बैंकों का महत्व बताइए - bainkon ka mahatv bataie

Post Date : 27 July 2022

बैंकों का महत्व 

बैंकों के महत्व को निम्न बिन्दुओं के रूप में स्पष्ट किया जा सकता है -

1. व्यापार व उद्योग के विकास में सहायक – कोई भी व्यापारी अथवा उद्योगपति कितना भी आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न क्यों न हो, वह अपने सभी प्रकार के व्यापार एवं उत्पादन सम्बन्धी कार्यों के लिए बैंक से ऋण लेता है। इन्हें नये यंत्रों एवं तकनीकी ज्ञान के लिए अधिक मात्रा में मुद्रा की आवश्यकता होती है। इस प्रकार व्यापारिक बैंक उद्योग व व्यापार के लिए आधारशिला का कार्य करते हैं। 

2. पूँजी संचय को प्रोत्साहन - बैंकों के विकास ने लोगों की बैंकिंग आदत को बढ़ाया है। लोग अपनी बचतों को बैंकों में जमा करते हैं जिससे पूँजी के संचय को प्रोत्साहन मिलता है। उनमें अधिक काम करने एवं बचत करने की भावना बढ़ती है। इस प्रकार, बैंक अनुत्पादक व्ययों को है रोककर उस धन को एकत्रित करके उत्पादक कार्यों के लिए उधार देता है।

3. आर्थिक विकास में सहायता - अल्पविकसित देशों में कम पूँजी निर्माण आर्थिक विकास की सबसे बड़ी बाधा है। पूँजी की कमी केवल बचतों के अभाव के कारण ही नहीं होती है। बल्कि इन बचतों को ठीक से एकत्रित करने वाली संस्थाओं का अभाव होता है। व्यापारिक बैंक इन बचतों को एकत्रित करके एवं उसे उत्पादन कार्यों के लिए उधार देकर आर्थिक विकास में सहयोग करती है।

4. साख का सृजन – बैंक जमाओं पर ऋण देकर साख का सृजन करती है। लोग बैंकों में अपनी जमा पूँजी रखते हैं तथा उन्हें चेक द्वारा भुगतान करने की सुविधा भी बैंक ही देती है। इससे बैंक अपने पास रखी रकम से साख सृजन करती है जिससे विनियोग एवं उत्पादन को प्रोत्साहन मिलता है।

5. भुगतान करने की सुविधा – बैंकों के माध्यम से ग्राहकों को बड़े भुगतान करना बहुत आसान हो जाता है । चेकों तथा ड्रॉफ्टों के द्वारा धन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से भेजा जा सकता है। इस प्रकार के भुगतान में रसीद प्राप्त करने की भी आवश्यकता नहीं होती है। बैंकों की भुगतान सुविधा के कारण ही देशी एवं विदेशी व्यापार में विकास हो रहा है।

6. मुद्रा प्रणाली में लोच – बैंकों को देश में मुद्रा की माँग के सम्बन्ध में जानकारी होती है, अत: वे उसी के अनुरूप मुद्रा की आपूर्ति करके मुद्रा प्रणाली में लोच बनाये रखते हैं।

7. ग्राहकों को लाभ - बैंक अपने ग्राहकों को अनेक प्रकार की सुविधाएँ प्रदान करते हैं। ये उनके शेयर्स का क्रयविक्रय, ट्रस्टी एवं प्रबन्धक आदि का कार्य करते हैं। इस प्रकार ग्राहकों को इनसे अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं।

8. पूँजी का समुचित वितरण - बैंक स्थानों से पूँजी एकत्रित करके जहाँ पर वह अधिक मात्रा में उपलब्ध है, वहाँ भेजते हैं जहाँ पर इसकी कमी है अथवा जो स्थान पिछड़े हुए हैं। इससे देश में पूँजी का समुचित वितरण होता है। 

9. सरकार को मदद - सरकार को बैंकों से अनेक प्रकार की मदद मिलती है। सरकारी ऋणों का निर्गमन एवं विक्रय बैंक ही करते हैं। सरकारी करों एवं अन्य भुगतानों की प्राप्ति का कार्य भी करते हैं । 3

10. धन एवं मूल्यवान वस्तुओं की सुरक्षा - बैंक ग्राहकों के अतिरिक्त धन को अपने पास जमा करते हैं, साथ ही लॉकर सुविधा देकर उनकी मूल्यवान वस्तुओं की भी सुरक्षा करते हैं।

इस प्रकार, बैंक आधुनिक आर्थिक क्रियाओं की रीढ़ है। समस्त आर्थिक गतिविधियाँ बैंकों के आस-पास ही घूमती हैं। सुव्यवस्थित बैंकिंग प्रणाली के अभाव में देश का आर्थिक विकास सम्भव नहीं है।