पिग्मी कहा के निवासी है

कांगो अथवा जायरे नदी-घाटी अफ्रीका महाद्वीप में भूमध्यरेखीय प्रदेश का ही एक भाग है। कांगो नदी तथा इसकी सहायक नदियों के किनारे ये पिग्मी निवास करते हैं। 

यह सम्पूर्ण प्रदेश भूमध्यरेखीय जलवायु के अन्तर्गत आता है। अतः यहाँ वर्ष भर ऊँचा तापमान (औसत तापक्रम 27° से.) रहता है । दैनिक तापान्तर 5° से. तथा वार्षिक तापान्तर 3° से. ग्रे. से अधिक नहीं होता है। यहाँ की औसत वार्षिक वर्षा 150 सेमी से 250 सेमी तक रहता है। वर्षा वर्ष भर प्रतिदिन होती है।

वर्ष भर ऊँचा तापमान तथा वर्षा के कारण यहाँ लम्बे तथा सीधे वृक्षों के सघन वन पाये जाते हैं। ये वन इतने सघन होते हैं कि सूर्य का प्रकाश भी धरातल तक नहीं पहुँच पाता है। इन वनों को 'वर्षा वन' भी कहते हैं । इन वनों में वृक्षों के तने मोटे होते हैं तथा लकड़ी कठोर और नमीयुक्त होती है। 60% तक लकड़ी में नमी रहने के कारण यह भारी होती है । -

पिग्मी का शारीरिक गठन - उच्च तापमान तथा उच्च आर्द्रता के फलस्वरूप यहाँ के निवासी पिग्मी कमजोर होते हैं। इनका कद 1.5 मीटर से अधिक नहीं होता है। इनका रंग काला होता है। बाल घुँघराले तथा काले होते हैं । गर्मी एवं उमस के कारण ये लोग आलसी होते हैं । 

पिग्मी कहा के निवासी है

भोजन- पिग्मी लोगों की आवश्यकताएँ न्यूनतम होती हैं। इनका भोजन कन्द-मूल, फल, मछलियाँ तथा पशुओं और पक्षियों का मांस होता है।

वस्त्र - अधिक गर्म और नम जलवायु होने के कारण ये लोग बहुत कम वस्त्रों का उपयोग करते हैं। पुरुष लंगोट बाँधते हैं तथा स्त्रियाँ कमर के चारों ओर पेड़ों की पत्तियाँ अथवा केले की पत्तियों को कमर के चारों ओर बाँधकर अपने अंगों को छिपाये रखती हैं कुछ सभ्य पिग्मी वस्त्रों का प्रयोग करने लगे हैं।

आवास- पिग्मी प्रवासी हैं। किसी एक स्थान पर तब तक निवास करते हैं, जब तक वहाँ भोजन सामग्री उपलब्ध होती रहती है। उसकी समाप्ति पर भोजन की तलाश में अन्यत्र चले जाते हैं। उष्ण एवं आर्द्र जलवायु के कारण भूमि पर अधिक नमी, घनी वनस्पति, विषैले कीटाणुओं व हिंसक पशुओं आदि का भय हमेशा बना रहता है, 

जिसके कारण पिग्मी लोग अपने झोपड़े वृक्षों की शाखाओं पर ही बना लेते हैं। ये घर पेड़ों की पत्तियों से बनायी गयी चटाइयों से बनाये जाते हैं। वर्षा की अधिकता के कारण इनकी छतें ढालू बनायी जाती हैं। घर का फर्श लकड़ी के तख्तों से बनाया जाता है। इन घरों में जाने के लिए सीढ़ियों का उपयोग किया जाता है।

व्यवसाय - अधिकांश पिग्मी लोगों का प्रमुख व्यवसाय कन्द-मूल, फल एकत्रित करना तथा शिकार करना है। शिकार करने में ये लोग बड़े निपुण होते हैं। ये लोग हाथी से लेकर दीमक तक का आखेट करते हैं। इनके आखेट करने का प्रमुख औजार तीर-कमान है। इनके तीर विष-बुझे होते हैं। ये लोग हाथी को अपने तीरों से अन्धा करके उसे गड्ढे में गिरा कर मार डालते हैं ।

अब पिग्मी लोग विदेशी जातियों के सम्पर्क में आने के कारण धीरे-धीरे सभ्य होने लगे हैं। इनमें शिक्षा का प्रसार भी बढ़ रहा है। ये लोग वस्त्रों का उपयोग भी करने लगे हैं। इनमें से कुछ तो उत्तम घरों में रहने लगे हैं। इनके प्रमुख व्यवसाय रतालू तथा केले व मक्के की कृषि करना, नारियल जटा से रस्सी बनाना और हाथी दाँत एकत्रि करना है। 

जायरे' बेसिन में परिवहन साधनों का विकास नहीं हुआ है। यहाँ नदियाँ ही परिवहन का प्रमुख साधन हैं। अतः पिग्मी लोगों का बाह्य संसार से सम्पर्क लगभग नहीं के बराबर हो पाया है, जिसका परिणाम यह हुआ कि ये लोग अत्यन्त पिछड़े और आधुनिक तकनीक से अनभिज्ञ हैं। ये लोग अपने पर्यावरण से समझौता करके अपना जीवन यापन करते हैं । यहाँ का पर्यावरण अत्यन्त कठोर है। 

Search this blog