कार्यालयी भाषा के स्वरूप -karyalayin bhasa ke swarup

 कार्यालयी भाषा के स्वरूप को स्पष्ट करते हुए राष्ट्रभाषा हिन्दी के संदर्भ में उसकी उपयोगिता बताइए । 

सरकारी कार्यालयों में काम करने एवं पत्राचार करने की एक निश्चित प्रणाली एवं भाषा होती है। कार्यालयों में पत्राचार के पूर्ण विषय वस्तु का संक्षिप्त आलेख तैयार किया जाता है। उच्चाधिकारियों द्वारा अनुमोदित आलेख को पत्र के रूप में कार्यालयों में भेजा जाता है। आलेख की भाषा औपचारिक एवं सृजनात्मक होती है। 

कार्यालयों में प्रयुक्त भाषा का उपयोग सामान्यतः सामाजिक जीवन में नहीं किया जाता है। दो स्वतंत्र संस्थाओं या निकायों द्वारा प्रेषित पत्र व्यवहार की भाषा की कार्यालयीन भाषा कहलाती है। कार्यालय में भेजे जाने वाले पत्रों की रूपरेखा या मसौदा तैयार करना होता है। अंग्रेजी में इसी प्रक्रिया को Drafting कहते हैं। 

संस्था के अति गोपनीय पत्रों एवं आलेखों का मसौदा उच्चाधिकारी स्वयं तैयार कर लेते हैं। कार्यालयीन भाषा का प्रयोग, परिपत्र, ज्ञापन, आदेश, अधिसूचना, अनुस्मारक, पृष्ठांकन, प्रतिवेदन, टिप्पण आदि में किया जाता है। सम्पूर्ण भारत वर्ष में कार्यालयीन भाषा के प्रयोग में एकरूपता पाई जाती है। 

भारतीय संविधान के अनुसार हिन्दी हमारी राजभाषा है। राजकाज में इसका प्रयोग विविध प्रान्तों में खुलकर किया जाता है। कार्यालयीन पत्रों में भी हिन्दी का एक जैसा स्वरूप देखने को मिलता है। सर्वाधिक समझ में आने वाली भाषा के कारण हिन्दी की उपयोगिता सर्वत्र सिद्ध हुई है। केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा इसके विकास एवं प्रचार-प्रसार के लिए गंभीर प्रयत्न किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

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