऊपरी सतह को धरातल कहा जाता है।\u0026nbsp;पृथ्वी की सतह ठोस हैं। इसके वायुमंडल, जलमंडल और जीवमंडल का एक गतिशील संघ है, इन सभी के रूप मे निरंतर बदलाव होता रहता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eक्रस्ट स्थलीय ग्रह के सबसे बाहरी आवरण है। हमारे ग्रह की 40 किलोमीटर गहरा क्षेत्र इसके अंतर्गत आता हैं। पृथ्वी की तीन परतें हैं - क्रस्ट, मेंटल और कोर। क्रस्ट ठोस चट्टानों और खनिजों से बना है। क्रस्ट के नीचे मेंटल होता है, जिसमे ज्यादातर ठोस चट्टानें और खनिज होते हैं। पृथ्वी के केंद्र में एक गर्म, घना धातु कोर कहलाता है। पृथ्वी की परतें लगातार एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करती रहती हैं। और मेंटल और क्रस्ट भूगर्भिक इकाई का हिस्सा हैं जिसे \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/what-is-lithosphere.html\"\u003Eस्थलमंडल\u003C\/a\u003E कहा जाता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5395605240755686272\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-surface.html#comment-form","title":"0 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patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-1842499697783108279"},"published":{"$t":"2022-08-30T11:15:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-10T08:50:14.596+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"जल किसे कहते हैं?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eछोटे जीव से लेकर विशाल ब्लू व्हेल तक सभी जीवित चीजों को जीवित रहने के लिए जल\u0026nbsp;की आवश्यकता होती है। जल\u0026nbsp;के बिना, जैसा कि हम जानते हैं कि जीवन का अस्तित्व नहीं हो सकता हैं। और जहां जल है वहां जीवन है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसभी जीव, जैसे जानवर और पौधे, जल\u0026nbsp;का उपयोग करते हैं। वे सभी प्रकार के आवासों के लिए अनुकूलित हैं, जलती हुई रेगिस्तान से लेकर ठंड और अंधेरे समुद्र तल तक। लगभग चार अरब साल पहले समुद्र में पहली जीवित चीजें दिखाई दीं। कुछ, हमारे पूर्वजों की तरह, भूमि पर जीवन के लिए अनुकूलित हुए। मनुष्यों ने यह पता लगा लिया है कि दलदलों, रेगिस्तानों और बीच-बीच में सभी प्रकार के आवासों में कैसे जीवित रह सकते है।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eजल किसे कहते हैं\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eजल\u0026nbsp;खास नहीं लगता है इसका कोई स्वाद नहीं है। यह किसी भी चीज की तरह गंध नहीं करता है। लेकिन जल\u0026nbsp;सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं इसके बिना पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व ही नहीं रहेगा।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजल एक सूक्ष्म अणु है। इसमें तीन परमाणु होते हैं। दो हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन का। जल\u0026nbsp;के अणु एक दूसरे से चिपके रहते हैं क्योंकि यह एक बल है जिसे हाइड्रोजन बंध कहते हैं। यही कारण है कि जल\u0026nbsp;अद्भुत काम कर सकता है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1842499697783108279\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-water.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/1842499697783108279"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/1842499697783108279"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-water.html","title":"जल किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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m²\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eक्षेत्र की गणना किसी आकृति की लंबाई को उसकी चौड़ाई से गुणा करके की जाती है। इस मामले में, हम इस आयत के क्षेत्र की गणना कर सकते हैं, भले ही वह चौकोर कागज पर न हो, केवल 5cm x 5cm = 25cm² की गणना करके।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4639277357380839851\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-area-called.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4639277357380839851"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4639277357380839851"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-area-called.html","title":"क्षेत्र किसे कहते 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href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझीलों\u003C\/a\u003E\n  में सबसे बड़ी है। यह पृथ्वी पर ताजे पानी का सबसे बड़ा जल निकाय भी है। और यहां\n  अमेरिका और कनाडा के अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फैला हुआ है।\u0026nbsp;सुपीरियर नाम इसके\n  आकार को दर्शाता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  झील लगभग 257 किलोमीटर चौड़ी और लगभग 563 किमी लंबी है। इसका सतह क्षेत्रफल\n  82,100 वर्ग किमी और पानी की मात्रा 12,100 घन किमी है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  सुपीरियर झील विस्कॉन्सिन राज्य के उत्तरी किनारे पर स्थित है और कनाडा के\n  ओंटारियो राज्य तक फैला है। यह पश्चिम से मिनेसोटा के पूर्वी किनारे तक फैला हुआ\n  है। सुपीरियर झील सतह क्षेत्र और आयतन के हिसाब से महान झीलों में सबसे बड़ी है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  सुपीरियर की औसत गहराई लगभग 500 फीट है। यह ग्रेट लेक्स की सबसे गहरी झील है।\n  सुपीरियर झील बड़ी झीलों में सबसे ठंडी है। पानी का तापमान क्षेत्र की जलवायु\n  निर्धारित करता है, जिससे सर्दियाँ गर्म और गर्मियाँ ठंडी हो जाती हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  झील का मौसम विस्कॉन्सिन और मिशिगन के तटों पर हिमपात का कारण बनता है क्योंकि\n  हवा ठंडी होती है और नमी को छोड़ती है। साथ ही सर्दियों के दौरान, झील 40 से 95\n  प्रतिशत बर्फ से ढकी रहती है। हवा आमतौर पर झील के केंद्र को खुला रखती है। यह\n  कभी-कभी पूरी तरह से जम जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  सुपीरियर पश्चिम से पूर्व की ओर लगभग 350 मील और उत्तर से दक्षिण की ओर 160 मील,\n  लगभग 2,800 मील लंबी तटरेखा के साथ फैला है। सुपीरियर झील के आसपास की अधिकांश\n  भूमि वनाच्छादित है। झील के पास लोग खेती नहीं करते हैं क्योंकि तापमान ठंडा है\n  और मिट्टी खराब है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Ctable\u003E\n  \u003Ctbody\u003E\u003Ctr\u003E\n    \u003Cth\u003Eमहत्वपूर्ण जानकारी\u003C\/th\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eसुपीरियर झील दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eसुपीरियर झील में पृथ्वी के ताजे सतही जल का 10% है।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n    \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eसुपीरियर झील का सबसे गहरा बिंदु सतह से 1,300 फीट नीचे है।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003E300 से अधिक धाराएँ और नदियाँ सुपीरियर झील में गिरती हैं।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n    \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eसुपीरियर झील की औसत ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 602 फीट है।\u0026nbsp;\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eसुपीरियर झील की औसत पानी के भीतर दृश्यता 27 फीट है।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n    \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eझील की लंबाई लगभग 563 किमी और चौड़ाई\u0026nbsp; 257 किमी है।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n  \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eसुपीरियर झील में 400 से अधिक द्वीप हैं, जिनमें से सबसे बड़ा आइल रोयाल है।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n    \u003Ctr\u003E\n    \u003Ctd\u003Eसुपीरियर झील पर 40 फीट से अधिक ऊंचाई की लहरें दर्ज की गई हैं।\u003C\/td\u003E\n  \u003C\/tr\u003E\n\u003C\/tbody\u003E\u003C\/table\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1136694069946380075\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-lake-superior.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/1136694069946380075"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/1136694069946380075"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-lake-superior.html","title":"सुपीरियर झील कहां है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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मंगोलियाई सीमा के उत्तर में दक्षिण-पूर्वी साइबेरिया से होकर लगभग 400 मील की दूरी पर है। अपने सबसे गहरे बिंदु पर यह 5,000 फीट (1,637 मीटर) से अधिक गहरा है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयह आयतन की दृष्टि से विश्व की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। इसमें लगभग 5,521 घन मील पानी (23,013 घन किलोमीटर) या पृथ्वी के ताजे सतही जल का लगभग 20% है। यह पानी की मात्रा है जो संयुक्त रूप से उत्तरी अमेरिकी ग्रेट झीलों के सभी पांचों के बराबर है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5484165636216543287\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-lake-baikal.html#comment-form","title":"0 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के रूप मानती हैं जबकि अन्य दुनिया की बहुलता की बात करती हैं। कुछ लोग दुनिया को एक साधारण वस्तु के रूप में देखते हैं जबकि अन्य दुनिया का विश्लेषण कई हिस्सों से बने एक जटिल के रूप में करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eविज्ञान में दुनिया या ब्रह्मांड को आमतौर पर वह सभी स्थान और समय की समग्रता के रूप में परिभाषित किया जाता है। दूसरी ओर, तौर-तरीके के सिद्धांत संभावित दुनिया को पूर्ण और सुसंगत तरीके से बताते हैं कि चीजें कैसे हो सकती थीं। प्रत्येक अनुभव की परिधि में मौजूद सह-दिया वस्तुओं के क्षितिज से शुरू होने वाली फेनोमेनोलॉजी, दुनिया को सबसे बड़े क्षितिज के रूप में परिभाषित करती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/3259447914170709812\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/who-is-world.html#comment-form","title":"0 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है। झरनों को कैस्केड भी कहा जाता है। कटाव की प्रक्रिया जलप्रपातों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जलप्रपात स्वयं भी अपरदन में योगदान करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eझरने कई अलग-अलग तरीकों से बनाए जा सकते हैं, लेकिन उनके बनने का सबसे आम तरीका कटाव के रूप में जानी जाने वाली भौगोलिक घटना पर निर्भर करता है। जलप्रपात तब बनते हैं जब पानी नरम सामग्री, जैसे बलुआ पत्थर, या कुछ परिस्थितियों में \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ice.html\"\u003Eबर्फ\u003C\/a\u003E जैसी नरम चट्टानों पर बहता है। जैसे-जैसे नदियाँ बहती हैं, उनमें अक्सर ठोस पदार्थ होते हैं, जिसे तलछट के रूप में जाना जाता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयह तलछट सूक्ष्म गाद से लेकर कंकड़ या बोल्डर तक आकार में भिन्न हो सकती है! पानी की गति, और तलछट धीरे-धीरे नदी के तल की नरम सामग्री को दूर कर सकती है, जिससे नदी का चैनल बदल जाता है। जैसे-जैसे अधिक से अधिक नरम सामग्री घिस जाती है, अंततः पानी की धारा धारा के तल में इतनी गहराई तक कट जाती है कि केवल ग्रेनाइट जैसी कठोर चट्टान रह जाती है। ये कठिन चट्टानें चट्टानें और सीढ़ियाँ बनाती हैं, जिन पर पानी अब बहता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eएक झरने के पास एक धारा का वेग बढ़ जाता है, जिससे कटाव की मात्रा बढ़ जाती है। एक झरने के शीर्ष पर पानी की गति चट्टानों को बहुत सपाट और चिकनी बना सकती है। झरने के ऊपर से पानी और तलछट का गिरना, आधार पर स्थित प्लंज पूल को नष्ट कर देता है। पानी का दुर्घटनाग्रस्त प्रवाह शक्तिशाली भँवर भी बना सकता है जो उनके नीचे डुबकी पूल की चट्टान को नष्ट कर देता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eएक झरने के आधार पर परिणामी क्षरण बहुत नाटकीय हो सकता है, और जलप्रपात को पीछे हटने का कारण बन सकता है। झरने के पीछे का क्षेत्र घिस जाता है, जिससे एक खोखली, गुफा जैसी संरचना बन जाती है जिसे चट्टान आश्रय कहा जाता है। आखिरकार, चट्टानी कगार नीचे गिर सकता है, बोल्डर को स्ट्रीम बेड में भेज सकता है और नीचे पूल को डुबो सकता है। यह झरने को कई मीटर ऊपर की ओर पीछे हटने का कारण बनता है। जलप्रपात के कटाव की प्रक्रिया फिर से शुरू हो जाती है, जो पूर्व के बहिर्गमन के शिलाखंडों को तोड़ती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eहालांकि यह सबसे आम तरीका है कि झरने बनते हैं कटाव सिर्फ एक प्रक्रिया है जो झरने का निर्माण कर सकती है। जलप्रपात पृथ्वी की सतह में किसी दोष या दरार के कारण बन सकता है। भूकंप,\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/05\/blog-post_50.html\"\u003Eभूस्खलन\u003C\/a\u003E, ग्लेशियर या ज्वालामुखी भी धारा के बिस्तरों को बाधित कर सकते हैं और झरने बनाने में मदद कर सकते हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/3010936338118542267\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-waterfall.html#comment-form","title":"0 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"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/15517691135806317871"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEjeVgKQytCUGzVtHR8Wy4zFDDEV9IeK7YK1RjUaNewWzYR-VSYmozeVzsKlM6CiXbKnC2vg_-gBK1BsfaiXZofGleBDezmhcXE5V_fzKgIxC2wQhCpIb_5Kt_CS3DnMdA\/s220\/26cb1c537c21f79a953214103b93c686.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-2870452328525025555"},"published":{"$t":"2022-08-29T13:21:00.015+05:30"},"updated":{"$t":"2023-12-14T07:14:25.567+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"शहर किसे कहते है?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eशहर एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। और यहाँ सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। शहरो में अधिकतर माकन पक्के होते हैं। परिवहन जैसे प्राथमिक सुविधाएं आसानी से प्राप्त हो जाती हैं। साथ ही बुनियादी सुविधावो को बनाए रखने के लिए सरकारें कार्य करती रहती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअधिकतर शहर आकार में बहुत बड़े होते हैं, जहाँ बड़ी संख्या में मानव बस्ती पायी जाती है। यह शहर को स्थायी बसी होती हैं। जहां के लोग गैर-कृषि कार्य करते हैं। शहरों में आवास, परिवहन, स्वच्छता, शिक्षा, रोजगार, वस्तुओं का उत्पादन और संचार जैसी प्राथमिक सुविधाएं आसानी से प्राप्त हो जाती हैं। शहरों में सरकारी संगठन और बड़े व्यवसाय भी पाए जाते है। जो जरूरतों को पूरा करने में सपनी भूमिका निभाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपहले शहरो में भी काम आबादी रहती थी। लेकिन शहरीकरण के कारण दुनिया की आधी से अधिक आबादी अब शहरों में रहती है। वर्तमान समय के शहर आम तौर पर बड़े महानगरीय क्षेत्रों में परिवर्तित हो गए हैं। इस तरह के शहर का क्षेत्र बहुत बड़ा होता हैं। और इन शहरों को कई क्षेत्रों में बांटा जाता हैं। बड़ी सुविधाएं अक्सर शहर के केंद्रों की ओर रहती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eशहर कितने प्रकार के होते हैं? विभिन्न प्रकार के शहर का विवरण नीचे दिया गया है -\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E1. मेट्रोप्लेक्स शहर -\u003C\/b\u003E यह एक महानगरीय क्षेत्र हैं जो दो शहरों के मिलने से बनते हैं। इसे जुड़वाँ शहर भी कहा जाता हैं। इस प्रकार के शहर समय के साथ साथ मिलकर महानगर का निर्माण करते हैं। जुड़वा शहर कभी-कभी एक हवाई अड्डे के निर्माण से उत्पन्न होते हैं जो बड़े शहरों और और आसपास के छोटे शहरो के मिलने से बनते है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E2. मेगासिटी \u003C\/b\u003E- 10 मिलियन से अधिक लोगों जिस शहर में रहते है उसे मेगासिटी कहा जाता हैं। इसमें पूरे शहरी समूह की आबादी की जनसख्या को गिना जाता है, अर्थात इसमें शहरी सीमा के बाहर उपनगरों में रहने वाले लोग शामिल होते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E3.महानगर -\u003C\/b\u003E एक बड़े शहरों और आसपास के महानगरीय क्षेत्रों के मिलने से बनता है जो मुख्य रूप से परिवहन और बुनियादी सुविधावों से जुड़े होते हैं। महानगर का निर्माण अधिकतर आर्थिक विकास और वाणिज्य के निरंतर प्रवाह के कारण होता है जो सभी क्षेत्रों को आपस में जोड़े रहती हैं और विकास का समर्थन करती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E4. स्मार्ट शहर\u003C\/b\u003E - यह वे शहर हैं जिसका निर्माण भविष्य को ध्यान में रखकर किया जाता हैं। इस प्रकार के शहर में परिवहन और प्रधोगिकी पर अधिक ध्यान दिया जाता हैं। इसका निर्माण करते समय आधुनिकीकरण के साथ साथ प्रकृति को ध्यान में रखा जाता हैं। डिजिटल और मानव प्रणालियों का प्रभावी एकीकरण स्मार्ट शहर की विशेता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E5. वैश्विक शहर -\u003C\/b\u003E एक ऐसा शहर है जो वैश्विक आर्थिक केंद्र के रूप में कार्य करता है। वैश्वीकरण का दुनिया भर में वित्त, व्यापार और संस्कृति पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा है। वैश्विक शहर व्यापारिक गतिविधि का महत्वपूर्ण केंद्र होता है, जो अन्य शहरों को जोड़ने का कार्य करता है। जिनका विश्व व्यापर में आर्थिक मामलों पर प्रत्यक्ष प्रभाव होता है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/2870452328525025555\/comments\/default","title":"Post 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रूप में की जाती है , और उन्होंने आज इस्तेमाल की जाने वाली कुछ शब्दावली का परिचय दिया हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउन्हें पृथ्वी की परिधि की गणना करने वाले पहले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है,\u0026nbsp; उनकी गणना सटीक थी। वह पृथ्वी के अक्षीय झुकाव की गणना करने वाले पहले व्यक्ति भी थे। उन्होंने अपने युग के उपलब्ध भौगोलिक ज्ञान के आधार पर समानांतर और मेरिडियन को शामिल करते हुए दुनिया का पहला वैश्विक मानचित्र बनाया था।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1347738073269269317\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/who-is-eratosthenes.html#comment-form","title":"0 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href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/what-is-pollution-in-hindi.html\"\u003Eप्रदूषण\u003C\/a\u003E और इसमें बहने वाली \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/nadi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eनदियों\u003C\/a\u003E पर बांधों के\n  निर्माण ने इसे नुकसान पहुँचाया है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eकैस्पियन सागर कहां है\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003Eकैस्पियन सागर क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा जल क्षेत्र है। यह दुनिया की कुल झील के पानी का 40-44% है। कैस्पियन सागर की तटरेखा अज़रबैजान,\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/capital-of-iran-in-hindi.html\"\u003Eईरान\u003C\/a\u003E,\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/Kazakhstan.html\"\u003Eकजाकिस्तान\u003C\/a\u003E,\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/Russia.html\"\u003Eरूस\u003C\/a\u003Eऔर\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/capital-of-turkmenistan.html\"\u003Eतुर्कमेनिस्तान\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;से मिलती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\n  कैस्पियन सागर यूरोप और \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/asia-in-hindi.html\"\u003Eएशिया\u003C\/a\u003E के बीच मे स्थित एक अंतर्देशीय \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/samudra-kise-kahate-hain.html\"\u003Eसमुद्र\u003C\/a\u003E है। कैस्पियन\n  सागर\u0026nbsp; दुनिया की सबसे बड़ी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझील\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;है। यह \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/prithvi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eपृथ्वी\u003C\/a\u003E पर\n  पानी का सबसे बड़ा संलग्न अंतर्देशीय पिंड है जिसका \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/definition-of-area.html\"\u003Eक्षेत्रफल\u003C\/a\u003E 371,000 किमी² है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  कैस्पियन सागर काला सागर से लगभग 500 किमी पूर्व में यूरोप और\n  पश्चिमी एशिया के बीच स्थित हैं। जबकि मध्य एशिया के\n  काराकुम और क्यज़िलकुम \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/08\/desert-in-hindi.html\"\u003Eरेगिस्तान\u003C\/a\u003E के पश्चिम में स्थित है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  कैस्पियन सागर यूरेशिया का सबसे निचला प्राकृतिक बिंदु है, कैस्पियन सागर की सतह\n  औसत समुद्र तल से लगभग 21 मीटर नीचे है। वोल्गा \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/nadi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eनदी\u003C\/a\u003E कैस्पियन के प्रवाह का 80%\n  है, अन्य प्रवाह यूराल नदी, कुरा और टेरेक नदी हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eइस समुद्री क्षेत्र को ऊर्जा संसाधनों की प्रचुरता के लिए भी जाना जाता है। कैस्पियन के सभी\n  देश अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के सहयोग से यहाँ स्थित तेल भंडार का दोहन करते हैं। लेकिन कैस्पियन\n  सागर में तेल और प्राकृतिक गैस संसाधनों में से अधिकांश का दोहन नहीं किया गया\n  है। क्योंकि पांच सीमावर्ती देशों के बीच समुद्री सीमाओं का सीमांकन करने और\n  ऊर्जा संसाधनों को कैसे विभाजित किया जाए इस पर विवाद है।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1348841621500340770\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-caspian-sea.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/1348841621500340770"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/1348841621500340770"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-caspian-sea.html","title":"कैस्पियन सागर कहां है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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परिवर्तनशीलता बढ़ी है और भूजल तालिका तेजी से घट रही है।\n    बुंदेलखंड, विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे कई \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/peninsula-in-hindi.html\"\u003Eप्रायद्वीपीय\u003C\/a\u003E क्षेत्र बार-बार सूखे\n    जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। देश में व्याप्त भीषण सूखे 250 से अधिक जिलों में संकट पैदा कर दिया है। तालाब और बांध का निर्माण जल का संरक्षण किया जा सकता हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eतालाब किसे कहते हैं\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003E\n  तालाब एक \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझील\u003C\/a\u003E से छोटा पानी का क्षेत्र होता है। तालाब में कई जलीय जीव निवास करते\n  हैं। बत्तख, कछुए, हंस, छोटी मछलियाँ और मेंढक एक तालाब में रहते हैं। ज्यादातर\n  तालाबों में धूप नीचे तक पहुंच जाती है। क्योकि अधिकतर तालाब ज्यादा गहरे नहीं\n  होते हैं। कुछ तालाब में पूरे साल पानी नहीं होती हैं। इस प्रकार के तालाब को\n  वर्नल तालाब या अल्पकालिक, मौसमी या अस्थायी तालाब कहा जाता है। इस प्रकार के\n  तालाबों में मछली नहीं होती है। कुछ तालाब अब इंसानों की वजह से प्रदूषित हो रहे\n  हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eतालाब के फायदे\u003C\/b\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cli\u003Eयह जल नियंत्रण को बढ़ाने में मदद करता है।\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eयह कृषि में योगदान देता है और \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/05\/blog-post_33.html\"\u003Eकृषि\u003C\/a\u003E आय को बढ़ावा देता है।\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eयह बरसात के दिनों में पानी एकत्र करता है।\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eसंचित जल का उपयोग फसलों की पूरक सिंचाई के लिए किया जा सकता है।\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003E\n    यह सूखे की स्थिति में मवेशियों के लिए पीने के पानी के रूप में उपयोगी है।\n  \u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eयह मिट्टी और नमी का संरक्षण करता है।\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eतालाब में मछली पालन कर आय को बढ़ाया जा सकता हैं।\u003C\/li\u003E\n\u003C\/ol\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/5686199320184381676\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-pond.