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कैलाश पर्वत कहां है - kailash parvat kahan hai

कैलाश पर्वत तिब्बत के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित हैं। 6638 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह हिमालय के सबसे ऊंचे हिस्सों में से एक है और एशिया की कुछ सबसे लंबी नदियों के स्रोत के रूप में कार्य करता है। …

काशी विश्वनाथ मंदिर को किसने बनवाया था

काशी विश्वनाथ, भगवान शिव के एक रूप में ज्योतिर्लिंग है, जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। काशी विश्वनाथ मंदिर को पिछली कुछ शताब्दियों में कई बार बनाया गया है।  वर्तमान मंदिर का निर्माण 18वीं…

काशी विश्वनाथ मंदिर कहां स्थित है

काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह भारत में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है । मंदिर पवित्र गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है, और बारह ज्योतिर्लिंगों में से …

परिवहन का महत्व क्या है

परिवहन सुविधाओं के अभाव में व्यावसायिक एवं औद्योगिक विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इतना ही नहीं व्यापार भी परिवहन की सुविधाओं और संचार साधनों पर टिका रहता है। विश्व के समस्त देशों के निवासी वस्त…

विद्यानिवास मिश्र की निबंध की विशेषता

मिश्र जी ने अपने ललित निबन्धों द्वारा हिन्दी के निबन्ध साहित्य को अत्यधिक समृद्ध बनाया है। आपके ये निबन्ध गहन अनुभूति एवं चमत्कारपूर्ण अभिव्यक्ति के ही भण्डार नहीं हैं। अपितु इनमें लेखक ने समसामयिक स…

हजारी प्रसाद द्विवेदी जीवन परिचय

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का जन्म 1907 में बलिया जिले के एक छोटे-से गाँव में छपरा (ओझबालिया) में हुआ था। आपके पिता का नाम पं. अनमोल द्विवेदी था। आपने सन् 1920 में मिडिल की परीक्षा पास की। उसके …

वसंत आ गया है निबंध का उद्देश्य

यह निबन्ध उस समय लिखा गया है जबकि द्विवेदी जी भावना-केन्द्र 'शान्ति निकेतन' में निवास करते थे। सौभाग्य या दुर्भाग्य से उस समय बसन्त का अवसर आया। लेखक की मर्मानुभूति इतर प्रकृति पर भी जा पड़ी।…

बसंत आ गया है किसकी कृति है

बसन्त डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी रचित एक महत्वपूर्ण निबन्ध है। इसमें डॉ. द्विवेदी ने बसन्त के आगमन पर प्रकृति की विविधता का चित्र बड़े ही रोचक शैली में किया है। प्रस्तुत निबन्ध लेखक के 'शांति निके…

क्रोध निबंध का सारांश लिखिए

क्रोध निबंध आचार्य रामचन्द्र शुक्ल जी का है। इस निबन्ध में आचार्य शुक्ल ने क्रोध की उत्पत्ति, क्रोध की आवश्यकता और उपादेयता, क्रोध का स्वरूप, क्रोध का लक्ष्य, क्रोध और चिड़चिड़ापन तथा क्रोध और बैर आद…
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