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मानव विकास क्या है

अवधारणा आज का मनुष्य स्वतः सहस्रों वर्षों में सृष्टि के विकास का परिणाम है, किन्तु मनुष्य का यह विकास आधुनिक संदर्भ में सामाजिक, आर्थिक एवं वैज्ञानिक क्षेत्र की प्रगति से आँका जाता है। इस दृष्टि से धरातल पर क्षेत्रीय विकास हुआ है। कुछ क्षेत्र बहुत विकास कर गये हैं। 

कुछ क्षेत्र विकासशील हैं और कुछ क्षेत्र पिछड़े हुए हैं और उनके क्षेत्र अभी भी अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आदिम अवस्था में विद्यमान हैं। मानव विकास की दृष्टि से सम्पूर्ण संसार को चार भागों में विभाजित किया जाता है - 

1. विकसित क्षेत्र या देश। 
2. विकासशील क्षेत्र या देश।
3. पिछड़े क्षेत्र। 
4. अति पिछड़े क्षेत्र।

 किसी भी क्षेत्र अथवा वहाँ के लोगों का विकास निम्नांकित बातों पर निर्भर करता है -

मानव विकास क्या है

 1. क्षेत्र विशेष में उपलब्ध संसाधन एवं उस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियाँ ।
 2. उस क्षेत्र के निवासियों या लोगों की आवश्यकतायें तथा महत्वाकांक्षायें ।
 3. वहाँ के निवासियों की तकनीकी बौद्धिक कुशलता ।

मानव विकास या क्षेत्र विकास के लिये उपर्युक्त तीनों बिन्दुओं का पारस्परिक सामंजस्य आवश्यक है। किसी-किसी क्षेत्र में पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध होते हैं, पर प्रयास एवं तकनीकी कुशलता के अभाव में उन क्षेत्रों का विकास नहीं हो पाया है। 

कभी-कभी आर्थिक कारण भी बाधा बनते हैं जैसे- पूँजी की कमी, परिवहन मार्गों का अभाव एवं आधारभूत ढाँचे के साधनों का अभाव।

विश्व में संसाधनों का वितरण सर्वत्र एक समान नहीं है। इसके वितरण में भिन्नता एवं असमानता विश्व में तो पाई ही जाती है, देश के भी विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाती है, जिससे मानव विका प्रभावित होता है। आर्थिक कारणों से संसाधनों का विकास होता है, जिससे क्षेत्रीय, प्रादेशिक, देशीय और अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार विकसित होते हैं।

किसी भी क्षेत्र के विकास में वहाँ पर बसे लोगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। मनुष्य ही इसका चुनाव करता है कि किन संसाधनों का वह अपने हित में प्राथमिकता के आधार पर विकास करे। इसके लिये यह भी आवश्यक होता है कि उसे सुविधाजनक औजार और तकनीक ऋण उपलब्ध हों । विकास के लिये आर्थिक संगठन एवं राजनैतिक स्थिरता का भी महत्व होता है।

प्रमुख संकेतक, अंतर्राष्ट्रीय तुलना

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रस्तावित मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार विकास केवल लोगों की आय और पूँजी का विस्तार ही नहीं वरन् यह मानव के कार्यप्रणाली तथा क्षमताओं में उन्नयन की प्रक्रिया है। वस्तुतः विकास की इसी विचारधारा को मानव विकास की संज्ञा दी गई है। सन् 1990 से प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ मानव विकास सूचकांक निर्धारित करता है।

मानव विकास सूचकांक  - संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंतर्राष्ट्रीय साम्यता की दृष्टि से निम्नांकित तीन चर-समूहों के आधार पर मानव विकास सूचकांक की गणना की है -

1. सकल घरेलू उत्पाद – 100 अमेरिकी डॉलर और 40,000 अमेरिकी डॉलर। 

2. जीवन की प्रत्याशा  – 25 वर्ष और 85 वर्ष।

3. शिक्षा   0 प्रतिशत और 100 प्रतिशत।

सूचकांक निर्मित करने के लिए प्रत्येक चर हेतु न्यूनतम व अधिकतम मान निश्चित करते हैं, फिर प्रत्येक चर का मान निकालकर उपर्युक्त तीनों चरों का औसत ज्ञात करते हैं, जो मानव विकास सूचकांक कहलाता है । यह सूचकांक 0 से 1 के मध्य ही रहता है। 

किसी देश या प्रदेश के लिए मानव विकास सूचकांक उस दूरी को प्रदर्शित करता है जो इसे अधिकतम संभावित मान 1 तक पहुँचाने के लिए तय करना पड़ेगा। इससे दो देशों के बीच विकास स्तर की तुलना करने में भी सहायता मिलती है। 

इस प्रकार यह सूचकांक प्रत्येक देश के समक्ष इस मानक को प्राप्त करने के उपायों को खोजने की चुनौती भी प्रस्तुत करता है।

अंतर्राष्ट्रीय तुलना – संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानव विकास सूचकांक के आधार पर विभिन्न देशों को कोटिक्रम प्रदान करके उच्च, मध्यम व निम्न श्रेणी में वर्गीकृत किया है । सन् 2000 में 174 देशों के लिए मानव विकास सूचकांक निकाला गया जिनमें 46 देश उच्च मानव विकास श्रेणी में 93 देश मध्यम श्रेणी तथा शेष 35 देश निम्न श्रेणी में सम्मिलित थे।

मानव विकास सूचकांक मानव विकास के शिखर पर कनाडा, नार्वे, संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विकसित देश प्रतिस्थापित हैं, जबकि सियरालियोन, नाइजर, बुरकिनाफासो न्यूनतम स्तर पर हैं। भारत 115वें, पाकिस्तान 127वें, नेपाल 129वें तथा बांग्ला देश 132वें स्थान पर थे, जो मानव विकास की निम्न श्रेणी हैं।

 विश्व मानव विकास को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है

 1. उच्च मानव विकास के क्षेत्र - इस वर्ग में 1999 में 48 देश आते थे, जिनका प्रतिशत 30 था । इनका मानव विकास सूचकांक 0.939 से 0.801 तक है। 

प्रमुख देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, यूरोप के लगभग सभी देश; मध्य एशिया में इजराइल, कुवैत, बहरीन, कतर, पूर्व में जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर; दक्षिणी अमेरिका के चिली और अर्जेण्टाइना, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड तथा छोटे राष्ट्रों में आइसलैण्ड, ग्रीस, साइप्रस एवं माल्टा द्वीप समूह आदि हैं ।

2. मध्यम मानव विकास के क्षेत्र - इसके अन्तर्गत मानव विकास सूचकांक का प्रसार 0.798 से 0.502 तक आता है। इस वर्ग में विश्व के 48% देश सम्मिलित हैं। इनमें रूस, मैक्सिको, मलेशिया, वेनेजुएला, सऊदी अरब, पेरु, यूक्रेन, श्रीलंका, चीन, दक्षिण अफ्रीका, अल्जीरिया, वियतनाम, भारत, घाना, काँगो आदि देश आते हैं।

3. निम्न मानव विकास के क्षेत्र - इस वर्ग का सूचकांक 0.498 से 0.258 विस्तृत है। इसके अन्तर्गत संसार के लगभग 22% देश आते हैं। पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान जैसे देश आते हैं। अफ्रीका के अधिकांश देश तथा यमन एवं हैती भी में प्रादेशिक विभिन्नता हैं।

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