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पुरस्कार कहानी का प्रमुख उद्देश्य लिखिए

आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग में पिछले पोस्ट में मैंने आपके साथ साझा किया था पुरस्कार कहानी के सारांश के साथ पूरी कहानी इस पोस्ट में हम बात करने वाले हैं पुरस्कार कहानी का उद्देश्य मैंने पुरस्कार कहानी के उद्देश्य को उसी में लिखना चाहा था लेकिन वह पोस्ट बड़ा हो जाता इस वजह से वहां पर उद्देश्य को नहीं लिखा। 

पुरस्कार कहानी को जानने से पहले उस कहानी को आपको एक बार और अच्छे से पढ़ लेना चाहिए ताकि आप परीक्षा में और अच्छे से इसके उद्देश्य को लिख सकें। पुरस्कार कहानी का लिंक निचे है। 

पुरस्कार कहानी का उद्देश्य 

1. हिंदी साहित्य के लगभग सभी विधाओं में पारंगत जयशंकर प्रसाद की इस रचना का उद्देश्य सीधा सा और सरल है राष्ट्र प्रेम और निजी प्रेम में दोनों के महत्व को समझना। 

2. राष्ट्र प्रेम के साथ-साथ अपने वंश के द्वारा ली गई जमीन को ना बेचना आत्म सम्मान की रक्षा करना अपने आत्म गौरव के लिए किसी भी प्रकार का समझौता न करना इस कहानी का उद्देश्य है। 

3. इस कहानी में मधुलिका अपने आत्म सम्मान के लिए किसी भी प्रकार का मूल्य ग्रहण नहीं करती हुई दिखाई गई हैं जो की हर इंसान में होना  चाहिए एक उद्देश्य यह भी है। 

4. हिंदी में ऐसे बहुत ही कम रचना देखने को मिलती है जिसमें इन दोनों का चित्रण साथ-साथ और बड़ी ही कुशल वार्ता इस कहानी में प्रस्तुत की गई है। 

5. मधुलिका इस कहानी की मुख्य पात्रा हैं जिसने माध्यम से इस कहानी के उद्देश्य को जयशंकर प्रसाद ने लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। 

6. पुरस्कार कहानी में राष्ट्र प्रेम को अपने निजी प्रेम से भी ऊपर दिखाने का प्रयास किया गया है जिसमें लेखक सफल भी रहे हैं। 

7. पुरस्कार कहानी में अरूण नायक है जो की आखिर में इस कहानी का खलनायक भी बनता है जो कौशल को अपने अधिकार में करने के उद्देश्य से मधुलिका के पास आया था। 

8. मधुलिका की आड़ में अरुण कौशल राज्य के समीप ही मधुलिका को खेती के लिए जमीन की मांग करवाता है ताकि वहाँ रहकर वह युद्ध की तैयारी कर सके। 

इसमें वह सफल भी हो जाता है लेकिन आखिर में मधुलिका की राष्ट्र भक्ति के सामने वह हार जाता है। और अंत में मधुलिका को जब पुरस्कार देने की बात जब महाराज करते हैं तो वह किसी भी तरह के पुरस्कार लेने से मना कर देती है।

9. मधुलिका जो की राष्ट्र प्रेम में चूर होने के साथ साथ अपने निजी प्रेम में भी आसक्त थी चुकी उसने लगभग तीन साल अरूण का इंतजार किया था इस वजह से भी उसके प्रेम में बहुत गहराई आ गई थी। 

10. चुकी वह अरूण से भी उतना ही प्रेम करती थीं जितना की अपने राष्ट्र से इसलिए वह आखिर में वह पुरस्कार के रूप में वहीं दण्ड मांगती है जो की अरूण को दिया गया था। 

11. इस प्रकार कहानी का अंत पुरस्कार के रूप में मृत्युदंड मांगती हुई मधुलिका से होता है। पुरस्कार कहानी प्रेम और कर्तव्य के द्वंद की कहानी है। 