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5686199320184381676"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/5686199320184381676"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-pond.html","title":"तालाब किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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में सिनाई \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/peninsula-in-hindi.html\"\u003Eप्रायद्वीप\u003C\/a\u003E, अकाबा की खाड़ी और स्वेज की खाड़ी हैं। लाल सागर का सतह क्षेत्र लगभग 174,000 वर्ग मील है। लगभग 1,200 मील लंबा और, इसके सबसे बड़े बिंदु पर 190 मील से अधिक चौड़ा है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइसकी अधिकतम गहराई 8,200 फीट और औसत गहराई 1,640 फीट है। समुद्र में 1,000 से अधिक प्रजातियों का निवास स्थान है और यह दुनिया का सबसे उत्तरी उष्णकटिबंधीय समुद्र है। लाल सागर को दुनिया के सबसे खारे जल क्षेत्र है जो लाल सागर में वाष्पीकरण और हवा के पैटर्न को प्रभावित करता है। इस क्षेत्र में लवणता 36 और 38 के बीच होती है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4038185117452166753\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-red-sea.html#comment-form","title":"0 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बनाती है। यह लगभग 200 किमी लंबा और उत्तर में 20 किमी चौड़ा और दक्षिण में 70 किमी तक फैला हुआ है। नर्मदा, तापी, माही गुजरात से अरब सागर तक जाती है। यह काठियावाड़ प्रायद्वीप को गुजरात के दक्षिण-पूर्वी भाग से विभाजित करता है। यह अत्यधिक ज्वार के लिए जाना जाता है। मैंग्रोव खंभात की खाड़ी में भी पाए जाते हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/7264254309509707264\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-gulf-of-khambhat-located.html#comment-form","title":"0 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style=\"text-align: left;\"\u003Eबंदरगाह\u0026nbsp; समुद्र, एक\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/nadi-kise-kahate-hain.html\"\u003E नदी\u003C\/a\u003E या एक\u0026nbsp; \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझील\u003C\/a\u003E के तट पर जहाजों के लिए रुकने का\u0026nbsp;स्थान है। जहाज अपने कार्गो और यात्रियों को लोड और अनलोड करने के लिए बंदरगाहों पर डॉक करते हैं। माल और कच्चे माल के परिवहन में बंदरगाह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें अक्सर उनके उद्देश्य से वर्गीकृत किया जाता है।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: left;\"\u003Eउदाहरण के लिए, रास तनुरा, सऊदी अरब, एक तेल बंदरगाह है। फ्रांस, एक मछली पकड़ने का बंदरगाह है। जिब्राल्टर, ग्रेट ब्रिटेन का एक क्षेत्र, एक नौसैनिक बंदरगाह है। सेना द्वारा उपयोग किया जाता है। नासाउ, बहामास, एक क्रूज जहाज और पर्यटन बंदरगाह है।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003Eजहाजों में आमतौर पर कॉल के एक से अधिक पोर्ट होते हैं। या वे स्थान जहां वे डॉक करते हैं । पनामा नहर के निर्माण से पहले, न्यूयॉर्क, न्यूयॉर्क से सैन फ्रांसिस्को, कैलिफ़ोर्निया जाने वाले एक जहाज में उत्तर और दक्षिण अमेरिका के तटों के आसपास दर्जनों कॉल पोर्ट होंगे। इनमें मियामी, फ्लोरिडा शामिल हो सकते हैं।\u0026nbsp;\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eरेसिफ़, ब्राज़ील; ब्यूनोस एयर्स, अर्जेंटीना; वालपराइसो, चिली; और अकापुल्को, मेक्सिको। कार्गोबंदरगाvvहvह कार्गो बंदरगाह महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र हैं जहां पानी परिवहन और भूमि परिवहन मिलते हैं। कई सामान, जैसे कि कार, तेल , लोहा और स्टील , बहुत भारी या बोझिल होते हैं। जिन्हें विमान, ट्रेन या ट्रक द्वारा लंबी दूरी तक ले जाया जा सकता है।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eट्रेनें ऐसे माल को बंदरगाह तक पहुंचा सकती हैं। जहां उन्हें जहाज पर लाद दिया जाता है। एक बार जहाज पर, माल दुनिया भर में यात्रा करता है। कुछ मालवाहक जहाज भीड़-भाड़ वाले बंदरगाह में संचालन के लिए बहुत बड़े हैं। टगबोट छोटी, शक्तिशाली नावें होती हैं जो अपने पीछे बड़े जहाजों को खींचती हैं। टगबोट भारी जहाज को अंदर खींच सकता है।\u0026nbsp;\u003Cbr \/\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eजहाज की तुलना में अधिक आसानी से बंदरगाह अपने आप का प्रबंधन कर सकता है। कई बंदरगाहों पर टगबोट परिचित जगहें हैं। न्यू ऑरलियन्स, लुइसियाना का बंदरगाह सैकड़ों वर्षों से संयुक्त राज्य में सबसे व्यस्त कार्गो बंदरगाहों में से एक रहा है। यह बंदरगाह मिसिसिपी नदी और मैक्सिको की खाड़ी के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका के आंतरिक भाग को शेष दुनिया से जोड़ता है।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eमिसिसिपी हर साल 500 मिलियन टन से अधिक कार्गो ले जाता है। न्यू ऑरलियन्स में मिसिसिपी के साथ हजारों जहाज डॉक करते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के जहाज अनाज जैसे सामान उतारते हैं और मिडवेस्ट से अन्य \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/05\/blog-post_33.html\"\u003Eकृषि\u003C\/a\u003E उत्पाद। लैटिन अमेरिका के जहाज कॉफी और रबर जैसे सामान उतारते हैं। एशिया से जहाज कपड़े या तेल के बैरल जैसे सामान ला सकते हैं।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003Eअधिकांश कार्गो बंदरगाह गर्म पानी के बंदरगाह हैं। गर्म पानी के बंदरगाह वे बंदरगाह हैं जो पूरे साल \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ice.html\"\u003Eबर्फ\u003C\/a\u003E से मुक्त रहते हैं। यहां तक ​​कि बंदरगाह जहां पानी ठंडा है। जैसे न्यूयॉर्क, या वैंकूवर, कनाडा, गर्म पानी के बंदरगाह हैं। रूस के पास हजारों मील का तट है। और सैकड़ों बंदरगाह हैं।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eआर्कटिक \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर\u003C\/a\u003E के किनारे। इनमें से लगभग सभी ठंडे पानी के बंदरगाह हैं। वे कभी-कभी हफ्तों या महीनों तक बर्फ में बंद रहते हैं। बर्फ से अवरुद्ध होने पर माल को बंदरगाह के अंदर या बाहर नहीं ले जाया जा सकता है। जब जहाज बर्फ से घिरे हों तो नाविक पनडुब्बियों में नहीं चढ़ सकते और न ही उनमें रह सकते हैं।\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eयात्री बंदरगाह\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cdiv\u003Eकुछ बंदरगाह , जैसे डोवर, इंग्लैंड में, मुख्य रूप से यात्रियों की सेवा करते हैं। डोवर में बंदरगाह सदियों से लोगों द्वारा उपयोग किया जाता रहा है क्योंकि यह इंग्लैंड और यूरोप के बीच 32 किलोमीटर (20 मील) से अधिक की दूरी पर सबसे छोटा समुद्री क्रॉसिंग प्रदान करता है।\u003Cbr \/\u003Eयात्री बंदरगाह परंपरागत रूप से संचार के केंद्र रहे हैं।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eऐतिहासिक रूप से, बंदरगाह विदेशों से नवीनतम समाचार, सामान और फैशन लाते थे। व्यस्त बंदरगाहों के आसपास रहने और काम करने वाले लोग अक्सर विदेशी भाषाओं और संस्कृतियों से परिचित होते हैं। न्यूयॉर्क का बंदरगाह लाखों अप्रवासियों के लिए संयुक्त राज्य का प्रवेश द्वार था।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eउदाहरण के लिए, उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी में यूरोप से। इतालवी, स्पेनिश और यिडिश परिचित भाषा बन गए, जबकि स्कैंडिनेविया और रूस के रीति-रिवाज आयरिश परंपराओं के साथ मिश्रित हो गए।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003Eबंदरगाह अधिक खतरनाक प्रकार के संचार की मेजबानी भी कर सकते हैं। भूमध्य सागर के तेज बंदरगाह हजारों वर्षों से व्यापार मार्गों का हिस्सा रहे हैं। जो अफ्रीका , एशिया और यूरोप के नाविकों और व्यापारियों से परिचित हैं। चौदहवीं शताब्दी में, काला सागर से नौकायन जहाज मेसिना, सिसिली के बंदरगाह पर उतरे।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eचीन से रेशम जैसे कार्गो के अलावा , गलीचेफारस से, और इंडोनेशिया से मसाले , जहाजों ने चूहों को ढोया। इन चूहों पर रोग, प्लेग , पूरे यूरोप में तेजी से फैल गया। ब्लैक डेथ नामक प्लेग के एक रूप से यूरोपीय आबादी का कम से कम एक चौथाई हिस्सा मर गया।\u003Cbr \/\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003C\/div\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4543176991702594063\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-port.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4543176991702594063"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/4543176991702594063"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-port.html","title":"बंदरगाह किसे कहते हैं - what is port"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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नुकसान का कारण बनती है। बाड़, सूखा, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/11\/sharad-ritu-ki-visheshta.html\"\u003Eसुनामी \u003C\/a\u003Eआदि इसके उदाहरण हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eआपदाओं को दो भागों में विभाजित किया जा सकता हैं। प्राकृतिक और मानवीय जो प्राकृतिक खतरे होती हैं उसे\u0026nbsp; प्राकृतिक आपदा कहा जाता हैं। और जो मानव द्वारा निर्मित आपदा होती हैं उसे मानवीय आपदा कहा जाता हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/4932483146362342891\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-disaster.html#comment-form","title":"0 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href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/blog-post_17.html\"\u003Eउपमहाद्वीप \u003C\/a\u003Eऔर हिंद \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/how-many-oceans-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर \u003C\/a\u003Eका हिस्सा है। \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/arabian-sea-in-hindi.html\"\u003Eअरब सागर\u003C\/a\u003E लगभग 38,62,000 किमी2 में स्थित है तथा इसकी अधिकतम चौड़ाई लगभग 2,400 किमी है। \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-origin-of-river-indus-river.html\"\u003Eसिन्धु नदी\u003C\/a\u003E सबसे महत्वपूर्ण \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/nadi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eनदी\u003C\/a\u003E है जो अरब सागर में गिरती है, इसके आलावा भारत की नर्मदा और ताप्ती नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं। यह एक त्रिभुजाकार सागर है जो दक्षिण से उत्तर की ओर संकरा होता जाता है। अरब सागर के तट पर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/india.html\"\u003Eभारत \u003C\/a\u003Eके अलावा \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/capital-of-iran-in-hindi.html\"\u003Eईरान\u003C\/a\u003E, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/capital-of-oman.html\"\u003Eओमान\u003C\/a\u003E, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/pakistan-in-hindi.html\"\u003Eपाकिस्तान\u003C\/a\u003E, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/capital-of-yemen-in-hindi.html\"\u003Eयमन \u003C\/a\u003Eऔर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/sanyukt-arab-amirat-ki-rajdhani.html\"\u003Eसंयुक्त अरब अमीरात\u003C\/a\u003E हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eअरब सागर में गिरने वाली 4 प्रमुख नदियों के नाम लिखिए\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Col\u003E\u003Cli\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-does-luni-river-flow.html\"\u003Eलूनी नदी\u003C\/a\u003E\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/sabarmati-river-in-hindi.html\"\u003Eसाबरमती नदी\u003C\/a\u003E\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/mahi-nadi-ka-udgam-sthal-kahan-hai.html\"\u003Eमाही नदी\u003C\/a\u003E\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/blog-post_1.html\"\u003Eनर्मदा नदी\u003C\/a\u003E\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003E1. लूनी नदी \u003C\/b\u003E- लूनी उत्तर पश्चिम भारत के \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/08\/thar-desert.html\"\u003Eथार रेगिस्तान\u003C\/a\u003E की सबसे बड़ी नदी है। यह अजमेर के पास \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/08\/aravali-parvat.html\"\u003Eअरावली रेंज\u003C\/a\u003E की पुष्कर घाटी से निकलती है। यह थार रेगिस्तान के दक्षिणपूर्वी हिस्से से गुजरती है, और 495 किमी की दूरी तय करने के बाद, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/capital-of-gujarat.html\"\u003Eगुजरात \u003C\/a\u003Eमें \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/rann-of-kutch.html\"\u003Eकच्छ के रण\u003C\/a\u003E में समाप्त होती है। इसे पहले सागरमती के नाम से जाना जाता है। यह अपनी सहायक नदी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/does-any-proof-for-existence-of-river.html\"\u003Eसरस्वती नदी\u003C\/a\u003E से मिलती है, जो \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-pushkar-lake-located.html\"\u003Eपुष्कर झील\u003C\/a\u003E से निकलती है और तब से इसे लूनी कहा जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003E2. साबरमती नदी\u003C\/b\u003E - साबरमती \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/nadi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eनदी\u003C\/a\u003E भारत में पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख नदियों में से एक है। यह \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/rajasthan-in-hindi.html\"\u003Eराजस्थान\u003C\/a\u003E के उदयपुर जिले की अरावली रेंज में निकलती है और राजस्थान और गुजरात में दक्षिण-पश्चिम दिशा में 371 किमी की यात्रा करने के बाद अरब सागर के \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-gulf-of-khambhat-located.html\"\u003Eखंभात की खाड़ी\u003C\/a\u003E से मिलती है। नदी की लंबाई का 48 किमी राजस्थान में है, जबकि 323 किमी गुजरात में है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003E3.\u0026nbsp;माही नदी \u003C\/b\u003E-\u0026nbsp;माही पश्चिमी भारत की एक नदी है। यह \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/madhya-pradesh-in-hindi.html\"\u003Eमध्य प्रदेश\u003C\/a\u003E से निकलती है और राजस्थान के वागड क्षेत्र से होते हुए गुजरात में प्रवेश करता है और अरब सागर में मिल जाता है। यह लूनी नदी, साबरमती नदी, तापी नदी और नर्मदा नदी के साथ भारत के पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में से एक है। भारत में अधिकांश \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/peninsula-in-hindi.html\"\u003Eप्रायद्वीपीय\u003C\/a\u003E नदियाँ पूर्व की ओर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/bay-of-bengal.html\"\u003Eबंगाल की खाड़ी\u003C\/a\u003E में या उत्तर की ओर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/06\/ganges-river-basin.html\"\u003Eगंगा नदी\u003C\/a\u003E में बहती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003E4. नर्मदा नदी\u003C\/b\u003E -\u0026nbsp;नर्मदा नदी, जिसे रेवा नदी भी कहा जाता है और जिसे पहले नर्बदा के नाम से भी जाना जाता था। भारत की 5वीं सबसे लंबी नदी है। यह मध्य प्रदेश \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/rajya-kise-kahte-hai.html\"\u003Eराज्य \u003C\/a\u003Eकी सबसे बड़ी बहने वाली नदी भी है। यह नदी भारत में मध्य प्रदेश और गुजरात राज्यों से होकर बहती है। इसके योगदान के कारण इसे मध्य प्रदेश और गुजरात की जीवन रेखा के रूप में भी जाना जाता है। नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में अमरकंटक पठार से निकलती है। यह उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच पारंपरिक सीमा बनाती है और पश्चिम की ओर 1,312 किमी लंबी है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/6607946547295108308\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/07\/4.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/6607946547295108308"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/6607946547295108308"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/07\/4.html","title":"अरब सागर में गिरने वाली 4 प्रमुख नदियों के नाम लिखिए"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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वातावरणों का अध्ययन शामिल है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eयह किसी स्थान के प्राकृतिक वातावरण, रहने वाली आबादी और होने वाली विभिन्न अंतःक्रियाओं की विशेषताओं का अध्ययन करता है। किसी स्थान के भौगोलिक अध्ययन में आमतौर पर इसकी स्थलाकृति के बारे में सीखना, जलवायु और मौसम के पैटर्न को जानना, उस क्षेत्र में प्रचलित वनस्पति के साथ-साथ औद्योगिक, कृषि, शहरीकरण और अन्य भूमि का अनुसरण करके उस पर्यावरण के प्रति मानव की प्रतिक्रिया शामिल है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/1251337975843190364\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/geography.html#comment-form","title":"0 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href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/arabian-sea-in-hindi.html\"\n    \u003Eअरब सागर\u003C\/a\n  \u003E\n  स्थित है।\u0026nbsp;अरब सागर को\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-red-sea.html\"\n    \u003Eलाल सागर\u003C\/a\n  \u003E\n  और\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/paras-ki-khadi-kahan-hai.html\"\n    \u003Eफारस की खाड़ी\u003C\/a\n  \u003E\n  से निकटता के कारण दुनिया की सबसे व्यस्त शिपिंग लेन में से एक माना जाता है।\n  परिवहन उद्देश्यों के लिए अरब सागर का उपयोग करने वाले अधिकांश जहाज बड़े टैंकर\n  होते हैं। जिनकी यात्रा अक्सर पूर्वी\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/asia-in-hindi.html\"\u003Eएशिया\u003C\/a\u003E,\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/08\/europe-continent.html\"\u003Eयूरोप \u003C\/a\n  \u003Eया अमेरिका में समाप्त होती है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  अरब सागर का नाम उन अरब व्यापारियों के नाम पर रखा गया है जो 9वीं शताब्दी से\n  लेकर मध्यकालीन\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/what-is-history-in-hindi.html\"\n    \u003Eइतिहास \u003C\/a\n  \u003Eके अंत तक समुद्र पर यात्रा किया करते थे। अरब सागर लगभग 1,491,130 वर्ग मील के\n  सतह क्षेत्र को कवर करता है। अरब सागर की अधिकतम चौड़ाई 1,490 मील और अधिकतम\n  गहराई 15,262 फीट है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  अरब सागर उत्तरी\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/indian-ocean-in-hindi.html\"\n    \u003Eहिंद महासागर\u003C\/a\n  \u003E\n  का एक क्षेत्र है जो उत्तर में\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/pakistan-in-hindi.html\"\n    \u003Eपाकिस्तान\u003C\/a\n  \u003E,\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/capital-of-iran-in-hindi.html\"\n    \u003Eईरान \u003C\/a\n  \u003Eऔर\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/blog-post_55.html\"\n    \u003Eओमान की खाड़ी\u003C\/a\n  \u003E, पश्चिम में\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/adan-ki-khadi-kahan-hai.html\"\n    \u003Eअदन की खाड़ी\u003C\/a\n  \u003E, गार्डाफुई चैनल और\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/arab-praydweep.html\"\n    \u003Eअरब प्रायद्वीप\u003C\/a\n  \u003E, दक्षिण-पूर्व में लक्षद्वीप सागर से घिरा है। जबकि दक्षिण-पश्चिम में\n  \u003Ca\n    href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/capital-of-maldives-in-hindi.html\"\n    \u003Eमालदीव\u003C\/a\n  \u003E,\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/capital-of-somalia-in-hindi.html\"\n    \u003Eसोमालिया \u003C\/a\n  \u003Eऔर पूर्व में भारत से घिरा हैं। इसका कुल\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/definition-of-area.html\"\n    \u003Eक्षेत्रफल \u003C\/a\n  \u003E3,862,000 किमी2 है और इसकी अधिकतम गहराई 4,652 मीटर है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  अरब सागर दुनिया के तीन सबसे बड़े महासागरीय ऑक्सीजन न्यूनतम क्षेत्र\u0026nbsp; या\n  मृत क्षेत्र में से एक है। यहाँ ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम होता है, कभी-कभी मानक\n  उपकरण द्वारा पता नहीं लगाया जा सकता है।\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/blog-post_55.html\"\n    \u003Eओमान की खाड़ी\u003C\/a\n  \u003E\n  में के आसपास अरब सागर में ऑक्सीजन का स्तर दुनिया में सबसे कम है।\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/bhartiya-upmahadeep.html\"\n    \u003Eभारतीय उपमहाद्वीप\u003C\/a\n  \u003E\n  पर उच्च तापमान के कारण अरब सागर के पानी में ऑक्सीजन की कमी होती हैं।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/6350312964242998104\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/07\/bharat-ke-paschim-mein-kaun-sa-sagar-hai.html#comment-form","title":"0 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\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/arab-praydweep.html\"\u003Eअरब प्रायद्वीप\u003C\/a\u003E और \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/bhartiya-upmahadeep.html\"\u003Eभारतीय उपमहाद्वीप\u003C\/a\u003E के बीच स्थित है। यह उत्तर-पश्चिम में \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/blog-post_55.html\"\u003Eओमान की खाड़ी\u003C\/a\u003E और दक्षिण-पश्चिम में \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/adan-ki-khadi-kahan-hai.html\"\u003Eअदन की खाड़ी\u003C\/a\u003E में विलीन हो जाती है। इसका कुल क्षेत्रफल 1,491,000 वर्ग मील है।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eअरब सागर की लंबाई कितनी है\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/arabian-sea-in-hindi.html\"\u003Eअरब सागर\u003C\/a\u003E की लंबाई लगभग 615 मील यानि 990 किमी है, और इसकी चौड़ाई अधिकतम 210 मील से लेकर न्यूनतम 35 मील तक है। दक्षिण में हिंद \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर\u003C\/a\u003E में शामिल होने के कारण \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/samudra-kise-kahate-hain.html\"\u003Eसमुद्र \u003C\/a\u003Eकी गहराई अलग-अलग है, लेकिन यह आमतौर पर 8,970 फीट गहरी है। अरब की खाड़ी हिंद महासागर का उथला समुद्र सीमांत हैं जो \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/arab-praydweep.html\"\u003Eअरब प्रायद्वीप \u003C\/a\u003Eऔर दक्षिण-पश्चिमी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/capital-of-iran-in-hindi.html\"\u003Eईरान \u003C\/a\u003Eके बीच स्थित है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eअरब सागर खाड़ी और जलडमरू द्वारा आसपास के जल निकायों से जुड़ा हुआ है जो समुद्र में एक स्थिर मार्ग प्रदान करते हैं। इस समुद्र की सबसे महत्वपूर्ण खाड़ी ओमान की खाड़ी है, जो अरब सागर को \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/paras-ki-khadi-kahan-hai.html\"\u003Eफारस की खाड़ी\u003C\/a\u003E, अदन की खाड़ी और \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-red-sea.html\"\u003Eलाल सागर\u003C\/a\u003E से जोड़ती है। अरब सागर में केवल खाड़ी ही पहुंच बिंदु नहीं हैं, दो महत्वपूर्ण नदियां इसकी सीमाओं में बहती हैं। \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-origin-of-river-indus-river.html\"\u003Eसिंधु \u003C\/a\u003Eऔर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/blog-post_1.html\"\u003Eनर्मदा \u003C\/a\u003Eनदियों से बहने वाले पानी अरब सागर तक पहुंचने का प्रमुख साधन है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/10\/capital-of-maldives-in-hindi.html\"\u003Eमालदीव \u003C\/a\u003Eअरब सागर में लगभग 50 मिलियन वर्ष पहले भूकंपीय गतिविधि का परिणाम है। इस अवधि के दौरान भारत के \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/blog-post_17.html\"\u003Eउपमहाद्वीप\u003C\/a\u003E \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/asia-in-hindi.html\"\u003Eएशिया \u003C\/a\u003Eसे टकराकर अरब सागर में नए निर्माण कर रही थी। दो भू-भागों की प्रारंभिक टक्कर के बाद, अरब सागर को विभिन्न प्रकार के अत्यधिक प्रभावशाली कारकों द्वारा आकार दिया गया है, जिसमें जल धाराओं से कटाव भी शामिल है। समुद्र तल के सबसे गहरे क्षेत्रों में से एक वह जगह है जहाँ \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/where-is-origin-of-river-indus-river.html\"\u003Eसिंधु नदी\u003C\/a\u003E अरब सागर से मिलती है।