स्वर संधि किसे कहते हैं

Post Date : 14 July 2022

संधि शब्द का अर्थ है - जोड़ना होता हैं। संधि हिंदी ग्रामर का महत्वपूर्ण भाग है। संधि दो वर्ण या दो शब्दों का मिलना होता है जिसके मिलने से तिसरा वर्ण या उसी वर्ण का बड़ा रूप बनता है इस प्रकार दो शब्दों के मेल से बना शब्द, संधि कहलाता है।

परिभाषा - दो ध्वनियों के परस्पर मेल से जो विकार अथवा परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं। संधि केवल तत्सम शब्दों में ही होती हैं। जैसे - भोजन+आलय - भोजनालय

स्वर संधि किसे कहते हैं

दो स्वरों के पारस्परिक मेल से उतपन्न विकार या परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं। हिंदी में कुल 11 स्वर वर्ण हैं तो यहां स्वर संधि का तात्पर्य यही है की स्वर वर्ण के मेल। जिसके मिलने के कारण अलग अलग परिवर्तन होते हैं जिसे विकार कहते हैं। इस प्रकार स्वर संधि के भी अलग अलग प्रकार हो जाते हैं क्योकि एक में पढ़ना मुश्किल भरा काम हो जाता है।

स्वर संधि के प्रकार

  1. दीर्घ स्वर संधि
  2. गुण स्वर संधि
  3. वृद्धि स्वर संधि
  4. यण स्वर संधि
  5. अयादि स्वर संधि

1. दीर्घ संधि - जब हस्व या दीर्घ 'अ', 'इ', 'उ' और 'आ', 'ई', 'ऊ' आपस में मिल जाते हैं तो वे दीर्घ स्वर 'आ', 'ई', 'ऊ' बन जाते हैं।

  • अधिक + अंश = अधिकांश
  • सत्य + आग्रह = सत्याग्रह
  • विदया + अर्थी = विद्यार्थी
  • दया + आंनद = दयानंद
  • कवि + इंद्र = महीन्द्र
  • प्रति + ईक्षा = प्रतीक्षा
  • शची + इंद्र = शचींद्र
  • रजनी + ईश = रजनीश
  • नारी + ईश्वर = नारीश्वर
  • भानु + उदय = भानूदय
  • साधू + उत्सव = साधूत्सव

2. गुण संधि - जब अ, आ के बाद 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' या 'ऋ' आए तो दोनों मिलकर 'ए', 'ओ' या 'अर' बन जाते हैं। 

  • शुभ + इच्छा = शुभेच्छा
  • नर + इंद्र = नरेंद्र
  • राम + ईश्वर = रामेश्वर
  • परम + ईश्वर = परमेश्वर
  • रमा + इंद्र = रमेंद्र
  • उमा + ईश = उमेश
  • वीर + उचित = वीरोचित
  • सूर्य + उदय = सूर्योदय
  • महा + उदय = महोदय
  • यमुना + ऊर्मि = यमुनोर्मि
  • देव + ऋषि = देवर्षि
  • वर्षा + ऋतू = वर्षतु

3. वृहद संधि - जब 'अ', 'आ' के बाद 'ए', 'ऐ' या 'ओ', 'औ' आए तो दोनों मिलकर क्रमशः 'ऐ' एवं 'औ' बन जाते हैं।

  • लोक + एषण = लौकेषण
  • एक + एक = एकैक
  • धन + ऐश्वर्य = धनैश्वर्य
  • मत + ऐक्य = मतैक्य
  • सदा + एव = सदैव
  • तथा + एव = तथैव
  • महा + औदार्य = महौदार्य
  • महा + औषध = महौषध

4. यण संधि - जब 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' और 'ऋ' के बाद कोई असमान स्वर आए तो 'इ', 'ई' का 'य', 'उ', 'ऊ' का 'य', 'व्' और 'ऋ' का 'अऱ' हो जाता है। 

  • वि + ऊह = व्यूह
  • नि + ऊन = न्यून
  • प्रति + एक = प्रत्येक
  • आधि + एता = अध्येता
  • नदी + ऐश्वर्य = नदयैश्वर्य
  • सखी + ऐश्वर्य = सख्यैश्चर्य
  • यदि + अपि = यदयपि
  • अति + अंत = अत्यंत
  • वि + आपक = व्यापक
  • इति + आदि = आदि
  • प्रति + उत्तर = प्रत्युत्तर
  • उपरि + उक्त = उपर्युक्त

5. अयादि संधि - जब स्वर 'ए', 'ऐ', 'ओ' और 'औ' के आगे कोई भिन्न स्वर आए तो 'ए' का 'अय', 'ऐ' का 'आय', 'ओ' का 'अव' और 'औ' का 'आव' हो जाता है। 

  • शे + अन = शयन
  • ने + अन = नयन
  • ऐ + अ = आय
  • नै + अक = नायक
  • गै + अक = गायक
  • ओ + अ = अव
  • पो + अन = पवन
  • भो + अन = भवन
  • ओ + अ = आव
  • पौ + अक = पावक
  • पौ + अन = पावन