सारांश

इस प्रकार कहा जा सकता है की पुरस्कार कहानी राष्ट्र भावना को उद्वेलित करने वाली और राष्ट्र के प्रति किस प्रकार का सम्मान लोगों में, लोगों के दिलों में होना चाहिए इसे बताना चाहा है। सबसे ऊचें स्थान पर यहाँ राष्ट्र प्रेम को रखा गया है। 

 पुरस्कार कहानी की विशेषताएं

पुरस्कार कहानी जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी है पिछले पोस्ट में हमें बात किया था पुरस्कार कहानी के उद्देश्य के बारे में इस पोस्ट में हम बात करने वाले हैं पुरस्कार कहानी की विशेषताओं के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं। 

पुरस्कार कहानी की विशेषताएं तत्वों के आधार पर 

कोई कहानी कहानी तभी मानी जाती है जब उसमें मुख्य तत्व जैसे की कथावस्तु, पात्र, कथोपकथन, वातावरण, भाषा-शैली, उद्देश्य जैसी मुख्य बातें शामिल हों। 

पुरस्कार कहानी की कथावस्तु - 

पुरस्कार कहानी की कथावस्तु बहुत ही सरल एवं सुबोध है जो की उस समय की दशा का वर्णन करने में सफल रही है जिस समय कौशल और दुर्ग के मध्य संघर्ष चल रही थी पुरस्कार कहानी में राज्य के माध्यम से राष्ट्र प्रेम को प्रदर्शित किया गया है।

पुरस्कार कहानी पात्र अथवा चरित्र चित्रण -

पुरस्कार कहानी के दो मुख्य पात्र हैं जिनका बखूबी चरित्र चित्रण किया गया है इस कहानी की नायिका मधुलिका है जो की सरल स्वभाव की लड़की है और एक किसान की कन्या है, तथा अरूण एक युवराज है जो की योद्धा के भाँती व्यवहार करता है। 

पुरस्कार कहानी कथोपकथन या संवाद -

पुरस्कार कहानी की संवाद योजना सराहनीय है क्योकि इसको पढ़ते वक्त आपको लगता है की वह घटना जैसे आपके आँखों सामने घटित हो रहा है। देशकाल और वातावरण के हिसाब से संवाद योजना बहुत ही बढ़िया है। 

पुरस्कार कहानी देशकाल अथवा वातावरण -

इस पुरस्कार कहानी में जयशंकर प्रसाद ने बहुत ही अच्छे ढंग से देशकाल के वातावरण को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है जैसे की कुछ पंक्ति देखें जो वहां की स्थिति के बारे में बताती हैं -स्वर्णमंच पर कोशल नरेश अर्धनिंद्रित अवस्था में आंखें मुकुलित किए हैं। एक चामरधारिणी युवती पीछे खड़ी अपनी कलाई बड़ी कुशलता से घुमा रही है। चमर के शुभ आंदोलन उस कोष्ट में धीरे-धीरे संचालित हो रहे हैं। तांबूल वाहिनी प्रतिमा के समान दूर खड़ी है। 

पुरस्कार कहानी की भाषा-शैली -

पुरस्कार कहानी की भाषा-शैली की बात करें तो यह उसके देशकाल और वातावरण के हिसाब से अत्यंत ही मधुर है और जिस प्रकार एक राजा के बोलने की शैली है वह बहुत ही सराहनीय है जैसे राजा का संवाद देखें - "कृषक बालिके ! वह बड़ी ऊबड़-खाबड़ भूमि है। तिस पर वह दुर्ग के समीप एक सैनिक महत्व रखती है। "

यहां पर संचार कौशल का बड़ी ही बखूबी से प्रयोग किया गया है। 

पुरस्कार कहानी का उद्देश्य - 

पुरस्कार कहानी अपना उद्देश्य प्रस्तुत करने में सफल रहा है। पुरस्कार कहानी का केवल एक उद्देश्य नहीं है इस कहानी के माध्यम से जयशंकर प्रसाद ने न केवल एक उद्देश्य को पूर्ण किया है। बल्कि उसके अनेक उद्देश्य हैं जो की इस कहानी को पढ़ने से पता चलता है। 

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