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/2160612076628181483\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/07\/arab-sagar-ki-lambai-kitni-hai.html#comment-form","title":"0 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जाता है। क्योंकि यह अरब सागर में सबसे सुंदर स्थानों में से एक हैं। यह\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/kerala-in-hindi.html\"\u003Eकेरल\u003C\/a\u003E के\n  दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित एक\u0026nbsp;शहर है। यह शहर दक्षिण \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/india.html\"\u003Eभारत\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eके प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों में से एक है। जो विश्व में सबसे अधिक\n  मसालों का निर्यात करता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकेरल देशी और विदेशी दोनों पर्यटकों के लिए सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। 2017 के एक रिपोर्ट के अनुसार कोच्चि शहर में देशी पर्यटकों की संख्या 23 मिलियन से अधिक थी। जो लुलु मॉल , वंडरला वाटर थीम पार्क और मेट्रो नेचर को देखने जाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयह शहर दुनिया के खूबसूरत प्राकृतिक बंदरगाहों में से एक है। कोच्चि मलयालम शब्द कोचाज़ी से लिया गया है जिसका अर्थ छोटा लैगून होता हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/3371335315717623263\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/07\/arab-sagar-ki-rani-kise-kaha-jata-hai.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/3371335315717623263"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/3371335315717623263"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/07\/arab-sagar-ki-rani-kise-kaha-jata-hai.html","title":"अरब सागर की रानी किसे कहा जाता है?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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आकार में उभरा होता हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eजिसे हम पत्थर पहाड़ या पर्तवत के नाम से जानते हैं। इसे ही\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/geography.html\"\u003Eभूगोल\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;की भाषा में चट्टान कहा जाता हैं।\nयह पृथ्वी के अंदर भी पाया जाता हैं। जो कभी कभी कई किलोमीटर तक लंबे और अभित मोटे आकर के होते हैं।\n\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eचट्टान किसे कहते हैं\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  पृथ्वी सतह\u0026nbsp;का निर्माण करने वाली रचना सामग्री को चट्टान कहा जाता है\n  सामान्यतः चट्टान शब्द का प्रयोग किसी कठोर वस्तु के लिए किया जाता हैं। किन्तु\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/geography.html\"\u003Eभूगोल\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eविषय में इसका प्रयोग बालू कंकड़ मिट्टी तथा ग्रेनाइट आदि के लिए किया\n  जाता है।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u0026nbsp;\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eचट्टान की परिभाषा क्या है\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n  आर्थर होम्स के अनुसार - अधिकांश चट्टानें खनिजों का ही मिश्रित अंश होती हैं अतः\n  उनमें कई खनिजों का पाया जाना स्वाभाविक होता है। इन खनिजों में रासायनिक तत्वों\n  का योग रहता है। प्रत्येक चट्टान में एक से अधिक खनिजों का सम्मिश्रण पाया जाता\n  है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cdiv\u003E\n  वॉरसेस्टर के अनुसार - सभी चट्टानों में दो या अधिक खनिज होते हैं अर्थात चट्टानें\n  चट्टान निर्मित करने वाले खनिजों का मिश्रण होती हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/div\u003E\n\u003Cdiv\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    प्रसिद्ध विद्वान लोबक के अनुसार - चट्टान अपने वातावरण का प्रतिफल होती है। जब\n    वातावरण बदलता है, तो चट्टान भी बदलती है।\u003C\/div\u003E\n  \u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eचट्टानों का निर्माण विभिन्न खनिजों के योग से हुआ है।\n    पृथ्वी में अनेक खनिजों का पाया जाना स्वाभाविक है किन्तु निम्न दस\n    खनिजो का चट्टान की निर्माण में विशेष योगदान होता है -\u003Cbr \/\u003Eसिलिका, एल्युमिना, चूना, आयरन ऑक्साइड, सोडा, आयरन ऑक्साइड-हेमेटाइट,\n    मैग्नीशिया, पोटेशियम, पोटाश, पानी एवं रिटेनिया आदि।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n    चट्टानों की रचना में सहयोग करने वाले रासायनिक तत्व भी अनेक हैं किन्तु उनमें\n    अम्ल, ऑक्सीजन, सिलिका, एल्यूमिनियम, लोहा, कैल्सियम, सोडियम पोटेशियम तथा\n    मैग्नीशियम शैल खनिजों का लगभग 98.59% भाग है।\u003C\/p\u003E\n  \u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eचट्टानों का वर्गीकरण\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    चट्टानों का निर्माण खनिजों के मिश्रण से होता है। इनके रंग-रूप में अन्तर\n    खनिजों को भिन्नता के कारण ही होता है। खनिजों की संख्या के आधार पर इनके कई\n    भाग हैं। उत्पत्ति एवं निर्माण विधि के आधार पर इनके निम्नलिखित तीन प्रकार\n    हैं।\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eआग्नेय चट्टान\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eपरतदार चट्टान\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eकायान्तरित चट्टान\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003C\/div\u003E\n  \n  \n\u003C\/div\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E1. आग्नेय चट्टानें\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\n\u003Cdiv\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    आग्नेय' शब्द लैटिन भाषा के इग्निस शल्द से सम्बन्धित है जिसका अर्थ 'अग्नि'\n    होता है ।\u0026nbsp; पृथ्वी के भीतरी भागों से आन्तरिक क्रिया जब पिघला हुआ पदार्थ\n    ठोस रूप धारण करता है तो द्वारा पृथ्वी के ऊपरी परत या ऊपरी धरातल पर आग्नेय\n    चट्टानें बनती हैं।\u0026nbsp;\n  \u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    पृथ्वी के भीतरी भाग में मध्यवर्ती गहराइयों में बहुत उच्च तापमान एवं दबाव के\n    मध्य जो पदार्थ अर्ध द्रव अवस्था में एकत्रित है उसे मैग्मा कहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    जब यह मैग्मा ज्वालामुखी के मुख से बाहर आता है तो उससे गैसें निकल जाती हैं। अतः शेष द्रव पदार्थ लावा कहलाता है। मैग्मा और लावा के ठण्डे होने पर आग्नेय\n    चट्टाने बनती हैं।\n  \u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    वॉरसेस्टर महोदय के अनुसार - आग्नेय चट्टानें पिघले पदार्थों के ठोस होने की\n    क्रिया से बनती हैं।\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    यद्यपि आग्नेय चट्टानें धरातल पर सबसे पहले बनी हैं, तथापि ज्वालामुखी की\n    क्रिया द्वारा इनका निर्माण-क्रम अभी भी जारी है। इनमें से कुछ चट्टानें बहुत\n    ही प्राचीन और कुछ नवीन हैं।\n  \u003C\/div\u003E\n  \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eआग्नेय चट्टानों के प्रकार\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E\u0026nbsp;\u003C\/span\u003E\u003C\/h4\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    आग्नेय चट्टानों का निर्माण विभिन्न परिस्थितियों में मैग्मा एवं लावा के ठण्डा\n    होने से होता है। अतः चट्टानों की स्थिति तथा संरचना के आधार पर आग्नेय\n    चट्टानों के निम्नलिखित भेद हैं -\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cb\u003E1. अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टान\u003C\/b\u003E - पृथ्वी के आन्तरिक भाग से निकला हुआ मैग्मा एवं लावा जब भूगर्भ की दरारों में\n    ही ठण्डा होकर जमा हो जाता है तो उसे अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टान कहा जाता है,\n    जैसे ग्रेनाइट, स्फटिक एवं फेल्सपार आदि। मैग्मा के धीरे-धीरे जमा होने के\n    आधार पर अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टानों को निम्नलिखित भागों में बाँटा जाता है।\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    पृथ्वी की अत्यधिक गहराई में जमने वाला मैग्मा ठोस होकर जिस चट्टान को जन्म\n    देता है, वह पातालीय चट्टान है। अधिक गहराई में मैग्मा के धीरे-धीरे जमा होने\n    के कारण यहाँ कणों के आकार बड़े होते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    पृथ्वी के आन्तरिक भाग में बनने वाली इन चट्टानों में विभिन्न रूप होते हैं। ये\n    चट्टानें ग्रेनाइट की बनी होती हैं जो ज्यादातर पठारी भागों में पायी जाती हैं।\n    भारत में ये चट्टानें राँची के पठार, सिंहभूम एवं राजस्थान में पायी जाती हैं।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    भूगर्भ से निकलने वाला मैग्मा जब धरातल पर न आकर भूगर्भ को सन्धियों में जमा\n    होकर ठोस हो जाता है तो वे मध्यवर्ती चट्टानें कहलाती हैं।\u0026nbsp;\n  \u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    पातालीय चट्टानें तुलना में इनके जमा होने में समय कम लगता है अतः इनमें पाए\n    जाने वाले रवे मोटे होते हैं । इनके प्रमुख रूप लैकोलिथ, लैपोलिथ, फैकोलिथ,\n    डाइक तथा सिल आदि हैं।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cb\u003E2. बहिर्वेधी आग्नेय चट्टान\u003C\/b\u003E - भूगर्भ से निकला मैग्मा जब किन्हीं कारणों से अन्दर जमा न होकर पृथ्वी सतह पर\n      लावा के रूप में ठोस होकर जमा हो जाता है तो उसे बहिर्वेधी आग्नेय चट्टानें\n      कहा जाता है।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cdiv\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\n      ज्वालामुखी उद्गार के समय निकलने वाले पदार्थ लैपिली, ज्वालामुखी बम्ब तथा\n      ज्वालामुखी राख आदि हैं। ये पदार्थ शीघ्र ही धरातल पर जमा हो जाते हैं अतः\n      इनमें रवे नहीं पाए जाते हैं। इनका निक्षेपण अधिकतर महासागरीय ज्वालामुखियों\n      एवं द्वीपों पर पाया जाता है।\u0026nbsp;\n    \u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\n      बेसाल्ट इनका उत्तम उदाहरण है। इन चट्टानों में क्षार की मात्रा कम तथा\n      लोहा, चूना एवं मैग्नीशियम की मात्रा अधिक पायी जाती है।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\n      \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eआग्नेय चट्टानों की विशेषताएँ\u003C\/h4\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\n        (1) इन चट्टानों का सम्बन्ध प्रायः ज्वालामुखी क्रिया से होता है अतः इनका\n        वितरण मुख्यतः ज्वालामुखी क्षेत्रों में पाया जाता है।\n      \u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\n        (2) आग्नेय चट्टानों में कण गोल नहीं होते । ये भिन्न-भिन्न रूप तथा भिन्न\n        प्रकार के स्फटिकों से बनी होती हैं। चट्टानों के टूटकर घिसने से ही कण गोल\n        बनते हैं।\n      \u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\n        (3) इन चट्टानों में परतें नहीं होतीं। ये पूर्णतया सघन होती हैं किन्तु\n        इनमें वर्गाकार सन्धियाँ होती हैं। ये सन्धियाँ ही चट्टानों के निर्बल स्थल\n        होती हैं; जहाँ ऋतु-अपक्षय का प्रभाव होता है।\n      \u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\n        (4) ये चट्टानें कठोर तथा आरन्ध्र होती हैं, अतः जल कठिनाई से सन्धियों के\n        सहारे इनमें पहुँच पाता है परन्तु यान्त्रिक अथवा भौतिक अपक्षय का प्रभाव\n        इन पर पड़ता है अतः विखण्डन के फलस्वरूप इनके टुकड़े हो जाते हैं ।\n      \u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\n        (5) इन चट्टानों में किसी प्रकार के जीवाश्म नहीं पाये जाते क्योंकि इनका\n        निर्माण गर्म और तरल मैग्मा के ठण्डे होने से होता है होती है अतः अत्यधिक\n        गर्मी के कारण जीवांश यदि हों भी तो नष्ट हो जाते हैं।\u0026nbsp;\n      \u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\n        (6) इन चट्टानों में बहुमूल्य खनिज पदार्थ पाये जाते हैं एवं उनके चूर्ण से\n        बनी लावा मिट्टी बड़ी उपजाऊ होती है।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\n        विश्व में प्राचीनतम आग्नेय चट्टानों की आयु लगभग 15 अरब वर्ष आँकी गयी है।\n        इस प्रकार की चट्टानें प्रायद्वीपीय भारत में अधिक पायी जाती हैं।\u0026nbsp;\n      \u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\n        राजस्थान का अरावली पर्वत, छोटा नागपुर की गुम्बदनुमा पहाड़ियाँ, राजमहल की\n        श्रेणी और राँची का पठार इस प्रकार की चट्टानों के बने हैं । अजन्ता की\n        गुफाएँ इन्हीं को काटकर बनायी गयी हैं।\n      \u003C\/div\u003E\n      \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eआग्नेय चट्टानों का आर्थिक उपयोग\u003C\/h4\u003E\n      \u003Cdiv\u003E\n        आग्नेय चट्टानों होती में विभिन्न प्रकार के खनिज पाये जाते हैं। अधिकांश\n        खनिज इसी प्रकार की चट्टानों में पाये जाते हैं। लौह, अयस्क, हीरा, सोना, चाँदी, सीसा, जस्ता, ताँबा, मैंगनीज आदि महत्वपूर्ण\n          खनिज आग्नेय चट्टानों में पाये जाते हैं। प्रमुख आग्नेय चट्टानें\n          निम्नलिखित हैं।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cb\u003Eग्रेनाइट \u003C\/b\u003E- प्रेनाइट चट्टान सतह के नीचे गहराई में होती है। इसमें सिलिका की मात्रा\n          अधिक होती है, अतः इसे अम्ल चट्टान भी कहा जाता है । इसकी स्थिति अधिक\n          गहराई में होने के कारण इसे पातालीय चट्टान भी कहा जाता है। यह खुरदरे एवं बड़े कणों वाली आग्नेय चट्टान है। इनका निर्माण गहराई में\n          होता है अतः लावा धीरे-धीरे जमा होता है इसीलिए दनके कणों की बनावट ठीक\n          प्रकार से होती है।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cb\u003Eबेसाल्ट \u003C\/b\u003E- इसका निर्माण ज्वालामुखी क्रिया से होता है। यह बाह्य आग्नेय चट्टान है।\n          है। जब लावा धरातल पर ठण्डा होकर जमा होने लगता है तो वह बेसाल्ट चट्टान\n          को जन्म देता है। लावा बाहर शीघ्रता से जमा हो जाता है अतः कणों का आकार अत्यन्त छोटा पाया\n          जाता है अथवा नहीं पाया जाता है। इसमें पाए जाने वाले कण बहुत चमकीले\n          होते हैं। यह ग्रेनाइट की तुलना में मुलायम होती है।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\n        \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cb\u003Eग्रेबो \u003C\/b\u003E- यह आन्तरिक (पातालीय) आग्नेय चट्टान है जिसमें पाए जाने वाले कण मोटे\n          होते हैं। इसका निर्माण फेल्सपार तथा अगाइट नामक खनिजों से हुई है। इसका\n          रंग काला होता है क्योंकि इसमें पाइरोक्लीन तथा ऑलविन की अधिकता होती है।\n          इसका रंग काले के अतिरिक्त गहरा हरा एवं धूसर होता है।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cb\u003Eडायोराइट\u003C\/b\u003E - यह बड़े कण वाली पातालीय चट्टान है। यह ग्रेनाइट से भी अधिक भारी होती\n          है। इसमें फेल्सपार सर्वाधिक मात्रा में पाया जाता है। फेल्सपार के अतिरिक्त हार्नब्लैण्ड नामक खनिज भी पाया जाता है। इनके\n          अतिरिक्त बायोराइट, अगाइट तथा पाइरोक्लीन नामक खनिज भी पाए जाते हैं।\n          इसका रंग काला, गहरा भूरा तथा हरा होता है।\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cb\u003Eपेरिडोटाइट \u003C\/b\u003E- यह ऑलविन तथा अगाइट नामक खनिज की अधिकता से बनी है। इनके अतिरिक्त\n          हार्नब्लेण्ड, बायोराइट भी पाए जाते हैं। इसमें सिलिका की मात्रा कम होती\n          है तथा कण मोटे होते हैं। यह महत्वपूर्ण चट्टान है क्योंकि इसमें निकिल,\n          क्रोमि प एवं प्लेटिनम जैसी महत्वपूर्ण धातुएँ भी पायी जाती हैं। इनके अतिरिक्त डोलोराइट एवं राओलाइट भी महत्वपूर्ण आग्नेय चट्टानें हैं।\u003C\/div\u003E\n        \u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eपरतदार चट्टान\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\n        \u003Cdiv\u003E\n          धरातल पर पायी जाने वाली अधिकांश चट्टानें पतरदार हैं। इनकी रचना अवसाद\n          के जमा होने से होती है अतः इन्हें अवसादी या तलछटी चट्टानें कहा जाता है।\u0026nbsp;\n        \u003C\/div\u003E\n        \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n        \u003Cdiv\u003E\n          पृथ्वी धरातल के लगभग 75% भाग र अवसादी चट्टानें तथा शेष भाग में आग्नेय\n          व कायान्तरित चट्टानें पायी जाती हैं। इनमें पायी जाने वाली परत के आधार\n          पर इन्हें परतदार चट्टानें कहा जाता है। अंग्रेजी में इन्हें Sedimentary\n          Rocks कहा जाता है।\u003C\/div\u003E\n        \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n        \u003Cdiv\u003Eअवसादी चट्टानें जैसा कि अवसाद का तात्पर्य\n          है, प्राचीन चट्टानों के टुकड़ों और खनिज पदार्थों के किसी न किसी रूप\n          में संगठित हो जाने तथा परतों में व्यवस्थित हो जाने से बनती\n          हैं।\u003C\/div\u003E\n      \u003C\/div\u003E\n    \u003C\/div\u003E\n  \u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\n      प्रारम्भ में जब पृथ्वी द्रव अवस्था से ठोस अवस्था में आयी तो पृथ्वी का\n      समस्त भूपृष्ठ का बना हुआ था, बाद में अनाच्छादन प्रक्रिया के प्रभाव से\n      धीरे-धीरे आग्नेय चट्टानों का विनाश होने लगा जिससे वे टूटकर चूर्ण रूप से\n      बदलने लगीं।\u0026nbsp;\n    \u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\n      आग्नेय चट्टानों àका चूर्ण जल, पवन एवं हिम द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान\n      पर लगातार एक के ऊपर एक जमा किया गया जिससे इसमें परतें पायी गयीं। इस प्रकार\n      लगातार जमा किए गए अवसाद से बनी चट्टानें परतदार या अवसादी कहलाती हैं।\u0026nbsp;\n    \u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\n      चट्टानों में परतें कणों के वजन तथा आकार के अनुसार पड़ती हैं। समुद्रों में\n      पायी जाने वाली वनस्पति एवं जीव-जन्तु भी इन चट्टानों के निर्माण में योगदान\n      देते हैं।\u0026nbsp;\n    \u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\n      समुद्रों में इन जीव-जन्तुओं के मरकर इकट्ठा होने से परतें लग जाती हैं जो\n      कालान्तर में कठोर हो जाती हैं तथा पुनः यही क्रिया होती है तथा प्रथम परत के\n      ऊपर दूसरी परत लगती है।\n    \u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003Eपरतदार चट्टान निर्माण प्रायः तीन प्रमुख चरणों में होता है\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\u003Cul style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eअवसाद वायु अथवा जल\u0026nbsp;द्वारा दूसरे स्थान पर ले जाये जाते हैं।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eदूसरे चरण में इन्हें जमाया जाता है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eअवसाद जमकर कठोर बनते जाते हैं।\u003C\/li\u003E\u003C\/ul\u003E\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\n      परतदार चट्टानों में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज क्ले, क्वार्ट्स तथा केल्साइट\n      हैं। इनके अतिरिक्त डोलोमाइट, फेल्सपार, लौह अयस्क, जिप्सम आदि खनिज पाये\n      जाते हैं।\n    \u003C\/div\u003E\n    \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eपरतदार चट्टानों के प्रकार\u003C\/h4\u003E\n    \u003Cdiv\u003Eपरतदार चट्टानों को निम्नांकित आधारों पर विभाजित किया जा सकता है। परतदार चट्टानों की उत्पत्ति में सहायक अवसादों के आधार पर परतदार चट्टानें\n      को निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है :\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n    \u003Cdiv\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eयान्त्रिक क्रियाओं द्वारा निर्मित अथवा चट्टान चूर्ण निर्मित परतदार\n      चट्टानें।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eरासायनिक विधि द्वारा निर्मित परतदार चट्टानें।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eजैविक तत्वों से निर्मित परतदार चट्टानें।\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003C\/div\u003E\n    \n    \n    \n    \n    \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E1. यान्त्रिक क्रियाओं द्वारा निर्मित चट्टान\u003C\/h4\u003E\n    \u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eगुटिकामय चट्टानें\u003C\/b\u003E - गुटिकामय परतदार चट्टानें वें हैं जिनका निर्माण बड़े कणों से होता है।\n      प्रायः देखा जाता है कि रेत के साथ बड़े-बड़े कण भी होते हैं । गोलाकार चिकने\n      पत्थरों को गुटिका कहा जाता है। इनका व्यास 4 मिलीमीटर से 64 मिलीमीटर तक होता है। इनके बड़े पत्थरों को\n      गोलाश्मिका कहा जाता है जो व्यास में 64 से 256 मिलीमीटर तक होते हैं। इनसे\n      भी बड़े पत्थरों को गोलाश्म कहा जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eबालुकामय चट्टानें\u003C\/b\u003E - बालू तथा बजरी के मिश्रण से बनी चट्टानें बालुकामय चट्टानें कहलाती हैं।\n      इनमें क्वार्ट्स की प्रधानता होती है। ये सरन्ध्रमय होती हैं। बलुआ पत्थर\n      इसका उत्तम उदाहरण है। बालू के कण सिलिका, कैल्सियम कार्बोनेट द्वारा मिलकर\n      बालुकामय चट्टान निर्मित करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eमृण्मय चट्टानें\u003C\/b\u003E - ये चीकामय चट्टानें हैं। इनका निर्माण मृदा के बारीक कणों के निक्षेपण से होता\n    है । जल में बड़े-बड़े कण भी घुलकर मिट्टी का रूप ले लेते हैं। इनका निर्माण\n    बारीक कणों से होता है।\u003C\/p\u003E\u003C\/div\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\n  \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E2. रासायनिक विधि द्वारा निर्मित परतदार चट्टान\u003C\/h4\u003E\n  \u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eचूना प्रधान चट्टानें\u003C\/b\u003E - विश्व के उष्ण एवं शीतोष्ण कटिबन्धीय छिछले सागरों के जल में घुले हुए चूने तथा\n    जीव-जन्तुओं के अवशेषों से बनी होने के कारण इन्हें चूना प्रधान चट्टाने कहा\n    जाता है। ये चट्टानें कठोर होती हैं किन्तु जल के सम्पर्क में आने से सरलता से घुल जाती\n    हैं । चूना, पत्थर, खडिया, डोलोमाइट आदि इस प्रकार की चट्टानें हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eसिलिका प्रधान चट्टाने\u003C\/b\u003E - इन चट्टानों में सिलिका की मात्रा अधिक होती है। इनमें नोवा क्यूलाइट तथा फ्लिट\n    प्रमुख हैं। गर्म पानी के स्रोतों में घुले हुए सिलिका के जमाव से नोवाक्यूलाइट\n    का निर्माण होता है। सिलिका का जमाव यलोस्टोन नेशनल पार्क तथा आइसलैण्ड के आस-पास बहुत पाया जाता\n    है। सामुद्रिक जल में होने वाले सिलिका के जमाव से फ्लिट का निर्माण होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eक्षारीय चट्टानें \u003C\/b\u003E- जब बहता हुआ जलं मार्ग में मिलने वाले खनिज लवणों को घोलकर किसी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझील\u003C\/a\u003E या आन्तरिक\n    सागर में मिलता है जिससे वाष्पीकरण द्वारा जल तो उड़ जाता है किन्तु खनिज लवण\n    नीचे रह जाते हैं जिससे वे नीचे परत के रूप में जमा हो जाते हैं। नमक, जिप्सम,\n    पोटाश तथा शोरा ऐसी ही चट्टानों के रूप हैं।\u003C\/p\u003E\n  \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E3. जैविक तत्वों से निर्मित परतदार चट्टाने\u0026nbsp;\n  \u003C\/h4\u003E\n  \u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n    जब वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं के अवशेषों के निक्षेपण से चट्टानों का निर्माण\n    होता है तो उन्हें जैविक तत्वों से निर्मित चट्टानें कहा जाता है। इनमें प्रमुख\n    निम्नलिखित हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eचूना प्रधान\u003C\/b\u003E - इन चट्टानों में चूना पत्थर तथा खड़िया प्रमुख हैं। चूना पत्थर सागरों में पाए\n    जाने वाले प्रवाल तथा मौलस्क आदि जीवधारियों तथा वनस्पतियों द्वारा बनता है।\n    सागरों में चूना प्रधान जीवों में प्रमुख ग्लोबिजेरिना तथा टैरोपोड होते हैं। इनमें कैल्सियम की मात्रा 64.6% होती है। टैरोपोड की शारीरिक\n    रचना में कैल्सियम कार्बोनेट की मात्रा 80% तक होती है। ये अधिकतर उष्ण\n    कटिबन्धीय \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागरों\u003C\/a\u003E में पाए जाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eसिलिका प्रधान\u003C\/b\u003E - सागरों में पाए जाने वाले कुछ जीवों में सिलिका की मात्रा अधिक होती है। इनमें\n    डायटम एवं रेडियोलोरिया प्रमुख हैं। ये मरकर नीचे जमा होते जाते हैं जो एक\n    चट्टान का रूप ले लेते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eकार्बनयुक्त चट्टानें \u003C\/b\u003E- इनमें कार्बन की प्रधानता होती है। दलदल एवं कीचड़ में पेड़ पौधों के संचयन से\n    इनका निर्माण होता है। भूमि के उथल-पुथल के कारण जल के समीप उगे हुए पेड़-पौधे\n    जल में दब जाते हैं तथा इनके ऊपर मिट्टियों का जमाव हो जाता है।\u003C\/p\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\n  \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eपरतदार चट्टानों की विशेषताएँ\u0026nbsp;\u003C\/h4\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eये चट्टानें भिन्न-भिन्न रूप की होती हैं जिनका निर्माण छोटे-बड़े\n    भिन्न-भिन्न कणों से होता है।\u0026nbsp;\n  \u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eइन चट्टानों में परत अथवा स्तर होते हैं जो एक-दूसरे पर समतल रूप में जमे\n    रहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eइन चट्टानों में वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं के जीवाश्म पाये जाते हैं। इन्हीं\n    चट्टानों से कोयला, स्लेट, संगमरमर, नमक, पैट्रोलियम आदि खनिज प्राप्त किये\n    जाते हैं।\n  \u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eसमुद्र-जल में निर्मित होने के कारण इनमें लहरों और धाराओं के चिह्न\n    एक-दूसरे को काटती क्यारियाँ, पगडंडियाँ, चूहों आदि के बिल उसी तरह मिलते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eये चट्टानें अपेक्षतया मुलायम होती हैं। इनका निर्माण सामान्यतः जल,पवन,\n    हिम, जीव-जन्तु अथवा रासायनिक प्रक्रियाओं के फलस्वरूप होता है।\n  \u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eये चट्टानें स्थूल और छिद्रमय होती हैं।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eइन चट्टानों में साधारणतः स्फटिक का अंश अधिक होता है तथा आग्नेय चट्टानों\n    में पाए जाने वाले खनिजों का अंश कम पाया जाता है।\n  \u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eपरतदार चट्टानों को तोड़ने पर परतें अलग-अलग हो जाती हैं।\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003C\/div\u003E\n  \n  \n  \n  \n  \n  \n  \n  \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eपरतदार चट्टानों का आर्थिक उपयोग\u0026nbsp;\u003C\/h4\u003E\n  \u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n    अवसादी चट्टाने अनेक प्रकार से उपयोगी हैं। बलुआ पत्थर, चूने के पत्थर आदि का\n    उपयोग भवन निर्माण में किया जाता है। भवन निर्माण में चूने का सीमेण्ट खूब\n    उपयोग किया जाता है जो चूने के पत्थर से तैयार किया जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n    चूने एवं डोलोमाइट व अन्य मिट्टियाँ इस्पात उद्योग में काम में आती हैं। है\n    परतदार चट्टानों में चूने के पत्थर का उपयोग सीमेंट बनाने में किया जाता है।\n    सीमेंट उद्योग आज विश्व के प्रमुख उद्योगों में गिना जाता है।\u003C\/p\u003E\n  \n  \u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eचूना पत्थर \u003C\/b\u003E- यह कैल्सियम कार्बोनेट का निक्षेप होता है, यह चूर्ण विहीन चट्टान इसका निर्माण\n    जैविक पदार्थों अथवा रासायनिक अवक्षेप से होता है। इसमें पाया जाने वाला मुख.\n    कालेज कार है। इसके अलावा क्वार्ट्स, फेल्सपार, चीका आदि खनिज पाए जाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eबलुआ पत्थर \u003C\/b\u003E- यह प्रमुखतः बालू के कणों के संयोजन से बनता है, निर्माण किसी भी प्रकार के\n    रेत-कणों से हो सकता है, किन्तु अधिकांश बलुआ पत्थर मुख्यतः क्वार्ट्ज के कणों\n    से निर्मित होते हैं। क्वार्ट्स के अतिरिक्त इनमें फेल्सपार क्ले' कैल्साइट एवं डोलोमाइट, अभ्रक,\n    लोहा आदि खनिज पाए जाते हैं। इन खनिजों के कण संयोजक पदार्थों द्वारा संयुक्त\n    होकर चट्टान का निर्माण करते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eकांग्लोमरेट \u003C\/b\u003E- यह पूर्णतः जलीय उत्पत्ति की चट्टान हैं। विभिन्न आकार के गुटिका या गोलाश्म का\n    जमाव कांग्लोमरेट कहलाता है। ये कुछ इंच से लेकर कई फुट व्यास तक के होते हैं\n    इनके गोल कणों के आधार पर ही पता चलता है कि ये नदियों द्वारा बहुत लम्बी दूरी\n    तक बहाए गए हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eशैल \u003C\/b\u003E- मिट्टी की सबसे बारीक कण वाली परत बारीक होते हैं अतः इनके जुड़ते समय पातदार\n    शैलों बीच में कोई रिक्त स्थान नहीं होता है इसीलिए इनकी सतह बहुत चिकनी होती\n    है। इसमें मिट्टी के साथ क्वार्टज, फेल्सपार, कैल्साइट, डोलोमाइट तथा अन्य खनिज\n    भी मिले रहते हैं।\u003C\/p\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\n  \u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E3. कायान्तरित चट्टान\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    ये चट्टाने मेटा तथा मोरफे\u0026nbsp; शब्द से बनी हैं जिनका अर्थ परिवर्तित रूप से\n    है अर्थात् जो चट्टानें परिवर्तित रूप से बनती हैं, वे कायान्तरित चट्टानें हैं\n    । रूप परिवर्तन के कारण इन्हें रूपान्तरित कहा जाता है।\n  \u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\n    चट्टानों का रूपान्तरण अत्यधिक ताप, सम्पीडन तथा विलयन द्वारा होता है। उच्च\n    तापमान,दबाव अथवा दोनों के प्रभाव से आग्नेय तथा परतदार चट्टानों का\n    मूल रूप परिवर्तित हो इन परिवर्तनों के कारण बनी चट्टानें कायान्तरित चट्टानें\n    कहलाती हैं।\u0026nbsp;\n  \u003C\/div\u003E\n\u003C\/div\u003E\n\u003Cdiv\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\n  \u003Cdiv\u003Eरूपान्तरित चट्टानों के अन्तर्गत उन चट्टानों को\n    सम्मिलित किया जाता है, जिनके आकार तथा संघटन में विघटन बिना ही परिवर्तन होता\n    है। चट्टानें कायान्तरित होकर पहले की अपेक्षा अधिक कठोर हो जाती हैं। इनमें\n    कभी-कभी रबे भी उत्पन्न हो जाते हैं।\u003C\/div\u003E\n  \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eकायान्तरण के अभिकर्ता\u003C\/h4\u003E\n  \u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n    जिन तत्वों से परिवर्तन होता है। उन्हें रूपान्तरण के अभिकर्ता कहा जाता है।\n    ये ताप, दबाव तथा घोल आदि हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eताप \u003C\/b\u003E- ताप रूप परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण कारक है। इससे चट्टानों में ढीलापन आता\n    है। कठोर से कठोर चट्टान ताप से फैलती है। चट्टानों में रूपान्तरण ताप की\n    मात्रा पर निर्भर करता है। तापमान अधिक होने पर रूपान्तरण भी अधिक होता है। तापमान की अधिकता से\n    चट्टानें पिघलती हैं एवं उनके कणों का रूप परिवर्तित होने लगता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eदबाव \u003C\/b\u003E- पर्वत निर्माणकारी हलचलों एवं भूकम्प आदि से चट्टानों पर अधिक दबाव पड़ता है।\n    दबाव के कारण चट्टानें न केवल टूटती अपितु उनमें स्थानान्तरण होता है जिससे वे\n    टूटती हैं एवं परिवर्तित हो जाती हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eघोल \u003C\/b\u003E- जल का स्वाभाविक गुण है कि वह सभी वस्तुओं को घोलने का प्रयास करता है।\n    कार्बन-डाइ-ऑक्साइड व ऑक्सीजन के जल में मिल जाने से इसकी घुलनशील शक्ति में\n    वृद्धि हो जाती है अतः चट्टानों का रूप परिवर्तन होने लगता है।\u003C\/p\u003E\n  \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eकायान्तरित चट्टानों के प्रकार\u0026nbsp;\u003C\/h4\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\n  \u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eतापीय कायान्तरण -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eताप से किसी पदार्थ की वास्तविक स्थिति में परिवर्तन हो जाता है। इसके भौतिक\n    एवं रासायनिक गुणों में परिवर्तन हो जाता है। जब भूगर्भ से मैगमा निकलता है तो\n    वह मार्ग की चट्टानों का रूप परिवर्तित कर देता है। चूना पत्थर ताप के कारण\n    संगमरमर में बदल जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eगतिज रूपान्तरण\u003C\/b\u003E - जब परतदार चट्टानों पर क्षैतिज बलों के कारण पाश्विक दबाव पड़ता है तो उनमें\n    मोड़ पड़ते हैं एवं वे अधिक गहराई तक चली जाती हैं। गहराई पर जाती है जिससे\n    उनका रूपान्तरण हो जाता है। उदाहरणार्थ-कोयला ग्रेफाइट में तथा शैल स्लेट में\n    परिवर्तित हो जाती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eस्थिर कायान्तरण\u003C\/b\u003E - स्थिर कायान्तरण वह है जिसमें चट्टान में अपने स्थान पर ही रूप परिवर्तन हो\n    जाय। ऊपरी दबाव के कारण आन्तरिक भाग की चट्टानों में होने वाला परिवर्तन स्थिर\n    कायान्तरण कहलाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eउष्ण जलीय कायान्तरण\u003C\/b\u003E - जब तप्त जल के सम्पर्क में चट्टानें आती हैं तो खनिज जल से रासायनिक क्रिया\n    करते हैं। इस रासायनिक क्रिया के कारण चट्टानों में रूप परिवर्तन होता है। यही\n    उष्ण जलीय अथवा रासायनिक कायान्तरण है।\u003C\/p\u003E\n  \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eकायान्तरित चट्टानों की विशेषताएँ\u0026nbsp;\u003C\/h4\u003E\n  \u003Cdiv\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eइन चट्टानों पर ताप एवं दबाव का बहुत प्रभाव पड़ता है।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eइन चट्टानों में स्फटिक भी पाए जाते हैं।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eकायान्तरित होकर ये चट्टानें पहले से अधिक कठोर एवं असरन्ध्री हो जाती\n      हैं।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eरूपान्तरण होने से मूल चट्टानों के मौलिक एवं रासायनिक गुण परिवर्तित हो\n      जाते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eइन चट्टानों में पाए जाने वाले कण प्रायः व्यवस्थित रूप में पाए जाते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eये चट्टानें ऋतु अपक्षय की क्रिया से अप्रभावित रहती हैं।\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003C\/div\u003E\n  \n  \n  \u003Cdiv\u003E\n    \n    \n    \n    \n    \n    \n    \n    \n    \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eकायान्तरित चट्टानों का वितरण\u0026nbsp;\u003C\/h4\u003E\n    \u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n      विश्व के प्रायः सभी प्राचीन पठारों पर कायान्तरित चट्टानें मिलती हैं। भारत\n      में ऐसी चट्टानें दक्षिण के \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/peninsula-in-hindi.html\"\u003Eप्रायद्वीप\u003C\/a\u003E, दक्षिण अफ्रीका के पठार और दक्षिणी\n      अमेरिका के ब्राजील के पठार, उत्तरी कनाडा, स्केण्डेनेविया, अरब, उत्तरी रूस\n      और पश्चिमी आस्ट्रेलिया के पठार पर पायी जाती हैं। इनमें सोना, हीरा, संगमरमर\n      चाँदी आदि खनिज पाये जाते हैं।\n    \u003C\/p\u003E\n    \u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eकायान्तरित चट्टानों का आर्थिक उपयोग\u0026nbsp;\u003C\/h4\u003E\n    \u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n      कायान्तरित चट्टानों में अनेक प्रकार के महत्वपूर्ण धातु खनिज पाये जाते हैं\n      जो मानव के लिए अनेक प्रकार से उपयोगी हैं। अधिकांश बहुमूल्य खनिज सोना,\n      चाँदी और हीरा कायान्तरित चट्टानों से प्राप्त होते हैं। संगमरमर जो एक\n      प्रमुख कायान्तरित चट्टान है, भवन निर्माण के लिए उपयोग में आता है।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eविश्व प्रसिद्ध ताजमहल एवं अनेक महत्वपूर्ण मन्दिर इसी प्रकार की चट्टान से निर्मित हैं। एन्थेसाइट कोयला, ग्रेनाइट एवं हीरा भी बहुउपयोगी\n      कायान्तरित चट्टान है। अभ्रक जैसे खनिज बार-बार कायान्तरण होने से बनते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eसंगमरमर \u003C\/b\u003E- संगमरमर चूना पत्थर या डोलोमाइट के रूप में परिवर्तन से बनता है। चूना पत्थर\n      की तरह संगमरमर भी प्रायः कैल्साइट से बना होता है जिससे इसे अम्लीय परीक्षण\n      द्वारा पहचाना जा सकता है, यह अधिक कठोर, घना रवेदार और चिकना होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eस्लेट \u003C\/b\u003E- स्लेट का निर्माण शैल तथा अन्य जलीय अवसादी चट्टानों से क्षेत्रीय रूपान्तरण\n      के कारण होता है। इसका निर्माण प्रादेशिक स्थानान्तरण से होता है। यह अत्यन्त\n      सूक्ष्ण कणों से बनने वाली कठोर, सघन एवं पत्राभिकृत चट्टान है। इस चट्टान में रंगहीन अभ्रक की अधिकता होती है। अभ्रक के अतिरिक्त क्वार्ट्ज\n      क्लोराइड भी पाए जाते हैं। स्लेट का रंग धूसर, काला या हरा होता है। इसका\n      उपयोग गृह निर्माण में होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eशिष्ट \u003C\/b\u003E- शिष्ट बारीक कणों वाली रूपान्तरित चट्टान है जिसमें पोलिएशन का विकास अच्छी\n      तरह होता है। शैल नामक जलज की चट्टान में अल्प क्रम के रूपान्तरण द्वारा इसका\n      निर्माण होता है। शिष्ट चट्टान में अनेक खनिज, यथा अभ्रक, बायोराइट, क्लोराइड, हॉर्नब्लैण्ड\n      आदि पाए जाते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eनीस \u003C\/b\u003E- यह खुरदरे कण वाली कायान्तरित चट्टान है। इसका प्रमुख खनिज फेल्सपार है। इसका\n      निर्माण कांग्लोमरेट तथा बड़े कणों वाली ग्रेनाइट चट्टान के रूपान्तरण से\n      होता है। इसमें पत्राभिकृत का विकास पूर्णतः नहीं हो पाता है। इसका निर्माण करने वाले खनिज एक-दूसरे\n        के समानान्तर होते हैं जिससे इसमें पट्टियों का विकास होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eक्वार्ट्साइट \u003C\/b\u003E- यह बलुआ पत्थर का रूपान्तरित रूप है । इसमें क्वार्ट्स की अधिकता होती है।\n        ताप की अधिकता के कारण बलुआ पत्थर के कण द्रवित हो जाते हैं जिससे इनका\n        रूपान्तरण हो जाता है । यह बहुत कठोर चट्टान है । इसके कण आपस में चिपके\n        रहते हैं तथा तोड़ने पर मध्य से टूट जाते हैं।\u003C\/p\u003E\n  \u003C\/div\u003E\n\u003C\/div\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/8615923618621069498\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/chattan-kise-kahate-hain.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/8615923618621069498"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/8615923618621069498"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/chattan-kise-kahate-hain.html","title":"चट्टान किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-7696416080131609880"},"published":{"$t":"2022-06-16T15:14:00.012+05:30"},"updated":{"$t":"2023-12-14T07:15:31.839+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"पर्वत किसे कहते हैं?"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003Eपृथ्वी की सतह पर पाये जाने वाले पर्वत, पहाड़ियाँ, पठार एवं \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/mandan-kise-kahate-hain.html\"\u003Eमैदान \u003C\/a\u003Eही यहाँ के प्रधान स्थल रूप या स्थलाकृतियाँ हैं। इनमें विश्व के कुल स्थल खण्ड के 27 प्रतिशत भाग पर पहाड़ियाँ व पर्वत पाये जाते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपर्वत धरातल पर त्रिकोणाकार वह स्थल रूप है जिनके किनारों पर प्राय: 25° से 40° के मध्य ढाल होता है और जिनका ऊपरी सिरा नुकीला होता है। उसे पर्वत\u0026nbsp;या शिखर कहते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eपर्वत किसे कहते हैं\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eभूमि के बहुत तेज ढालो वाले भाग को पर्वत कहते है। जैसे हिमालय, राकी, आल्पस आदि। पर्वत पृथ्वी की पपड़ी का एक ऊंचा हिस्सा होता है और इसकी उचाई कम से कम 300 मीटर या 1000 फीट से अधिक होता है। पर्वत पृथ्वी की सतह का एक बड़ा प्राकृतिक उभरा हुआ भाग होता है। जिसमें आमतौर पर एक शिखर होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयह आमतौर पर एक पहाड़ी की तुलना में अधिक कठोर और लंबा होता है। पहाड़ों को अक्सर पर्वतों के रूप में माना जाता है जो 600 मीटर से बड़ा होता है। हालांकि, कुछ परिभाषाएं कहती हैं कि एक पर्वत 300 मीटर से भी बड़ा हो सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E#1\u0026nbsp;परिभाषा\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- पर्वत स्थल वे भाग हैं जो अपने आसपास के क्षेत्र से 2000 फुट से अधिक ऊँचे हों।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E#2 परिभाषा\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- पर्वत विशेष ऊँचाई वाले वे स्थल हैं जिनकी चोटी का क्षेत्र बहुत संकुचित या सीमित होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E#3 परिभाषा\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- पर्वत निकटवर्ती क्षेत्रों से 2000 फीट या 600 मीटर उठे ऐसे भाग होते हैं जिनका शिखर क्षेत्र विशेष संकुचित होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003E#4 परिभाषा\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E- पर्वत उस श्रेणी अथवा उच्च स्थान को कहते हैं जिसका ढाल तीव्र हो तथा वह अपने समीपवर्ती क्षेत्र से इतना अधिक ऊँचा हो और वह दूर से ही स्पष्ट रूप से दिखायी दे सके तथा उसका शिखर क्षेत्र पठार के विपरीत संकुचित हो।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003Eपर्वतों का वर्गीकरण\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eपर्वतों को निम्नलिखित आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है -\u003C\/p\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eभौगोलिक व्यवस्था के आधार पर\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eऊँचाई के आधार पर\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eरचना विधि के आधार पर\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eआयु के आधार पर\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003C\/div\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E1. भौगोलिक आधार पर\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eवारसेस्टर के अनुसार. विस्तार एवं आकृति के अनुसार पर्वत निम्न प्रकार के होते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eपर्वत शिखर\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E - निकटवर्ती पहाड़ी क्षेत्र में गुम्बद या नुकीले सींग की भाँति उठे पर्वतीय खण्ड को शिखर कहते हैं। जैसे - माउण्ट एवरेस्ट, गॉडविन ऑस्टिन आदि।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eपर्वत कटक\u003C\/b\u003E - जब कुछ किलोमीटर तक पहाड़ी सिलसिला चला गया हो जिसमें कई कम या अधिक ऊँचाई के शिखर पाये जाये तो उसे कटक कहते हैं। जैसे-अप्लेशियन पर्वत की ब्लूरिज, अरावली की आबू कटक आदि।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eपर्वत श्रेणी\u003C\/b\u003E - जब लम्बी दूरी तक बड़े प्रदेश में पर्वत विस्तृत होते इनमें कटक, शिखर घाटियाँ एवं जटिल मोड़ एवं ऊबड़-खाबड़ संरचना पायी जाती है तो उसे पर्वत श्रेणी कहते हैं।\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/himalaya-in-hindi.html\"\u003Eहिमालय पर्वत\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;श्रेणी इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eपर्वत समूह \u003C\/b\u003E- जब एक ही समय की पर्वत निर्माण गतियों से एक साथ कई पर्वत श्रेणियाँ विकसित होती हैं, तो उसे पर्वत तत्र कहते हैं। उदाहरणार्थ, भारत के हिमालय एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के अप्लेशियन के पर्वत तन्त्र। हिमालय में कई पर्वत श्रेणियाँ पाई जाती हैं। ऐसे पर्वत स्पष्टत. जटिल, बहुत ऊंचे-नीचे एवं विस्तृत क्षेत्र घेरे होते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eपर्वत वर्ग\u003C\/b\u003E - जब विभिन्न युगों की पर्वत श्रेणियाँ या पर्वत तन्त्र पास-पास फैले हुए हों एवं जिनमें पहाड़ियाँ एवं जटिल संरचनाएँ भी पाई जाती हैं तो उन्हें कार्डिलेग कहा जाता है । इन पर्वतों का विस्तार अनियमित भी हो सकता है। उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी पर्वतीय भाग एवं हिन्दुकुश व निकट के पर्वत कार्डिलेरा के उत्तम उदाहरण हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eपर्वत श्रृंखला\u003C\/b\u003E - इसमें असमान क्रम में एवं असमान कारणों से विकसित पर्वत एक साथ पाये जाते हैं। यहाँ ज्वालामुखी पहाड़ एवं मोड़दार पर्वत साथ-साथ पाये जा सकते हैं। इनके मध्य ऊँचे पठारी खण्ड भी हो सकते हैं। जापान के पर्वतीय भाग, एल्युशियन द्वीप के पर्वत इसके उदाहरण।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eएकाकी पर्वत\u003C\/b\u003E - प्रायः ज्वालामुखी पर्वत इस श्रेणी में आते हैं। वैसे भ्रंश क्रिया से बनने वाले पर्वत भी एकाकी पर्वत ही कहलाते हैं। ये दूर-दूर एवं बिखरे होते हैं। कभी-कभी पठारी भाग के अत्यधिक कट-छंट जाने एवं स्थानीय विवर्तनिक गतियों के प्रभाव से भी ऐसे पर्वत बन सकते हैं। उदाहरणार्थ, किलीमंजेरो, केनिया, केमरून के ज्वालामुखी एवं नीलगिरि आदि ऐसे ही पर्वत हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E2. ऊँचाई के आधार पर\u0026nbsp;\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eऊँचाई के अनुसार पर्वतों को निम्न भागों में बाँटा गया है -\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eनिचले पर्वत - उंचाई 600 मीटर फिट से 900 मीटरफिट।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eकम ऊँचे पर्वत - ऊँचाई 900 मीटर से 1,350 मीटर।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eविषम आकृति के पर्वत - ऊँचाई 1,350 मीटर से 1,800 मीटर।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eअधिक ऊँचे पर्वत - ऊँचाई 1,800 मीटर से अधिक।\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E3. रचना विधि के आधार पर\u0026nbsp;\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eरचना विधि के अनुसार पर्वत निम्न प्रकार के हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eवलित पर्वत किसे कहते हैं\u003C\/b\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइनकी उत्पत्ति आन्तरिक शक्तियों के प्रभाव से भू-सन्नतियों के विकास के पश्चात् धरातलीय भाग पर उत्पन्न भिंचाव से मोड़ या\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/08\/blog-post.html\"\u003Eवलन\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;पड़ने से होती है। ये मोड़ कई अवस्थाओं में बहुत ऊँचाई तक उठ जाते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइसी कारण पृथ्वी की सतह पर ये सबसे ऊँचे पर्वत हैं। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, भू-सन्नतियों से वलित पर्वतों का निर्माण 15-20 करोड़ वर्षों के अन्तर पर होता रहा है। अब तक की चार मोड़दार पर्वत निर्माण घटनाओं का व्यवस्थित ज्ञान प्राप्त हो चुका है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eवर्तमान के सबसे ऊँचे मोड़दार पर्वत अल्पाइन युग के मोड़दार पर्वत कहलाते हैं। इसी अध्याय में कालक्रम के अनुसार वलित पर्वतों का वर्गीकरण दिया गया हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eवलित पर्वत दो प्रकार के होते हैं\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eप्राचीन वलित पर्वत -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eप्राचीन वलित पर्वत वे है जिनका निर्माण टर्शरी युग से पहले हुआ। ऐसे पर्वत उत्तरी अमेरिका में अप्लेशियन, यूरोप में स्कॉटलैण्ड, स्केण्डेनेनिया पर्वत तथा यूराल, भारत में\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_9.html\"\u003Eविन्ध्याचल\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;तथा अरावली पर्वत आदि हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eनवीन वलित पर्वत\u003C\/b\u003E - नवीन वलित है। इन पर्वतों में वलन क्रिया की अनेक जटिलताएँ मिलती हैं। इन पर्वतों की \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/chattan-kise-kahate-hain.html\"\u003Eचट्टानों \u003C\/a\u003Eका जटिल वलन तथा अल्पाइन पर्वतों को सम्मिलित किया जाता है । ये पर्वत विश्व में सबसे ऊँचे पर्वत हैं जिन पर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ice.html\"\u003Eबर्फ\u003C\/a\u003E जमी रहती कायान्तरण हुआ है । रॉकी, एण्डीज, आल्पस एवं हिमालय नवीन वलित (मोड़दार) पर्वत हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eवलित पर्वतों की विशेषताएँ\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eवलित पर्वतों\u0026nbsp; की निम्नलिखित विशेषताएँ है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eइन पर्वतों का निर्माण अवसादी या परतदार चट्टानों से हुआ है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eवलित पर्वतों में पायी जाने वाली चट्टानें जलज हैं।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eइन पर्वतों में अवसाद अधिक गहराई तक पाया जाता है जो स्पष्ट करता है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eवलित पर्वतों की वक्राकार आकृति स्पष्ट करती है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eये पर्वत लम्बाई में अधिक व चौड़ाई में कम हैं।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eइनकी आकृति चापाकार या वक्राकार है। उदाहरणार्थ-हिमालय पर्वत।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eवलित पर्वतों पर अपरदन की शक्तियों का प्रभाव अधिक पड़ता है।\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eगुम्बदाकार पर्वत -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eजब विशेष दशा में भूमि के नीचे लावा का जमाव गुम्बदाकार हो, अथवा धरातल पर जैसा उभार बन जाय तो इसे गुम्बदाकार या लैकोलिथ पर्वत कहते हैं। पश्मिी संयुक्त राज्य । के यूटाह राज्य में स्थित हेनरी पर्वत इसका सुन्दर उदाहरण है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eभ्रंश पर्वत \u003C\/b\u003E- इस पर्वत का विकास भ्रंश क्रिया से होता है। अतः इसे भ्रंश या भ्रंशोत्थ पर्वत भी कहते हैं। जब भूतल के किसी क्षेत्र में दो समानान्तर भ्रंश पड़ने के पश्चात् बीच का भाग ऊपर उठा रह जाय तो ऐसा पर्वत भाग बन जाता है। ये एकाकी पर्वत होते हैं। फ्रांस का ब्लेक फोरेस्ट, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/08\/what-is-capital-of-germany.html\"\u003Eजर्मनी\u003C\/a\u003E का होर्ट एवं पश्चिमी संयुक्त राज्य के ओरेगन राज्य के पर्वत इसके कुछ उदाहरण हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E4. आयु के आधार पर\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eआयु या कालक्रम के आधार पर पर्वत\u0026nbsp; निम्न प्रकार के हैं ।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभू-वैज्ञानिकों ने अब तक की ज्ञात पर्वत निर्माणकारी घटनाओं को निम्न प्रकार से विभाजित किया है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eचर्नियन पर्वत निर्माणकारी घटना।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eकेलिडोनियन पर्वत निर्माणकारी घटना।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eहर्सीनियन या अल्टाइड पर्वत निर्माणकारी घटना।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eअल्पाइन पर्वत निर्माणकारी घटना।\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E1. चर्नियन घटना\u003C\/h4\u003E\u003Cp\u003Eइसे चर्नियन वालनिक घटना भी कहते हैं। यह घटना पूर्व केम्ब्रियन काल की है। सम्भवतः 50 से 60 करोड़ वर्ष पूर्व या अति प्राचीन काल के मोड़दार पर्वत इसमें आते हैं। इसके अन्तर्गत भारत के विन्ध्याचल, सतपुड़ा, अरावली, कुडप्पा आदि पर्वत एवं स्केण्डेनेविया के पर्वत तथा संयुक्त राज्य के महान \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझीलों\u003C\/a\u003E के पूर्व के पर्वत आते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयूरोप के फैनोस्केण्डेनेविया में भी इसके उदाहरण मिलते हैं । यद्यपि इन पर्वतों का अपरदन के पश्चात् कई बार पुनः उत्थान भी हो चुका है, फिर भी ये घिस-घिस कर बहुत नीची पहाड़ियों में बदल गये हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E2. केलिडोनियन घटना\u003C\/h4\u003E\u003Cp\u003Eयह पर्वत निर्माण घटना डेवोनियन एवं सिलूरियन काल में आज से लगभग 32-35 करोड़ वर्ष पूर्व हुई। इसी समय यूरोप में स्केण्डेनेवियन पर्वत, उत्तरी आयरलैण्ड पर्वत, यूरेशिया में बागलैण्ड पर्वत एवं उत्तरी अमेरिका के महान अप्लेशियन पर्वतों की उत्पत्ति हुई। इनमें से अप्लेशियन अपनी युवावस्था में हिमालय एवं रॉकीज से भी अधिक वैभवशाली थे।\u003C\/p\u003E\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E3. हर्मीनियन घटना\u003C\/h4\u003E\u003Cp\u003Eइसे वारिस्कन, अल्टाइड पर्वत निर्माणकारी घटना भी कहते हैं क्योंकि इस घटना का विस्तार सम्पूर्ण यूरेशिया में व ऑस्ट्रेलिया में दूर-दूर तक रहा। यह पर्वत निर्माण विशाल एवं अनेक रूपों में प्रभावित रहा हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयह घटना कार्बोनिफरस एवं परमियन युग के 22 करोड़ वर्ष पूर्व की है। अधिकांश मध्य एशियाई पर्वत ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी कार्डिलेरा, यूरोप में पिनाइन, वॉस्जेज, कारपेथियन एवं मेसिटा आदि इस क्रम के पर्वत हैं। इस समय अप्लेशियन एवं अरावली में पुनः उत्थान भी हुए हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E4. अल्पाइन घटना\u0026nbsp;\u003C\/h4\u003E\u003Cp\u003Eसे पर्वत सबसे बाद के है। इनका प्रारंभ आज से 6-7 वर्ष पूर्व हुआ। इनका\u0026nbsp; आधिकांश विकास 2.6 से 3 वर्ष पूर्व पूरा हो चुका था। वर्तमान में ये विश्व के वैभवशाली एवं सर्वोच्च पर्वत है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइनमे सम्पूर्ण दक्षिण एशिया के टर्की के\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/myanmar-in-hindi.html\"\u003Eम्यांमार\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eतक के पर्वत यूरोप में अल्पस पिरेनिज उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका के रॉकीज व एंडिज एवं न्यूजीलैंड के दक्षिणी अल्पस मुख्यताः सम्मिलित है इनकी कई शाखा पर्वत श्रेणियां भी हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eपर्वत निर्माण के सिद्धान्त\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\u003Cp\u003Eपर्वत निर्माण की घटना प्रक्रिया में विद्वानों में मतभेद पाए जाते है फिर भी यह सर्वमान्य तथ्य है कि पर्वतों की उत्पति भू संनियों से हुईं थी अतः पर्वत निर्माण प्रक्रिया को समझने के लिए भू-सन्नति या भू अभिन्नति को समझना अनिवार्य है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभू अभिनति क्या है\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cdiv\u003Eपृथ्वी का प्राचीन स्वरूप वर्तमान स्वरूप से बहुत भिन्न था। वर्तमान समय के बिखरे भूखण्ड पूर्व में ऐसो अवस्था में नहीं थे। दृढ़ भूखण्डों के कारण हो वर्तमान महाद्वीप एवं महासागरों की रचना हुई।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eवर्तमान समय के ये व भूखण्ड (महाद्वीप) पहले जलीय भागों से घिरे थे जो अस्थिर एवं परिवर्तनशील रहे हैं। ये अस्थिर जलीय भाग हो भू-सन्नतियाँ कहलाते हैं। भू-सन्नतियों से तात्पर्य ऐसे भू-भागों से है जिनमें सदैव अवसाद का निक्षेप होता रहता है।\u0026nbsp;\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003E\u003Cbr \/\u003E\u003C\/div\u003E\u003Cdiv\u003Eये निक्षेपित पदार्थ भूगर्भिक हलचलों के कारण वलन के रूप में ऊपर की ये ओर आने लगते हैं।\u003C\/div\u003E\u003Cp\u003Eआधुनिक या अल्पाइन युग के पर्वतों की उत्पत्ति से पूर्व पृथ्वी पर पाँच दृढ़ भू-खण्ड थे। ये भू-खण्ड कठोर व स्थिर स्थलीय भाग रहे । ये पृथ्वी को सम्पूर्ण भू-वैज्ञानिक हलचलों के काल में भी समुद्र का अंग नहीं बने। मध्यजीव कल्प के पाँच दृढ़ भू-खण्ड निम्नलिखित हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eउत्तरी अटलाण्टिक खण्ड\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eसिनो-साइबेरियन खण्ड\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eभारत-मैडागास्कर- अण्टार्कटिक भू-खण्ड\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eअफ्रीका-ब्राजील भू-खण्ड\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eप्रशान्त भू-खण्ड\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजबकि इन दृढ़ भू-खण्डों के मध्य या किनारों पर भू-सन्नतियाँ पाई जाती थीं। भू-सन्नति लम्बे, संकरे व छिछले सागर होते हैं। इनकी तली में निरन्तर अवसाद जमा होने से वह धंसती रहती हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपृथ्वी की पपड़ी के धंसाव से बनी लम्बी पेटी जिसमें तलछट की मोटी परत के साथ कभी ज्वालामुखी चट्टानें भी सम्मिलित होती हैं, सामान्य मात्रा में भू-सन्नति कहलाती है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजे. टी. डाना ने भू-सन्नति सिद्धान्त के सम्बन्ध में अपना मत सर्वप्रथम सन् 1873 में रखा तथा बताया कि भू-सन्नति लम्बे, सँकरे तथा निरन्तर धंसते हुए उथले सागरीय भागों को कहा जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजहाँ डाना ने भू-सन्नतियों को छिछला माना वहीं हॉग ने उन्हें गहरे व लम्बे सागर माना जिनमें कि निरन्तर अवसाद जमा होते हैं। उसके अनुसार भू-सन्नतियों के किनारे छिछले होते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइनमें अवसादों के जमाव के साथ-साथ सागर जीवों के अवशेष भी पाये जाते हैं। इससे जमाव की मोटाई का पता लगाया जा सकता है। हॉग के अनुसार जब भी भू-सन्नतियों के तटीय भागों में दबाव पड़ेगा, पर्वतों या मोड़ों का विकास है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकिन्तु हॉग एवं पूर्व की विचारधारा को माना गया, क्योंकि इसमें भू-सन्नतियों एवं दृढ़ भूखण्डों के सम्बन्ध व भू स्थिति पर मतभेद रहा तथा पर्वत निर्माण प्रक्रिया को भी गलत माना गया।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eहॉग महोदय के अनुसारपृथ्वी पर पाँच अत्यधिक कठोर भू-खण्ड थे।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eउत्तरी अटलाण्टिक भू-खण्ड\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eसिनोसाइबेरिया भू-खण्ड\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eअफ्रीकाब्राजील भू-खण्ड\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eऑस्ट्रेलिया इण्डिया-मैडागास्कर भू-खण्ड\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eपैसिफिक भू-खण्ड\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइन भू-खण्डों के मध्य निम्न चार भू-सन्नतियाँ थीं\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eरॉकीज भू-सन्नतियाँ\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eयूराल भू-सन्नतियाँ\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eटेथिस भू-सन्नतियाँ एवं\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eपरिप्रशान्त भू-सन्नतियाँ\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eहॉग के अनुसार भू-सन्नतियों का विकास आसान नहीं है । उनका विचार था कि भू-सन्नतियों के लिए यह भी आवश्यक है कि वे विकास की सभी अवस्थाओं को पूरा करें।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eहाँग द्वारा भू-सन्नतियों की जो गहराई बतायी गयी है, वह तथ्यों के विपरीत है। इनके द्वारा जल एवं स्थल का किया गया वर्णन भी गलत है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजेम्स हॉल ने भू-सन्नतियों तथा वलित पर्वत श्रेणियों के मध्य सम्बन्ध स्थापित कर उसे प्रमाणित करने का प्रयास किया। उनका विचार था कि पर्वतों की अवसादी चट्टानों की रचना किसी छिछले सागर से हुई है । तलछट के जमा होने से सागर तली नीचे दबती गयी जिससे वहाँ अवसाद का जमाव हो गया।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eशूकर्ट की विचारधारा-शूकर्ट ने भू-सन्नतियों की स्थिति एवं उनके विकास के बारे में नवीन विचारधारा प्रस्तुत की। उसने अल्पाइन क्रम के पर्वतों का विस्तृत अध्ययन कर विविध पर्वतमालाओं के विकास के लिए उत्तरदायी मध्यजीव कल्प की एवं पूर्वकालीन भू-सन्नतियों को उनकी विषमताओं के अनुसार तीन वर्गों में बाँटा हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eएक भू-सन्नति\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eबहु आकृति भू-सन्नति\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eमध्यस्थ भू-सन्नति\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003C\/div\u003E\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E1. एक भू-सन्नति\u0026nbsp;\u003C\/h4\u003E\u003Cp\u003Eऐसी भू-सन्नति विशेष लम्बे, संकरे एवं छिछले तल वाली थी। इनकी स्थिति महाद्वीपों के मध्य अथवा किनारों पर सम्भावित मानी गई जैसे-अप्लेशियन भू-सन्नति । इनकी उत्पत्ति छिछले सागरों से ही होती है। इसलिए तलछट की अधिक मोटाई समुद्र तली के धंसने से ही सम्भव है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजहाँ वर्तमान समय में अप्लेशियन पर्वत है, वहाँ पैलियोजोइक कल्प में एक भू-सन्नति थी। इसके पूरब में अप्लेशिया नामक उच्च भूखण्ड तथा पश्चिम में मिसीसिपी का निम्न मैदान था। अप्लेशिया\u003C\/p\u003E\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E2. बहु आकृति भू-सन्नति\u003C\/h4\u003E\u003Cp\u003Eइन्हें शूकर्ट ने विशेष गहरी, लम्बी व संकरी भू-अभिनति माना। इसकी लम्बाई अधिक होने के साथ-साथ इसमें कुछ शाखाएँ भी थीं। इनका भू-वैज्ञानिक इतिहास विशेष जटिल रहा है। ऐसी ही रॉकी व यूराल जैसी भू-सन्नतियों से अनेक शृंखलाओं वाले पर्वतों का विकास हुआ।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभू-सन्नतियों में अवसाद का जमाव लम्बे समय तक होता रहा जिससे अधिक दबाव के कारण वलन उत्पन्न हुआ जिससे उसके उठे हुए भाग पर्वत एवं धंसे हुए भाग घाटियों के रूप में विकसित हुए।\u003C\/p\u003E\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E3. मध्यस्थ भू-सन्नति\u003C\/h4\u003E\u003Cp\u003Eऐसी भू-सन्नतियाँ दो विशाल भू-खण्डों या महाद्वीपों के बीच विकसित होती हैं। ऐसे सागरों को लम्बे, संकरे व गतिशील विशेषताओं वाला बताया गया। ऐसी भू-सन्नतियाँ अधिक लम्बी, मोड़दार एवं बहु-शाखाओं वाली भी हो सकती हैं। टेथिस ऐसी ही भू-सन्नति रहा। इससे आल्पस से लेकर हिमालय एवं उससे पूर्व के पर्वतों का विकास हुआ। टेथिस सागर, अंगारालैण्ड तथा गोण्डवाना लैण्ड नामक कठोर भूखण्डों के मध्य स्थित था।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eआर्थर होम्स का भू-सन्नति पर विचार\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eआर्थर होम्स ने महाद्वीपों का विस्थापन, महासागरीय तली का विकास, भू-सन्नति में निरन्तर अवसादीकरण एवं भू-सन्नति का विकास और पर्वत निर्माण सभी बातों को अन्तःसम्बन्धित घटनाएँ मानते हुए उसके लिए संवाहनिक धाराओं की विशेष विचारधारा प्रस्तुत की।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eपृथ्वी के गर्म होने एवं स्थानीय रूप से सन्तुलन बिगड़ने से भी भू-सन्नतियों के क्रिया कलाप पर प्रभाव पड़ता है।जहाँ संवाहनिक धाराएँ मिलती हैं वहाँ पर नीचे उतरती हुई धारा से भू-सन्नति का विकास होता है, साथ ही वहाँ की भू-सन्नति की तली धीरे धीरे नीचे की ओर गतिशील बनी रहती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइसके साथ-साथ उसमें निकट के महाद्वीपों से अवसाद जमा होते रहते हैं इस प्रकार निरन्तर छिछले रहने वाले सागरों में हिमालय, आल्पस व रांकी जैसे पर्वतों के लिए 40 से 45 हजार फीट मोटाई के जमाव सम्भव हो पाये। इसे होम्स ने समझाया है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eसभी प्रकार के पर्वतों के निर्माण व विकास में तीन अवस्थाएँ समझायी गईं जो निम्नलिखित हैं -\u003C\/p\u003E\u003Cdiv style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cul style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eभू-सन्नति अवस्था या पर्वतों की गर्भव्यवस्था\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eवलन पड़ने की या पर्वत निर्माण अवस्था\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eविकास अवस्था\u003C\/li\u003E\u003C\/ul\u003E\u003C\/div\u003E\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eभू-सन्नति अवस्था या पर्वतों की गर्भव्यवस्था\u0026nbsp;\u003C\/h4\u003E\u003Cp\u003Eइस लम्बे भू-सन्नति के काल मे निकट के महाद्विपों से\u0026nbsp; अपरदन\u0026nbsp; \u0026nbsp;एवं परि वाहन द्वारा लाये गए अवसादों का निरंतर जमाव होता रहा है तली के धंसाव के साथ साथ अवसादों\u0026nbsp; की मोटाई बढ़ती जाती है। संवाहनिक धाराओं के अंतिम चरण में यहाँ जमाव से संतुलन बिगड़ने से पर्वतों की गर्भावस्था के बाद की दूसरी अवस्था प्रारम्भ होती है।\u003C\/p\u003E\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eवलन पड़ने की या पर्वत निर्माण अवस्था\u003C\/h4\u003E\u003Cp\u003Eकिसी भी विधि से भू-सन्तुलन बिगड़ने एवं महाद्वीपों के निकट आने या विस्थापन से भींचाव या सम्पीडन की क्रिया होने लगती है। इससे पहले तटीय भाग के निकट एवं बाद में रुक-रुक कर आने वाले दबाव या भींचाव की प्रकृति एवं दिशा के अनुसार मोड़ों का विकास एवं पर्वतों के विशेष का निर्माण होता है।\u003C\/p\u003E\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003Eविकास अवस्था\u003C\/h4\u003E\u003Cp\u003Eइस अवस्था में पर्वतों का अन्तिम चरण के रूप में स्थानीय या क्षेत्रीय में धीरे-धीरे विकास होता है। इसके ही सम्पूर्ण पर्वतीय क्षेत्र में वहाँ की दशाओं के अनुसार अपक्षय के कारकों का तेजी से प्रभाव इस पर्वत निरन्तर घिस-घिस कर धीरे-धीरे नीचे होने लगते हैं। इससे स्थानीय रूप से सन्तुलन स्थापक शक्तियों प्रभाव से कहीं-कहीं उत्थान भी हो सकता है। विश्व के अधिकांश अल्पाइन पर्वत इसी अवस्था से गुजर रहे हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eकोबर का भू-अभिनति सिद्धान्त\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eकोबर ने संकुचन विचारधारा के आधार पर भू-सन्नति सिद्धान्त एवं पर्वत निर्माण की व्याख्या सन् 1923 में प्रस्तुत की। उसने पृथ्वी के ठण्डा होने एवं संकुचन होने के साथ-साथ दृढ़ भू-खण्डों या प्राचीन कठोर स्थल प्रदेश तथा महासागरों एवं भू-सन्नतियों की कल्पना प्रस्तुत की।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eउसके अनुसार पेंजिया महाद्वीप के अंगारालैण्ड एवं गोण्डवानालैण्ड के मध्य टेथिस \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर\u003C\/a\u003E स्थित था। इसे विद्वानों ने भू-सन्नति बताया। इसमें निरन्तर अवसाद जमाव होने एवं सिकुड़ने की क्रिया होती रही इसके साथ-साथ इसमें अवसादों के दबाव होता रहा हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइस दबाव से अन्ततः अंगारालैण्ड एवं गोण्डवानालैण्ड दोनों निकट आते गये। ऐसे में भू-सन्नति पर दबाव बढ़ने लगा और अवसादों में मोड़ पड़ते गये। इस सिद्धान्त को मध्य पिण्ड सिद्धान्तभी कहा जाता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकोबर के अनुसार सर्वप्रथम अग्र प्रदेशों के किनारे के भाग में तटीय पर्वत श्रेणियाँ बनीं। इन्हें जर्मनी के इस विद्वान ने रेण्ड केटन कहा। दबाव निरन्तर बढ़ते रहने से अधिक जटिल एवं कई श्रेणियाँ दोनों ओर विकसित होती गईं। यदि दबाव तीव्र रहा तो सम्पूर्ण प्रदेश की ऐसी श्रेणियों को कोबर ने नाब कहा हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eस्विट्जरलैण्ड की आल्पस श्रेणी नार्ब का ही उदाहरण है किन्तु जब दबाव रुक-रुककर एवं मध्य रहा हो तो मध्यवर्ती भाग पठारी भाग में बदल जाता है जैसा कि तिब्बत का पठार एवं मध्य एशिया के अन्य पठार हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइस चौड़े समतलप्रायः ऊँचे व पठार कहे जाने वाले भाग को मध्य पिण्ड या ज्यूसचेंजेबर्ग कहा। यूरोप में हंगरी का उच्च मैदान भी दिनारिक आल्पस एवं कारपेथियन के मध्य स्थित ऐसा ही मध्य पिण्ड है। कोबर के इस सिद्धान्त की प्रारम्भ से ही आलोचना होती रही है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eदोनों ही प्रदेशों को अग्र प्रदेश मानना, दोनों ओर से आने वाला समानप्रायः दबाव, समरूपी श्रेणियों का निर्माण एवं मध्य पिण्ड आदि तथ्यों को लेकर आलोचना की गई है। उत्तर दक्षिण में फैले रॉकीज, एण्डीज, अप्लेशियन, कुछ मध्य एशियाई पर्वतों की उत्पत्ति इस सिद्धान्त से स्पष्ट नहीं की जा सकती।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजे.डब्ल्यू. ईवान्स का मत-ईवान्स ने भू-सन्नतियों को तलछट का धंसाव क्षेत्र माना है। उनके अनुसार भू-सन्नतियों का आकार बदलता रहता है। इनकी आकृतियों में अन्तर होने के साथ-साथ विकास क्रम में भी परिवर्तन होता रहता है। इससे भू-सन्नतियाँ संकरी तथा चपटी भी हो जाती हैं। भू-सन्नतियाँ कहीं पर वक्राकार तो कहीं पर असमान धंसा पृष्ठ के समान होती हैं। स्थिति के आधार पर भू-सन्नतियाँ चार प्रकार की होती हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eदो महाद्वीपों के मध्य।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eकिसी विशाल\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/nadi-kise-kahate-hain.html\"\u003E नदी\u003C\/a\u003E के मुहाने पर।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eपर्वव तथा पठार के मध्य मैदानों में।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eमहाद्वीपों के निकट सागर में।\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eईवान्स का मानना है कि अवसाद के धीरे-धीरे जमा होते रहने से सियाल के कमजोर भाग नीचे धंस जाते हैं। जब यहाँ भार अधिक हो जाता है तो खिंचाव तथा तनाव उत्पन्न होता है जिससे भू-सन्नति के दोनों किनारे एक दूसरे के समीप आना प्रारम्भ कर देते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eजैफ्रे का तापीय संकुचन सिद्धान्त\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eजैफ्रे ने पृथ्वी के ठण्डा होने के साथ-साथ उसके सिकुड़ने की विधि को एवं इस प्रक्रिया से पर्वतों के निर्माण एवं विकास को स्पष्ट किया। उनके अनुसार ठण्डी होती हुई पृथ्वी पर सिकुडन या वलन पड़ने लगे। यही सिकुडन या वलन पर्वत कहलाए।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eप्रारम्भ में ठण्डा होने की यह प्रक्रिया अधिक तीव रही अत यह प्रक्रिया तेजी से व बड़े पैमाने पर चलती रही। अब यह विचारधारा बिल्कुल मान्य नहीं है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eआगे चलकर एडवर्ड सुएस ने सन् 1885 में तथा सन् 1892 में अपने महान ग्रन्थ 'भू-तल के इतिहास में कुछ अलग प्रकार से संकुचन पर आधारित पर्वत निर्माण सिद्धान्त प्रस्तुत किया। आरगण्ड भी सुरास से का हो पक्षपाती था।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइन विद्वानों ने प्राचीन कठोर स्थल खण्डों का विस्तार समझाते हुए इसमें से एक को अग्र प्रदेश एवं दूसरे को पृष्ठ प्रदेश बताया। मध्य के मुलायम या कमजोर भू भाग या भू-सन्नति पर पड़ने वाले दबाव से हो पर्वतों का विकास हुआ।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eवर्तमान समय में अब यह सिद्धान्त मान्य नहीं है क्योंकि आणविक पदार्थों की उष्णता से तो टण्डी होतो हुई पृथ्वो भी बार बार गरम हो जाती है एवं पर्वत निर्माण का कारण पूर्णतः भिन्न विधि से जौली एवं होम्स द्वारा समझाए गए हैं। पूर्व अध्याय में वर्णित आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी की विचारधारा भी इस दिशा में नये रूप से पर्वत निर्माण घटना को समझाने का आधुनिक प्रयास माना जा सकता है।\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eजौली का तापीय चक्र सिद्धान्त\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp\u003Eजौलो ने प्रथम विश्वयुद्ध तक ज्ञात रेडियोधर्मी आणविक पदार्थो के गुणों की नवीन खोजों से विशेष प्रभावित हुए । जौलो ने उनसे निकलने वाली गर्मों या ऊष्मा पर आधारित रेडियोधर्मी सक्रियता सिद्धान्न के द्वारा अन्य बातों के साथ-साथ पर्वत निर्माणकारी घटनाओं पर भी सन् 1925 में प्रकाश कला। इसके कुछ समय पश्चात् आर्थर होम्स ने भी इससे कुछ संशोधित एवं विकसित संवहन धारा सिद्धान प्रस्तुत किया था।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eजौली के अनुसार पृथ्वी के आन्तरिक भागों में पाये जाने वाले रेडियोधर्मी पदार्थों की गर्मी सीमा के ऊपरी परतों में ही एकत्रित होने से वहाँ के तापमान निरन्तर बढ़कर चट्टानों के अर्द्ध द्रवावस्था में ला देते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइससे सियाल का भाग जोकि सीमा पर तैर रहा है, कुछ अधिक गहराई तक सोमा में डूब जाता है । इसी से सागर तल में परिवर्तन आते हैं। भू-सन्तुलन बिगड़ने लगता है एवं भू-सन्नतियों का विकास होता है। जब ऐसा होने से भीतरी एकत्रित गर्मी बाहर आ जाती है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयह क्रिया धीमी पड़ने लगती एव महाद्वीप में पुन: स्थायित्व एवं उभार के साथ भिचाव व सम्पीडन की क्रिया से पर्वतों का निर्माण छिछले में सागरों या मुलायम चट्टानों के जमाव के क्षेत्रों से होने लगता है। पर्वत निर्माण की क्रिया के काल में महासागर तटीय भाग की ओर बढ़ने लगते हैं एवं महाद्वीपों का विस्थापन भी होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eआलोचना\u003C\/b\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eयह सिद्धान्त सियाल एवं सीमा परतों में रेडियोधर्मी पदार्थों के वितरण एवं उनसे निकलने वाली गर्मी के सीमा परत में कैद होकर एकत्रित होने पर आधारित है। वास्तव में इसके बारे में आज भी वैज्ञानिकों को विशेष तथ्यात्मक ज्ञान नहीं है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइस सिद्धान्त के अनुसार सभी महाद्वीपों के केवल किनारों पर ही पर्वत निर्माण घटना होनी चाहिए, किन्तु वास्तव में ऐसी स्थिति नहीं है। इसी भॉति जौली के अनुसार पर्वत निर्माण की सभी घटनाएँ चक्रवार या निश्चित समय के अन्तर पर होती रहनी चाहिए इसे अर्तमान में सही नहीं माना जाता हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/7696416080131609880\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/parvat-kise-kahate-hain.html#comment-form","title":"0 Comments"},{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/7696416080131609880"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.blogger.com\/feeds\/8967061962470197044\/posts\/default\/7696416080131609880"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/parvat-kise-kahate-hain.html","title":"पर्वत किसे कहते हैं?"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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लिए किया जाता है। स्थान शब्द का अर्थ आम तौर पर स्थान की तुलना में उच्च स्तर की निश्चितता है। एक इलाके, बस्ती या आबादी वाले स्थान का एक अच्छी तरह से परिभाषित नाम होता है, लेकिन एक सीमा जो अच्छी तरह से परिभाषित नहीं है वह भिन्न होता है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eस्थान किसी क्षेत्र विशेष को कहा जाता हैं। जैसे \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/india.html\"\u003Eभारत \u003C\/a\u003Eका नाम सुनते ही एक क्षेत्र का ध्यान आता हैं। उसे ही स्थान कहा जाता हैं। जैसे आप जिस गाँव या शहर मे रहते है। वह एक स्थान ही हैं।\u003C\/p\u003E"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/9022572937641094712\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/06\/sthan-kise-kahate-hain.html#comment-form","title":"0 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मानव और जीव जन्तु के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। अधिकतर जनसंख्या\n  मैदानों मे निवास करते हैं। क्योंकि यहा फसलों की अधिक पैदावार होती हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  सामान्य रूप मे मैदान का अर्थ समतल भू भाग से हैं। अपने खेल के मदानों को देखा ही\n  होगा सपाट और घास उगे होते हैं। इसी प्रकार प्राकृतिक रूप से विशाल मैदान पाए\n  जाते हैं। जो हजारों किलोमीटर तक फैले होते हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003Eमैदान किसे कहते है\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003E\n  मैदान हमारी धरती के 50 प्रतिशत से अधिक भाग पर फैले हुए हैं। मैदान सामान्यतः समुद्र तल से\n  180 मीटर की ऊँचाई तक पाये जाते हैं। कही कही पर यह 300 मीटर ऊँचे भी\n  हो सकते हैं। अतः एक समतल क्षेत्र जिसकी ऊँचाई सामान्यतः कम होती है। उस विस्तृत भूखंड को मैदान कहते हैं।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eपरिभाषा\u0026nbsp;\u003C\/b\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eमैदान भू-तल पर प्रायः समतल एवं सपाट भाग होते हैं, किन्तु कभी-कभी ये लहरदार भी हो सकते हैं।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eसमुद्र तल से साधारण ऊँचाई वाले समतल क्षेत्रों को जिनके ढाल न्यूनतम होते हैं, मैदान कहा जाता है।\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eसमुद्र तल से 150 मीटर या कम ऊँचे समतल भू-भाग को मैदान कहा जा सकता है।\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eकोई भी भू-भाग मैदान तभी कहा जा सकता है जब उस प्रदेश की स्थानीय भूमि का ऊँचा या नीचापन कुल 100 फीट से अधिक न हो।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eविश्व के प्रमुख घास के मैदान\u003C\/b\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col\u003E\u003Cli\u003Eसवाना घास मैदान – पूर्वी अफ्रीका, वेनेजुएला\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eपम्पास घास का मैदान – अर्जेंटीना, उरुग्वे, ब्राजील\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eस्टेपी घास का मैदान – पश्चिम रूस, मध्य एशिया\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eसेल्वास घास का मैदान – अमेजन बेसिन\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eडाउन्स घास का मैदान – आस्ट्रेलिया\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eप्रेयरी घास का मैदान – उत्तरी अमेरिका\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003Eसामान्य मैदान की कुछ विशेषताएं निम्नलिखित हैं -\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Cul style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eसमतल भू-भाग होते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eउनकी संरचना एक जैसे अवसादों या पदार्थों से बनी होती है।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eऐसे मैदानों में ढाल का अन्तर ज्ञात करना कठिन होता है।\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003C\/ul\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमैदानों का वर्गीकरण\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003E\n  मैदानों के अन्य गुणों की भाँति उनकी उत्पत्ति के भी विभिन्न कारण हो सकते हैं।\n  सामान्यतः जहाँ अधिकांश मैदानों की उत्पत्ति बाह्य शक्तियों\n  द्वारा होती है, वहीं अपवाद की दशा में मैदान आन्तरिक शक्तियों के प्रभाव से भी\n  बन सकते हैं। इनका वर्गीकरण मोटे तौर पर निम्न प्रकार से किया जा सकता है।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E1. आन्तरिक शक्तियों से बने मैदान\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  आन्तरिक शक्तियों से बने अधिकांश मैदानों की पहचान सामान्यतः तटीय भागों के निकट होती है। इनका विस्तार सीमित क्षेत्रों में होता है। आंतरिक हलचल से कभी महाद्वीप पर बड़ा भाग ऊपर उठ जाते हैं। तथा मैदान का निर्माण हो जाता हैं।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eआन्तरिक शक्तियों से बने विशाल मैदानों में पश्चिमी साइबेरिया का मैदान,\n  यूराल के पश्चिम का मैदान, पूर्वी यूरोप का मैदान एवं मिसीसिपी का मैदान हैं। ऐसे मैदान तटीय भाग के निकट भी पाये जा सकते हैं। जैसे कच्छ का मैदान समुद्र तट के निकट स्थित है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  इस विधि से बनने वाले मैदान लावा निर्मित होते हैं।\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/india.html\"\u003Eभारत\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eके दक्षिणी\n  पठार एवं पश्चिमी संयुक्त राज्य के 5 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले मैदान इसके महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। ये विश्व के विशेष उपजाऊ\n  मैदानों में से एक हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E2. बाहरी शक्तियों से निर्मित मैदान\u003C\/span\u003E\u003C\/h4\u003E\n\u003Cp\u003Eइस प्रकार के\u0026nbsp;मैदानों का निर्माण बाहरी क्रियाओं से होता हैं। जैसे - \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/nadi-kise-kahate-hain.html\"\u003Eनदी\u003C\/a\u003E, हिमनद,\n  हवा, लहरें, अपक्षय आदि के कटाव एवं जमाव की क्रियाओं से मैदान का निर्माण हो जाता\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E1. अपरदनात्मक मैदान\u003C\/h4\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eनदियों की अपरदन क्रिया से बने मैदान -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eनदियाँ, पहाड़ी एवं पर्वतीय\u0026nbsp;भागो का\u0026nbsp;अधिक कटाव कती रहती हैं। इसी प्रभाव से\n  नदी की घाटी चौड़ी होती जाती है। और पहाड़ी भागों की संकरी घाटी एवं\n  अपरदन-चक्र कीअधिकता से मैदानों का निर्माण होता रहता हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  कई बार दो पहाड़ी घाटियों के बीच के ऊबड़-खाबड़ भाग को कटाव व\n  जमाव की क्रिया से भी नदी उपजाऊ मैदान बनाती है।\n  नेपाल एवं भूटान में लघु हिमालय की घाटियों के मैदान इसके अच्छे\u0026nbsp;उदाहरण हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eहिमानी अपरदन से बने मैदान -\u003C\/b\u003E लम्बे समय से जमे \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ice.html\"\u003Eबर्फ\u003C\/a\u003E\u003Cb\u003E\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eसमाप्त होते है उसके\u0026nbsp;पश्चात् महाद्वीपीय हिमानी का तल घर्षण क्रिया से मैदान में बदल जाता है। उत्तरी अमेरिका के\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझीलों\u003C\/a\u003E के निकट पश्चिमी साइबेरिया एवं पूर्वी यूरोप के मैदान के विकास में इन शक्तियों का\n  महत्वपूर्ण है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eपवन के अपरदन से बने मैदान - \u003C\/b\u003Eहवा\u0026nbsp;शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में अपरदन का महत्वपूर्ण कारक बनता है। अतः\n  पथरीले प्रदेशों में इनकी आकृतियाँ अधिक बनती हैं। वहाँ पर पवन एवं पानी के सम्मिलित कार्यों से घाटियाँ, बजादा,\n  पेडिमेण्ट एवं अपरदन-चक्र के लहरदार मैदान का निर्माण होता\u0026nbsp;हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eसमुद्र लहरों के अपरदन से बने मैदान -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eसमुद्र तट के निकट निरन्तर लहरों के अपरदन से वहाँ पर प्रारम्भ में बनी आकृतियाँ नष्ट होती जाती हैं और लहरदार पथरीली\u0026nbsp;मैदान रह जाता\u0026nbsp;है। ऐसे अपरदन के मैदान बहुत संकरे होते हैं। सभी तटों के निकट इनका\n  निर्माण होना आवश्यक नहीं है।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E2. निक्षेपात्मक मैदान\u0026nbsp;\u003C\/h4\u003E\n\u003Cp\u003E\n  समतल स्थापक शक्तियाँ जहाँ एक ओर अपरदन का प्रधान साधन हैं वहीं ये शक्तियाँ काटे\n  गये पदार्थों को बहाकर कहीं-न-कहीं अवश्य जमा करती रहती हैं। सभी जमाव की क्रिया\n  से ही कई प्रकार की आकृतियाँ एवं विविध प्रकार से छोटे-बड़े समतल क्षेत्रों का\n  निर्माण होता है। इनमें भी नदियों का जमाव कार्य सबसे महत्वपूर्ण है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eनदियों की निक्षेप क्रिया - \u003C\/b\u003Eनदियों के\u0026nbsp;मुहाने पर\u0026nbsp;कई प्रकार से मैदान का\n  निर्माण होता हैं। जब ये पहाड़ी भाग से निचले मैदानी भाग में प्रवेश करती हैं तो नदी अपने साथ कंकड़, पत्थर आदि का जमाव पर्वत तटीय प्रदेश में करती हैं। जिसके कारण\u0026nbsp;जलोढ़ पंख नामक लहरदार मैदान बनते\n  हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eइसकी आकृति पंखे जैसी बाहर की ओर फैली होती है। नदी में\n  जल अधिक होने, महीन पदार्थों के जमाव के साथ-साथ दलदली मैदान का\n  विकास होता है। हिमालय के निचले ढालों पर ऐसे ही छोटे व संकरे मैदानी भाग मिलते\n  हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eगंगा-यमुना व सिन्धु-सतलज का मैदान नदियों द्वारा प्रतिवर्ष बाढ़ के समय घाटी में दूर-दूर तक बारीक अवसाद लाने से\u0026nbsp;मैदान का निर्माण होता है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eहिमानी के निक्षेप से बने मैदान -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eहिमानी अपने साथ सतह से\u0026nbsp;मोरेन को बहाकर ले जाती है। ये मोरेन बर्फ\n  पिघलने के साथ ही जमा होते जाते हैं। अत: जहाँ बर्फ एवं जल मिलकर जमाव कार्य करते\n  हैं। वहाँ महीन जमाव के मैदान सहित लहरदार मैदान एवं अवसादों के जमा होने से अवक्षेप के\n  मैदान की रचना होती है। उत्तरी यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका में हिमाच्छादन के कारण निर्मित\n  मैदान मिलते हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eपवन के निक्षेप से बने मैदान -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eपवन की गति शुष्क प्रदेशों में निरन्तर कम रहती है वहाँ कम ढालू व लहरदार\n  बालू के मैदान की रचना होती रहती है। इसी प्रकार जिन प्रदेशों में छोटे-छोटे टीले\n  पाये जाते हैं वहाँ पर लहरदार व टीले युक्त ऊबड़-खाबड़ मैदान पाये जाते\n  हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  राजस्थान में चुरू व शेखावाटी के क्षेत्र में ऐसे ही रेतीले जमाव से लहरदार मैदान\n  बनते हैं। मरुस्थलीय प्रदेशों की सीमा या उसके बाहरी भाग में पवन द्वारा जमा की\n  गई महीन बालू से उपजाऊ लोयस के मैदान का निर्माण होता है। चीन का पीला मैदान इसका\n  आदर्श उदाहरण है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eअर्द्ध-मरुस्थलीय भागों के निचले भागों में जल के बहाव की क्रिया एवं जल के\n  निरन्तर वाष्पीकरण से भूमि का क्षार सतह के निकट निचले भागों में इकट्ठा होता\n  जाता है। अत: वहाँ खारे या नमकीन दलदल एवं नमकीन एवं अनुपजाऊ समतल भाग पाये जाते\n  हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eमैदानों का महत्व\u003C\/span\u003E\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003E\n  मैदान मानव के लिए हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहा\u0026nbsp;हैं। विश्व की प्राचीनतम सभ्यता\n  का विकास नदियों की उपजाऊ व समतल घाटियों में ही हुआ हैं। मानव के आर्थिक, सामाजिक\n  एवं सांस्कृतिक विकास मैदानी प्रदेशों में ही आदर्श रूप में मिलते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eमैदान कहीं भी हो तट के निकट, नदी घाटी या डेल्टा क्षेत्र में या\n  महाद्वीपों के मध्य जहाँ भी मैदान है। वह\u0026nbsp;जल की आपूर्ति अधिक\u0026nbsp;है। मैदानों का मानव के लिए विशेष महत्व है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E1. प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति के पोषक व विकास स्थल के रूप में मैदान जीवन के लिए एक उत्तम स्थान रहा हैं। वर्तमान में भी मानव जनसँख्या सबसे अधिक मैदानी इलाको में पाए जाते हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E2. विश्व के सभी महानगर मैदानी प्रदेशों में ही पाये जाते हैं। 85 प्रतिशत नगरीय जनसंख्या\n  मैदानों में ही केन्द्रित है। जलवायु संसाधन और पानी की आपूर्ति मैदानों में महानगर के विकास का मुख्य कारण हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  3. मैदान अपने उपजाऊपन के लिए विशेष प्रसिद्ध हैं अतः यहाँ पर उन्नत किस्म की कृषि,\n  व्यावसायिक पशुपालन, बागान कृषि एवं उन्नत व्यवसायों का विकास व प्राथमिक व्यवसाय\n  तेजी से बढ़ते रहे हैं। देश का सबसे अधिक सिंचित क्षेत्र भी यहीं पाया जाता है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  4. मैदान सघन आबाद होते हैं। यहाँ के निवासी अधिक धनी होते हैं। अतः यहाँ पर तेजी से\n  कृषि एवं शिल्प पर आधारित अनेक प्रकार के कुटीर, लघु व बड़े उद्योग, बहुमूल्य\n  वस्तुओं के शिल्प आदि की निरन्तर माँग रहने से विकास होता रहता है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  5. विकास कृषि एवं उद्योगों के विकास, सघन आबादी, बढ़ती हुई वस्तुओं की माँग के कारण\n  मैदानी भागों में रेल, सड़क एवं वायुमार्गों का तेजी से व उत्तम विकास होता रहा\n  है। भारत में भी उत्तरी मैदान में व्यापार की मण्डियाँ एवं आधुनिक परिवहन संचार\n  सेवाओं का जाल बिछा हुआ है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E6. विश्व के सभी मैदान सभी देशों में उष्ण, अझैष्ण एवं शीतोष्ण प्रदेशों में\n  सघन आबाद हैं। यहाँ पर ग्रामीण एवं नगरीय दोनों ही प्रकार की जनसंख्या आनुपातिक\n  दृष्टि से सबसे अधिक पाई जाती है।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/2111631288442504754\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/mandan-kise-kahate-hain.html#comment-form","title":"0 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के दक्षिण में स्थित विश्व का\n  एक अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं प्राचीनतम् देश है। यहाँ की संस्कृति विश्व की\n  प्रसिद्ध एवं प्रचीनतम् संस्कृतियों में से एक है। इसकी सभ्यता का विकास उत्तरी\n  भारत में सिन्धु नदी की घाटी में हुआ था।\u003C\/p\u003E\n\u003Cdiv class=\"separator\" style=\"clear: both; text-align: center;\"\u003E\u003C\/div\u003E\n\n\u003Cp\u003E\n  उत्तरी भारत में बहने वाली इस नदी को वैदिक आर्यों ने सिन्ध नदी के नाम से\n  सम्बोधित किया गया हैं। सिन्धु नदी को ईरानियों ने हिन्दू नदी कहा इसलिए इस देश\n  को हिन्दुस्तान भी कहा जाता हैं। बाद में रोम निवासियों ने इस नदी को इन्डस\u0026nbsp;\n  तथा प्रचीन ग्रीक निवासियों ने इस नदी को इण्डोस\u0026nbsp; नदी के नाम से पुकारा।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  समय के साथ-साथ यूरोपीय भाषाओं में इस देश को इण्डिया तथा पश्चिमी एशियाई भाषाओं\n  में हिन्दुस्तान कहा जाने लगा। देश का नाम भारतवर्ष, महाभारत और पुराणों से राजा\n  भरत के नाम से लिया गया हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  वर्तमान में, केवल भारत तथा इण्डिया शब्द ही अधिकृत रूप से प्रयोग किये जाते हैं।\n  सामान्यतः हिन्दुस्तान शब्द प्रयोग बहुत कम किया जाता है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत का भौगोलिक स्थिति क्या है\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भौगोलिक रूप में भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी है, जो हिमालय की चोटियों\n  से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। विश्व के इस सातवें विशाल देश को\n  पर्वत और समुद्र, शेष एशिया से अलग करते हैं, जिससे भारत का अपना स्वतंत्र\n  भौगोलिक अस्तित्व है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारत का क्षेत्र उत्तर में\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/himalaya-in-hindi.html\"\u003Eहिमालय पर्वत\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;से लेकर दक्षिण में हिंद \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर\u003C\/a\u003E तक फैला हैं। वही पूर्व मे अरुणाचल\n  प्रदेश से लेकर पश्चिम में द्वारिका गुजरात तक विस्तृत है। हमारा देश पूर्णतया\n  उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारत की भूमि 8°4' से 37°6' उत्तरी अंक्षाश एवं 68°7' से 97°25' पूर्वी देशांतर\n  के बीच फैली हुई है। इसका विस्तार उत्तर से दक्षिण तक 3,214 किलोमीटर और पूर्व से\n  पश्चिम तक 2,933 किलोमीटर है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारत की सीमा 15,200 किमी की है तथा लक्षद्वीप और अण्डमान-निकोबार द्वीप के साथ\n  भारत की समुद्र तट की कुल लम्बाई 7,516.6 किमी है। भारत का दक्षिण छोर\n  अण्डमान-निकोबार द्वीप सीमा है। यह 6°30 उत्तरी अक्षांश पर स्थित है। इसे पहले\n  पिगमैटीयन प्वाइंट कहते थे। वर्तमान नाम इन्दिरा प्वाइंट है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  इस प्रकार भारत लगभग 30° अक्षांशों में बटा हुआ है और कर्क रेखा भारत के लगभग\n  मध्य भाग से गुजरता है। यह रेखा भारत दो जलवायु भागों में विभक्त करता है। कर्क\n  रेखा का उत्तर भाग उपोष्ण कटिबन्ध तथा दक्षिण भाग उष्ण कटिबन्ध जलवायु में आता\n  है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  उपोष्ण कटिबन्ध में सूर्यातप की प्राप्ति कम और उष्ण कटिबन्ध में अधिक होती है।\n  विषुवत् वृत्त के निकट स्थित भारतीय प्रदेशों में दिन और रात्रि की अवधि में केवल\n  45 मिनट का अन्तर होता है, जबकि उत्तर सीमा पर यह अन्तर 5 घण्टे का होता\n  है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  इस देश का देशांतरीय विस्तार भी लगभग 30° का है, अतः देश के लगभग मध्य भाग से\n  गुजरने वाली 82°30’ देशांतर रेखा का समय ही भारत का मानक समय निर्धारित किया गया\n  है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत की वैश्विक स्थिति\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारत उत्तरी एवं पूर्वी गोलार्द्ध में एशिया महाद्वीप के दक्षिण में स्थित हैं।\n  क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का सातवाँ बड़ा देश है। सोवियत संघ, कनाडा,\n  चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील और आस्ट्रेलिया भारत से बड़े क्षेत्रफल वाले\n  देश हैं।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारत का क्षेत्रफल विश्व के क्षेत्रफल का मात्र 2-3 प्रतिशत है, जबकि यहाँ विश्व\n  की 16-87 प्रतिशत\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/population-in-hindi.html\"\u003Eजनसंख्या\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eनिवास करती है। सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 102-7 करोड़ है।\n  जनसंख्या की दृष्टि से चीन के बाद भारत विश्व का दूसरा बड़ा देश है।\u0026nbsp;\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत इंग्लैण्ड से 12 गुना, जापान से 8 गुना बड़ा है। इस\n  प्रकार भारत न तो बहुत बड़ा है और न ही बहुत छोटा हैं।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/2523485354174138711\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/05\/geography-of-india-in-hindi.html#comment-form","title":"0 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patel"},"uri":{"$t":"http:\/\/www.blogger.com\/profile\/12426690531717448804"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"32","src":"\/\/blogger.googleusercontent.com\/img\/b\/R29vZ2xl\/AVvXsEibaWemXB42zGoMaIKeiS1lLwlgsUdkuHIHVsqo5BEu-emdTYIk0VCb5x_43RJ90u4xfNdPMEmdr2gPzknoxzGKGElrCWkTas3Ts-vVzm7LECz7rXDvwX5dlgT96th5_A\/s220\/IMG_20210708_204752_375.jpg"}}],"thr$total":{"$t":"0"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8967061962470197044.post-8642432258076881709"},"published":{"$t":"2022-05-31T07:44:00.032+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-01T07:58:42.383+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"geography"}],"title":{"type":"text","$t":"भारत के प्राकृतिक संसाधन"},"content":{"type":"html","$t":"\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/09\/natural-resources-in-hindi.html\"\u003Eप्राकृतिक संसाधन\u003C\/a\u003E \u003C\/b\u003Eवे संसाधन हैं। जो पहले से प्रकृति में मौजूद होते हैं। इसमें वाणिज्यिक और\n  औद्योगिक, सौंदर्य मूल्य और सांस्कृतिक मूल्य जैसी विशेषताएँ होती हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पृथ्वी पर प्राकृतिक संसाधन के कुछ उदाहरण हैं - सूर्य का प्रकाश, वातावरण,\n  जल, भूमि, खनिज, वनस्पति और पशु आदि। प्राकृतिक संसाधन हमारी प्रकृति के भंडार\n  में संरक्षित होते हैं। जिसका उपयोग मानव अपनी आवश्यकता अनुशार करता हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  प्राकृतिक संसाधनों को विभिन्न वर्गों में  वर्गीकृत किया जा सकता है।\n  प्राकृतिक संसाधन सामग्री के आधार पर \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/paryavaran-kise-kahate-hai.html\"\u003Eपर्यावरण \u003C\/a\u003Eके भीतर पाए जाते\u0026nbsp;है। चलिए जानते है। \u003Cb\u003Eभारत के प्राकृतिक संसाधन\u003C\/b\u003E क्या क्या हैं\u0026nbsp;और हम\u0026nbsp;इसका कैसे उपयोग करते हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003Eभारत के प्राकृतिक संसाधन\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003E\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/india.html\"\u003Eभारत\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eप्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न है। इस सम्पन्नता के कारण ही प्राचीन काल में\u0026nbsp;भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। भारत एक विशाल देश है, हमारे देश का\u0026nbsp;क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग कि. मी. है। क्षेत्रफल की\n  दृष्टि से यह विश्व का सातवाँ बड़ा देश है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eइसमें विभिन्न स्थल रूप, पर्वत, पठार\n  एवं\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/04\/mandan-kise-kahate-hain.html\"\u003Eमैदान \u003C\/a\u003Eहैं, जो अनेक आर्थिक क्रियाओं को जन्म देते हैं। भारत के पर्वतीय एवं पठारी\n  क्षेत्र में\u0026nbsp;खनिज एवं वन संपदाओं का भण्डार हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  वहीं मैदान कृषि एवं उससे सम्बन्धित व्यवसायों के स्रोत हैं। पर्वत एवं पठारी\n  क्षेत्रों से निकलने वाली नदियाँ\u0026nbsp; उपजाऊ मिट्टी का निर्माण करती\n  हैं। जो मानव जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eभारत में विशाल कृषि भूमि, बहता व भूमिगत जल, वनस्पति, उपजाऊ मैदान, खनिज,\n  जीव-जन्तु आदि संसाधनों से भरा पड़ा\u0026nbsp;है। फिर भी भारत सांस्कृतिक विकास एवं\n  प्रौद्योगिकी के अभाव के कारण अपना आर्थिक विकास नहीं कर पाया हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eअसम के स्थानान्तरित कृषि को अपनाने वाले एवं\n  जम्मू कश्मीर के चलवासी चरवाहे गूजर व बेकरवाला आदि इन क्षेत्रों एवं लोगों के\n  पास आज भी सांस्कृतिक विकास एवं प्रौद्योगिकी का अभाव है।\n\u003C\/p\u003E\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eप्राकृतिक संसाधन के प्रकार\u003C\/span\u003E\u003C\/h3\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eप्राकृतिक संसाधन कई प्रकार के हो सकते\u0026nbsp;हैं। नीचे 6 प्रकार के प्राकृतिक संसाधन का वर्णन किया गया हैं। जो हमारे प्रकृति में स्वतंत्र रूप से पाया जाता हैं।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eभूमि संसाधन\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eजल संसाधन\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eखनिज संसाधन\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eपशु संसाधन\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eवन संसाधन\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eऊर्जा संसाधन\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cb\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E1. भूमि संसाधन\u003C\/span\u003E\u003C\/b\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारत का विशाल भूमि संसाधन इस देश के लिए\u0026nbsp;महत्वपूर्ण है। यह तीन ओर विशाल समुद्र\n  से तथा एक ओर हिमाच्छादित \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/himalaya-in-hindi.html\"\u003Eहिमालय पर्वत\u003C\/a\u003E\u0026nbsp;से घिरा है। अतः यहाँ सागरीय, पर्वतीय एवं मरुस्थलीय\n  संसाधनों की भी प्रचुरता है। इसके ऊँचे-ऊँचे पर्वत, प्राचीन पठार और\n  विस्तृत मैदान के कारण आर्थिक क्रियाओं के विविध रूप दिखाई देते\u0026nbsp;हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारत के 43 प्रतिशत\u0026nbsp;धरातल मैदानी है जहाँ कृषि एवं व्यवसाय होते हैं। 28 प्रतिशत भाग में पठार\n  फैला है, जो औद्योगिक विकास के आधार हैं। यहाँ वन एवं\n  कृषि क्षेत्रों की प्रचुरता है। 29 प्रतिशत भाग पर्वतों से घिरे हैं। ये वनस्पतियों,\n  जीव-जन्तुओं, खनिजों एवं स्वास्थ्य लाभ के केन्द्र होते है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पर्वतीय क्षेत्र को छोड़कर सम्पूर्ण देश में पूरे वर्ष ताप एवं वर्षा के अनुकूल रहता है।\n  प्राकृतिक वनस्पति एवं फसलों की उत्पादकता के करण\u0026nbsp;भूमि अति उपयोगी होती\u0026nbsp;है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारतीय कृषि की मजबूरी \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-monsoon-called-in-hindi.html\"\u003Eमानसून\u003C\/a\u003E पर आश्रित होना है। मानसूनी हवाओं द्वारा वर्ष के\n  केवल 3-4 महिने वर्षा होती है। यही नहीं यहाँ होने वाली वर्षा अनिश्चित और अनियमित भी होती है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  गर्मी के दिनों में वर्षा होने से\u0026nbsp;वर्षा जल का वाष्पन से ह्रास हो जाता है। मूसलाधार वर्षा\n  के कारण बहुत सा जल बहकर यत्र तत्र\u0026nbsp;चला जाता है। नदियों में बाढ़ आ जाती है। वर्षा\n  के असमान वितरण भी कृषि के विकास में बाधक है। हमारे लिए आवश्यक है कि हम भूमि का\n  सर्वोत्तम उपयोग करें। इसके लिए सिंचाई के साधनों का विकास आवश्यक है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारत का सौभाग्य है कि यहाँ अनेक विशाल सदा बहने वाली\u0026nbsp;नदियाँ हैं। इन नदियों में बाँध\n  बनाकर सिंचाई कार्य किया जाता है। पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिंचाई की सुविधा के कारण कृषि का विकास तेजी से हुआ\u0026nbsp;है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  कुछ प्रदेशों में अति सिंचाई के कारण जलाक्रांति की समस्या और उष्ण तथा शुष्क\n  भागों में गहन जल के उपयोग के कारण लवणता अधिक होने की समस्या हो सकती है। इन\n  समस्याओं के प्रति सचेत रहना आवश्यक है। इस तरह से हम भूमि की उर्वरता को नष्ट\n  होने से बचा सकते हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E2. जल संसाधन\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003Eजीवन की एक अनिवार्य आवश्यकता जल भी है। ऐसा माना जाता\n  है कि पृथ्वी पर जल की उपस्थिति के कारण जीवों की उत्पत्ति हुई अर्थात् जल जीवों\n  की जननी है। जल के बिना जीवन सम्भव नहीं है। प्रारम्भ में जब पृथ्वी द्रव अवस्था\n  से ठोस अवस्था में आ रही थी। तब गर्म गैसीय पदार्थ ऊपर जमा हो रहे थे।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  जिससे वायुमण्डल की रचना हुई। गर्म गैसीय पदार्थ के ठण्डे होने से विशाल मेघों की\n  रचना हुई, जो बाद में हजारों साल तक पृथ्वी पर मूसलाधार वर्षा करते रहे। इस\n  प्रकार जल की रचना रासायनिक क्रिया से हुई और पृथ्वी पर जल अवतरित हुआ। जिससे\n  सागर, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/what-is-ocean-in-hindi.html\"\u003Eमहासागर\u003C\/a\u003E आदि अस्तित्व में आये हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eभारत के प्रमुख जल प्राप्ति स्रोतों को दो\n  वर्गों में रखा जाता है -\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eधरातलीय जल\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eभूमिगत जल\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E1. धरातलीय जल\u003C\/b\u003E - भारत में धरातल जल वर्षा से प्राप्त होता है।\n  वर्षा एक महत्वपूर्ण जल संसाधन है। इसी से नदियों, जलाशयों, नहरों आदि को जल की\n  पूर्ति होती है। देश की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 110 सेमी है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  देश के 10 प्रतिशत\u0026nbsp;भाग में 200 सेमी से अधिक तथा 33 प्रतिशत भाग में शून्य से 75 सेमी तक वर्षा\n  होती है। जो लगभग 3700 बिलियन घन मीटर जल के बराबर है। इसका 33 प्रतिशत जल वाष्पीकृत\n  हो जाता है। 45 प्रतिशत जल जलाशय, नदियों आदि में प्रवाहित होते है तथा शेष 22% जल भूमि\n  द्वारा सोख लिया जाता है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eदेश में कुल जल संसाधन 16.7 करोड़ हेक्टेयर प्राप्त होता\u0026nbsp;है। जिसमे से\u0026nbsp;केवल 6.6 करोड़\n  हेक्टेयर जल का उपयोग आवश्यकतानुरूप कृषि आदि कार्यों में किया जाता है। जितना जल का उपयोग करते है वह हमारे लिए\u0026nbsp;संसाधन है ।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  धरातलीय जल जो नदियों में प्रवाहित होता है, व्यर्थ न जाने पाये इसलिए\n  स्वतन्त्रता के पश्चात् नदी मार्गों पर छोटे-बड़े जलाशयों का निर्माण किया गया\u0026nbsp;है। और आवश्यकतानुसार समय-समय पर जल का उपयोग कृषि\n  कार्यों, औद्योगिक आवश्यकताओं, विद्युत उत्पादन आदि कार्यों में किया जाता\n  है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जैसे - पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी\n  मध्य प्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र, तेलंगाना, रॉयल सीमा, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक के\n  पठार में जलाशयों एवं नहरों की आवश्यकता को महसूस किया गया। वहीं दूसरी ओर\n  भूमिगत जल कृषि क्षेत्र में उपयोगिता को बढ़ावा देने हेतु विद्युत् ऊर्जा की\n  आवश्यकता महसूस की गयी और बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाओं को अपनाया गया हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eसतलज नदी पर भाखड़ा नांगल, सतलज नदी पर\u0026nbsp;इन्दिरा गाँधी\n  नहर, बिहार में कोसी नदी पर कोसी परियोजना, उड़ीसा में \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/blog-post_46.html\"\u003Eमहानदी\u003C\/a\u003E पर\n  हीराकुण्ड, आन्ध्र-कर्नाटक में तुंगभद्रा परियोजना, आन्ध्र में कृष्णा नदी पर\n  नागार्जुन, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में चम्बल परियोजना मध्य प्रदेश व उत्तर\n  प्रदेश हेतु रिहन्द परियोजना आदि। कृषि उधोग और बिजली की आपूर्ति करने के लिए बनाये गए हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E2. भूमिगत जल\u003C\/b\u003E  - भारत में वर्षा जल का लगभग 22 प्रतिशत भाग चट्टानों\n  के छिद्रों व दरारों से रिसकर धरातल में प्रवेश कर जाता है। चट्टानों में रिसकर\n  पहुँचे हुए इसी जल को भूमिगत जल कहते हैं। कुएँ, पाताल तोड़ कुएँ, ट्यूबवेल,\n  हैण्डपम्प आदि इसके उदाहरण हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E790 बिलियन घन मीटर जल धरातल के नीचे तक पहुँच जाता\n  है, जिसे ट्यूबवेल, हैण्डपम्प एवं कुएँ खोदकर प्राप्त किया जा सकता है। इसका\n  मात्र 70 प्रतिशत भाग ही हम आर्थिक रूप से प्रयोग कर सकते हैं, अर्थात् 70\n  प्रतिशत जल हमारे लिये जल संसाधन हैं। भारत में मानसूनी वर्षा अनियमित,\n  अनिश्चित व असमान वितरण वाली है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  जिन भू-भागों में वर्षा नहीं होती या कम होती है, वहाँ का भूमिगत जल-स्तर नीचा\n  एवं खारा होता है। जैसे\u0026nbsp;पश्चिमी राजस्थान में कई स्थानों पर कुएँ खोदे\n  गये जिनका जल इतना खारा निकला कि सिंचाई के काम में भी नहीं लाया जासकता हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भूमिगत जल का लगभग 90 प्रतिशत भाग अकेला उत्तर भारत के मैदान में विद्यमान है। केन्द्रीय भूमिगत जल बोर्ड ने सर्वे द्वारा अनुमान लगाया है कि देश में\n  भूमिगत जल की उपलब्धता करीब 433-9 लाख हेक्टेयर मीटर प्रति वर्ष है। इसमें से मात्र 71.3 लाख हेक्टेयर मीटर प्रतिवर्ष पानी का उपयोग घरेलू एवं\n  औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए किया जाता है।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cb\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E3. खनिज संसाधन\u003C\/span\u003E\u003C\/b\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003Eखनिज प्राकृतिक-रासायनिक यौगिक तत्व होता हैं।\u0026nbsp;जो अजैव प्रक्रियाओं से बना\n  है। भूमि से खोदकर निकाले गये पदार्थ को खनिज पदार्थ कहते हैं। जो\n  एक या अधिक तत्वों के योग से बनता है। खनिज मानव की असंख्य आवश्यकताओं की पूर्ति करता हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  ये औद्योगिक व्यापारिक तन्त्र की रीढ़ हैं। जल\n  शक्ति, सौर्यिक शक्ति, परमाणु शक्ति आदि को उपयोग में लाने के लिए भी धात्विक\n  खनिज आवश्यक है। कृषि, परिवहन, उत्खनन, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति आदि के लिए\n  खनिज पदार्थ की आवश्यकता होती\u0026nbsp;हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eजीवन के प्रत्येक आयामों में खनिज पदार्थों का महत्व एवं\n  उपयोगिता बहुत अधिक है। इसके बिना हम जीवन के विकास की कल्पना नहीं कर\n  सकते हैं। पाषाण युग, ताम्र युग, लौह युग , इस्पात युग, प्लास्टिक युग, अणु युग \n  आदि मानव विकास के इतिहास की कथा बतलाते हैं। मानव के विकास एवं प्रगति में\n  खनिज तत्वों का योगदान रहा है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  अधिकांश खनिज समाप्त होने वाले संसाधनों की श्रेणी में आते हैं। एक बार भूमि\u0026nbsp;से निकाल लिये जाने के बाद दुबारा उसे\u0026nbsp;प्राप्त नहीं\n  किये जा सकते हैं। क्योंकि ये प्रकृति द्वारा ही लाखों करोड़ों वर्षों में निर्मित\n  होते हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  खनिजों के गुण एवं मात्रा में विपरीत संबंध होता है। उत्तम गुण वाले खनिज कम\n  मात्रा में तथा निम्न गुण वाले खनिज अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। भारत एक वृहत् क्षेत्रफल वाला देश है। इसमें कई प्रकार की भू-रचनाएँ हैं, जिसके\n  कारण प्रकृति ने इसे कई प्रकार के खनिजों से सम्पन्न किया\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभारत का उत्तरी\n  भाग जो मैदानी है औरनवीन चट्टानों से बना है। यहाँ चूने के पत्थर व विशेष प्रकार की मिट्टियों को छोड़कर अन्य खनिज कम हैं।\n  दक्षिणी प्रायद्वीपीय\u0026nbsp;अत्यन्त कठोर चट्टान से निर्मित है। जहाँ\n  आग्नेय चट्टानों की खनिजों का बाहुल्य है।\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003Eभारत में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज निम्नलिखित हैं -\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cli\u003Eकोयला\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eलौह अयस्क\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eबॉक्साइट\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eतांबा\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eअभ्रक\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eसोना\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eचाँदी\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003Cli\u003Eनमक\u0026nbsp;\u003C\/li\u003E\u003C\/ol\u003E\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E4. पशु संसाधन\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\n   किसी देश की अर्थव्यवस्था में पशु संसाधन का महत्वपूर्ण स्थान होता है। भारत\n  कृषि प्रधान देश है। भारत में पशुओं के महत्व को इस समझा जा सकता\n  है।\u003C\/p\u003E\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003Eकृषि कार्य में पशुओं का महत्वपूर्ण योगदान है क्योंकि हल खींचने, बैलगाड़ी\n  खींचने, बोझा ढोने, गन्ने की चरखियाँ पेरने, कुओं से पानी खींचने आदि कार्य में\n  पशुओं का उपयोग किया जाता रहा है। हलाकी वर्तमान मे इसकी जगह मानिशों ने ले ली हैं।\u0026nbsp;\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  एक अनुमान के अनुसार भारतीय कृषि कार्य में लगभग 1185 करोड़ कार्यशील घण्टे प्रति\n  वर्ष पशु शक्ति से प्राप्त किये जाते हैं। पशुओं के गोबर से उत्तम खाद तथा गोबर\n  गैस का उत्पादन होता है। सन् 1984-85 में लगभग 80 करोड़ टन खाद पशुओं से प्राप्त\n  किया गया हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पशुओं से उत्तम पौष्टिक पदार्थ दूध प्राप्त होता है। दूध का उत्पादन जो सन्\n  1979-80 में लगभग 303 लाख टन था, जो 1984-85 से बढ़कर 380 लाख टन हो गया । पशुओं\n  से चमड़ा और खाल प्राप्त होता है। उनसे विभिन्न प्रकार की सामग्रियाँ तैयार की\n  जाती हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भेड़ों से ऊन प्राप्त होता है। ऊन का उपयोग कपड़े, कम्बल आदि बनाने में\n  किया जाता है। सन् 1984-85 में 3-84 करोड़ कि. ग्रा. ऊन का उत्पादन हुआ था। पशुओं\n  से मांस की प्राप्ति होती है। मांस बहुत बड़ी जनसंख्या का मुख्य खाद्य पदार्थ है।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  अनुमान है कि देश को पशुओं से करोड़ों की आय होती है। जो हमें दूध, खाद्य पदार्थ,\n  खाद, ईंधन, मांस, चमड़ा, खालें, बाल, ऊन, अण्डा, हड्डियाँ इत्यादि प्रत्यक्ष रूप\n  में प्राप्त होती हैं। जबकि कृषि कार्य में इनका योगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण है।\n  भारत की कृषि आय में लगभग 10% भाग पशुओं का होता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पशु संसाधनों की स्थिति एवं वितरण - विश्व में सबसे अधिक पशुओं की संख्या भारत\n  में है। विश्व के कुल भैसों का 57% और गाय-बैलों का 15% भाग भारत में है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  यहाँ प्राचीन काल से पशु-पालन किया जाता रहा है। पशुओं का सर्वाधिक उपयोग कृषि\n  कार्य में किया जाता है। भारत में पशु-संसाधनों की वृद्धि निम्नांकित तालिका से\n  स्पष्ट है -\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पशुओं के नाम 2003 (मिलियन) गाय बैल 185-1 primer भैंस 97-9 भेड़ें 61.5 बकरियाँ\n  124-4 ऊँट 0.6 सुअर 13.5\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  देश का पशु संसाधन अधिकतर कम वर्षा व शुष्क जलवायु वाले स्थानों में (पशुपालन)\n  होता है, क्योंकि यहाँ की प्राकृतिक रचना कृषि कार्य के अनुकूल नहीं होती। भारत\n  के पशु संसाधन क्षेत्रों को अग्रलिखित भागों में रखा जा सकता है।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E5. वन संसाधन\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पृथ्वी के धरातल पर वन संसाधन, भू-पारिस्थितिकी के सबसे प्रमुख उदाहरण हैं।\n  इन्हें जैविक संसाधनों की श्रेणी में रखा जाता है। वनों की उपयोगिता एवं महत्व से\n  स्पष्ट है कि मानव ने वन संसाधनों का प्रयोग कई रूपों में किया है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eउपयोगिता एवं महत्त्व\u003C\/b\u003E - भारतीय संस्कृति में वनों का बड़ा महत्त्व रहा है।\n  हमारे प्राचीन धर्म ग्रन्थों में भी वनों के महत्त्व का वर्णन मिलता है। आदिकाल\n  से मानव का लालन-पालन इन्हीं वनों से होता आया है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  वनों से ही वनोपज एकत्रित कर भोजन, वस्त्र, आवास जैसी मूल आवश्यकताओं की पूर्ति\n  मानव करता रहा है, वहीं वन जलवायु को प्रभावित करते हैं, वन वर्षा करने वाले\n  मेघों को आकर्षित करते हैं, भूमि के अपरदन को रोकते हैं, \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  बाढ़ों को नियन्त्रित करते हैं, अधिक वाष्पीकरण को प्रभावित करते हैं, पशुओं को\n  चारा उपलब्ध कराते हैं, उद्योग-धन्धों एवं ग्रामीणों के लिए कच्चे माल उपलब्ध\n  कराते हैं एवं जीव-जन्तुओं के शरण स्थल हैं, आदि । वनों के इसी महत्त्व को देखते\n  हुए वनों को राष्ट्रीय सम्पदा कहा गया है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पृथ्वी पर मानव के अस्तित्व में आने के पूर्व ही सम्भवतः वनों का विकास हो चुका\n  था। तभी तो मानव के लिए वन पालना गृह रहे हैं. साधारणतः वन शब्द से आशय ऐसे\n  विस्तृत क्षेत्र से है, जहाँ पेड़-पौधों का सघन आवरण पाया जाता है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  शासकीय आँकड़ों के अनुसार भारत में सन् 1985 के अनुसार 748.72 लाख हेक्टेयर भूमि\n  पर (लगभग 22.8%) वन थे, परन्तु यह बढ़कर सन् 1991 में 752-3 लाख हेक्टेयर (लगभग\n  22.9%) तथा सन् 1999 में 6·37 करोड़ हेक्टेयर (19-39%) भूमि पर वन हैं, परन्तु\n  सन् 1980-82 में सुदूर संवदेन उपग्रह से लिये गये चित्र के अनुसार मात्र 463.5\n  लाख हेक्टेयर भूमि पर ही (लगभग 14%) वन पाये गये, जो भारत जैसे विशाल आकार के देश\n  के लिए बहुत ही कम हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E1 भौगोलिक आधार पर वनों का वर्गीकरण\u003C\/b\u003E - भारत में जलवायु की विविधता एवं\n  धरातलीय असमानताओं के कारण विभिन्न प्रकार के वन पाए जाते हैं। भारतीय वनस्पति\n  सर्वेक्षण संस्था ने देश में पेड़-पौधों की 47,000 प्रजातियों का पता लगाया है।\n  इनमें 5000 प्रजातियाँ तो ऐसी हैं जो केवल भारत में ही मिलती हैं। भौगोलिक तत्वों\n  के आधार पर भारतीय वनों को पाँच भागों में बाँटा गया है\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp style=\"text-align: left;\"\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cli\u003Eउष्ण कटिबंधीय सदापर्णी वन \u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eमानसूनी वन\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eमरुस्थलीय वन \u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eडेल्टाई वन \u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eहिमालय पर्वतीय वन \u003C\/li\u003E\n\u003C\/ol\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E1. उष्ण कटिबंधीय सदापर्णी वन\u003C\/b\u003E  ये वन विषुवत् रेखीय वनों से\n  मिलते-जुलते हैं । उच्च तापमान और पर्याप्त वर्षा (200 सेमी तथा इससे अधिक) के\n  कारण वृक्षों की ऊँचाई 50 मीटर से भी अधिक होती है, सदा हरित वन 200 सेमी से अधिक\n  वर्षा वाले भागों में पाये जाते हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  ये क्षेत्र पश्चिमी तटीय प्रदेश, पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल, उत्तर-पूर्वी\n  पर्वतीय प्रदेश और अण्डमान निकोबार द्वीप समूह हैं। वनस्पति की विविधता और अधिकता\n  इन वनों की प्रमुख विशेषता है। इनकी लकड़ी काले रंग की तथा कठोर होती हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  लता व झाड़ियों के कारण वन दुर्गम हैं। मुख्य वृक्ष रबड़, महोगनी, एबोनी, ताड़,\n  आबनूस, बाँस आदि हैं। इन वनों की लकड़ी का उपयोग पेटियाँ बनाने, पैकिंग करने व\n  प्लाईवुड बनाने में किया जाने लगा है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  ये वन भूमध्य रेखीय वनों की तुलना में कम घने हैं। साथ ही वृक्षों की ऊँचाई भी\n  अपेक्षाकृत कम है। जहाँ वर्षा की मात्रा कम हो जाती है, वहाँ ये वन अर्द्ध-\n  सदाबहार वन  कहलाते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E2. मानसूनी वन\u003C\/b\u003E - मानसूनी वन भारत के विशिष्ट वन हैं। इनका विस्तार\n  लगभग सारे भारत में है, किन्तु ये 75 सेमी से लेकर 200 सेमी तक वर्षा वाले\n  क्षेत्रों में विशेष रूप से पाए जाते हैं। इन वनों के वृक्ष विशेष मौसम में अपनी\n  पत्तियाँ गिरा देते हैं, इसलिए इन्हें उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन भी कहते हैं।\n  आर्थिक दृष्टि से ये वन बहुत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी हैं। इन वनों के दो उप-वर्ग\n  हैं\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Col style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cli\u003Eआर्द्र मानसूनी वन\u003C\/li\u003E\n  \u003Cli\u003Eशुष्क मानसूनी वन \u003C\/li\u003E\n\u003C\/ol\u003E\n\u003Cp\u003E\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eआर्द्र मानसूनी वन\u003C\/b\u003E - ये वन पर्णपाती या पतझड़ वन भी कहलाते हैं,\n  क्योंकि शुष्क ग्रीष्म काल में ये वृक्ष अपनी सभी पत्तियाँ एक साथ गिरा देते हैं।\n  इनकी ऊँचाई 30 से 40 मी. तक होती है। सदापर्णी वनों की भाँति ये वन सघन नहीं होते\n  हैं अर्थात् आर्थिक दृष्टि से ये वन उपयोगी हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  ये वन 100 से 200 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में पाये जाते हैं। ये वन गंगा की\n  निचली व मध्य घाटी व पूर्वी तटीय मैदान में पाये जाते हैं अर्थात् छत्तीसगढ़,\n  पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक,\n  \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/kerala-in-hindi.html\"\u003Eकेरल\u003C\/a\u003E तथा\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/tamil-nadu-ki-rajdhani-kya-hai.html\"\u003Eतमिलनाडु\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eके भागों में पाये जाते हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  साल, सागौन, शीशम, आँवला, नीम, आम व चन्दन प्रमुख वृक्ष हैं, तथा अन्य वृक्षों\n  में गूलर, जामुन, रीठा, बेर, पलास, महुआ, बरगद, पीपल आदि । सागौन लकड़ी फर्नीचर\n  बनाने के लिए उपयुक्त होती है। चन्दन की लकड़ी सुगन्धित होती है ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eशुष्क मानसूनी वन\u003C\/b\u003E - इन वनों के पत्ते ग्रीष्म ऋतु के आरम्भ में ही\n  गिर जाते हैं । कृषि भूमि को विकसित करने के लिए अनेक भागों के वनों को काटा गया\n  है। ये वन 50 से 100 सेमी वर्षा वाले भागों में पाये जाते हैं। ये वन आर्द्र-\n  मानसून वनों के पश्चिम की ओर पाये जाते हैं, क्योंकि वर्षा की मात्रा प्रायः\n  पूर्व से पश्चिम की ओर कम होती जाती है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  ये वन पंजाब, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान, मध्य व दक्षिणी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी\n  मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक व गुजरात के अधिकांश भागों में पाये जाते हैं।\n  आम, जामुन, महुआ तथा शीशम मुख्य वृक्ष हैं। अन्य वृक्षों में बबूल, रीठा, बेर,\n  खजूर, अमलता, नीम आदि हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E3. मरुस्थलीय वन -\u003C\/b\u003E इन वनों में वर्षा की कमी के कारण वृक्षों में\n  पत्तियाँ कम, छोटी व काँटेदार, जड़े लम्बी होती हैं । ये वन 50 सेमी से कम वर्षा\n  वाले क्षेत्रों में पाये जाते हैं। पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश आदि\n  राज्यों के शुष्क भागों में यह वनस्पति पायी जाती है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  बबूल, नागफनी, रामबाँस, खेजड़ा, खैर, खजूर आदि प्रमुख वृक्ष हैं। इनका प्रयोग\n  मुख्यतः ईंधन की लकड़ी के रूप में होता है। खजूर से गुड़ भी बनाया जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E4. डेल्टाई वन\u003C\/b\u003E - इन वनों को मैनग्रोव या ज्वारीय वन भी कहते हैं। ये\n  नदियों के डेल्टा क्षेत्रों में पाये जाने के कारण डेल्टाई वन कहलाते हैं । इनकी\n  लकड़ी अधिकतर नाव बनाने के काम में आती है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  गंगा-ब्रम्हपुत्र के डेल्टा क्षेत्र में ये वन पाये जाते हैं। ये वन महानदी,\n  गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आदि \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/09\/peninsula-in-hindi.html\"\u003Eप्रायद्वीप\u003C\/a\u003E की नदियों के डेल्टा क्षेत्र में पाये\n  जाते हैं । सुन्दरी वृक्ष तथा मैनग्रोव मुख्य वृक्ष हैं। अन्य प्रकार के वृक्षों\n  में केवड़ा, नारियल, बोगरा, गोरडन आदि हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E5. हिमालय पर्वतीय वन\u003C\/b\u003E – पर्वतों पर ऊँचाई के कारण तापमान व वर्षा में\n  अन्तर होता जाता है । फलतः वनस्पति भी ऊँचाई के अनुसार परिवर्तित होती जाती है।\n  यहाँ उष्ण कटिबन्धीय से लेकर अल्पाइन वनस्पति तक का क्रम पाया जाता है, इसका\n  विवरण अग्र प्रकार से है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  4800 मीटर से अधिक ऊँचाई पर किसी भी प्रकार के वृक्ष नहीं पाये जाते हैं। पर्वतीय\n  ऊँचाई के बढ़ने के साथ-साथ वृक्षों की ऊँचाई घटती जाती है और हिम रेखा के निकट\n  केवल अल्पाइन घास पायी जाती है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत में वनों का वितरण\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  इस समय भारत की 752-3 लाख हेक्टेयर भूमि (19.47%) पर वनों का विस्तार है। यहाँ\n  प्रति व्यक्ति वनों का औसत 0-2 हेक्टेयर मात्र है। भारत में वनों का वितरण बहुत\n  असमान है। प्रादेशिक वनों के वितरण को चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E1. पर्याप्त वन भूमि वाले राज्य\u003C\/b\u003E - इसके अन्तर्गत वे राज्य आते हैं, जहाँ\n  की कुल भूमि का 50% से अधिक भाग वनों का है। इसमें अण्डमान निकोबार द्वीप\n  (86.2%), मणिपुर (67.5%), अरुणाचल प्रदेश (61.9%), त्रिपुरा (61.0%), मिजोरम\n  (80.5% ), और उत्तरांचल (63%) सम्मिलित हैं। भारतीय वनों का वितरण 1. पर्याप्त\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E2. आवश्यकता के अनुरूप वन वाले राज्य\u003C\/b\u003E - \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/11\/paryavaran-kise-kahate-hai.html\"\u003Eपर्यावरण\u003C\/a\u003E को सन्तुलित बनाये रखने\n  के लिए कम से कम 30% भूमि वनों का होना आवश्यक होता है। भारत में 30% से 50% वन\n  भूमि वाले राज्य छत्तीसगढ़ (46%), मेघालय ( 41.1% ), दादर व नगर हवेली (41-2%),\n  असम (39-1%), हिमाचल प्रदेश (38·1%), उड़ीसा (38-3%),\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/sikkim-in-hindi.html\"\u003Eसिक्किम\u0026nbsp;\u003C\/a\u003E(36-3%), एवं\n  मध्यप्रदेश (35-1%), हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E3. आवश्यकता से कम वन वाले राज्य\u003C\/b\u003E - इसके अन्तर्गत 20% से 30% तक वन\n  भूमि वाले क्षेत्र समाहित हैं। इसमें केरल (28-9%), गोवा, दमन दीव ( 26.1%),\n  आन्ध्र प्रदेश (23-0%), कर्नाटक (20.1%), व महाराष्ट्र (20-8%), हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E4. अल्प वन भूमि वाले राज्य\u003C\/b\u003E – इसमें उत्तर प्रदेश (17-4%), नागालैण्ड,\n  तमिलनाडु, बिहार (16-8%), पश्चिम बंगाल (13.5%), गुजरात (10-0%), जम्मू व कश्मीर\n  (9.4%), राजस्थान (9-0%), पंजाब (5-2%), और हरियाणा (3-9%) है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  देश के 50% वन प्रायद्वीपीय पठार व पहाड़ियों में 20% तक हिमालय पर्वतीय प्रदेश\n  में, 12% वन पूर्वी घाट व तटीय प्रदेश में, 10.5% वन पश्चिमी घाट व तटीय प्रदेश\n  में और 7-5% वन उत्तरी मैदान में पाये जाते हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eसमस्याएँ\u003C\/b\u003E\u003C\/h4\u003E\n\u003Cp\u003E\n  भारत में वनों का विस्तार मानक स्तर से बहुत कम है। साथ ही यहाँ के वन संसाधन\n  अग्रलिखित समस्याओं से ग्रस्त हैं -\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E1. वृक्षों की अंधाधुन्ध कटाई\u003C\/b\u003E - स्वतन्त्रता के पश्चात् निरन्तर जनसंख्या\n  वृद्धि के कारण कृषि उद्योग विकास के लिए वनों की अंधाधुन्ध कटाई से भारत में\n  वनों का क्षेत्रफल अत्यन्त कम हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मकान के निर्माण\n  तथा जलाऊ ईंधन के लिए वनों को काटा जाता है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  शहरों में स्थापित उद्योगों में कच्चे माल की पूर्ति के लिए वनों को काटा जाता\n  है। परिणामस्वरूप भारत के भारतीय वन संसाधन की प्रमुख अधिकांश वन क्षेत्र आज नग्न\n  भूमि में परिवर्तित हो चुके हैं। समस्याएँ\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E2. वनों में आग लगना\u003C\/b\u003E - मानवीय या प्राकृतिक कारणों से वनों में आग लग जाती\n  है। इससे वन जलकर नष्ट हो जाते हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E3. वनों के क्षेत्रफल में कमी\u003C\/b\u003E - कृषि के विस्तार, उद्योग स्थापित करने तथा\n  मानव बस्ती के लिए आजकल वन भूमि का उपयोग किया जा रहा है। परिणामस्वरूप वन भूमि\n  के क्षेत्रफल में कमी आ रही है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E4. पर्यावरण असन्तुलन\u003C\/b\u003E - पर्यावरण सन्तुलन के लिए भूमि में से 33% भाग पर\n  वन होने चाहिए जबकि भारत में 22.9% भूमि पर ही वन हैं। वनों की कमी से वायुमण्डल\n  में गैसों का सन्तुलन बिगड़ गया है और पर्यावरण में जहरीली गैसों का प्रभाव बढ़\n  रहा है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  विश्वव्यापी स्तर पर ओजोन मण्डल में छेद पड़ने लगे हैं जो मानव तथा पर्यावरण के\n  लिए खतरे की चेतावनी है ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E5. अन्य समस्याएँ\u003C\/b\u003E – वनों की कमी से नगरों में आज औद्योगिक प्रदूषण तेजी से\n  बढ़ रहा है। कहीं भयानक बाढ़ तो कहीं सूखे की स्थिति है । वन क्षेत्रों में कमी\n  के साथ-साथ वन्य प्राणियों की संख्या भी कम हो रही है। वन संसाधन के समक्ष अनेक\n  समस्याएँ हैं, जिनसे मानव के स्वास्थ्य तथा कार्यक्षमता, राष्ट्रीय, प्राकृतिक\n  संसाधन आदि पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cb\u003E\u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eवन संरक्षण के उपाय\u003C\/span\u003E\u003C\/b\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  हमारे देश में वन संसाधन की कमी तथा उससे उत्पन्न समस्याओं को देखते हुए वनों का\n  संरक्षण करना आवश्यक है। वनों के संरक्षण हेतु निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिए -\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E1. वृक्षारोपण\u003C\/b\u003E – वनों का विस्तार ही वनों का सर्वोत्तम संरक्षण है। भारत\n  की राष्ट्रीय वन नीति में उल्लेखित 33% वन भूमि के लिए ठोस प्रयास किये जाने\n  चाहिए। वनविहीन पहाड़ों, पठारों एवं अन्य खाली क्षेत्रों में वृक्षारोपण किया\n  जाय। वृक्षारोपण कार्यक्रम को सार्थक बनाना और उसकी पर्याप्त सुरक्षा भी करनी\n  चाहिए ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E2. वनों की कटाई पर रोक\u003C\/b\u003E - वनों की कटाई पर कठोरता से रोक लगाकर ईंधन, चारे\n  तथा लकड़ी की पूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोत तैयार किये जाने चाहिए। प्राकृतिक\n  वनों को काटे जाने पर उनके स्थान पर शीघ्र पनपने वाले वृक्षों का रोपण किया जाना\n  चाहिए । आदिवासी क्षेत्रों में वनों को काटकर खेती करने की प्रथा पर पूर्ण रोक\n  लगानी चाहिए।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E3. वनों को आग से बचाना\u003C\/b\u003E- वनों में आग लगाने की समस्या सामान्य हो गयी है।\n  वनों में अग्नि शमन के लिए आवश्यक उपकरण तथा प्रशिक्षित कर्मचारियों को तैयार\n  किया जाना चाहिए ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E4. परिवहन मार्गों का विकास\u003C\/b\u003E - वनों की सुरक्षा के लिए जंगली क्षेत्रों में\n  सड़क परिवहन तथा संचार के साधनों का विकास करना नितांत आवश्यक है। इससे वनों को\n  सुरक्षित रखने में शासन को आसानी होगी। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E5. वानिकी विकास\u003C\/b\u003E – परम्परागत वानिकी के अतिरिक्त कृषि वानिकी, विस्तार\n  वानिकी, रक्षा पंक्ति वानिकी एवं सामाजिक वानिकी विकास पर विशेष ध्यान दिया जाये\n  ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E6. वन संरक्षण के प्रति लोगों में चेतना जाग्रत करना\u003C\/b\u003E -\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2023\/10\/blog-post_90.html\"\u003Eप्राचीनकाल\u0026nbsp;\u003C\/a\u003Eसे भारत\n  में वनों को अत्यधिक महत्व दिया जाता रहा है जैसा कि- अग्नि पुराण में कहा गया है\n  – “एक वृक्ष दस पुत्रों के बराबर होता है” इसी से वनों का महत्व स्पष्ट होता है।\n  दुर्भाग्यवश जनसंख्या वृद्धि एवं अज्ञानता के कारण वर्तमान में वनों की अंधाधुन्ध\n  कटाई की जा रही है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  वनों के विनाश से उत्पन्न होने वाले गंभीर दुष्परिणामों के प्रति समय रहते सचेत\n  करने का प्रयास करना चाहिए एवं शासन को इस संबंध में एक निश्चित वन नीति\n  निर्धारित करके लोगों में वन संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने का प्रयास करना\n  चाहिए।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  'सन् 1952 की वन नीति के अनुसार जुलाई, 1952 से भारत सरकार ने वन महोत्सव मनाना\n  प्रारम्भ किया है । वन महोत्सव आन्दोलन का मूल आधार- “वृक्ष का अर्थ जल है, जल का\n  अर्थ रोटी है और रोटी ही जीवन है।\" \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  यह निर्विवाद सत्य है कि वनों के बिना धरातल पर किसी भी जीव- -जन्तु का जीवित\n  रहना सम्भव नहीं है, इसलिए वन संरक्षण को सर्वोत्तम प्राथमिकता दी जाये ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003E6. ऊर्जा संसाधन\u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eकोयला\u003C\/b\u003E\u003C\/h4\u003E\n\u003Cp\u003E\n  शक्ति के साधनों में कोयला सर्वोपरि है। इसी कारण आधुनिक औद्योगीकरण का सूत्रपात\n  एवं विश्व का विकास हुआ। कोयले का महत्व अकथनीय है। वैज्ञानिकों ने इस कच्चे\n  पदार्थ से आज तक लगभग दो लाख विविध वस्तुओं का निर्माण किया है, जिससे इसका महत्व\n  स्वतः स्पष्ट होता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eउपयोग\u003C\/b\u003E – कोयले का उपयोग लिपिस्टिक तथा सुगंधित तेलों, जैसे- प्रसाधन की\n  वस्तुएँ, नायलोन, डेक्रोन जैसे सूक्ष्म धागे वाले वस्त्र, प्लास्टिक, टूथ ब्रश,\n  बटन, वाटर प्रूफ कागज, नेफ्थालिन, अमोनिया जैसी वस्तुएँ, कोक, कोलतार, (डामर,\n  फिनाइल, बेंजोल), कृत्रिम रबर, कृत्रिम पेट्रोलियम, रंग, पेंट, सेक्रीन, इत्र,\n  दवाईयाँ, पॉलिश के रंग, बालों में लगाने वाला खिजाब, नील, वार्निश, रंगों के घोल,\n  प्रिंटिंग प्रेस तथा फोटो कलर प्रिंटिंग की स्याही आदि बनाने में किया जाता\n  है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  कोयले की हाइड्रोजनीकरण क्रिया से पेट्रोल प्राप्त किया जाता है। धातुओं को\n  गलाने, ताप शक्ति का निर्माण करने तथा भाप शक्ति बनाने आदि के कार्य में इसका\n  अधिकाधिक उपयोग किया जाता है । \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eकोयले के प्रकार -\u0026nbsp;\u003C\/b\u003Eरासायनिक सम्मिश्रण की दृष्टि से भारत में निम्नलिखित चार\n  प्रकार के कोयले की किस्में पायी जाती हैं\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(i) एन्थ्रेसाइट\u003C\/b\u003E—यह सर्वोत्तम किस्म का कोयला है, इसमें कार्बन की मात्रा\n  80 से 95% तक होती है ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(ii) बिटूमिनस\u003C\/b\u003E – यह कोयला गोंडवाना काल की शैलों में मिलता है। इसमें\n  कार्बन की मात्रा 75 से 80% होती है ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(iii) लिग्नाइट\u003C\/b\u003E – यह मध्यम श्रेणी का कोयला है। इसमें कार्बन की मात्रा 45\n  से 55% होती है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(iv) पीट कोयला\u003C\/b\u003E – यह निम्न श्रेणी का कोयला है । यह धुँआ बहुत देता है।\n  इसमें कार्बन की मात्रा 40% से कम होती है ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eउत्पादन एवं वितरण\u003C\/b\u003E – भारत कोयला उत्पादन में विश्व का पाँचवाँ बड़ा\n  राष्ट्र है। यहाँ कोयले का अनुमानित भंडार “जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया” के\n  अनुसार जनवरी, 2001 में 2,13,905-51 मिलियन टन बताया गया है, जो गोंडवाना तथा\n  टर्शियरी अवसादी चट्टानों में पाया जाता है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  यह मुख्यतः पश्चिम बंगाल के रानीगंज, झारखंड के झरिया, बोकारो, मध्य प्रदेश के\n  उमरिया, पंच नहान, सिंगरौली, छत्तीसगढ़ के चिरमिरी, झिलमिली, कोरबा, महाराष्ट्र\n  के चाँद - वर्धा, उड़ीसा के ईब, तालचेर एवं आंध्र के गोदावरी घाटी से प्राप्त\n  होता है। इसके अतिरिक्त असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैण्ड एवं जम्मू कश्मीर\n  हैं ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eअन्तर्राष्ट्रीय व्यापार\u003C\/b\u003E – विश्व के कोयला निर्यात में भारत का योगदान 1\n  प्रतिशत से कम रहता है। यह देश\u0026nbsp;\u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/myanmar-in-hindi.html\"\u003Eम्यांमार\u003C\/a\u003E, बांग्लादेश, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/07\/sri-lanka-in-hindi.html\"\u003Eश्रीलंका\u003C\/a\u003E, नेपाल, भूटान तथा\n  मारीशस को कोयले का निर्यात करता है। सन् 1950-51 में भारत में 3-2 करोड़ रुपये\n  का 12 लाख टन कोयला निर्यात किया गया, जो सन् 1960-61 में बढ़कर 5-3 करोड़ रुपये\n  तथा 14 लाख टन हो गया। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  सन् 1980-81 में निर्यात की मात्रा घटकर लगभग 1 लाख टन रह गई, जिसका मूल्य लगभग 3\n  करोड़ रुपए था । जो बढ़कर वर्तमान में 350 रुपये हो गया है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch4 style=\"text-align: left;\"\u003E\u003Cb\u003Eखनिज तेल\u003C\/b\u003E\u003C\/h4\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पेट्रोलियम  का शाब्दिक अर्थ चट्टानी तेल है। यह लैटिन भाषा के दो शब्दों\n  पेट्रो और ओलियम से मिलकर बना है। पेट्रो का अर्थ 'शैल' (चट्टान) और ओलियम का\n  अर्थ ‘तेल’ होता है। इस प्रकार इसका शाब्दिक अर्थ 'चट्टानी तेल' अर्थात् खनिज तेल\n  है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  ऐसा माना जाता है कि हजारों वर्ष पूर्व तेल की उत्पत्ति वनस्पतियों एवं समुद्र के\n  अनेक छोटे-बड़े जीवजन्तुओं के जो प्राचीन काल में डेल्टाओं, \u003Ca href=\"https:\/\/www.questionmug.com\/2021\/05\/what-is-lake-in-hindi.html\"\u003Eझीलों\u003C\/a\u003E और समुद्रों\n  में रहते थे, किसी कारणवश दब जाने से पृथ्वी की गर्मी व दबाव से आसवन क्रिया के\n  कारण हुई।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eउपयोग\u003C\/b\u003E – कोयले के बाद शक्ति के साधनों में खनिज तेल का महत्व सबसे अधिक\n  है। इसका अधिकाधिक उपयोग ताप, प्रकाश, चालक शक्ति और मशीनों को चिकना करने के लिए\n  किया जाता है । इसने अपने गुणों के कारण ही स्थल, जल एवं वायु, यातायात में\n  क्रान्ति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  इससे लगभग 5,000 किस्मों की उप-वस्तुएँ भी प्राप्त की जाती हैं। खनिज तेल को साफ\n  करने पर ईंधन का तेल, गैसोलिन, गैस का तेल, मिट्टी का तेल, डिस्टिलेट, चिकना करने\n  का तेल, पैराफीन, नेप्था, वैसलीन, बेंजीन, कोक, मोम आदि प्राप्त होते हैं ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eभारत में खनिज तेल का वितरण\u003C\/b\u003E- भारत में पेट्रोलियम की खोज पहली बार 1866\n  में ऊपरी असम घाटी में हुई थी। 1890 में डिगबोई क्षेत्र में तेल की खोज की गयी।\n  1958 में खंभात की खाड़ी में, 1960 में अंकलेश्वर क्षेत्र में, 1975 में बॉम्बे\n  हाई में पेट्रोल की खोज की गयी । इन प्रयत्नों के फलस्वरूप देश में तेल के\n  उत्पादन में तीव्र वृद्धि होने लगी। वर्तमान समय में भारत में निम्नलिखित चार तेल\n  उत्पादक क्षेत्र हैं\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E1. उत्तरी पूर्वी प्रदेश\u003C\/b\u003E - यह देश का सबसे पुराना तेल उत्पादक क्षेत्र है।\n  यहाँ तेल के मुख्य क्षेत्र निम्नलिखित हैं\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(i) डिगबोई क्षेत्र\u003C\/b\u003E – यह क्षेत्र लखीमपुर जिले में 8 वर्ग किमी. भूमि में\n  फैला हुआ है। यहाँ तेल के 100 से अधिक कुएँ हैं। तेल के प्रमुख क्षेत्र डिग्बोई,\n  बाप्पापांग, हास्सापांग और पानाटोला हैं। इस क्षेत्र का तेल डिंग्बोई तेल शोधक\n  कारखाने में साफ किया जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(ii) सुरमा घाटी\u003C\/b\u003E— यह क्षेत्र सुरमा नदी की घाटी में फैला हुआ है। इस\n  क्षेत्र में तेल बदरपुर, मसीमपुर और पथरिया केन्द्रों से प्राप्त होता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(iii) नाहर कटिया-मोरान क्षेत्र\u003C\/b\u003E – यह एक नवीन क्षेत्र है। यह ब्रह्मपुत्र\n  की घाटी में डिग्बोई से 40 किमी. पश्चिम की ओर है। नाहर कटिया, मोरान, हगरीजन\n  प्रमुख केन्द्र हैं। इस क्षेत्र का तेल नूनमाटी व बरौनी तेलशोधक कारखानों में साफ\n  किया जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(iv) शिव सागर व तकना क्षेत्र\u003C\/b\u003E — यहाँ रुद्र सागर में तेल के कुएँ हैं।\n  क्षेत्र 2. गुजरात प्रदेश – यह प्रदेश खंभात के बेसिन तथा गुजरात के मैदान में\n  विस्तृत है। यहाँ के मुख्य निम्नलिखित हैं\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(i) लुनेज क्षेत्र\u003C\/b\u003E - इसे खंभात क्षेत्र भी कहा जाता है। यह क्षेत्र बड़ौदा\n  से 60 किमी. पश्चिम में स्थित है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(ii) अंकलेश्वर क्षेत्र –\u003C\/b\u003E इस क्षेत्र का पता सन् 1959 में लगा। इसे\n  बसुधारा क्षेत्र के नाम से पुकारा जाता है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(iii) अहमदाबाद क्षेत्र \u003C\/b\u003E– इस क्षेत्र में अहमदाबाद के निकट कलोल, नवगाम,\n  ओल्पाद, कथाना, धोलका महसाना, कोसम्बा आदि स्थानों पर भी तेल का पता चला है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E(iv) बड़ोदरा क्षेत्र\u003C\/b\u003E – यह क्षेत्र बड़ोदरा के समीप फैला है। यहाँ बादसर\n  प्रमुख उत्पादक केन्द्र है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E3. बॉम्बे हाई\u003C\/b\u003E – इसकी खोज 1975 में की गई। यह मुम्बई तट के निकट मुम्बई से\n  176 किमी. उ. प्र. दिशा में स्थित है। यह भारत का पहला अपतटीय (कम गहरा) क्षेत्र\n  है। यहाँ से खनिज तेल निकालने के लिए समुद्र (में एक विशेष प्लेटफॉर्म का निर्माण\n  किया गया, जिसको \"सागर सम्राट\" कहते हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  समुद्र तली पर बिछायी गई पाइप लाइनों द्वारा खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस तट पर\n  पहुँचायी जाती है। 2001-02 में यहाँ से 20145 हजार टन कच्चा तेल प्राप्त किया गया\n  था, जो भारत के कुल उत्पादन का लगभग 63% है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E4. पूर्वी तट प्रदेश\u003C\/b\u003E – यह कृष्णा- गोदावरी और कावेरी की द्रोणियों में\n  विस्तृत है। 1980 के दशक में तेल और प्राकृतिक गैस आयोगऔर आयल इण्डिया लिमिटेड ने\n  इस क्षेत्र में विस्तृत सर्वेक्षण एवं खोज किया। नारीमनम और कोविलप्पल कावेरी\n  द्रोणी के प्रमुख तेल क्षेत्र हैं। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  2001-02 में इस द्रोणी में 4-41 लाख टन कच्चा तेल निकाला गया। इसके अतिरिक्त अभी\n  कुछ समय पूर्व आन्ध्र प्रदेश के गोदावरी, कृष्णा द्रोणी में भी तेल की खोज हुई\n  है। 2001-02 में आन्ध्र प्रदेश ने 2-83 लाख टन का उत्पादन किया।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003Eव्यापार\u003C\/b\u003E – भारत अपनी आवश्यकता का केवल एक तिहाई पेट्रोलियम ही पैदा करता\n  है, शेष दो तिहाई पेट्रोलियम की आपूर्ति आयात से होती है। भारत अधिकांश\n  पेट्रोलियम पदार्थ रूस, ईरान, इराक, म्यांमार, सऊदी अरब, इण्डोनेशिया, बहरीन, स.\n  रा. अमेरिका तथा अमानिया आदि देशों से आयात किया जाता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eपेट्रोलियम के संचित भण्डार\u003C\/b\u003E \u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  प्राकृतिक गैस एवं तेल आयोग के अनुसार भारत में पेट्रोलियम के संचित भण्डारों की\n  मात्रा 1,750 लाख मी टन की है, जबकि भारत सरकार का पेट्रोलियम एवं रसायन\n  मन्त्रालय देश में लगभग 1,300 लाख मी टन खनिज तेल के संचित भण्डार बताया\n  है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  दूसरी ओर सोवियत संघ के खनन विशेषज्ञ भारत में 1.5 अरब मी टना खनिज तेल के संचित\n  भण्डार बताते हैं । अन्तर्राष्ट्रीय भूगर्भिक सर्वेक्षण के अनुसार देश में 620\n  करोड़ मी टन पेट्रोलियम के संचित भण्डार हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\u003Cb\u003Eपेट्रोलियम उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र\u003C\/b\u003E \u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003Eभारत में पेट्रोलियम उत्पादन के निम्नलिखित तीन क्षेत्र सर्वप्रमुख हैं।\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  (1) असम तेल क्षेत्र, (2) गुजरात तेल क्षेत्र, (3) अरब सागर के अपतटीय तेल\n  क्षेत्र।\u003C\/p\u003E\n\u003Ch3 style=\"text-align: left;\"\u003E\n  \u003Cspan style=\"font-size: large;\"\u003Eभारत मे खनिज संसाधनों की समस्याएँ \u003C\/span\u003E\n\u003C\/h3\u003E\n\u003Cp\u003E\n  पृथ्वी के गर्भ में अनेक (प्राकृतिक सम्पदा) बहुमूल्य पदार्थ पाये जाते हैं, जिसे\n  मानव अपने हित के लिए अनेक वर्षों से निकालता रहा है। खनिज को निकालना या खानें\n  खोदना प्रकृति की सम्पदा का अपहरण करना है, \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  क्योंकि पृथ्वी से जब एक बार किसी भी खनिज पदार्थ को निकाल लिया जाता है, तो उतनी\n  मात्रा में वह खनिज सदा के लिए समाप्त हो जाता है। भारत में अनेक प्रकार के खनिज\n  पाये जाते हैं। भारतीय खनिज संसाधन के समक्ष निम्नलिखित समस्याएँ हैं\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E1. असमान वितरण\u003C\/b\u003E - भारत में खनिजों का वितरण असमान है, जैसे- कोयले,\n  पेट्रोलियम तथा लोहे के निक्षेप देश के कुछ क्षेत्रों पर ही पाये जाते हैं, जबकि\n  इनकी माँग देश के सभी भागों में है। इन खनिजों का वितरण बाजार और औद्योगिक\n  क्षेत्र से दूर होने के कारण इनका समुचित विकास नहीं हो पा रहा है ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E2. उत्तम किस्म के खनिजों की कमी\u003C\/b\u003E - भारत में पाये जाने वाले कई खनिज निम्न\n  श्रेणी के हैं, जिनमें ताँबा, सीसा, जस्ता, राक-फॉस्फेट आदि हैं। भारत में अच्छी\n  श्रेणी खनिज संसाधनों की समस्याएँ के कोकिंग कोल कम मात्रा में है, जबकि भारतीय\n  उद्योगों में कोकिंग कोल की अत्यधिक आवश्यकता है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E3. आधुनिक खनन तकनीक का अभाव\u003C\/b\u003E - हमारे देश में अभी भी खनन कार्य आधुनिक\n  वैज्ञानिक विधि से नहीं होता है । शिक्षित व प्रशिक्षित श्रमिकों तथा आधुनिक\n  यन्त्रों, मशीनों के अभाव के कारण खनिज पदार्थ पूरी मात्रा में नहीं निकाले जाते\n  जिसके कारण लगभग 1 से 3% तक खनिज व्यर्थ नष्ट हो जाते हैं । \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E4. सस्ते परिवहन का अभाव\u003C\/b\u003E - भारत में परिवहन के सस्ते साधन अर्थात्\n  जलमार्गों के अपर्याप्त विकास के कारण अधिकांश खनिजों का परिवहन कार्य रेलमार्गों\n  तथा सड़क मार्गों द्वारा होता है। रेल तथा सड़क परिवहन व्यय अधिक होने के कारण\n  खनिज महँगे पड़ते हैं जिसके कारण खनिजों का दोहन प्रभावित होता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E5. नये खनिज क्षेत्रों के खोज में धीमी गति\u003C\/b\u003E - भारत के नये खनिज क्षेत्रों\n  के खोज का कार्य अभी भी अधूरा है। देश के कई भागों की भूगर्भिक जाँच बाकी है। असम\n  और उड़ीसा के कुछ क्षेत्रों की तो पूरी तरह से जाँच भी नहीं हो पाई है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  राष्ट्रीय खनिज नीति का अभाव, खनिजों के कचरे का उपयोग न होना, आधुनिक तकनीकी\n  ज्ञान का अभाव आदि अन्य समस्याएँ हैं, जिसके कारण खनिज संसाधन का पूर्ण विकास\n  नहीं हो पा रहा है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Ch2 style=\"text-align: left;\"\u003Eखनिज संसाधनों का संरक्षण\u003C\/h2\u003E\n\u003Cp\u003E\n  खनिज समाप्त होने वाले होते हैं। यदि हम इनका तीव्र गति से दोहन करते रहें तो कुछ\n  समय पश्चात् हमारे पास खनिज नहीं होंगे। अतः खनिजों के संरक्षण हेतु निम्नलिखित\n  कदम उठाये जा सकते हैं-\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E1. प्रौद्योगिकी का विकास\u003C\/b\u003E - खनिजों के शोषण में आज बुद्धिमतापूर्ण\n  प्रौद्योगिकी विकास करना आवश्यक है। खनिजों के खनन में उच्च आधुनिक तकनीक अपनायी\n  जानी चाहिए, इससे खनिज व्यर्थ व नष्ट नहीं होगा और ज्ञात भण्डारों का अधिक समय तक\n  उपयोग किया जा सकेगा। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  जैसे- कोयले के भण्डार सीमित हैं जबकि जल संसाधन विपुल तथा समाप्त न होने वाली\n  है। अतः जल विद्युत का अधिकाधिक विकास करके कोयले के भण्डार का काफी लम्बे समय तक\n  उपयोग किया जा सकता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E2. खनिजों का विकल्प खोजना\u003C\/b\u003E - जो खनिज कम मात्रा में पाये जाते हैं, उनके\n  स्थान पर विकल्प (संश्लेषित उत्पाद) खोजकर प्राकृतिक संसाधनों को अधिक समय तक\n  उपयोग के लिए बचाया जा सकता है। जैसे—एल्यूमिनियम का उपयोग ताँबे के विद्युत्\n  तारों की जगह किया जा सकता है। \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  प्लास्टिक ने आज कई धातुओं का स्थान ले लिया है। “तेल शैल” नामक चट्टान में खनिज\n  तेल की पर्याप्त मात्रा होती है। अतः तेल शैल का उपयोग करके पेट्रोलियम का\n  संरक्षण किया जा सकता है।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E3. खनिजों का विवेकपूर्ण उपयोग\u003C\/b\u003E- खनिजों का उपयोग विवेकपूर्ण होना चाहिए ।\n  उत्तम प्रकार के कोकिंग कोयले का उपयोग केवल धातु शोधन उद्योगों के लिए हो और\n  निम्न श्रेणी के कोयले से कोलतार, रंग, कृत्रिम ऑयल तथा ताप विद्युत् प्राप्त\n  किया जाय ।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E4. खनिजों से उपउत्पादों की प्राप्ति\u003C\/b\u003E- किसी खनिज से धातु निकालने की\n  प्रक्रिया में कुछ अन्य धातु भी प्राप्त होते हैं जैसे- ताँबे से गंधक का तेजाब व\n  गंधकीय गैसें प्राप्त की जा सकती हैं । \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  व्यर्थ हो जाने वाले अभ्रक के छोटे टुकड़ों से बोर्ड, अभ्रक की चादरें, ईंटें,\n  पेंट तथा पोटाश प्राप्त किये जा सकते हैं। निकिल और चाँदी को परिष्कृत करते समय\n  उसमें आर्सेनिक ऑक्साइड प्राप्त किया जा सकता हैं।\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E5. आधुनिक यन्त्रों एवं उपकरणों का उपयोग\u003C\/b\u003E,खानों से खनिज निकालने में\n  आधुनिक यन्त्रों उपकरणों तथा तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग किया जाय। ऐसा करने से\n  खनिजों की व्यर्थ बर्बादी को रोका जा सकता है।,\u003Cb\u003E \u003C\/b\u003E\n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E6. लोगों में जागरुकता लाना -\u003C\/b\u003E लोगों को खनिजों की समाप्यता के प्रति\n  जागरूक किया जाय तथा देश में अल्प मात्रा में उपलब्ध खनिजों को मितव्ययितापूर्ण\n  उपयोग के लिए प्रेरित किया जाय । \n\u003C\/p\u003E\n\u003Cp\u003E\n  \u003Cb\u003E7. अन्य उपाय\u003C\/b\u003E – खनिजों के नये क्षेत्रों का पता लगाया जाय, ईंधन के लिए\n  बायोगैस तथा सौर ऊर्जा के उपयोग पर बल दिया जाय तथा खनिजों के संरक्षण के लिए\n  व्यापक राष्ट्रीय नीति घोषित की जाय।\n\u003C\/p\u003E\n"},"link":[{"rel":"replies","type":"application/atom+xml","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/feeds\/8642432258076881709\/comments\/default","title":"Post Comments"},{"rel":"replies","type":"text/html","href":"https:\/\/www.questionmug.com\/2022\/05\/natural-resources-of-india.html#comment-form","title":"0 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